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दिल्ली में ठांय-ठांय, तिहाड़ से निकलते ही 2 गैंगस्टर ने मचाया था कोहराम, पुलिस ने ठोक दी गोली | delhi crime branch encounter nandu gang vinod vicky sanyasi bharat manni kapil sangwan arrested shooting extortion tihar jail

Last Updated:February 22, 2026, 18:42 IST Delhi Enconter News: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बिंदापुर फायरिंग मामले में वांछित दो खतरनाक अपराधियों को एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार किया है. कपिल सांगवान उर्फ नंदू गैंग से जुड़े इन बदमाशों ने एक कारोबारी को धमकाने के लिए दफ्तर पर गोलियां चलाई थीं. मुठभेड़ के दौरान एक आरोपी के पैर में गोली लगी है. दिल्ली पुलिस का एनकाउंटर. नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली में गैंगस्टरों और उनके गुर्गों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ा और सफल ऑपरेशन अंजाम दिया है. कपिल सांगवान उर्फ नंदू गैंग से जुड़े और जेल में बंद गैंगस्टर विनोद उर्फ विक्की संन्यासी के दो सक्रिय गुर्गों को एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है. यह मुठभेड़ द्वारका के पास हुई. इस पूरे मामले की शुरुआत 20 फरवरी 2026 को हुई थी, जब आरोपियों ने बिंदापुर इलाके में एक बड़े कारोबारी के दफ्तर पर फायरिंग की थी. यह फायरिंग किसी जमीन विवाद को गैंगस्टर के हक में सुलझाने और रंगदारी वसूलने के मकसद से की गई थी. बिंदापुर थाने में मामला दर्ज होने के बाद क्राइम ब्रांच की एजीएस टीम को इन अपराधियों को पकड़ने का जिम्मा सौंपा गया. डीसीपी क्राइम हर्ष इंदोरा के नेतृत्व में इंस्पेक्टर पवन कुमार और उनकी टीम को गुप्त सूचना मिली कि आरोपी भरत उर्फ मन्नी और वीराज उर्फ विरोधी किसी नई सुरक्षित जगह की तलाश में कुतुब विहार की ओर जाने वाले हैं. रात करीब 2:10 बजे पुलिस ने एक संदिग्ध स्कूटी को आते देखा जिसकी नंबर प्लेट टूटी हुई थी. दोनों का एनकाउंटर कैसे हुआ? पुलिस ने जब उन्हें रुकने का इशारा किया, तो आरोपियों ने भागने की कोशिश की और अंधेरे का फायदा उठाकर झाड़ियों की ओर दौड़ते हुए पुलिस टीम पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं. आरोपी भरत उर्फ मन्नी ने हेड कांस्टेबल अमित कुमार पर सीधी फायरिंग की, जिसमें वे बाल-बाल बचे. जवाबी कार्रवाई और आत्मरक्षा में पुलिस ने 3 राउंड फायरिंग की, जिसमें एक गोली भरत के दाहिने पैर में लगी. दूसरा आरोपी वीराज भी पकड़ा गया, जिसकी पिस्तौल पुलिस पर फायरिंग के दौरान जाम हो गई थी. तिहाड़ में बनी थी खूनी साजिश जांच में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी भरत उर्फ मन्नी (23 साल) पर पहले से ही चोरी, झपटमारी और आर्म्स एक्ट के 15 से ज्यादा मामले दर्ज हैं. वह इसी साल 21 जनवरी को तिहाड़ जेल से बाहर आया था. जेल में ही उसकी मुलाकात कुख्यात गैंगस्टर विक्की संन्यासी से हुई थी. विक्की ने ही भरत को उत्तम नगर के एक प्लॉट विवाद में कारोबारी को धमकाने का काम सौंपा था. आरोपी वीराज उर्फ विरोधी, जो पहले बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था, नशे की लत के कारण भरत के साथ जुड़ गया और अपराध की दुनिया में कदम रख दिया. पुलिस ने इस मुठभेड़ के बाद 2 पिस्तौल 4 खाली कारतूस और 3 जिंदा कारतूस के साथ 1 होंडा एक्टिवा स्कूटी बरामद किया है. घायल आरोपी भरत को तुरंत द्वारका के इंदिरा गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. क्राइम ब्रांच अब इस मामले में बड़ी साजिश के एंगल से जांच कर रही है कि कैसे जेल में बंद अपराधी स्थानीय अपराधियों को हायर कर शहर में दहशत फैला रहे हैं. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें Location : Delhi Cantonment,New Delhi,Delhi First Published : February 22, 2026, 18:42 IST

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दिल्ली: अमीन खान-राशिद का ड्रग सिंडिकेट पकड़ा, 326 ग्राम स्मैक बरामद

