Sunday, 06 Sep 2026 | 06:55 PM

Trending :

8 मुस्लिम देशों ने इजराइली मंत्रियों की निंदा की:गाजा खाली कराने को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया, कहा- इससे शांति को खतरा 8 मुस्लिम देशों ने इजराइली मंत्रियों की निंदा की:गाजा को खाली कराने की योजना पर बोले- यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन, शांति प्रयासों को खतरा अमेरिकी मंत्री ने कनाडा को 'छोटा भौंकने वाला कुत्ता' बताया:बोले- पीएम कार्नी ने बेहतरीन ट्रेड डील ठुकराई; अगस्त में हुई बातचीत नाकाम रही थी अमेरिकी मंत्री ने कनाडा को 'छोटा भौंकने वाला कुत्ता' कहा:बोले- पीएम कार्नी ने बेहतरीन ट्रेड डील ठुकराई; अगस्त में हुई बातचीत नाकाम रही थी Kangana Ranaut Manali Janmashtami Bhog Controversy इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटा:50 हजार फीट ऊपर तक पहुंची राख, 301 उड़ानें प्रभावित, कई यात्री एयरपोर्ट पर फंसे
EXCLUSIVE

China Satellite Images Tracked US Military Before Iran Strike

China Satellite Images Tracked US Military Before Iran Strike

बीजिंग9 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

फरवरी के आखिरी हफ्ते में, जब पहली मिसाइल भी नहीं चली थी, उससे पहले ही चीनी सोशल मीडिया पर यह खुलासा हो गया था कि अमेरिका, ईरान पर बड़ा हमला करने जा रहा है।

चीनी सोशल मीडिया पर अमेरिकी सेना की तैयारियों से जुड़ीं सैटेलाइट तस्वीरें इंटरनेट पर फैलने लगी थीं।

इन तस्वीरों में रनवे पर खड़े लड़ाकू विमान, रेगिस्तान के एयरफील्ड पर उतरते ट्रांसपोर्ट प्लेन और भूमध्यसागर में किसी विमानवाहक पोत के डेक पर खड़े फाइटर जेट दिखाई दे रहे थे।

इन तस्वीरों की खास बात यह थी कि इनमें बहुत ज्यादा जानकारी दी गई थी। यह जानकारी अंग्रेजी में नहीं, बल्कि मंदारिन (चीनी भाषा) में लिखी थी।

तस्वीरों में विमान के नाम बताए गए थे, मिसाइल रक्षा सिस्टम को प्वाइंट आउट किया गया था और सैनिकों की मौजूदगी को सटीक लोकेशन के साथ दिखाया गया था।

24 फरवरी: सैटेलाइट तस्वीरों में प्रिंस सुल्तान एयर फोर्स बेस पर सैन्य विमान दिखाई दिए।

24 फरवरी: सैटेलाइट तस्वीरों में प्रिंस सुल्तान एयर फोर्स बेस पर सैन्य विमान दिखाई दिए।

चीनी AI कंपनी ने तस्वीरें शेयर की थीं

एक तस्वीर में इजराइल के ओवदा एयर बेस पर लॉकहीड मार्टिन के F-22 स्टेल्थ फाइटर खड़े दिखे। दूसरी तस्वीर में सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर विमान और सपोर्ट सिस्टम की बढ़ती तैनाती दिखाई गई।

इसके अलावा कतर, जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी नक्शे पर दिखाया गया था। ये सभी तस्वीरें एक चीनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी ने ऑनलाइन साझा की थीं, जिसमें 200 से भी कम कर्मचारी काम करते हैं।

28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम से ईरान पर हवाई हमले शुरू किए। इसके बाद तेहरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों से जवाब दिया।

लेकिन इस संघर्ष के दौरान एक और चीज समानांतर रूप से चल रही थी। इंटरनेट पर लगातार सैटेलाइट तस्वीरें सामने आती रहीं, जिनमें अमेरिकी विमान, मिसाइल रक्षा सिस्टम और नौसेना की गतिविधियों को दिखाया जा रहा था। ये सभी तस्वीरें शंघाई स्थित जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस कंपनी मिजारविजन से शेयर हो रही थीं।

