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India Ramps Up Russia Crude Oil Bookings Amid Middle East Tensions

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नई दिल्ली21 मिनट पहले

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ईरान-इजराइल में जारी जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज रूट बंद हो गया है। ऐसे में कच्चे तेल की सप्लाई बंद होने के बाद भारत करीब 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल रूस से खरीदेगा।

यह दावा ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों ने रूस से तेल के एग्रीमेंट किए हैं।

हाल ही में अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल के शिपमेंट्स खरीदने के लिए भारत को 30 दिन (3 अप्रैल तक) की छूट देने का दावा किया था।

हालांकि, इस पर भारतीय अधिकारी कह चुके हैं कि भारत तेल खरीदने के लिए किसी भी देश की इजाजत पर निर्भर नहीं है।

एशियाई समुद्री सीमा में फंसा तेल खरीदा

कार्गो शिप्स रूस से कच्चा तेल टैंकरों में भरकर एशियाई देशों के आसपास वेटिंग मोड में खड़ी हैं।

कार्गो शिप्स रूस से कच्चा तेल टैंकरों में भरकर एशियाई देशों के आसपास वेटिंग मोड में खड़ी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ के जरिए होने वाली तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में भारतीय रिफाइनर्स ने उन रूसी जहाजों को सुरक्षित किया है जो पहले से ही एशियाई समुद्र में मौजूद थे, लेकिन उन्हें खरीदार नहीं मिल रहे थे।

ट्रेडर्स का कहना है कि इंडियन ऑयल ने करीब 1 करोड़ बैरल और रिलायंस ने भी कम से कम 1 करोड़ बैरल तेल खरीदा है। बाकी बचा हुआ तेल अन्य भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने लिया है।

रास्ते में ही जहाजों ने भारत की ओर मोड़ा रुख

शिपिंग डेटा से पता चला है कि रूसी जहाज ‘मायलो’ और ‘सारा’ जैसे कई बड़े तेल टैंकर, जो पहले सिंगापुर की ओर जा रहे थे, उन्होंने अब भारत के बंदरगाहों की तरफ अपना रास्ता मोड़ लिया है। अमेरिकी छूट मिलने के तुरंत बाद इन जहाजों के डेस्टीनेशन बदल दिए गए। रूस ने इस बार यूराल्स, ESPO और वरान्डे जैसे ग्रेड का तेल ऑफर किया है।

सऊदी और इराक से घटाकर फिर रूस पर फोकस

पिछले कुछ महीनों में भारत ने रूस से तेल की खरीद कम कर दी थी और इसकी जगह सऊदी अरब और इराक से ज्यादा तेल लेना शुरू किया था। आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में रूस से आयात घटकर 10.6 लाख बैरल प्रति दिन रह गया था, जो कि 2024 के मध्य में 20 लाख बैरल प्रति दिन से ज्यादा था।

अब मिडिल ईस्ट संकट की वजह से एक बार फिर भारत ने रूस की तरफ रुख किया है, ताकि देश में ऊर्जा की किल्लत न हो।

जरूरत का 70% कच्चा तेल अब दूसरे रास्तों से आएगा

ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को ब्लॉक कर दिया है, जहां से दुनिया की 20% तेल सप्लाई होती है। वहीं, भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए भारत ने अपनी रणनीति बदल ली है और इस विवादित रास्ते पर निर्भरता कम कर दी है। वहीं, भारतीय कंपनियां जल्द से जल्द अपना स्टॉक भरना चाहती हैं।

10% की बढ़ोतरी: भारत ने उन रास्तों से होने वाले कच्चे तेल के आयात में 10% की बढ़ोतरी की है, जो होर्मुज के दायरे में नहीं आते।

नया रूट: पहले भारत अपनी जरूरत का 60% कच्चा तेल होर्मुज के अलावा अन्य रास्तों से मंगाता था, जिसे अब बढ़ाकर 70% कर दिया गया है। इससे खाड़ी देशों में छिड़ी जंग का असर भारत की सप्लाई चेन पर कम पड़ेगा। बता दें कि भारत अपनी जरूरत का करीब 85-90% कच्चा तेल 40+ देशों से मंगाता है।

ईरान ने भरोसा दिया: होर्मुज से कार्गो मूवमेंट जल्द शुरू होगा

सरकार ने ये संकेत भी दिए हैं कि होर्मुज रूट के पास जहाजों की आवाजाही जल्द ही शुरू हो सकती है।

ईरान का रुख: सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने वादा किया है कि वह अपने पड़ोसी देशों को तब तक निशाना नहीं बनाएगा, जब तक कि उनके इलाके से ईरान पर हमला न हो।

ग्लोबल ऑफर: भारत के लिए अच्छी बात यह है कि दुनिया के कई अन्य देश भी उसे तेल और LNG सप्लाई करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास अभी LNG का सरप्लस स्टॉक मौजूद है।

देश में तेल का भंडार बढ़ा, सरकार का बढ़ा कॉन्फिडेंस

पश्चिम एशिया में चल रही उथल-पुथल के बावजूद भारत की एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत हुई है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, हालिया समीक्षा में तेल के स्टॉक के स्तर में सुधार देखा गया है।

  • स्टॉक की स्थिति: सूत्रों के मुताबिक, “भारत की एनर्जी स्टॉक पोजीशन बेहतर हो रही है। जैसे-जैसे हालात सुधर रहे हैं, इससे हमारा कॉन्फिडेंस भी बढ़ रहा है।”
  • रिव्यू मीटिंग: इंटरनल रिव्यू मीटिंग्स में भी यह बात सामने आई है कि भारत का एनर्जी स्टॉक पहले के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति में पहुंच गया है।

