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Omega 3 Vs Fish Oil: ओमेगा-3 या फिश ऑयल? सेहत के लिए क्या है बेस्ट ऑप्शन, डाइटिशियन की सलाह

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Omega 3 Vs Fish Oil: ओमेगा-3 और फिश दोनों ही सेहत के लिए फायदेमंद है. यदि आप कोलेस्ट्रॉल को टारगेट करने के लिए दोनों में से किसी का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो फिश ऑयल ज्यादा बेहतर होते हैं. लेकिन यदि आप शाकाहारी हैं तो ओमेगा-3 का प्लांट बेस्ट सोर्स और सप्लीमेंट ले सकते हैं.

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Omega 3 Vs Fish Oil Which is Better: अक्सर ओमेगा-3 और फिश ऑयल को एक-दूसरे की जगह इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन ये दोनों एक ही चीज नहीं हैं. ओमेगा-3 फैटी एसिड एक तरह का पॉलीअनसैचुरेटेड फैट है जो समुद्री भोजन और पौधों में पाया जाता है.वहीं, फिश ऑयल, मछली से निकाला गया तेल है जिसमें ओमेगा-3 सहित कई जरूरी फैटी एसिड होते हैं.

डाइटिशियन शालिनी ब्लिस जो कि PSRI अस्पताल, दिल्ली में आहार विशेषज्ञ हैं बताती हैं कि ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और फिश ऑयल दोनों ही सेहत के लिए फायदेमंद माने जानते हैं. दोनों को दिल, दिमाग और शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर दोनों में बेहतर क्या है? (Difference between fish oil and omega-3) कुछ स्टडी बताते हैं कि फिश ऑयल में मौजूद ओमेगा-3 की न्यूट्रीशनल वैल्यू दूसरे प्लांट सोर्स से ज्यादा होते हैं. लेकिन यदि आप ओमेगा-3 खा रहे हैं, तो इसके साथ फिश ऑयल का सेवन न करें.

क्या होता है ओमेगा-3
ओमेगा-3 फैटी एसिड मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं—EPA, DHA और ALA. इनमें EPA और DHA खासतौर पर दिल और दिमाग की सेहत के लिए जरूरी होते हैं. ये फैटी एसिड शरीर में सूजन कम करने, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में मदद करते हैं.

दूसरी तरफ, फिश ऑयल मछलियों से निकाला जाता है और इसमें EPA और DHA अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, इसलिए इसे ओमेगा-3 का सबसे आसान और असरदार स्रोत माना जाता है.

ओमेगा-3 का वेजिटेरियन सोर्स
अगर आप शाकाहारी हैं, तो आप ओमेगा-3 के लिए अलसी के बीज, अखरोट और चिया सीड्स जैसे विकल्प चुन सकते हैं. हालांकि, इनमें मौजूद ALA को शरीर को EPA और DHA में बदलना पड़ता है, जो सीमित मात्रा में ही हो पाता है.

डॉक्टर से लें सप्लीमेंट लेने की सलाह
फिश ऑयल सप्लीमेंट्स का फायदा यह है कि ये सीधे EPA और DHA प्रदान करते हैं, जिससे शरीर को तुरंत लाभ मिलता है. लेकिन ध्यान रखें कि बिना डॉक्टर की सलाह के ज्यादा मात्रा में फिश ऑयल लेना नुकसानदायक भी हो सकता है, जैसे ब्लड थिनिंग या पाचन संबंधी समस्याएं.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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डाइटिशियन शालिनी ब्लिस जो कि PSRI अस्पताल, दिल्ली में आहार विशेषज्ञ हैं बताती हैं कि ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और फिश ऑयल दोनों ही सेहत के लिए फायदेमंद माने जानते हैं. दोनों को दिल, दिमाग और शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर दोनों में बेहतर क्या है? (Difference between fish oil and omega-3) कुछ स्टडी बताते हैं कि फिश ऑयल में मौजूद ओमेगा-3 की न्यूट्रीशनल वैल्यू दूसरे प्लांट सोर्स से ज्यादा होते हैं. लेकिन यदि आप ओमेगा-3 खा रहे हैं, तो इसके साथ फिश ऑयल का सेवन न करें.

क्या होता है ओमेगा-3
ओमेगा-3 फैटी एसिड मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं—EPA, DHA और ALA. इनमें EPA और DHA खासतौर पर दिल और दिमाग की सेहत के लिए जरूरी होते हैं. ये फैटी एसिड शरीर में सूजन कम करने, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में मदद करते हैं.

दूसरी तरफ, फिश ऑयल मछलियों से निकाला जाता है और इसमें EPA और DHA अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, इसलिए इसे ओमेगा-3 का सबसे आसान और असरदार स्रोत माना जाता है.

ओमेगा-3 का वेजिटेरियन सोर्स
अगर आप शाकाहारी हैं, तो आप ओमेगा-3 के लिए अलसी के बीज, अखरोट और चिया सीड्स जैसे विकल्प चुन सकते हैं. हालांकि, इनमें मौजूद ALA को शरीर को EPA और DHA में बदलना पड़ता है, जो सीमित मात्रा में ही हो पाता है.

डॉक्टर से लें सप्लीमेंट लेने की सलाह
फिश ऑयल सप्लीमेंट्स का फायदा यह है कि ये सीधे EPA और DHA प्रदान करते हैं, जिससे शरीर को तुरंत लाभ मिलता है. लेकिन ध्यान रखें कि बिना डॉक्टर की सलाह के ज्यादा मात्रा में फिश ऑयल लेना नुकसानदायक भी हो सकता है, जैसे ब्लड थिनिंग या पाचन संबंधी समस्याएं.

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