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Punjab AAP MPs Defection to BJP

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पंजाब से आम आदमी पार्टी (AAP) के 6 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ दी। इनमें राघव चड्‌ढा, अशोक मित्तल, विक्रम साहनी, हरभजन सिंह भज्जी, डॉ. संदीप पाठक और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं। इनमें से 3 राघव, मित्तल और पाठक BJP में शामिल हो चुके हैं। राज्यसभा का स

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सांसदों की दलबदली से AAP में बैचेनी साफ नजर आ रही है। डैमेज कंट्रोल के लिए 2 दिन से पंजाब में उनके घरों पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उन्हें पंजाब का गद्दार कहा जा रहा है। वहीं AAP सरकार ने पहले राघव चड्‌ढा की Z+ सिक्योरिटी और फिर हरभजन भज्जी की Y सिक्योरिटी वापस ले ली। इन्हें पंजाब पुलिस की सुरक्षा दी गई थी।

पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन 6 सांसदों में सिर्फ राघव चड्‌ढा डायरेक्ट ग्राउंड पॉलिटिक्स में इनवॉल्व रहे हैं। ऐसे में इस सब घमासान के बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर इन सांसदों का चुनाव में कितना ग्राउंड इंपैक्ट है?, क्या ये 2027 में वोट बैंक के लिहाज से AAP को नुकसान और BJP को फायदा दिला सकते हैं।

AAP इतनी चिंता में क्यों है?… इन सब सवालों के जवाब के लिए हमने 3 पॉलिटिकल एक्सपर्ट से बातचीत की, जिनका कहना था कि डायरेक्ट पॉलिटिक्स से ज्यादा इन सांसदों का पर्सनल रसूख वोटरों को प्रभावित करेगा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

1. राघव चड्‌ढा: मीडिया मैनेजमेंट, कैंपेन से नैरेटिव के काम आएंगे राघव चड्‌ढा ग्राउंड पॉलिटिक्स में जरूर हैं लेकिन उन्होंने दिल्ली में चुनाव लड़ा, पंजाब में नहीं। हालांकि 2022 में ग्राउंड पर उतरकर उन्होंने AAP के लिए एग्रेसिव कैंपेन की। इस दौरान उन्होंने हर जिले में जाकर AAP के नेताओं से कॉन्टैक्ट किया। कई लोगों को टिकट दिलाया तो कई नेताओं को चेयरमैनी की कुर्सी दिलाने में भी भूमिका निभाई।

पॉलिटिकल साइंस के पूर्व प्रोफेसर डॉ. केके रत्तू कहते हैं- चड्‌ढा भाजपा के लिए बैकएंड और ऑन ग्राउंड दोनों जगह काम आ सकते हैं। चड्‌ढा पॉलिटिकल मशीनरी और मैनेजमेंट के अच्छे रणनीतिकार हैं। चुनाव के वक्त पार्टी के पक्ष में नैरेटिव कैसे सेट करना है, ये वह बाखूबी जानते हैं। 2022 में ‘बदलाव’ और ‘एक मौका’ के जरिए AAP के पक्ष में लहर खड़ी करने में उनका योगदान रहा। इसी चुनाव से उनकी पंजाब की पॉलिटिकल समझ भी बन चुकी है। वह पूरे पंजाब में भाजपा के लिए एग्रेसिव स्ट्रेटजी बनाने और उसे लागू करने में काम आ सकते हैं।

2. अशोक मित्तल: कारोबारी नेटवर्क, 3 जिलों में रसूख अशोक मित्तल लवली ग्रुप के संस्थापक हैं। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के चांसलर हैं। मित्तल ग्राउंड पॉलिटिशियन नहीं हैं लेकिन उनका पर्सनल रसूख 3 जिलों में माना जाता है। इनमें जालंधर, कपूरथला और होशियारपुर शामिल हैं। यहां विधानसभा की 20 सीटें हैं।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट डॉक्टर कृष्ण कुमार रत्तू कहते हैं- मित्तल भले ही डायरेक्ट पॉलिटिक्स में नहीं लेकिन उनकी छवि सफल कारोबारी की है। शहरी हिंदू वर्ग के साथ व्यापारियों व मिडिल क्लास में उनका अच्छा असर है। बड़े एजुकेशन और कारोबारी नेटवर्क के जरिए वह BJP के काम आएंगे। खासकर, AAP का गद्दार कहना मित्तल की छवि के बिल्कुल उलट है, ऐसे में वह अपने सर्किल में सहानुभूति को भी वोट बैंक में मोड़ने की कोशिश करेंगे।