24 फरवरी: सैटेलाइट तस्वीरों में प्रिंस सुल्तान एयर फोर्स बेस के रनवे पर खड़े सैन्य विमान दिखाई दिए।

24 फरवरी: सैटेलाइट तस्वीरों में प्रिंस सुल्तान एयर फोर्स बेस के रनवे पर खड़े सैन्य विमान दिखाई दिए।

तस्वीरों में क्या दिखा

पहली बड़ी तस्वीरों का सेट 20 फरवरी के आसपास सामने आया बताया जाता है।

मिजार विजन ने हाई-रेजोल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों की एक लिस्ट जारी की, जिसमें दक्षिणी इजराइल के ओवदा एयर बेस पर अमेरिकी विमानों की तैनाती, सऊदी अरब और कतर सहित मिडिल ईस्ट के कई देशों में फाइटर जेट की मौजूदगी, अरब सागर में नौसैनिक गतिविधियां और विमानवाहक पोतों की आवाजाही दिखाई गई।

हर तस्वीर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से जानकारी जोड़ी गई थी। विमानों के प्रकार बताए गए थे, सपोर्ट विमान की पहचान की गई थी और मिसाइल रक्षा सिस्टम को चिन्हित किया गया था।

1 मार्च तक यह डेटा काफी बढ़ चुका था। मिजारविजन ने जॉर्डन, कुवैत, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के सैन्य ठिकानों की भी नई तस्वीरें जारी कीं। इन तस्वीरों में विमानों के प्रकार, एयर डिफेंस सिस्टम की व्यवस्था और सैनिकों की तैनाती को दर्ज किया गया था।

26 फरवरी: सैटेलाइट तस्वीरों में अल-उदीद एयर बेस के रनवे पर एक KC-135, दो C-130 विमान और लगभग सात अटैक हेलीकॉप्टर खड़े दिखाई दिए।

26 फरवरी: सैटेलाइट तस्वीरों में अल-उदीद एयर बेस के रनवे पर एक KC-135, दो C-130 विमान और लगभग सात अटैक हेलीकॉप्टर खड़े दिखाई दिए।

सटीक लोकेशन के साथ X पर शेयर किए गए

इन तस्वीरों को सटीक लोकेशन के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और चीनी प्लेटफॉर्म जैसे वीबो पर पोस्ट किया गया। इनमें से कुछ पोस्ट चीनी सरकारी मीडिया से जुड़े अकाउंट और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) से जुड़े एक्सपर्ट्स ने भी शेयर किए।

इन तस्वीरों में अमेरिका के कई अहम सैन्य प्लेटफॉर्म दिखाई दिए। सैटेलाइट तस्वीरों में ओवदा एयर बेस पर F-22 स्टेल्थ फाइटर खड़े दिखे, ठीक उस समय जब युद्ध शुरू होने वाला था।

तस्वीरों के मुताबिक, सात F-22 विमान रनवे के पास खड़े थे और चार अन्य F-22 रनवे पर दिखाई दिए। करीब 24 घंटे बाद “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” शुरू हो गया।

सैटेलाइट तस्वीरों में USS फोर्ड विमानवाहक पोत को सूडा बे नौसैनिक अड्डे से रवाना होते हुए दिखाया गया।

सैटेलाइट तस्वीरों में USS फोर्ड विमानवाहक पोत को सूडा बे नौसैनिक अड्डे से रवाना होते हुए दिखाया गया।

अन्य तस्वीरों में सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर गतिविधियां दिखाई गईं। यहां सात बोइंग E-3 एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम विमान और दो बॉम्बार्डियर E-11 कम्युनिकेशन विमान तैनात बताए गए।

इसके अलावा कतर के अल-उदीद एयर बेस की भी सैटेलाइट तस्वीरें सामने आईं। बाद में यही बेस ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बना।

