Wednesday, 12 Aug 2026 | 07:29 PM

Trending :

EXCLUSIVE

क्या बच्चे भी एंजायटी और डिप्रेशन की दवाएं ले सकते हैं? इस बारे में क्या है एक्सपर्ट की राय

authorimg

Last Updated:

Anxiety and Depression in Kids: आजकल बच्चों में एंजायटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार जरूरत पड़ने पर बच्चों को एंजायटी और डिप्रेशन की दवाएं दी जा सकती हैं. हालांकि यह फैसला केवल डॉक्टर ही कर सकते हैं. कॉग्निटिव थेरेपी, फैमिली सपोर्ट और हेल्दी लाइफस्टाइल से बच्चों की मेंटल हेल्थ को सुधारा जा सकता है.

Zoom

बच्चों में आजकल मेंटल हेल्थ से जुड़ी प्रॉब्लम्स बढ़ रही हैं.

Anxiety and Depression Drugs: आज के जमाने में मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं. छोटे बच्चों से लेकर टीनएजर्स, युवा, मिडिल एज के लोग और बुजुर्ग सभी मानसिक समस्याओं से परेशान हैं. पढ़ाई का दबाव, सोशल मीडिया, अकेलापन, पारिवारिक तनाव और बदलती लाइफस्टाइल की वजह से कई बच्चे एंजायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं की चपेट में आ जाते हैं. ऐसे में माता-पिता के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या बच्चों को भी एंजायटी और डिप्रेशन की दवाएं दी जा सकती हैं? चलिए इस बारे में साइकेट्रिस्ट से हकीकत जानने की कोशिश करते हैं.

नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और साइकेस्ट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया बच्चों में एंजायटी और डिप्रेशन का इलाज केवल दवाओं पर निर्भर नहीं होता है. ज्यादातर मामलों में सबसे पहले काउंसलिंग, बिहेवियर थेरेपी और परिवार का सहयोग जरूरी माना जाता है. अगर समस्या हल्की हो, तो थेरेपी और लाइफस्टाइल में बदलाव करने की सलाह दी जाती है. अगर बच्चा लंबे समय तक उदास रहे, पढ़ाई और रोजमर्रा की गतिविधियों में रुचि कम हो जाए, नींद और भूख प्रभावित होने लगे या आत्महत्या जैसे विचार आने लगें, तब दवाओं की जरूरत पड़ सकती है.

एक्सपर्ट के अनुसार कुछ एंटीडिप्रेसेंट और एंटी-एंजायटी दवाएं बच्चों और किशोरों के लिए मेडिकल गाइडलाइन के तहत इस्तेमाल की जाती हैं. हर दवा हर बच्चे के लिए सुरक्षित नहीं होती. डॉक्टर बच्चे की उम्र, लक्षणों की गंभीरता, मेडिकल हिस्ट्री और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखकर ही दवा तय करते हैं. यही वजह है कि बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दवाएं देना खतरनाक माना जाता है. इन दवाओं के कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं. कुछ मामलों में शुरुआती दिनों में आत्मघाती विचार बढ़ने का खतरा भी देखा गया है, इसलिए दवा शुरू होने के बाद बच्चे की नियमित निगरानी बेहद जरूरी होती है. माता-पिता को बच्चे के व्यवहार में आने वाले किसी भी असामान्य बदलाव पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

डॉक्टर का मानना है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर पैरेंट्स को भी जागरूक रहना चाहिए. कई बार माता-पिता बच्चों की चिंता, डर या उदासी को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर बच्चा लंबे समय तक चुप रहने लगे, दोस्तों से दूरी बनाने लगे, पढ़ाई में गिरावट आए या व्यवहार अचानक बदल जाए, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए. स्वस्थ दिनचर्या भी बच्चों की मानसिक सेहत को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, फिजिकल एक्टिविटी, परिवार के साथ समय और स्क्रीन टाइम कम करना एंजायटी और तनाव को कम करने में मदद कर सकता है. बच्चों से खुलकर बातचीत करना और उनकी भावनाओं को समझना भी बेहद जरूरी है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

About the Author

authorimg

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
authorimg

April 27, 2026/
12:27 pm

Last Updated:April 27, 2026, 12:27 IST Swarnaprashan Benefits: स्वर्ण प्राशन का एक बड़ा लाभ यह भी है कि इससे बच्चों...

MLA T Raja Warns MP: Convertion Threatens Bhagwa Govt

March 31, 2026/
5:22 pm

राजा ने कहा- धर्मांतरण पर ध्यान नहीं दिया गया तो आदिवासी और हिंदू समाज खत्म हो जाएगा। तेलंगाना की गोशामहल...

