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July Tariff Rates, UK Talks Boost 2026

July Tariff Rates, UK Talks Boost 2026

नई दिल्ली28 मिनट पहले

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भारत और अमेरिका के बीच बाइलेटरल ट्रेड डील की पहली किस्त जल्द ही फाइनल हो सकती है। दोनों देशों के बीच यह डील जुलाई के बाद भारतीय एक्सपोर्ट पर लागू होने वाली टैरिफ दरों पर कंफर्मेशन आने के बाद फाइनल लेगी।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, अमेरिका की धारा 301 की प्रोसेस के तहत जो टैरिफ रेट तय किया जाएगा, वही रेट इस ट्रेड डील में भारत के लिए भी लागू होने की संभावना है।

जुलाई में खत्म हो रहा है मौजूदा 10% टैरिफ

  • बातचीत से जुड़े एक सरकारी सूत्र ने बताया कि भारत के एक्सपोर्ट पर लगने वाला मौजूदा 10% का टैरिफ इसी साल जुलाई में समाप्त हो रहा है।
  • इसके बाद जब तक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) धारा 301 के तहत नए टैरिफ तय नहीं करता, तब तक केवल एमएफएन (MFN) टैरिफ ही लागू हो सकते हैं।
  • भारत चाहता है कि जो भी नई दर तय हो, वह बाजार में हमारे डायरेक्ट कॉम्पिटिटर्स देशों के मुकाबले कम होना चाहिए।

नई दिल्ली में 2 से 4 जून तक चली बैठक

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर 2 से 4 जून तक नई दिल्ली में मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में दोनों देशों के अधिकारियों ने मुख्य रूप से मार्केट एक्सेस, टैरिफ से जुड़े मुद्दे, गैर-टैरिफ बाधाएं, सीमा शुल्क सुविधा और प्रस्तावित बाइलेटरल ट्रेड डील के फ्रेमवर्क पर विस्तार से चर्चा की है।

धारा 301 के तहत 12.5% अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव

यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के कार्यालय ने अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत एक नया कदम उठाया है। उड्डयन और व्यापार नियमों से जुड़े इस कानून के तहत, USTR ने 2 जून को भारत और 53 अन्य अर्थव्यवस्थाओं से होने वाले आयात पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है।

अमेरिका का आरोप है कि इन देशों में जबरन श्रम से बनने वाले सामानों पर प्रतिबंधों का ठीक से पालन नहीं किया जा रहा है। इस प्रस्ताव पर अभी विचार-विमर्श चल रहा है और जुलाई में पब्लिक कमेंट (जनता की राय) की प्रोसेस के बाद इसे फाइनल किया जाएगा।

भारत ने मांगी दोबारा जांच न होने की गारंटी

धारा 301 वास्तव में अमेरिकी व्यापार अधिनियम (US ट्रेड एक्ट) का वह नियम है जो वॉशिंगटन को अपने व्यापारिक साझेदारों की उन नीतियों की जांच करने और उन पर टैरिफ लगाने की अनुमति देता है, जिन्हें वह अनुचित व्यापार व्यवहार यानी अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस मानता है।

भारत ने अमेरिका से यह आश्वासन मांगा है कि एक बार यह व्यापार समझौता फाइनल और लागू हो जाने के बाद, भविष्य में भारत को निशाना बनाकर ऐसी कोई भी धारा 301 की जांच नहीं की जाएगी।

UK के साथ भी डील पर प्रोग्रेस, एक विवाद सुलझा

अमेरिका के साथ-साथ भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच भी व्यापार समझौते को लागू करने की दिशा में अच्छी प्रोग्रेस हुई है। हाल ही में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और यूके के बिजनेस एंड ट्रेड सेक्रेटरी पीटर काइल के बीच एक अहम मीटिंग हुई थी।

इस बातचीत में दोनों देशों के बीच अटके तीन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें से एक बड़े मुद्दे को सफलतापूर्वक सुलझा लिया गया है। सूत्र के मुताबिक, ब्रिटिश अधिकारी चाहते हैं कि इस समझौते के लागू होने की आधिकारिक घोषणा लंदन में की जाए।

स्टील और कार्बन टैक्स पर बातचीत जारी

  • फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत पूरी होने और हस्ताक्षर होने के बाद भी कुछ व्यापारिक अड़चनें सामने आई थीं, जिन्हें दूर करने का प्रयास नई दिल्ली कर रहा है।
  • भारतीय पक्ष का मुख्य ध्यान यूके द्वारा हाल ही में बढ़ाए गए स्टील सेफगार्ड मेजर्स और उसके प्रस्तावित कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) पर केंद्रित है।
  • भारत को आशंका है कि यूके के इन कदमों से इस समझौते के तहत भारतीय कंपनियों को मिलने वाली बाजार पहुंच पर बुरा असर पड़ सकता है।

क्या है धारा 301?