3. हरभजन सिंह भज्जी: ग्राउंड नेटवर्क नहीं, सेलिब्रिटी स्टाइल इंडियन क्रिकेटर रहे हरभजन सिंह भज्जी पॉलिटिकल ग्राउंड में कभी नजर नहीं आए। उनकी इमेज सेलिब्रिटी क्रिकेटर की है। क्रिकेट छोड़ने के बाद वह कमेंट्री में बिजी हो गए। पॉलिटिकल एक्सपर्ट विंकलजीत सिंह सरां कहते हैं- भज्जी का कोई पॉलिटिकल ग्रुप नहीं है। न ही वह कहीं ग्राउंड पर कभी नजर आए। हालांकि इतना जरूर है कि वह पंजाब में भाजपा के लिए स्टार कैंपेनर और मजबूत सिख चेहरे के तौर पर काम आ सकते हैं। भज्जी भले ही ट्रेडिशनल पॉलिटिशियन नहीं लेकिन सिख के तौर पर ग्लोबल आइकन हैं। ऐसे में अपनी अचीवमेंट्स से पंजाबियों को प्राउड फील कराने वाले भज्जी चुनाव के दौरान भीड़ जुटाने के काम जरूर आएंगे।

4. विक्रमजीत साहनी: पॉलिटिकल नेटवर्क नहीं, नरमख्याली सिख चेहरे की छवि विक्रमजीत साहनी बहुत सुलझे हुए इंसान माने जाते हैं। फर्टिलाइजर फर्म सन ग्रुप के मालिक साहनी का भी ग्राउंड पर कोई पॉलिटिकल नेटवर्क नहीं है। वह अपनी NGO कौशल विकास के जरिए लोगों के बीच समाज सेवी के तौर पर एक्टिव हैं। कोविड के दौरान उन्होंने पंजाबी युवाओं को रोजगार देने का काम किया था।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट विंकलजीत सरां कहते हैं साहनी नरमख्याली सिख चेहरा हैं। उनकी टोन एग्रेसिव नहीं है, ऐसे में भाजपा सिखों के बीच अपनी दूरी कम करने का नैरेटिव सेट करने के लिए उनका यूज कर सकती है। हालांकि इससे आप के लिए कोई बड़ा संकट नहीं आने वाला। आप ने ग्राउंड पर कुछ काम ऐसे किए हैं जिनका सीधा असर लोगों के दिलो दीमाग पर है।

5. राजिंदर गुप्ता: एक्टिव पॉलिटिशियन नहीं, मालवा-लुधियाना में रसूख 5 हजार करोड़ की प्रॉपर्टी वाले ट्राइडेंट ग्रुप के फाउंडर राजिंदर गुप्ता एक्टिव पॉलिटिशियन नहीं रहे हैं। मगर, उनका पर्सनल सामाजिक रसूख काफी अच्छा है। खासकर, लुधियाना के कार्पोरेट्स के बीच उनकी अच्छी ट्यूनिंग है। वह अपने ग्रुप में पंजाबी युवकों को रोजगार भी दे चुके हैं।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट डॉक्टर रत्तू कहते हैं कि मालवा इलाके के युवाओं को उन्होंने अपनी इंडस्ट्री में नौकरी दी। होमटाउन बरनाला में भी उनका अच्छा रसूख है। एक कामयाब उद्योगपति होने की वजह से बड़े उद्योगपतियों के साथ उनका उठना-बैठना है। ऐसे में BJP उनके जरिए इंडस्ट्री कम्युनिटी के डायरेक्ट डोमिनेंस वाली लुधियाना की 6 सीटों और 117 में से 69 सीटों वाले मालवा क्षेत्र की 20 से 25 सेमी अर्बन सीटों पर प्रभाव डालने की कोशिश करेगी।