होमताजा खबरक्राइम दिल्ली: ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़, बदायूं से आ रही लाखों की ड्रग्‍स, 3 अरेस्‍ट Last Updated:February 22, 2026, 18:25 IST दिल्ली पुलिस ने जीरो टॉलरेंस मुहिम में अमीन खान, राशिद और बलबीर के अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश कर 326.85 ग्राम स्मैक बरामद की और नेटवर्क की कमर तोड़ दी है. Delhi Crime News: जीरो टॉलरेंस मुहिम के तहत पूर्वी दिल्‍ली जिले की एंटी नारकोटिक्स स्क्वॉड ने एक ऐसे अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है. यह सिंडिकेट यूपी के बदायूं से दिल्ली-एनसीआर तक ड्रग्‍स की सप्लाई कर रहा था. पुलिस की इस कार्रवाई ने न सिर्फ एक ड्रग पेडलर को पकड़ा, बल्कि उसके पीछे छिपे पूरे नेटवर्क को भी बेनकाब कर दिया है. दिल्‍ली पुलिस के अनुसार, 12 फरवरी 2026 की रात एंटी नारकोटिक्स स्क्वॉड को एक गुप्त सूचना मिली. खबर थी कि अमीन खान नाम का युवक पांडव नगर इलाके में स्मैक की बड़ी खेप पहुंचाने वाला है. सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने इलाके में जाल बिछा दिया. देर रात जैसे ही संदिग्ध युवक वहां पहुंचा, टीम ने उसे दबोच लिया. तलाशी लेने पर उसके पास से 291 ग्राम स्मैक बरामद हुई, जिसकी कीमत करीब 60 लाख रुपये आंकी गई है. गिरफ्तारी के बाद शुरू हुई पूछताछ ने मामले को और गंभीर बना दिया. अमीन खान ने खुलासा किया कि वह खुद सिर्फ सप्लायर नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क की कड़ी है. वह बदायूं निवासी राशिद से स्मैक लेकर दिल्ली-एनसीआर में छोटे-छोटे पैकेट बनाकर बेचता था. पुलिस को समझ आ गया कि असली खेल सप्लाई चेन को तोड़ने में है. इसके बाद पुलिस टीम बदायूं पहुंची. तकनीकी और मैन्युअल इनपुट्स के आधार पर 15 फरवरी की रात राशिद को गिरफ्तार कर लिया गया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. राशिद ने पूछताछ में बताया कि असली जरिया बलबीर नाम का शख्स है, जो लंबे समय से इस अवैध धंधे को ऑपरेट कर रहा था. पुलिस की कार्रवाई का पता चलते ही बलबीर फरार हो गया. एक लंबी कवायद के बाद पुलिस ने उसे भी दबोच लिया. उसके पास से 35.85 ग्राम स्मैक और बरामद हुई. जांच में सामने आया कि अमीन खान पहले भी 2023 में मेरठ में स्मैक सप्लाई करते हुए गिरफ्तार हो चुका था. जेल से बाहर आने के बाद उसने दोबारा यही रास्ता चुना और दिल्ली के गांधीनगर इलाके में किराए पर रहकर नशे का कारोबार शुरू कर दिया. तेजी से पैसे कमाने की लालच ने तीनों आरोपियों को इस अवैध धंधे में धकेल दिया. पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह बदायूं से स्मैक लाकर दिल्ली के नशा प्रभावित इलाकों में सप्लाई करता था और युवाओं की लत को कमाई का जरिया बना चुका था. कुल 326.85 ग्राम स्मैक बरामद कर पुलिस ने इस नेटवर्क की कमर तोड़ दी है. दिल्ली पुलिस का कहना है कि नशे के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा, क्योंकि हर टूटा हुआ नेटवर्क समाज को ड्रग्स के अंधेरे से बाहर निकालने की दिशा में एक बड़ी जीत है. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें First Published : February 22, 2026, 18:25 IST

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कौन है बांग्लादेशी हैंडलर शब्बीर शाह, जो हाफिज सईद और लखवी के संपर्क में था? जानें कैसे हुई गिरफ्तारी | delhi police special cell lashkar module bangladesh handler shabbir ahmed lone with 8 terrorist arrest from kolkata

होमताजा खबरDelhi कौन है बांग्लादेशी हैंडलर शब्बीर शाह, जो हाफिज सईद और लखवी के संपर्क में था? Last Updated:February 22, 2026, 17:56 IST दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने लश्कर-ए-तैयबा के एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है. बांग्लादेश से संचालित इस गिरोह ने दिल्ली के कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन पर देश विरोधी पोस्टर लगाए थे. पुलिस ने कोलकाता और तमिलनाडु से 8 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जो फिदायीन हमले की फिराक में थे. गिरफ्तार आतंकी में 6 बांग्लादेशी हैं. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 8 आतंकी को गिरफ्तार किया. नई दिल्ली. पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा दिल्ली सहित देश के कई बड़े शहरों को दहलाने की साजिश रच रहा है. भारतीय एजेंसियां इसको लेकर हाई अलर्ट पर है. इस बीच रविवार को दिल्ली पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक ऐसे मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है, जिसे बांग्लादेश में बैठा एक पुराना आतंकी हैंडलर संचालित कर रहा था. इस मॉड्यूल के तार दिल्ली से लेकर कोलकाता और तमिलनाडु तक फैले हुए थे. स्पेशल सेल की पूछताछ में पता चला है कि जिन 8 आतंकियों की गिरफ्तारी हुई है, उस मॉड्यूल का हैंडलर शब्बीर शाह पाकिस्तान में बैठे हाफिज सईद और 26/11 हमलों का मास्टरमाइंड जकीउर रहमान लखवी के संपर्क में था. एडिशनल सीपी स्पेशल सेल प्रमोद कुमार कुशवाहा ने इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी देते हुए बताया कि कैसे एक पोस्टर से शुरू हुई जांच ने देशव्यापी आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश किया. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, साजिश का खुलासा 7 फरवरी 2026 को हुआ, जब दिल्ली के कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन और आसपास के कुछ अन्य स्टेशनों के पिलरों पर देश विरोधी और आतंकी विचारधारा को बढ़ावा देने वाले पोस्टर चिपके पाए गए. सीआईएसएफ की नजर इन पोस्टरों पर पड़ी, जिसके बाद दिल्ली पुलिस की मेट्रो यूनिट और स्पेशल सेल को अलर्ट किया गया. जांच शुरू हुई तो पता चला कि यह किसी शरारती तत्व का काम नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आतंकी मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा था. कोलकाता में गिरफ्तारी और मुख्य हैंडलर का खुलासा स्पेशल सेल की टीम ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर कोलकाता में छापेमारी की. वहां स्थानीय पुलिस की मदद से दो संदिग्धों उमर फारूक और एक बांग्लादेशी नागरिक रोबिल उल इस्लाम को गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में खुलासा हुआ कि इन दोनों को निर्देश बांग्लादेश में बैठा शब्बीर अहमद लोन दे रहा था. #WATCH | Delhi | Additional CP, Special Cell, Pramod Kumar Kushwaha says, “A total of eight people have been arrested in this case. Seven of them are Bangladeshi nationals. The arrest of the initial two persons was done on the 15th. On the 7th of February, anti-national posters… https://t.co/XDJ6DLwqpW pic.twitter.com/pRdIOgM4e2