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ये खबर भी पढ़ें…

रूस से कच्चा तेल खरीद सकेगा भारत: ईरान जंग के कारण अमेरिका ने 3 अप्रैल तक रियायत दी, क्रूड ऑयल की कीमत 89 डॉलर के पार

भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का संकट फिलहाल खत्म हो गया है, क्योंकि भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की शर्तों के साथ छूट मिल गई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का स्पेशल लाइसेंस दिया है। ये लाइसेंस 3 अप्रैल तक वैलिड रहेगा।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 6 मार्च को बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के तहत यह अस्थायी कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण पार्टनर हैं और ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को स्थिर रखने के लिए यह छूट दी गई है। पूरी खबर पढ़ें…

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यह दावा ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों ने रूस से तेल के एग्रीमेंट किए हैं।

हाल ही में अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल के शिपमेंट्स खरीदने के लिए भारत को 30 दिन (3 अप्रैल तक) की छूट देने का दावा किया था।

हालांकि, इस पर भारतीय अधिकारी कह चुके हैं कि भारत तेल खरीदने के लिए किसी भी देश की इजाजत पर निर्भर नहीं है।

एशियाई समुद्री सीमा में फंसा तेल खरीदा

कार्गो शिप्स रूस से कच्चा तेल टैंकरों में भरकर एशियाई देशों के आसपास वेटिंग मोड में खड़ी हैं।

कार्गो शिप्स रूस से कच्चा तेल टैंकरों में भरकर एशियाई देशों के आसपास वेटिंग मोड में खड़ी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ के जरिए होने वाली तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में भारतीय रिफाइनर्स ने उन रूसी जहाजों को सुरक्षित किया है जो पहले से ही एशियाई समुद्र में मौजूद थे, लेकिन उन्हें खरीदार नहीं मिल रहे थे।

ट्रेडर्स का कहना है कि इंडियन ऑयल ने करीब 1 करोड़ बैरल और रिलायंस ने भी कम से कम 1 करोड़ बैरल तेल खरीदा है। बाकी बचा हुआ तेल अन्य भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने लिया है।

रास्ते में ही जहाजों ने भारत की ओर मोड़ा रुख

शिपिंग डेटा से पता चला है कि रूसी जहाज ‘मायलो’ और ‘सारा’ जैसे कई बड़े तेल टैंकर, जो पहले सिंगापुर की ओर जा रहे थे, उन्होंने अब भारत के बंदरगाहों की तरफ अपना रास्ता मोड़ लिया है। अमेरिकी छूट मिलने के तुरंत बाद इन जहाजों के डेस्टीनेशन बदल दिए गए। रूस ने इस बार यूराल्स, ESPO और वरान्डे जैसे ग्रेड का तेल ऑफर किया है।

सऊदी और इराक से घटाकर फिर रूस पर फोकस

पिछले कुछ महीनों में भारत ने रूस से तेल की खरीद कम कर दी थी और इसकी जगह सऊदी अरब और इराक से ज्यादा तेल लेना शुरू किया था। आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में रूस से आयात घटकर 10.6 लाख बैरल प्रति दिन रह गया था, जो कि 2024 के मध्य में 20 लाख बैरल प्रति दिन से ज्यादा था।

अब मिडिल ईस्ट संकट की वजह से एक बार फिर भारत ने रूस की तरफ रुख किया है, ताकि देश में ऊर्जा की किल्लत न हो।

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10% की बढ़ोतरी: भारत ने उन रास्तों से होने वाले कच्चे तेल के आयात में 10% की बढ़ोतरी की है, जो होर्मुज के दायरे में नहीं आते।

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ईरान का रुख: सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने वादा किया है कि वह अपने पड़ोसी देशों को तब तक निशाना नहीं बनाएगा, जब तक कि उनके इलाके से ईरान पर हमला न हो।

ग्लोबल ऑफर: भारत के लिए अच्छी बात यह है कि दुनिया के कई अन्य देश भी उसे तेल और LNG सप्लाई करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास अभी LNG का सरप्लस स्टॉक मौजूद है।

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पश्चिम एशिया में चल रही उथल-पुथल के बावजूद भारत की एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत हुई है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, हालिया समीक्षा में तेल के स्टॉक के स्तर में सुधार देखा गया है।

  • स्टॉक की स्थिति: सूत्रों के मुताबिक, “भारत की एनर्जी स्टॉक पोजीशन बेहतर हो रही है। जैसे-जैसे हालात सुधर रहे हैं, इससे हमारा कॉन्फिडेंस भी बढ़ रहा है।”
  • रिव्यू मीटिंग: इंटरनल रिव्यू मीटिंग्स में भी यह बात सामने आई है कि भारत का एनर्जी स्टॉक पहले के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति में पहुंच गया है।

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भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का संकट फिलहाल खत्म हो गया है, क्योंकि भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की शर्तों के साथ छूट मिल गई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का स्पेशल लाइसेंस दिया है। ये लाइसेंस 3 अप्रैल तक वैलिड रहेगा।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 6 मार्च को बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के तहत यह अस्थायी कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण पार्टनर हैं और ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को स्थिर रखने के लिए यह छूट दी गई है। पूरी खबर पढ़ें…

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