6. संदीप पाठक: वोट नहीं दिलाएंगे, उसे पाने के तरीके बताएंगे डॉ. संदीप पाठक मूल रूप से छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। वह दिल्ली में प्रोफेसर रहे हैं। हालांकि AAP के वह मेन रणनीतिकार माने जाते थे, जो पर्दे के पीछे से माइक्रो मैनेजमेंट करते हैं। उनका पंजाब में बहुत आधार भी नहीं है, यहां तक कि उन्हें राज्यसभा भेजने पर भी बाहरी का ठप्पा लगा था।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश कहते हैं पाठक के पास भले ही वोट बैंक नहीं है लेकिन वह उसे पाने में भाजपा की बड़ी मदद कर सकते हैं। उनके पास 2022 का पंजाब का हर बूथ का डेटाबेस, जातीय समीकरणों की इन्फॉर्मेशन और AAP का 2022 का इंटरनल सर्वे भी होगा। वह AAP से मिले एक्सपीरियंस के आधार पर 2027 में BJP के लिए विनिंग पोटेंशियल वाले कैंडिडेट्स की सिलेक्शन के साथ प्रचार का रोडमैप बनाने में मदद करेंगे।

पंजाब को लेकर AAP इतनी टेंशन में क्यों? जवाब साफ है, ये AAP के लिए विधानसभा चुनाव से ज्यादा सर्वाइवल की लड़ाई है। दिल्ली में चुनाव हारने के बाद पंजाब इकलौता स्टेट है, जहां AAP की सरकार है। 2027 में यहां चुनाव हारे तो फिर AAP में बिखराव और तेज हो सकता है। ऐसे में पार्टी में टूट बढ़ेगी। वहीं AAP जिस तेजी से पॉलिटिकल सिनेरियो में छाई, उतनी ही जल्दी हट भी सकती है। ये बात AAP और CM भगवंत मान अच्छे से समझते हैं। यही वजह है कि राज्यसभा सांसदों को भले ही पार्टी के विधायकों ने चुना हो और पंजाबियों का उनके सिलेक्शन से लेकर जीतने तक में कोई डायरेक्ट योगदान नहीं, फिर भी उन्हें पंजाब का गद्दार साबित करने का नैरेटिव बनाया जा रहा है।

AAP पंजाब में जीत को लेकर क्या कर रही? आम आदमी पार्टी का पूरा जोर अब पंजाब में ही है। AAP को फिलहाल 2022 के ‘बदलाव’ और ‘एक मौका केजरीवाल को’ के माहौल से ज्यादा CM भगवंत मान के चेहरे पर ज्यादा भरोसा है। यही वजह है कि पंजाब में अब पहले की तरह दिल्ली के नेता मीडिया के सामने ज्यादा नजर नहीं आते। हर बड़े मुद्दे पर CM मान की कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। वैसे, संगठन के तौर पर AAP ने दिल्ली के पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया को पंजाब इंचार्ज बनाकर कैंप करवा रखा है। अरविंद केजरीवाल का भी पूरा फोकस पंजाब पर ही है।

6 सांसदों के जाने के बाद AAP के आगे सबसे बड़ी चुनौती क्या है? AAP को पंजाब में विधायकों की टूट रोकनी होगी। अगर राघव चड्‌ढा और संदीप पाठक के जरिए विधायक टूटे तो फिर AAP के लिए चुनाव से ठीक पहले माहौल संभालना मुश्किल होगा। अगर MLA दूसरी पार्टी में आए तो वह उन बातों को पुख्ता कर सकते हैं, जिनकी चर्चा अक्सर विरोधी करते हैं। जिसमें सबसे अहम आरोप AAP की दिल्ली टीम के हाथ में पूरी कमान का होना है।

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ये खबरें भी पढ़ें: पंजाब- AAP छोड़ने वाले सांसदों की लग्जरी लाइफस्टाइल:₹60 हजार के जूते, ₹80 हजार का चश्मा, ₹3 लाख का पेन; 6 सांसदों की प्रॉपर्टी-शौक के बारे में जानिए

आम आदमी पार्टी (AAP) को छोड़ने वाले पंजाब के 6 में से 5 राज्यसभा सांसद लग्जरी लाइफस्टाइल जीते हैं। संदीप पाठक को छोड़ दें तो सभी करोड़पति हैं। इनमें सबसे अमीर ट्राइडेंट ग्रुप के चेयरमैन राजिंदर गुप्ता है, जिनके पास 5 हजार करोड़ की प्रॉपर्टी है। (पढ़ें पूरी खबर)