तस्वीरें सिर्फ एयरफील्ड तक सीमित नहीं थीं।

अंतरिक्ष से विमानवाहक पोतों की निगरानी

समुद्र में नौसैनिक गतिविधियों को भी ट्रैक किया गया।

मिजारविजन ने सैटेलाइट तस्वीरें जारी कीं, जिनमें अमेरिकी नौसेना का सबसे नया विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर फोर्ड दिखाई दिया। यह पोत क्रेट के सूडा बे नौसैनिक अड्डे से रवाना होने के बाद नजर आया।

तस्वीरों में विमानवाहक पोत के डेक पर बोइंग F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट फाइटर और नॉर्थरोप ग्रुम्मन E-2D अर्ली वार्निंग विमान दिखाई दिए।

एक अन्य सैटेलाइट तस्वीर में USS अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत अरब सागर में ओमान के पास एक सप्लाई जहाज से मिलते हुए दिखाई दिया।

कंपनी ने सैटेलाइट तस्वीरों को ओपन-सोर्स फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के साथ भी जोड़ा।

विमान ट्रैकिंग टूल की मदद से विश्लेषकों ने अमेरिकी नौसेना के बोइंग P-8A समुद्री निगरानी विमान को बहरीन के ईसा एयर बेस से उड़ान भरते हुए ट्रैक किया। यह विमान अरब सागर के उस इलाके की ओर जा रहा था जहां अब्राहम लिंकन कैरियर समूह के मौजूद होने की संभावना थी।

सैटेलाइट तस्वीरों में अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में कई इमारतों को हुआ नुकसान दिखाई देता है।

सैटेलाइट तस्वीरों में अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में कई इमारतों को हुआ नुकसान दिखाई देता है।

तस्वीरें जारी करने वाली कंपनी

अमेरिका की वैनटोर (पहले मैक्सर इंटेलिजेंस) या प्लैनेट लैब्स जैसी कंपनियों के विपरीत, जो अपने सैटेलाइट नेटवर्क चलाती हैं, मिजारविजन मुख्य रूप से विश्लेषण और डेटा प्रोसेसिंग का काम करती है।

विश्लेषकों के मुताबिक इसकी भूमिका एक “इन्फॉर्मेशन एग्रीगेटर” जैसी है।

कंपनी कई तरह के सार्वजनिक डेटा को जोड़ती है, जैसे कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरें, ADS-B विमान ट्रैकिंग सिग्नल और AIS जहाज ट्रैकिंग डेटा।

इन सभी डेटा को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल के जरिए प्रोसेस किया जाता है, जो अपने आप सैन्य उपकरणों की पहचान कर लेते हैं।

इस तरह तैयार होने वाला डेटा जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस जैसा होता है, जो आम तौर पर राष्ट्रीय खुफिया एजेंसियां तैयार करती हैं।

कंपनी को “इंटेलिजेंस की ब्लूमबर्ग” भी कहा गया है, क्योंकि यह अलग-अलग स्रोतों के डेटा को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़कर विश्लेषण करती है।

सैटेलाइट डेटा कहां से आता है

मिजारविजन द्वारा इस्तेमाल की गई सैटेलाइट तस्वीरें दो संभावित स्रोतों से आ सकती हैं।

पहला स्रोत चीन का जिलिन-1 सैटेलाइट नेटवर्क हो सकता है, जिसे चांग गुआंग सैटेलाइट टेक्नोलॉजी संचालित करती है।

जिलिन-1 नेटवर्क में 100 से ज्यादा पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट हैं। इनमें से कई सैटेलाइट सब-मीटर रेजोल्यूशन की तस्वीरें लेते हैं। इतनी स्पष्ट तस्वीरों में रनवे पर खड़े विमानों और अलग-अलग मिसाइल रक्षा सिस्टम की पहचान की जा सकती है।

दूसरा संभावित स्रोत पश्चिमी कमर्शियल सैटेलाइट कंपनियां भी हो सकती हैं, जैसे वैनटोर, प्लैनेट लैब्स और एयरबस डिफेंस एंड स्पेस, जो दुनिया भर में सैटेलाइट नेटवर्क चलाती हैं और तस्वीरें व्यावसायिक रूप से बेचती हैं।