यह अमेरिकी व्यापार अधिनियम का एक विशेष प्रावधान है जो अमेरिकी सरकार को किसी भी ऐसे विदेशी देश के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई (जैसे अतिरिक्त टैरिफ लगाना) करने का अधिकार देता है, जिसका व्यापार व्यवहार अमेरिका के हितों के खिलाफ या अनुचित होता है।

क्या होता है MFN (मोस्ट फेवर्ड नेशन) टैरिफ?

वैश्विक व्यापार नियमों के तहत डब्ल्यूटीओ (WTO) के सदस्य देशों द्वारा एक-दूसरे को दिया जाने वाला सामान्य और गैर-भेदभावपूर्ण टैरिफ रेट, जो किसी विशेष व्यापार समझौते के न होने पर डिफॉल्ट रूप से लागू होता है।

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सरकारी सूत्रों के अनुसार, अमेरिका की धारा 301 की प्रोसेस के तहत जो टैरिफ रेट तय किया जाएगा, वही रेट इस ट्रेड डील में भारत के लिए भी लागू होने की संभावना है।

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  • बातचीत से जुड़े एक सरकारी सूत्र ने बताया कि भारत के एक्सपोर्ट पर लगने वाला मौजूदा 10% का टैरिफ इसी साल जुलाई में समाप्त हो रहा है।
  • इसके बाद जब तक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) धारा 301 के तहत नए टैरिफ तय नहीं करता, तब तक केवल एमएफएन (MFN) टैरिफ ही लागू हो सकते हैं।
  • भारत चाहता है कि जो भी नई दर तय हो, वह बाजार में हमारे डायरेक्ट कॉम्पिटिटर्स देशों के मुकाबले कम होना चाहिए।

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धारा 301 के तहत 12.5% अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव

यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के कार्यालय ने अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत एक नया कदम उठाया है। उड्डयन और व्यापार नियमों से जुड़े इस कानून के तहत, USTR ने 2 जून को भारत और 53 अन्य अर्थव्यवस्थाओं से होने वाले आयात पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है।

अमेरिका का आरोप है कि इन देशों में जबरन श्रम से बनने वाले सामानों पर प्रतिबंधों का ठीक से पालन नहीं किया जा रहा है। इस प्रस्ताव पर अभी विचार-विमर्श चल रहा है और जुलाई में पब्लिक कमेंट (जनता की राय) की प्रोसेस के बाद इसे फाइनल किया जाएगा।

भारत ने मांगी दोबारा जांच न होने की गारंटी

धारा 301 वास्तव में अमेरिकी व्यापार अधिनियम (US ट्रेड एक्ट) का वह नियम है जो वॉशिंगटन को अपने व्यापारिक साझेदारों की उन नीतियों की जांच करने और उन पर टैरिफ लगाने की अनुमति देता है, जिन्हें वह अनुचित व्यापार व्यवहार यानी अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस मानता है।

भारत ने अमेरिका से यह आश्वासन मांगा है कि एक बार यह व्यापार समझौता फाइनल और लागू हो जाने के बाद, भविष्य में भारत को निशाना बनाकर ऐसी कोई भी धारा 301 की जांच नहीं की जाएगी।

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क्या है धारा 301?

यह अमेरिकी व्यापार अधिनियम का एक विशेष प्रावधान है जो अमेरिकी सरकार को किसी भी ऐसे विदेशी देश के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई (जैसे अतिरिक्त टैरिफ लगाना) करने का अधिकार देता है, जिसका व्यापार व्यवहार अमेरिका के हितों के खिलाफ या अनुचित होता है।

क्या होता है MFN (मोस्ट फेवर्ड नेशन) टैरिफ?

वैश्विक व्यापार नियमों के तहत डब्ल्यूटीओ (WTO) के सदस्य देशों द्वारा एक-दूसरे को दिया जाने वाला सामान्य और गैर-भेदभावपूर्ण टैरिफ रेट, जो किसी विशेष व्यापार समझौते के न होने पर डिफॉल्ट रूप से लागू होता है।

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