—————– AAP की टूट से BJP को पंजाब में क्या फायदा:चड्‌ढा केजरीवाल के खिलाफ नैरेटिव सेट करेंगे, पाठक स्ट्रैटजी बनाएंगे; जानें ‘कैप्टन’ कौन होगा

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही आम आदमी पार्टी (AAP) में टूट हो गई। पंजाब के 6 सांसदों ने अचानक पार्टी छोड़ दी। इनमें से 3 राघव चड्‌ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने भाजपा जॉइन कर ली। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि पंजाब में AAP के MLA भी टूटेंगे या नहीं। (पढ़ें पूरी खबर)

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पंजाब से आम आदमी पार्टी (AAP) के 6 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ दी। इनमें राघव चड्‌ढा, अशोक मित्तल, विक्रम साहनी, हरभजन सिंह भज्जी, डॉ. संदीप पाठक और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं। इनमें से 3 राघव, मित्तल और पाठक BJP में शामिल हो चुके हैं। राज्यसभा का स

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सांसदों की दलबदली से AAP में बैचेनी साफ नजर आ रही है। डैमेज कंट्रोल के लिए 2 दिन से पंजाब में उनके घरों पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उन्हें पंजाब का गद्दार कहा जा रहा है। वहीं AAP सरकार ने पहले राघव चड्‌ढा की Z+ सिक्योरिटी और फिर हरभजन भज्जी की Y सिक्योरिटी वापस ले ली। इन्हें पंजाब पुलिस की सुरक्षा दी गई थी।

पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन 6 सांसदों में सिर्फ राघव चड्‌ढा डायरेक्ट ग्राउंड पॉलिटिक्स में इनवॉल्व रहे हैं। ऐसे में इस सब घमासान के बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर इन सांसदों का चुनाव में कितना ग्राउंड इंपैक्ट है?, क्या ये 2027 में वोट बैंक के लिहाज से AAP को नुकसान और BJP को फायदा दिला सकते हैं।

AAP इतनी चिंता में क्यों है?… इन सब सवालों के जवाब के लिए हमने 3 पॉलिटिकल एक्सपर्ट से बातचीत की, जिनका कहना था कि डायरेक्ट पॉलिटिक्स से ज्यादा इन सांसदों का पर्सनल रसूख वोटरों को प्रभावित करेगा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

1. राघव चड्‌ढा: मीडिया मैनेजमेंट, कैंपेन से नैरेटिव के काम आएंगे राघव चड्‌ढा ग्राउंड पॉलिटिक्स में जरूर हैं लेकिन उन्होंने दिल्ली में चुनाव लड़ा, पंजाब में नहीं। हालांकि 2022 में ग्राउंड पर उतरकर उन्होंने AAP के लिए एग्रेसिव कैंपेन की। इस दौरान उन्होंने हर जिले में जाकर AAP के नेताओं से कॉन्टैक्ट किया। कई लोगों को टिकट दिलाया तो कई नेताओं को चेयरमैनी की कुर्सी दिलाने में भी भूमिका निभाई।

पॉलिटिकल साइंस के पूर्व प्रोफेसर डॉ. केके रत्तू कहते हैं- चड्‌ढा भाजपा के लिए बैकएंड और ऑन ग्राउंड दोनों जगह काम आ सकते हैं। चड्‌ढा पॉलिटिकल मशीनरी और मैनेजमेंट के अच्छे रणनीतिकार हैं। चुनाव के वक्त पार्टी के पक्ष में नैरेटिव कैसे सेट करना है, ये वह बाखूबी जानते हैं। 2022 में ‘बदलाव’ और ‘एक मौका’ के जरिए AAP के पक्ष में लहर खड़ी करने में उनका योगदान रहा। इसी चुनाव से उनकी पंजाब की पॉलिटिकल समझ भी बन चुकी है। वह पूरे पंजाब में भाजपा के लिए एग्रेसिव स्ट्रेटजी बनाने और उसे लागू करने में काम आ सकते हैं।