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दिल्ली: नंद नगरी गोलीबारी में उमर दीन की हत्या, आरोपी गिरफ्तार

होमताजा खबरक्राइम क्‍यों हुई उमर की‍ दिनदहाड़े हत्‍या? दिल्‍ली पुलिस की गिरफ्त में आया नरेंद्र Last Updated:February 22, 2026, 17:26 IST नंद नगरी में मोहम्मद उमर दीन की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस ने आदतन अपराधी सुनील उर्फ दीपु उर्फ नरेंद्र को गिरफ्तार कर पिस्टल और कारतूस बरामद किए हैं. जांच जारी है. Delhi Crime News: पूर्वी दिल्ली के नंद नगरी इलाके में हुई गोलीबारी और हत्या की सनसनीखेज वारदात का दिल्ली पुलिस ने खुलासा कर दिया है. थाना नंद नगरी की टीम ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार करते हुए उसके कब्जे से एक पिस्टल और तीन जिंदा कारतूस बरामद किए हैं. पुलिस के मुताबिक आरोपी एक आदतन अपराधी है और पहले भी कई गंभीर मामलों में शामिल रह चुका है. पुलिस के अनुसार 17 फरवरी 2026 की शाम थाना नंद नगरी में गोली चलने की सूचना मिली थी. सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत बड़े स्कूल के पास नंद नगरी इलाके में पहुंची. वहां पता चला कि घायल व्यक्ति मोहम्मद उमर दीन (35) को उसके परिजन पहले ही जीटीबी अस्पताल लेकर जा चुके हैं. अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया. घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की. फॉरेंसिक टीम ने मौके का मुआयना कर जरूरी साक्ष्य जुटाए. जांच के लिए इंस्पेक्टर आनंद यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें एएसआई प्रमोद, हेड कांस्टेबल दीपक, विपिन, रोहित और कांस्टेबल जितेंद्र व विमल शामिल थे. लंबी कवायद के बाद पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी. पुलिस ने आरोपी सुनील उर्फ दीपु उर्फ नरेंद्र (34) दिल्‍ली के नंद नगरी इलाके से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ के दौरान आरोपी ने हत्या की वारदात को अंजाम देने की बात कबूल कर ली. पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर उसके पास से एक पिस्टल और तीन जिंदा कारतूस भी बरामद किए. विस्तृत जांच में सामने आया कि आरोपी पहले से ही आठ आपराधिक मामलों में शामिल रहा है, जिनमें हत्या, हत्या का प्रयास, स्नैचिंग, मारपीट और आर्म्स एक्ट से जुड़े अपराध शामिल हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे की जांच जारी है और हत्या के पीछे की पूरी साजिश तथा अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें First Published : February 22, 2026, 17:26 IST

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मां ने सुनाई बेटी की दर्दनाक दास्तां, फट जाएगा आपका कलेजा, प्रेमी ने पार कर दी दरिंदगी की सारी हदें | gurugram 19 year tripura girl live in partner tortured crossed all limits mother shared daughter painful story haryana police

Last Updated:February 22, 2026, 15:28 IST गुरुग्राम में त्रिपुरा की एक 19 साल की युवती के साथ उसके लिव-इन पार्टनर ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं. शिवम नाम का आरोपी शख्स ने युवती पर सैनिटाइजर छिड़ककर उसके प्राइवेट पार्ट में आग लगा दी और इसका वीडियो भी बनाया. पीड़िता को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है. पीड़िता की मां ने ऐसे-ऐसे आरोप लगाए हैं, जिससे आपका कलेजा फट जाएगा. गुरुग्राम पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपी शख्स की तलाश शुरू कर दी है. दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में त्रिपुरा की लड़की जिंदगी की जंग लड़ रही है. गुरुग्राम. हरियाणा के गुरुग्राम से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है. 19 साल की एक लड़की के साथ उसके लिव-इन पार्टनर ने न केवल विश्वासघात किया, बल्कि उसे ऐसी क्रूर यातनाएं दीं जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए. आरोपी शख्स ने अपनी पार्टनर के शरीर पर सैनिटाइजर डालकर उसे आग के हवाले कर दिया. गुरुग्राम पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. आरोपी की पहचान शिवम के रूप में हुई है. पीड़िता त्रिपुरा की रहने वाली है, जिसका इलाज दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में चल रहा है. डॉक्टरों के मुताबिक युवती काफी गंभीर रूप से झुलस गई है और उसका इलाज जारी है. दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में त्रिपुरा की लड़की जिंदगी की जंग लड़ रही है. इधर मां का रो-रो कर बुरा हाल है. पीड़िता की मां ने मीडिया के सामने अपनी बेटी की आपबीती सुनाई. मां के मुताबिक, आरोपी ने न केवल उसकी बेटी का रेप किया, बल्कि तीन दिनों तक उसे बंधक बनाकर ऐसी हैवानियत की जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा फट जाए. पीड़िता की मां ने बताया कि 16 फरवरी की रात 10 बजे उनकी बेटी का फोन आया था. फोन पर वह बुरी तरह रो रही थी और उसने कहा, ‘मां, मेरे पास समय नहीं है, वह मुझे मार डालेगा. शिवम नाम का लड़का पिछले 3 दिनों से मुझे प्रताड़ित कर रहा है. उसने मुझे पीटा है, जलाया है और आज वह मेरी जान ले लेगा.’ #WATCH | Delhi: On the Tripura girl assaulted in Gurugram, mother of the victim, says, “On 16th February at 10 PM, my daughter called me and said- “I don’t have time, I will be killed… A man named Shivam has been assaulting me for the last 3 days. He hit me and also burnt me,… https://t.co/3jLxPqkhXZ pic.twitter.com/cytvR0wHDR