क्या ईरान ने इस डेटा का इस्तेमाल किया

इस बात का कोई पक्का सबूत नहीं है कि ईरान ने इन तस्वीरों का इस्तेमाल अपने हमलों को निर्देशित करने के लिए किया। लेकिन जिन कई सैन्य ठिकानों को पहले मिजारविजन की पोस्ट में दिखाया गया था, उनमें से कुछ बाद में ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बने।

इनमें कतर का अल-उदीद एयर बेस भी शामिल था। ईरान ने जॉर्डन में मौजूद सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया, जिनमें मुवाफक सल्ती एयर बेस शामिल था। यहां अमेरिकी THAAD मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए इस्तेमाल होने वाला लगभग 300 मिलियन डॉलर का AN/TPY-2 रडार सिस्टम नष्ट हो गया।

बाद की सैटेलाइट तस्वीरों में इस रडार सिस्टम के नष्ट होने की पुष्टि भी हुई। यह सिस्टम खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल रक्षा के लिए बेहद अहम माना जाता था।

रडार नष्ट होने के बाद मिसाइल को रोकने की जिम्मेदारी ज्यादा हद तक पैट्रियट मिसाइल बैटरियों पर आ गई। लेकिन इनमें इस्तेमाल होने वाले PAC-3 इंटरसेप्टर पहले से ही सीमित संख्या में उपलब्ध हैं।

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
₹2 Lakh Crore Sold Amidst Global Market Uncertainty

May 10, 2026/
2:09 pm

मुंबई28 मिनट पहले कॉपी लिंक मई महीने में भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की निकासी जारी है।...

Mumbai Indians vs Kolkata Knight Riders Live Score: IPL 2026 Match Today Updates From Wankhede Stadium. (Picture Credit: AP)

March 29, 2026/
8:44 pm

आखरी अपडेट:मार्च 29, 2026, 20:44 IST एक्स पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए, सस्मित पात्रा ने कहा कि वह...

authorimg

March 21, 2026/
2:45 pm

kathal health benefits: कई तरह की मार्केट में सब्जियां मिलती हैं, जिनमें कुछ ऐसी सब्जी होती है, जिसका सेवन लोग...

ओवल टेस्ट-न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड पर 352 रन की बढ़त बनाई:हेनरी निकोल्स का कमबैक शतक, रचिन के साथ 161 रन की पार्टनरशिप

June 20, 2026/
9:56 am

न्यूजीलैंड ने दूसरे टेस्ट के तीसरे दिन इंग्लैंड पर 352 रन की मजबूत बढ़त हासिल कर ली है। लंदन के...

गुजराती स्टाइल डबल टुकड़े टुकड़े ऐसे खास, 10 मिनट में टेस्टी ब्रेकफ़ास्ट तैयार; बच्चे-बच्चे सब चैट कर जायेंगे

February 23, 2026/
11:44 pm

गुजराती डबल चीज़ सैंडविच: कैसीनो हर किसी को पसंद होता है। ब्रेकफ़ास्ट हो, स्कूल-ऑफ़िस का टिफ़िन हो या शाम का...

विजय ने तमिलनाडु में जातिविहीन वोट की शुरुआत की | विजय थलपति | तमिलनाडु की राजनीति | साफ़ बोलो

May 5, 2026/
7:18 pm

विजय ने कथित तौर पर तमिलनाडु में “जातिविहीन वोट” डालने के बाद व्यापक चर्चा छेड़ दी है, यह एक प्रतीकात्मक...

Hanuman Ansh Box Office Collection

September 2, 2026/
4:20 pm

9 मिनट पहले कॉपी लिंक नीम करौली बाबा के जीवन पर बनी छोटे बजट की फिल्म ‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस...