2. अशोक मित्तल: कारोबारी नेटवर्क, 3 जिलों में रसूख अशोक मित्तल लवली ग्रुप के संस्थापक हैं। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के चांसलर हैं। मित्तल ग्राउंड पॉलिटिशियन नहीं हैं लेकिन उनका पर्सनल रसूख 3 जिलों में माना जाता है। इनमें जालंधर, कपूरथला और होशियारपुर शामिल हैं। यहां विधानसभा की 20 सीटें हैं।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट डॉक्टर कृष्ण कुमार रत्तू कहते हैं- मित्तल भले ही डायरेक्ट पॉलिटिक्स में नहीं लेकिन उनकी छवि सफल कारोबारी की है। शहरी हिंदू वर्ग के साथ व्यापारियों व मिडिल क्लास में उनका अच्छा असर है। बड़े एजुकेशन और कारोबारी नेटवर्क के जरिए वह BJP के काम आएंगे। खासकर, AAP का गद्दार कहना मित्तल की छवि के बिल्कुल उलट है, ऐसे में वह अपने सर्किल में सहानुभूति को भी वोट बैंक में मोड़ने की कोशिश करेंगे।

3. हरभजन सिंह भज्जी: ग्राउंड नेटवर्क नहीं, सेलिब्रिटी स्टाइल इंडियन क्रिकेटर रहे हरभजन सिंह भज्जी पॉलिटिकल ग्राउंड में कभी नजर नहीं आए। उनकी इमेज सेलिब्रिटी क्रिकेटर की है। क्रिकेट छोड़ने के बाद वह कमेंट्री में बिजी हो गए। पॉलिटिकल एक्सपर्ट विंकलजीत सिंह सरां कहते हैं- भज्जी का कोई पॉलिटिकल ग्रुप नहीं है। न ही वह कहीं ग्राउंड पर कभी नजर आए। हालांकि इतना जरूर है कि वह पंजाब में भाजपा के लिए स्टार कैंपेनर और मजबूत सिख चेहरे के तौर पर काम आ सकते हैं। भज्जी भले ही ट्रेडिशनल पॉलिटिशियन नहीं लेकिन सिख के तौर पर ग्लोबल आइकन हैं। ऐसे में अपनी अचीवमेंट्स से पंजाबियों को प्राउड फील कराने वाले भज्जी चुनाव के दौरान भीड़ जुटाने के काम जरूर आएंगे।

4. विक्रमजीत साहनी: पॉलिटिकल नेटवर्क नहीं, नरमख्याली सिख चेहरे की छवि विक्रमजीत साहनी बहुत सुलझे हुए इंसान माने जाते हैं। फर्टिलाइजर फर्म सन ग्रुप के मालिक साहनी का भी ग्राउंड पर कोई पॉलिटिकल नेटवर्क नहीं है। वह अपनी NGO कौशल विकास के जरिए लोगों के बीच समाज सेवी के तौर पर एक्टिव हैं। कोविड के दौरान उन्होंने पंजाबी युवाओं को रोजगार देने का काम किया था।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट विंकलजीत सरां कहते हैं साहनी नरमख्याली सिख चेहरा हैं। उनकी टोन एग्रेसिव नहीं है, ऐसे में भाजपा सिखों के बीच अपनी दूरी कम करने का नैरेटिव सेट करने के लिए उनका यूज कर सकती है। हालांकि इससे आप के लिए कोई बड़ा संकट नहीं आने वाला। आप ने ग्राउंड पर कुछ काम ऐसे किए हैं जिनका सीधा असर लोगों के दिलो दीमाग पर है।

5. राजिंदर गुप्ता: एक्टिव पॉलिटिशियन नहीं, मालवा-लुधियाना में रसूख 5 हजार करोड़ की प्रॉपर्टी वाले ट्राइडेंट ग्रुप के फाउंडर राजिंदर गुप्ता एक्टिव पॉलिटिशियन नहीं रहे हैं। मगर, उनका पर्सनल सामाजिक रसूख काफी अच्छा है। खासकर, लुधियाना के कार्पोरेट्स के बीच उनकी अच्छी ट्यूनिंग है। वह अपने ग्रुप में पंजाबी युवकों को रोजगार भी दे चुके हैं।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट डॉक्टर रत्तू कहते हैं कि मालवा इलाके के युवाओं को उन्होंने अपनी इंडस्ट्री में नौकरी दी। होमटाउन बरनाला में भी उनका अच्छा रसूख है। एक कामयाब उद्योगपति होने की वजह से बड़े उद्योगपतियों के साथ उनका उठना-बैठना है। ऐसे में BJP उनके जरिए इंडस्ट्री कम्युनिटी के डायरेक्ट डोमिनेंस वाली लुधियाना की 6 सीटों और 117 में से 69 सीटों वाले मालवा क्षेत्र की 20 से 25 सेमी अर्बन सीटों पर प्रभाव डालने की कोशिश करेगी।