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What is difference between Avimukteshwaranand and Asaram Bapu Case: avimukteshwaranand pocso case | up police | क्या अविमुक्तेश्वरानंद जाएंगे जेल, यौन शोषण के आरोप कितने गंभीर, आसाराम बापू से कितना अलग है मामला?

नई दिल्ली. क्या ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती यौन शोषण के आरोप में बहुत जल्द गिरफ्तार होने वाले हैं? पॉक्सो एक्ट में एफआईआर दर्ज होने के बाद अविमुक्तेश्वरानंद के सामने अब क्या-क्या कानूनी विकल्प बच गए हैं? अविमुक्तेश्वरानंद का मामला आसाराम बापू वाले मामले से कितना अलग है? क्या पॉक्सो एक्ट 2012 और भारतीय न्याय संहिता 2023 अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरि को जेल की सलाखों तक पहुंचा देगा? अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों में दर्ज एफआईआर को लेकर अब धार्मिक और कानूनी गलियारों में हलचल मच गई है. प्रयागराज में माघ मेला 2025-26 के दौरान दो नाबालिग बच्चों द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर अविमुक्तेश्वरानंद एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं. 21 फरवरी 2026 को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने झूंसी पुलिस स्टेशन को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. आरोपों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69, 74, 75, 76, 79 और 109 साथ ही POCSO एक्ट की धारा 3, 5, 9 और 17 शामिल हैं, जो यौन हमला, गैंग असॉल्ट और नाबालिगों के शोषण से संबंधित हैं. क्या अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी होगी? कानूनी रूप से देखा जाए तो पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज होने वाले मामले बेहद गंभीर और गैर-जमानती होते हैं. एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस को जांच के दौरान आरोपी को गिरफ्तार करने का अधिकार होता है. खासकर जब मामला नाबालिगों से जुड़ा हो. हालांकि, गिरफ्तारी केवल आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि पुलिस द्वारा जुटाए गए शुरुआती साक्ष्यों और पीड़ितों के बयानों जो धारा 164 के तहत की गंभीरता पर निर्भर करेगी. यदि जांच एजेंसी को लगता है कि आरोपी साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है, तो गिरफ्तारी की संभावना प्रबल हो जाती है. अविमुक्तेश्वरानंद के पास अब क्या विकल्प बचे हैं? एफआईआर दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पास मुख्य रूप से तीन कानूनी विकल्प मौजूद हैं: 1. अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail): स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद गिरफ्तारी से बचने के लिए सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत की याचिका दायर कर सकते हैं.2. 2. FIR को चुनौती (Quashing of FIR): वे इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर को रद्द करने की मांग कर सकते हैं, यदि वे यह साबित कर सकें कि यह मामला पूरी तरह फर्जी या दुर्भावनापूर्ण है.3. जांच में सहयोग: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अब खुद पुलिस के सामने पेश होकर अपना पक्ष रख सकते हैं और अपनी बेगुनाही के सबूत पेश कर सकते हैं. आशाराम बापू और अविमुक्तेश्वरानंद: क्या मामला एक जैसा है? अक्सर लोग इसकी तुलना आशाराम बापू मामले से कर रहे हैं, लेकिन दोनों में कुछ बुनियादी समानताएं और अंतर हैं. दोनों ही मामलों में पीड़ितों ने ‘गुरु-शिष्य’ परंपरा की आड़ में यौन शोषण का आरोप लगाया है. दोनों पर पॉक्सो एक्ट की धाराएं लगी हैं. लेकिन आशाराम के खिलाफ पुलिस ने सीधे एफआईआर दर्ज की थी, जबकि अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा, क्योंकि पुलिस ने शुरुआत में केस दर्ज नहीं किया था. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे एक साजिश करार दिया है और शिकायतकर्ता के हिस्ट्रीशीटर होने का दावा किया है. पॉक्सो एक्ट में सजा के क्या प्रावधान हैं? अविमुक्तेश्वरानंद पर अब पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता 2023 के मामला चलेगा. पॉक्सो एक्ट की धारा 6 में गंभीर मर्मभेदी यौन हमला के लिए न्यूनतम 20 साल की कैद, जिसे आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक बढ़ाया जा सकता है. बीएनएस 2023 की धारा 64/65 में नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में सख्त सजा का प्रावधान है. यदि पीड़िता 12 साल से कम है तो मौत की सजा तक का प्रावधान है. कानून के जानकारों का मानना है कि अदालत ने केवल एफआईआर का आदेश दिया है. इसका मतलब यह नहीं कि दोष सिद्ध हो गया है. चूंकि शिकायतकर्ता का पिछला रिकॉर्ड विवादित बताया जा रहा है, इसलिए पुलिस को साक्ष्यों विशेषकर शिकायतकर्ता द्वारा सौंपी गई सीडी की फॉरेंसिक जांच बहुत बारीकी से करनी होगी. पॉक्सो के मामलों में अदालतें अक्सर बहुत सख्त रुख अपनाती हैं, इसलिए आरोपी के लिए कानूनी लड़ाई चुनौतीपूर्ण हो सकती है.