राजनीति

China Satellite Images Tracked US Military Before Iran Strike

China Satellite Images Tracked US Military Before Iran Strike

बीजिंग9 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

फरवरी के आखिरी हफ्ते में, जब पहली मिसाइल भी नहीं चली थी, उससे पहले ही चीनी सोशल मीडिया पर यह खुलासा हो गया था कि अमेरिका, ईरान पर बड़ा हमला करने जा रहा है।

चीनी सोशल मीडिया पर अमेरिकी सेना की तैयारियों से जुड़ीं सैटेलाइट तस्वीरें इंटरनेट पर फैलने लगी थीं।

इन तस्वीरों में रनवे पर खड़े लड़ाकू विमान, रेगिस्तान के एयरफील्ड पर उतरते ट्रांसपोर्ट प्लेन और भूमध्यसागर में किसी विमानवाहक पोत के डेक पर खड़े फाइटर जेट दिखाई दे रहे थे।

इन तस्वीरों की खास बात यह थी कि इनमें बहुत ज्यादा जानकारी दी गई थी। यह जानकारी अंग्रेजी में नहीं, बल्कि मंदारिन (चीनी भाषा) में लिखी थी।

तस्वीरों में विमान के नाम बताए गए थे, मिसाइल रक्षा सिस्टम को प्वाइंट आउट किया गया था और सैनिकों की मौजूदगी को सटीक लोकेशन के साथ दिखाया गया था।

24 फरवरी: सैटेलाइट तस्वीरों में प्रिंस सुल्तान एयर फोर्स बेस पर सैन्य विमान दिखाई दिए।

24 फरवरी: सैटेलाइट तस्वीरों में प्रिंस सुल्तान एयर फोर्स बेस पर सैन्य विमान दिखाई दिए।

चीनी AI कंपनी ने तस्वीरें शेयर की थीं

एक तस्वीर में इजराइल के ओवदा एयर बेस पर लॉकहीड मार्टिन के F-22 स्टेल्थ फाइटर खड़े दिखे। दूसरी तस्वीर में सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर विमान और सपोर्ट सिस्टम की बढ़ती तैनाती दिखाई गई।

इसके अलावा कतर, जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी नक्शे पर दिखाया गया था। ये सभी तस्वीरें एक चीनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी ने ऑनलाइन साझा की थीं, जिसमें 200 से भी कम कर्मचारी काम करते हैं।

28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम से ईरान पर हवाई हमले शुरू किए। इसके बाद तेहरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों से जवाब दिया।

लेकिन इस संघर्ष के दौरान एक और चीज समानांतर रूप से चल रही थी। इंटरनेट पर लगातार सैटेलाइट तस्वीरें सामने आती रहीं, जिनमें अमेरिकी विमान, मिसाइल रक्षा सिस्टम और नौसेना की गतिविधियों को दिखाया जा रहा था। ये सभी तस्वीरें शंघाई स्थित जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस कंपनी मिजारविजन से शेयर हो रही थीं।

24 फरवरी: सैटेलाइट तस्वीरों में प्रिंस सुल्तान एयर फोर्स बेस के रनवे पर खड़े सैन्य विमान दिखाई दिए।

24 फरवरी: सैटेलाइट तस्वीरों में प्रिंस सुल्तान एयर फोर्स बेस के रनवे पर खड़े सैन्य विमान दिखाई दिए।

तस्वीरों में क्या दिखा

पहली बड़ी तस्वीरों का सेट 20 फरवरी के आसपास सामने आया बताया जाता है।

मिजार विजन ने हाई-रेजोल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों की एक लिस्ट जारी की, जिसमें दक्षिणी इजराइल के ओवदा एयर बेस पर अमेरिकी विमानों की तैनाती, सऊदी अरब और कतर सहित मिडिल ईस्ट के कई देशों में फाइटर जेट की मौजूदगी, अरब सागर में नौसैनिक गतिविधियां और विमानवाहक पोतों की आवाजाही दिखाई गई।

हर तस्वीर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से जानकारी जोड़ी गई थी। विमानों के प्रकार बताए गए थे, सपोर्ट विमान की पहचान की गई थी और मिसाइल रक्षा सिस्टम को चिन्हित किया गया था।

