Saturday, 16 May 2026 | 11:29 AM

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Dhar Bhojshala Case Verdict | Muslim Side Free to Approach SC

Dhar Bhojshala Case Verdict | Muslim Side Free to Approach SC

सभी पदाधिकारियों ने यज्ञ कुंड के समीप पहुंचकर भी श्रद्धापूर्वक दर्शन किए।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने धार स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला परिसर को राजा भोज के समय का वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर माना है। कोर्ट ने हिंदू पक्ष को यहां पूजा का अधिकार दे दिया है।

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फैसले के बाद शनिवार सुबह श्रद्धालुओं और अलग-अलग समितियों के पदाधिकारियों ने शांतिपूर्ण माहौल में भोजशाला पहुंचकर दर्शन और पूजा-अर्चना की। लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया।

हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि हाई कोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 के ASI आदेश को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया है। इस आदेश में मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को तय अवधि के लिए नमाज की अनुमति दी गई थी।

ASI के वकील अविरल विकास खरे ने कानूनी पहलू स्पष्ट किए…

  • भोजशाला स्थल को वर्ष 1904 से ‘संरक्षित स्मारक’ का दर्जा प्राप्त है।
  • इस स्मारक का पूरा प्रशासन, नियमन और निगरानी केवल ASI के पास ही रहेगी।
  • कोर्ट ने ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर माना है कि इसका निर्माण भोज-परमार वंश के काल में हुआ था।

देखिए आज की तस्वीरें…

‘भोजशाला मंदिर थी, है और रहेगी’

दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने कहा कि सालों बाद उन्हें बिना रोक-टोक पूजा करने का अवसर मिला है। भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा, “भोजशाला का कण-कण यह दर्शाता है कि यह एक मंदिर है।”

मुस्लिम पक्ष की आगे की कानूनी कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन भोजशाला मंदिर थी, मंदिर है और हमेशा मंदिर ही रहेगी। फिलहाल पूरे धार शहर और भोजशाला परिसर की स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना

शनिवार सुबह सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच श्रद्धालु और भोज उत्सव समिति के पदाधिकारी परिसर पहुंचे। इनमें संरक्षक विश्वास पांडे, भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा, श्रीश दुबे, केशव शर्मा और अशोक जैन शामिल थे। सभी ने मां वाग्देवी के स्थान और यज्ञ कुंड के पास पुष्प अर्पित कर दंडवत प्रणाम किया।

सुप्रीम कोर्ट में 2 कैविएट याचिकाएं दायर

मुस्लिम पक्ष के सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना को देखते हुए हिंदू पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय में 2 कैविएट याचिकाएं दायर की हैं। कोर्ट ने लंदन के एक संग्रहालय में रखी वाग्देवी की मूल मूर्ति वापस लाने की मांग पर भी विचार किया है।

ये खबर भी पढ़ें… MP हाईकोर्ट ने धार भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। शुक्रवार को दिए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा- हमने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर विचार किया है। ASI एक्ट के प्रावधानों के साथ-साथ अयोध्या मामले को भी आधार माना। पढ़ें पूरी खबर…

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सभी पदाधिकारियों ने यज्ञ कुंड के समीप पहुंचकर भी श्रद्धापूर्वक दर्शन किए।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने धार स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला परिसर को राजा भोज के समय का वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर माना है। कोर्ट ने हिंदू पक्ष को यहां पूजा का अधिकार दे दिया है।

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फैसले के बाद शनिवार सुबह श्रद्धालुओं और अलग-अलग समितियों के पदाधिकारियों ने शांतिपूर्ण माहौल में भोजशाला पहुंचकर दर्शन और पूजा-अर्चना की। लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया।

हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि हाई कोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 के ASI आदेश को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया है। इस आदेश में मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को तय अवधि के लिए नमाज की अनुमति दी गई थी।

ASI के वकील अविरल विकास खरे ने कानूनी पहलू स्पष्ट किए…

  • भोजशाला स्थल को वर्ष 1904 से ‘संरक्षित स्मारक’ का दर्जा प्राप्त है।
  • इस स्मारक का पूरा प्रशासन, नियमन और निगरानी केवल ASI के पास ही रहेगी।
  • कोर्ट ने ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर माना है कि इसका निर्माण भोज-परमार वंश के काल में हुआ था।

देखिए आज की तस्वीरें…

‘भोजशाला मंदिर थी, है और रहेगी’

दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने कहा कि सालों बाद उन्हें बिना रोक-टोक पूजा करने का अवसर मिला है। भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा, “भोजशाला का कण-कण यह दर्शाता है कि यह एक मंदिर है।”

मुस्लिम पक्ष की आगे की कानूनी कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन भोजशाला मंदिर थी, मंदिर है और हमेशा मंदिर ही रहेगी। फिलहाल पूरे धार शहर और भोजशाला परिसर की स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना

शनिवार सुबह सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच श्रद्धालु और भोज उत्सव समिति के पदाधिकारी परिसर पहुंचे। इनमें संरक्षक विश्वास पांडे, भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा, श्रीश दुबे, केशव शर्मा और अशोक जैन शामिल थे। सभी ने मां वाग्देवी के स्थान और यज्ञ कुंड के पास पुष्प अर्पित कर दंडवत प्रणाम किया।

सुप्रीम कोर्ट में 2 कैविएट याचिकाएं दायर

मुस्लिम पक्ष के सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना को देखते हुए हिंदू पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय में 2 कैविएट याचिकाएं दायर की हैं। कोर्ट ने लंदन के एक संग्रहालय में रखी वाग्देवी की मूल मूर्ति वापस लाने की मांग पर भी विचार किया है।

ये खबर भी पढ़ें… MP हाईकोर्ट ने धार भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना

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