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दिल्‍ली में इंटरनेशनल ड्रग सिंडिकेट का जाल, 513 किलो नशीली दवाएं जब्‍त, क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्‍शन – crime branch team busted internationl drug racket sized 513 kilogram banned substance

होमताजा खबरDelhi दिल्‍ली में इंटरनेशनल ड्रग सिंडिकेट का जाल, 513 किलो नशीली दवाएं जब्‍त Last Updated:February 22, 2026, 12:51 IST नेशनल कैपिटल दिल्‍ली ड्रग तस्‍करों का अड्डा बनता जा रहा है. दिल्‍ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इंटरनेशनल ड्रग रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 513 किलो नशीली दवाएं बरामद की हैं. इससे पहले भी दिल्‍ली पुलिस की टीम ने ऐसे की एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था. दिल्‍ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इंटरनेशनल ड्रग्‍स रैकेट का भंडाफोड़ किया है. (फाइल फोटो) नई दिल्‍ली. देश की राजधानी में नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत दिल्‍ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को बड़ी सफलता मिली है. पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए 513 किलोग्राम नशीली दवाओं का बड़ा जखीरा बरामद किया है. क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के अनुसार, जब्त की गई दवाओं में ट्रामाडोल ट्रेकैम, नाइट्रोजेप, अल्प्राजोलम, जोल्पिडेम और ट्रामाडोल ट्रेकेन जैसी प्रतिबंधित दवाएं शामिल हैं. ये दवाएं अवैध रूप से देश और विदेश में सप्लाई की जा रही थीं. पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपियों को पकड़ा और ड्रग तस्करी के इस नेटवर्क का खुलासा किया. जांच में सामने आया है कि यह गिरोह लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय था और बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल था. फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है. अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही और खुलासे होने की संभावना है. इससे पहले दिल्ली-एनसीआर में ‘स्मैक’ की आपूर्ति करने वाले एक अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने शनिवार को बताया था कि आरोपियों के कब्जे से करीब 60 लाख रुपये मूल्य के मादक पदार्थ बरामद किए गए हैं. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमीन खान, राशिद, बलबीर, आसिफ और इकरार के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी अमीन खान उत्तर प्रदेश के बदायूं का रहने वाला है और उसे 12 फरवरी को पूर्वी दिल्ली के पांडव नगर इलाके में नोएडा लिंक रोड के पास से गिरफ्तार किया गया. वह कथित तौर पर ‘स्मैक’ की खेप पहुंचाने के लिए वहां आया था. तलाशी के दौरान उसके पास से 291 ग्राम प्रतिबंधित मादक पदार्थ बरामद किया गया. यूपी से जुड़ा था कनेक्‍शन पूछताछ के दौरान अमीन खान ने खुलासा किया कि वह बदायूं के सप्लायरों से स्मैक लाकर पूर्वी दिल्ली के विभिन्न इलाकों में छोटी-छोटी मात्रा में बेचता था. उसने बताया कि खोडा चौक और शशि गार्डन समेत कई क्षेत्रों में वह नियमित रूप से नशीले पदार्थ की आपूर्ति करता था. उसके बयान के आधार पर पुलिस ने आगे कार्रवाई करते हुए बदायूं से उसके दो सप्लायरों राशिद और बलबीर को गिरफ्तार किया, जिनके पास से अतिरिक्त 35.85 ग्राम स्मैक बरामद हुई. जांच के दौरान पुलिस ने अमीन खान के कॉल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया, जिससे उसके स्थानीय संपर्कों का पता चला. इसके बाद पुलिस ने त्रिलोकपुरी निवासी उसके दो सहयोगियों आसिफ और इकरार को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपी सीधे तौर पर अमीन खान के संपर्क में थे और उससे स्मैक लेकर स्थानीय स्तर पर उसकी बिक्री करते थे. पहले से थे वॉन्‍टेड पुलिस ने बताया कि आसिफ और इकरार पहले से ही मादक पदार्थ तस्करी के एक अन्य मामले में वांछित थे. उनके खिलाफ मयूर विहार थाने में दर्ज मामले में उद्घोषणा की कार्रवाई भी शुरू की जा चुकी थी. अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार सभी आरोपी एक संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क का हिस्सा थे, जो उत्तर प्रदेश से दिल्ली-एनसीआर तक मादक पदार्थों की तस्करी करता था. जांच में यह भी सामने आया है कि अमीन खान इससे पहले मेरठ में इसी तरह के एक मामले में गिरफ्तार हो चुका है. पिछले कुछ महीनों से वह दिल्ली में किराये पर रहकर इस अवैध धंधे को संचालित कर रहा था. पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और सप्लाई चेन से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि ड्रग तस्करी के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा. About the Author Manish Kumar बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें Location : New Delhi,Delhi First Published : February 22, 2026, 12:43 IST

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आधी रात, सुनसान सड़क और 3 लुटेरे; परिवार को बचाने तलवार लेकर सड़क पर निकल गई लुधियाना की सिखनी