1 मार्च तक यह डेटा काफी बढ़ चुका था। मिजारविजन ने जॉर्डन, कुवैत, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के सैन्य ठिकानों की भी नई तस्वीरें जारी कीं। इन तस्वीरों में विमानों के प्रकार, एयर डिफेंस सिस्टम की व्यवस्था और सैनिकों की तैनाती को दर्ज किया गया था।

26 फरवरी: सैटेलाइट तस्वीरों में अल-उदीद एयर बेस के रनवे पर एक KC-135, दो C-130 विमान और लगभग सात अटैक हेलीकॉप्टर खड़े दिखाई दिए।

26 फरवरी: सैटेलाइट तस्वीरों में अल-उदीद एयर बेस के रनवे पर एक KC-135, दो C-130 विमान और लगभग सात अटैक हेलीकॉप्टर खड़े दिखाई दिए।

सटीक लोकेशन के साथ X पर शेयर किए गए

इन तस्वीरों को सटीक लोकेशन के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और चीनी प्लेटफॉर्म जैसे वीबो पर पोस्ट किया गया। इनमें से कुछ पोस्ट चीनी सरकारी मीडिया से जुड़े अकाउंट और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) से जुड़े एक्सपर्ट्स ने भी शेयर किए।

इन तस्वीरों में अमेरिका के कई अहम सैन्य प्लेटफॉर्म दिखाई दिए। सैटेलाइट तस्वीरों में ओवदा एयर बेस पर F-22 स्टेल्थ फाइटर खड़े दिखे, ठीक उस समय जब युद्ध शुरू होने वाला था।

तस्वीरों के मुताबिक, सात F-22 विमान रनवे के पास खड़े थे और चार अन्य F-22 रनवे पर दिखाई दिए। करीब 24 घंटे बाद “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” शुरू हो गया।

सैटेलाइट तस्वीरों में USS फोर्ड विमानवाहक पोत को सूडा बे नौसैनिक अड्डे से रवाना होते हुए दिखाया गया।

सैटेलाइट तस्वीरों में USS फोर्ड विमानवाहक पोत को सूडा बे नौसैनिक अड्डे से रवाना होते हुए दिखाया गया।

अन्य तस्वीरों में सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर गतिविधियां दिखाई गईं। यहां सात बोइंग E-3 एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम विमान और दो बॉम्बार्डियर E-11 कम्युनिकेशन विमान तैनात बताए गए।

इसके अलावा कतर के अल-उदीद एयर बेस की भी सैटेलाइट तस्वीरें सामने आईं। बाद में यही बेस ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बना।

तस्वीरें सिर्फ एयरफील्ड तक सीमित नहीं थीं।

अंतरिक्ष से विमानवाहक पोतों की निगरानी

समुद्र में नौसैनिक गतिविधियों को भी ट्रैक किया गया।

मिजारविजन ने सैटेलाइट तस्वीरें जारी कीं, जिनमें अमेरिकी नौसेना का सबसे नया विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर फोर्ड दिखाई दिया। यह पोत क्रेट के सूडा बे नौसैनिक अड्डे से रवाना होने के बाद नजर आया।

तस्वीरों में विमानवाहक पोत के डेक पर बोइंग F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट फाइटर और नॉर्थरोप ग्रुम्मन E-2D अर्ली वार्निंग विमान दिखाई दिए।

एक अन्य सैटेलाइट तस्वीर में USS अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत अरब सागर में ओमान के पास एक सप्लाई जहाज से मिलते हुए दिखाई दिया।

कंपनी ने सैटेलाइट तस्वीरों को ओपन-सोर्स फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के साथ भी जोड़ा।

विमान ट्रैकिंग टूल की मदद से विश्लेषकों ने अमेरिकी नौसेना के बोइंग P-8A समुद्री निगरानी विमान को बहरीन के ईसा एयर बेस से उड़ान भरते हुए ट्रैक किया। यह विमान अरब सागर के उस इलाके की ओर जा रहा था जहां अब्राहम लिंकन कैरियर समूह के मौजूद होने की संभावना थी।

सैटेलाइट तस्वीरों में अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में कई इमारतों को हुआ नुकसान दिखाई देता है।