6. संदीप पाठक: वोट नहीं दिलाएंगे, उसे पाने के तरीके बताएंगे डॉ. संदीप पाठक मूल रूप से छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। वह दिल्ली में प्रोफेसर रहे हैं। हालांकि AAP के वह मेन रणनीतिकार माने जाते थे, जो पर्दे के पीछे से माइक्रो मैनेजमेंट करते हैं। उनका पंजाब में बहुत आधार भी नहीं है, यहां तक कि उन्हें राज्यसभा भेजने पर भी बाहरी का ठप्पा लगा था।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश कहते हैं पाठक के पास भले ही वोट बैंक नहीं है लेकिन वह उसे पाने में भाजपा की बड़ी मदद कर सकते हैं। उनके पास 2022 का पंजाब का हर बूथ का डेटाबेस, जातीय समीकरणों की इन्फॉर्मेशन और AAP का 2022 का इंटरनल सर्वे भी होगा। वह AAP से मिले एक्सपीरियंस के आधार पर 2027 में BJP के लिए विनिंग पोटेंशियल वाले कैंडिडेट्स की सिलेक्शन के साथ प्रचार का रोडमैप बनाने में मदद करेंगे।

पंजाब को लेकर AAP इतनी टेंशन में क्यों? जवाब साफ है, ये AAP के लिए विधानसभा चुनाव से ज्यादा सर्वाइवल की लड़ाई है। दिल्ली में चुनाव हारने के बाद पंजाब इकलौता स्टेट है, जहां AAP की सरकार है। 2027 में यहां चुनाव हारे तो फिर AAP में बिखराव और तेज हो सकता है। ऐसे में पार्टी में टूट बढ़ेगी। वहीं AAP जिस तेजी से पॉलिटिकल सिनेरियो में छाई, उतनी ही जल्दी हट भी सकती है। ये बात AAP और CM भगवंत मान अच्छे से समझते हैं। यही वजह है कि राज्यसभा सांसदों को भले ही पार्टी के विधायकों ने चुना हो और पंजाबियों का उनके सिलेक्शन से लेकर जीतने तक में कोई डायरेक्ट योगदान नहीं, फिर भी उन्हें पंजाब का गद्दार साबित करने का नैरेटिव बनाया जा रहा है।

AAP पंजाब में जीत को लेकर क्या कर रही? आम आदमी पार्टी का पूरा जोर अब पंजाब में ही है। AAP को फिलहाल 2022 के ‘बदलाव’ और ‘एक मौका केजरीवाल को’ के माहौल से ज्यादा CM भगवंत मान के चेहरे पर ज्यादा भरोसा है। यही वजह है कि पंजाब में अब पहले की तरह दिल्ली के नेता मीडिया के सामने ज्यादा नजर नहीं आते। हर बड़े मुद्दे पर CM मान की कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। वैसे, संगठन के तौर पर AAP ने दिल्ली के पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया को पंजाब इंचार्ज बनाकर कैंप करवा रखा है। अरविंद केजरीवाल का भी पूरा फोकस पंजाब पर ही है।

6 सांसदों के जाने के बाद AAP के आगे सबसे बड़ी चुनौती क्या है? AAP को पंजाब में विधायकों की टूट रोकनी होगी। अगर राघव चड्‌ढा और संदीप पाठक के जरिए विधायक टूटे तो फिर AAP के लिए चुनाव से ठीक पहले माहौल संभालना मुश्किल होगा। अगर MLA दूसरी पार्टी में आए तो वह उन बातों को पुख्ता कर सकते हैं, जिनकी चर्चा अक्सर विरोधी करते हैं। जिसमें सबसे अहम आरोप AAP की दिल्ली टीम के हाथ में पूरी कमान का होना है।

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पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही आम आदमी पार्टी (AAP) में टूट हो गई। पंजाब के 6 सांसदों ने अचानक पार्टी छोड़ दी। इनमें से 3 राघव चड्‌ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने भाजपा जॉइन कर ली। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि पंजाब में AAP के MLA भी टूटेंगे या नहीं। (पढ़ें पूरी खबर)

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