होमवीडियोक्राइम आधी रात, सुनसान सड़क और 3 लुटेरे; परिवार को बचाने तलवार लेकर सड़क पर निकल गई लुधियाना की सिखनी X आधी रात, सुनसान सड़क और 3 लुटेरे; परिवार को बचाने तलवार लेकर सड़क पर निकल गई लुधियाना की सिखनी   लुधियाना में ऑस्ट्रेलिया निवासी NRI हरजिंद कौर ने अदम्य साहस दिखाते हुए बदमाशों के लूट के मंसूबों को नाकाम कर दिया. ब्रिसबेन में एंकरिंग करने वाली हरजिंद अपनी सास और चाची के साथ कार से जा रही थीं. इसी दौरान बदमाशों ने कार के शीशे पर अंडे फेंककर उन्हें रोकने की साजिश रची. खतरे को भांपते हुए हरजिंद ने डरने के बजाय कार में रखी तलवार निकाल ली. उन्होंने रौद्र रूप अपनाकर लुटेरों को खुलेआम ललकारा, जिसे देख हमलावर डरकर भाग खड़े हुए. हरजिंद ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह कदम परिवार की सुरक्षा के लिए उठाया. उन्होंने युवतियों को आत्मरक्षा के लिए ‘गतका’ सीखने और शस्त्र साथ रखने की नसीहत दी है ताकि वे सुरक्षित रह सकें.लुधियाना में ऑस्ट्रेलिया निवासी NRI हरजिंद कौर ने अदम्य साहस दिखाते हुए बदमाशों के लूट के मंसूबों को नाकाम कर दिया. ब्रिसबेन में एंकरिंग करने वाली हरजिंद अपनी सास और चाची के साथ कार से जा रही थीं. इसी दौरान बदमाशों ने कार के शीशे पर अंडे फेंककर उन्हें रोकने की साजिश रची. खतरे को भांपते हुए हरजिंद ने डरने के बजाय कार में रखी तलवार निकाल ली. उन्होंने रौद्र रूप अपनाकर लुटेरों को खुलेआम ललकारा, जिसे देख हमलावर डरकर भाग खड़े हुए. हरजिंद ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह कदम परिवार की सुरक्षा के लिए उठाया. उन्होंने युवतियों को आत्मरक्षा के लिए ‘गतका’ सीखने और शस्त्र साथ रखने की नसीहत दी है ताकि वे सुरक्षित रह सकें.

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Sambhal Honor Killing| Love Affair Crime Story| Muslim Girl Hindu Boy Love Story

संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले के मतावली पट्टी जग्गू गांव की गलियों में आज सन्नाटा है, लेकिन हवाओं में एक बेबस चीख और एक पिता के पत्थर दिल बयानों की गूंज है. यह कहानी 18 साल की रूपजहां और शिवम सैनी के उस अधूरे इश्क की है, जिसका अंत निकाह के मंडप में नहीं, बल्कि श्मशान और कब्रिस्तान के बीच नफरत की भेंट चढ़ गया. एक तरफ वो प्रेमी था जिसके साथ रूपजहां ने सात जन्मों के वादे किए थे, और दूसरी तरफ वो सगा भाई था जिसके हाथों में बहन की सुरक्षा की डोर होनी चाहिए थी, लेकिन उसने उसी दुपट्टे से रूपजहां का दम घोंट दिया जिसे वह अपनी शान समझती थी. दरअसल, भाई ने अपनी सगी बहन का गला महज इसलिए घोंट दिया क्योंकि वह एक दूसरे मजहब के लड़के से मोहब्बत करने की ‘खता’ कर बैठी थी. चारपाई पर बिछी लाश और पिता की बेखौफ बातें गुरुवार की रात करीब 11 बजे जब संभल के एसएसपी कुलदीप सिंह मतावली पट्टी गांव पहुंचे, तो मंजर रूह कंपा देने वाला था. घर के आंगन में बिछी एक चारपाई पर 18 साल की रूपजहां का बेजान शरीर पड़ा था. उसी घर के एक कोने में खड़ा उसका भाई जाने आलम और पिता नौशे आलम पुलिस को देख जरा भी विचलित नहीं थे. जाने आलम ने खुद पुलिस को फोन कर कहा था, साहब, मैंने अपनी बहन को मार डाला है, आकर मुझे ले जाओ. हैरानी की बात पुलिस के लिए यह नहीं थी कि हत्या हुई है, बल्कि हैरानी इस बात पर थी कि पिता नौशे के चेहरे पर न तो बेटी को खोने का गम था और न ही बेटे के जेल जाने का डर. नौशे ने कैमरे के सामने खड़े होकर जो कहा, वह समाज के उस काले चेहरे को उजागर करता है जिसे ‘ऑनर किलिंग’ कहा जाता है. पिता का कबूलनामा, ‘वो जिद पर अड़ी थी, मारना ही सही था’नौशे आलम की बातों में नफरत और कट्टरता का मिला-जुला स्वर था. उसने दोटूक शब्दों में कहा, मेरी बेटी शिवम सैनी नाम के