सैटेलाइट तस्वीरों में अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में कई इमारतों को हुआ नुकसान दिखाई देता है।

तस्वीरें जारी करने वाली कंपनी

अमेरिका की वैनटोर (पहले मैक्सर इंटेलिजेंस) या प्लैनेट लैब्स जैसी कंपनियों के विपरीत, जो अपने सैटेलाइट नेटवर्क चलाती हैं, मिजारविजन मुख्य रूप से विश्लेषण और डेटा प्रोसेसिंग का काम करती है।

विश्लेषकों के मुताबिक इसकी भूमिका एक “इन्फॉर्मेशन एग्रीगेटर” जैसी है।

कंपनी कई तरह के सार्वजनिक डेटा को जोड़ती है, जैसे कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरें, ADS-B विमान ट्रैकिंग सिग्नल और AIS जहाज ट्रैकिंग डेटा।

इन सभी डेटा को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल के जरिए प्रोसेस किया जाता है, जो अपने आप सैन्य उपकरणों की पहचान कर लेते हैं।

इस तरह तैयार होने वाला डेटा जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस जैसा होता है, जो आम तौर पर राष्ट्रीय खुफिया एजेंसियां तैयार करती हैं।

कंपनी को “इंटेलिजेंस की ब्लूमबर्ग” भी कहा गया है, क्योंकि यह अलग-अलग स्रोतों के डेटा को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़कर विश्लेषण करती है।

सैटेलाइट डेटा कहां से आता है

मिजारविजन द्वारा इस्तेमाल की गई सैटेलाइट तस्वीरें दो संभावित स्रोतों से आ सकती हैं।

पहला स्रोत चीन का जिलिन-1 सैटेलाइट नेटवर्क हो सकता है, जिसे चांग गुआंग सैटेलाइट टेक्नोलॉजी संचालित करती है।

जिलिन-1 नेटवर्क में 100 से ज्यादा पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट हैं। इनमें से कई सैटेलाइट सब-मीटर रेजोल्यूशन की तस्वीरें लेते हैं। इतनी स्पष्ट तस्वीरों में रनवे पर खड़े विमानों और अलग-अलग मिसाइल रक्षा सिस्टम की पहचान की जा सकती है।

दूसरा संभावित स्रोत पश्चिमी कमर्शियल सैटेलाइट कंपनियां भी हो सकती हैं, जैसे वैनटोर, प्लैनेट लैब्स और एयरबस डिफेंस एंड स्पेस, जो दुनिया भर में सैटेलाइट नेटवर्क चलाती हैं और तस्वीरें व्यावसायिक रूप से बेचती हैं।

क्या ईरान ने इस डेटा का इस्तेमाल किया

इस बात का कोई पक्का सबूत नहीं है कि ईरान ने इन तस्वीरों का इस्तेमाल अपने हमलों को निर्देशित करने के लिए किया। लेकिन जिन कई सैन्य ठिकानों को पहले मिजारविजन की पोस्ट में दिखाया गया था, उनमें से कुछ बाद में ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बने।

इनमें कतर का अल-उदीद एयर बेस भी शामिल था। ईरान ने जॉर्डन में मौजूद सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया, जिनमें मुवाफक सल्ती एयर बेस शामिल था। यहां अमेरिकी THAAD मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए इस्तेमाल होने वाला लगभग 300 मिलियन डॉलर का AN/TPY-2 रडार सिस्टम नष्ट हो गया।

बाद की सैटेलाइट तस्वीरों में इस रडार सिस्टम के नष्ट होने की पुष्टि भी हुई। यह सिस्टम खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल रक्षा के लिए बेहद अहम माना जाता था।

रडार नष्ट होने के बाद मिसाइल को रोकने की जिम्मेदारी ज्यादा हद तक पैट्रियट मिसाइल बैटरियों पर आ गई। लेकिन इनमें इस्तेमाल होने वाले PAC-3 इंटरसेप्टर पहले से ही सीमित संख्या में उपलब्ध हैं।

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.