लड़के से प्यार करती थी. वह उससे शादी करना चाहती थी और वह उसके साथ भाग गई थी. गांववाले मेरा मजाक उड़ा रहे थे, गलियों से गुजरना मुश्किल हो गया था. मैं परेशान था. दो दिन पहले वह शिवम के साथ भाग गई थी. हमने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी. नौशे आगे कहता है, हम मुसलमान हैं. बेटी का प्रेमी सैनी (हिंदू) है. हम ऐसी शादी कैसे कर देते? अगर हमारी बिरादरी में शादी की बात होती, तो हम करा देते. जब वह घर आई और फिर से उसी के पास जाने की जिद करने लगी, तो मेरे बेटे ने दुपट्टे से उसका गला घोंट दिया. मुझे कोई पछतावा नहीं है. ऐसी लड़की को मारना ही सही है, इससे घर की इज्जत बच गई. ‘प्रधान ने मांगी घूस, पुलिस कराना चाहती थी फेरे’: चाचा का आरोपइस पूरी साजिश में एक और सनसनीखेज पहलू सामने आया है रुपयों का लेनदेन. रूपजहां के चाचा दुलारे हुसैन ने ऑन-कैमरा बताया कि इस पूरी वारदात के पीछे गांव के प्रधान और पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है. दुलारे के मुताबिक, जब रूपजहां और शिवम थाने पहुंचे थे, तो वहां पंचायत हुई. चाचा दुलारे ने बताया, थाने के एसओ साहब दोनों के फेरे कराने को तैयार थे. उन्होंने कहा था कि लड़की बालिग है. उन्होंने हमसे अंगूठा लगवाने को कहा, तो हम वहां से भाग आए. इसके बाद प्रधान लेखराज ने बीच-बचाव किया और बेटी को वापस लाने के बदले 3 लाख रुपये मांगे. प्रधान ने कहा कि पुलिस और मामले को रफा-दफा करने के लिए पैसे लगेंगे. हमने किसी तरह 1.5 लाख रुपये दिए. परिजनों का आरोप है कि पैसे देने के बाद वे बेटी को घर तो ले आए, लेकिन उसकी ‘आजादी’ छीनने के लिए. जब घर के भीतर बंद रूपजहां ने फिर से शिवम का नाम लिया, तो भाई जाने आलम का खून खौल उठा. एक साल का इश्क और दो महीने पहले की गुप्त शादीरूपजहां और शिवम सैनी का घर एक-दूसरे से महज 400 मीटर की दूरी पर है. पिछले एक साल से दोनों के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था. शिवम के परिवार को इस रिश्ते से ऐतराज नहीं था, लेकिन रूपजहां का परिवार इसे मजहबी चश्मे से देख रहा था. इधर, शिवम की मां हरप्यारी का रो-रोकर बुरा हाल है. उन्होंने पुलिस को एक ऐसा सच बताया जिसने इस केस की दिशा बदल दी. हरप्यारी के मुताबिक, मेरे बेटे और रूपजहां ने दो महीने पहले ही चोरी-छिपे शादी कर ली थी. वे एक-दूसरे के हो चुके थे. रूपजहां हमारी बहू थी. बुधवार को जब वे घर से भागे थे, तो वे अपनी सुरक्षा की गुहार लगाने थाने गए थे. हरप्यारी ने ही अपनी ‘बहू’ की हत्या के आरोप में रूपजहां के भाई जाने आलम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है. अब पुलिस इस मामले को एक पत्नी की हत्या के नजरिए से भी देख रही है. साजिश के तहत बुलाई गई मौत, अमरोहा से घर तक का सफरबुधवार को जब रूपजहां और शिवम थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें बालिग होने के नाते साथ रहने की अनुमति दे दी थी. शिवम सुरक्षा के लिहाज से रूपजहां को लेकर अमरोहा में अपनी एक रिश्तेदारी में चला गया था. उसे लगा था कि वह सुरक्षित है. लेकिन घर पर पिता और भाई ने उसे वापस लाने का जाल बुना. प्रधान की मदद से उसे ‘सब ठीक हो जाएगा’ का झांसा देकर घर बुलाया गया. गुरुवार की शाम जब रूपजहां अपने घर की दहलीज पर कदम रखी, उसे नहीं पता था कि यह उसका आखिरी सफर है. रात करीब 10:30 बजे, जब परिवार के अन्य सदस्य एक शादी में गए हुए थे (जैसा कि कुछ रिपोर्ट में दावा है), घर में सिर्फ जाने आलम और रूपजहां थे. इसी दौरान विवाद हुआ और जाने आलम ने दुपट्टे का फंदा बनाकर अपनी बहन की जीवनलीला समाप्त कर दी. इस घटना ने खड़े किए कई कड़वे सवालइस हत्या के मामले में केस दर्ज हो चुका है. लेकिन इस घटना ने समाज के सामने कई कड़वे सवाल खड़े कर दिए हैं.

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यूपी का एपस्टीन! पत्नी लाती थी बच्चे, JE पति करता कुकर्म, फिर डार्क वेब पर बिकती थीं चीखें, अब सजा ए मौत

चित्रकूट: उत्तर प्रदेश के सूखे, शांत और आधे-अधूरे सपनों से भरे बुंदेलखंड में बसे शहर बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर ने बहुत कुछ देखा है. गरीबी, पलायन, सूखा और संघर्ष… लेकिन जो सच साल 2020 के बाद धीरे-धीरे सामने आया, उसने इन शहरों की आत्मा तक को झकझोर दिया. यह कहानी सिर्फ एक अपराध की नहीं, बल्कि उस अंधेरे की है, जो इंसान के भीतर पलता है और मौका मिलते ही राक्षस बनकर बाहर आ जाता है. यह कहानी है सिंचाई विभाग के एक निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती की, एक ऐसा दंपती जिसने भरोसे को हथियार बनाया, मासूमियत को जाल में फंसाया और इंसानियत को शर्मसार कर दिया. यह है मामला हम बात कर रहे हैं चित्रकूट में सिंचाई विभाग के निलंबित जूनियर इंजीनियर (जेई) रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती की. इस दंपति ने सबसे भयानक मिसाल पेश की है. 50 से ज्यादा मासूम बच्चों का यौन शोषण कर उनके वीडियो डार्क वेब और विदेशी पोर्न साइट्स पर बेचने वाले इस दरिंदे दंपती को आखिरकार अदालत ने फांसी की सजा सुना दी है. सीबीआई की जांच में सामने आया यह मामला सिर्फ बाल यौन शोषण का नहीं था, बल्कि मासूमों की आड़ में चल रहे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम का भी पर्दाफाश था. आइए जानते हैं सबकुछ. एक दम शांत दिखने वाला खूंखार शख्स रामभवन बाहर से बिल्कुल साधारण आदमी लगता था. सरकारी नौकरी, पढ़ा-लिखा चेहरा, कम बोलने वाला स्वभाव. उसने कभी विभागीय आवास की मांग नहीं की. हमेशा किराए के मकान में रहा. मोहल्ले वाले कहते थे- अलग-थलग रहता है, ज्यादा मेलजोल नहीं. वहीं, उसकी पत्नी दुर्गावती भी चुपचाप रहने वाली महिला के रूप में जानी जाती थी. शादी को कई साल बीत चुके थे, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी. बाहर से देखने पर वे एक सामान्य, निःसंतान दंपती लगते थे, जो अपनी दुनिया में सिमटा हुआ था. मगर, इस चुप्पी के पीछे एक खौफनाक योजना धीरे-धीरे आकार ले रही थी. बच्चों के सामने बिछाया लालसा का जालदुर्गावती ने अपने आसपास के गरीब परिवारों के बच्चों को निशाना बनाना शुरू किया. 5 से 16 साल उम्र के बच्चों को महंगा मोबाइल, घड़ी या चॉकलेट का लालच देती. बेचारे बच्चे समझते कितनी अच्छी आंटी हैं. उनके लिए ये सामान किसी खजाने से कम नहीं था. वह बच्चों से अपनापन जताती. कभी मिठाई देती, कभी पेन, कभी कपड़े. धीरे-धीरे बच्चे उसके घर आने लगे. पड़ोसियों को यह सब कुछ सामान्य लगता था. मगर, हर बार जब घर का दरवाजा बंद होता, तो एक बच्चे की मासूमियत छीन ली जाती थी. हवस से बड़ा था लालचरामभवन का मकसद केवल हवस को मिटाना नहीं था. बल्कि वह पैसे का भूखा था. उसने अपराध को कारोबार बना दिया था. घर के अंदर बच्चों की अश्लील तस्वीरें और वीडियो बनाए जाते. फिर वे फाइलें इंटरनेट के उस अंधेरे हिस्से में पहुंचाई जातीं, जहां पहचान छुपाकर गुनाह खरीदे-बेचे जाते हैं. वह डार्क वेब और विदेशी पोर्न साइट्स के जरिए इन वीडियो को बेचता था. ईमेल की जांच की गई तो सामने आया कि वह देश-विदेश के कई गिरोहों के संपर्क में था. यह कोई अकेला अपराध नहीं था- यह एक अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़ा संगठित अपराध था. अगर कोई बच्चा किसी तरह का विरोध करता तो उसे उन्हीं तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल किया जाता. साथ ही परिवारों को भी धमकी दी जाती. इस पर गरीब परिवार, जिनके पास इज्जत ही सबसे बड़ी पूंजी थी, खामोश हो जाते और इसी खामोशी में कई साल बीत गए. इंटरपोल से आया पहला संकेत 17 अक्टूबर 2020 को भारत की प्रमुख जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को एक चौंकाने वाली सूचना मिली. यह सूचना अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल से आई थी. एक पेन ड्राइव में 34 बच्चों से जुड़े वीडियो और 679 तस्वीरें थीं. डिजिटल ट्रैकिंग से पता चला कि इनका स्रोत बुंदेलखंड का एक सरकारी इंजीनियर है. 31 अक्टूबर 2020 को नई दिल्ली में केस दर्ज हुआ. जांच की कमान डीएसपी अमित कुमार को सौंपी गई. अब तक जो अंधेरा घर की चारदीवारी में छुपा था, वह जांच की रोशनी में आने लगा. इस दिन हुआ था गिरफ्तार16 नवंबर 2020 को इस पूरे मामले से परदा हट गया. चित्रकूट की एसडीएम कॉलोनी को सीबीआई की 10 सदस्यीय टीम ने चुपचाप घेर लिया. दरवाजा खुला तो अंदर जो मिला, उसने जांच अधिकारियों तक को हिला दिया. 8 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, सेक्स टॉयज, 8 लाख रुपये नकद और डिजिटल फोल्डरों में छुपी 66 वीडियो और 600 से ज्यादा तस्वीरें. कुछ ही दिनों बाद दुर्गावती भी गिरफ्तार कर ली गई. गवाही ऐसी कि कांप गई रूहअब यह मामला केवल स्थानीय पुलिस का नहीं रहा था. यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अपराध का केस बन चुका था. जांच के दौरान कई बच्चों को मेडिकल जांच के लिए एम्स दिल्ली भेजा गया. डॉक्टरों की टीम ने जो देखा, उसने उन्हें अंदर तक हिला दिया. कोर्ट में जब उन्होंने गवाही दी, तो शब्द कांप रहे थे. कुछ बच्चों की आंखों में स्थायी डर था. कुछ शारीरिक रूप से गंभीर रूप से आहत थे. मगर, सबसे गहरा घाव उनके मन पर था. कई बच्चे अब भी अंधेरे कमरे से डरते थे. किसी अजनबी की मुस्कान उन्हें सिहरन दे जाती थी. कोर्ट में पेश हुए 25 पीड़ित बच्चों ने जब बयान दिए, तो पूरा माहौल भारी हो गया. यह केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं थी, यह मासूमियत की चीख थी. 24 फरवरी 2021 को बांदा कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई. 2023 में आरोप तय हुए. रामभवन और दुर्गावती ने खुद को निर्दोष बताया. 5 जून 2023 से विशेष पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. 74 गवाह पेश हुए. बच्चे, डॉक्टर, शिक्षक, डिजिटल विशेषज्ञ सब शामिल थे. हर गवाही के साथ अपराध का एक नया पहलू सामने आता. हर डिजिटल सबूत अदालत के सामने एक और दरवाजा खोलता, जिसके पीछे घिनौनी सच्चाई छुपी थी. अब मिला न्याय20 फरवरी 2026 का सबसे ज्यादा दिन अहम था. इसी दिन इन मासूमों को न्याय मिला. बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत में 163 पन्नों का फैसला पढ़ा गया. जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा कि यह अपराध विरल से विरलतम की श्रेणी में आता है. कोर्ट ने दोनों दोषियों को मौत

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