छिपकली हटाने के टिप्स: सिर्फ 5 रुपए में घर से गायब हो जाए छिपकली, बस एक बार देखें यह घरेलू छिपकली

March 24, 2026/
4:54 pm

छिपकली हटाने के उपाय: हॉटलाइन्स और अभिनेत्रियों में ही शामिल हैं घर में छिपकलियों का आतंक बढ़ता जा रहा है।...

Nathan Smith celebrates taking the wicket of England's Josh Tongue (Picture credit: AP)

June 5, 2026/
10:54 pm

आखरी अपडेट:05 जून, 2026, 22:54 IST अन्नामलाई ने कहा कि उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भाजपा के ढांचे से परे हैं और...

भोपाल में पारा 43.6°C, 10 साल में दूसरा सबसे ज्यादा:खजुराहो MP का सबसे गर्म; ग्वालियर समेत 15 जिलों में आज लू चलेगी

April 29, 2026/
5:05 am

मध्य प्रदेश का टूरिस्ट स्पॉट खजुराहो सबसे ‘हॉट’ बना हुआ है। मंगलवार को यहां तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस रहा। भोपाल...

स्कॉर्पियों की सेट्रों कार से ओवरटेकिंग, बिना नंबर बाइक की एंट्री और धड़धड़ा हथियार... शुभेंदु पीए प्रधानमंत्री की ऐसी लिखी गई स्क्रिप्ट

May 7, 2026/
6:07 pm

उत्तर 24 परगना के मध्यमग्राम की सड़कों पर रोज की तरह 6 मई की रात करीब सवा दस बजे हलचल...

केरल चुनाव में एसडीपीआई का समर्थन सपोर्टबॉट: वोट लेने से मना नहीं किया जा सकता-बाएं

March 31, 2026/
12:12 pm

केरल चुनाव 2026: केरल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक नए विवाद का तापमान बढ़ रहा है। एसडीपीआई के समर्थन...

राजनीति

क्या बच्चे भी एंजायटी और डिप्रेशन की दवाएं ले सकते हैं? इस बारे में क्या है एक्सपर्ट की राय

authorimg

Last Updated:

Anxiety and Depression in Kids: आजकल बच्चों में एंजायटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार जरूरत पड़ने पर बच्चों को एंजायटी और डिप्रेशन की दवाएं दी जा सकती हैं. हालांकि यह फैसला केवल डॉक्टर ही कर सकते हैं. कॉग्निटिव थेरेपी, फैमिली सपोर्ट और हेल्दी लाइफस्टाइल से बच्चों की मेंटल हेल्थ को सुधारा जा सकता है.

Zoom

बच्चों में आजकल मेंटल हेल्थ से जुड़ी प्रॉब्लम्स बढ़ रही हैं.

Anxiety and Depression Drugs: आज के जमाने में मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं. छोटे बच्चों से लेकर टीनएजर्स, युवा, मिडिल एज के लोग और बुजुर्ग सभी मानसिक समस्याओं से परेशान हैं. पढ़ाई का दबाव, सोशल मीडिया, अकेलापन, पारिवारिक तनाव और बदलती लाइफस्टाइल की वजह से कई बच्चे एंजायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं की चपेट में आ जाते हैं. ऐसे में माता-पिता के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या बच्चों को भी एंजायटी और डिप्रेशन की दवाएं दी जा सकती हैं? चलिए इस बारे में साइकेट्रिस्ट से हकीकत जानने की कोशिश करते हैं.

नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और साइकेस्ट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया बच्चों में एंजायटी और डिप्रेशन का इलाज केवल दवाओं पर निर्भर नहीं होता है. ज्यादातर मामलों में सबसे पहले काउंसलिंग, बिहेवियर थेरेपी और परिवार का सहयोग जरूरी माना जाता है. अगर समस्या हल्की हो, तो थेरेपी और लाइफस्टाइल में बदलाव करने की सलाह दी जाती है. अगर बच्चा लंबे समय तक उदास रहे, पढ़ाई और रोजमर्रा की गतिविधियों में रुचि कम हो जाए, नींद और भूख प्रभावित होने लगे या आत्महत्या जैसे विचार आने लगें, तब दवाओं की जरूरत पड़ सकती है.

एक्सपर्ट के अनुसार कुछ एंटीडिप्रेसेंट और एंटी-एंजायटी दवाएं बच्चों और किशोरों के लिए मेडिकल गाइडलाइन के तहत इस्तेमाल की जाती हैं. हर दवा हर बच्चे के लिए सुरक्षित नहीं होती. डॉक्टर बच्चे की उम्र, लक्षणों की गंभीरता, मेडिकल हिस्ट्री और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखकर ही दवा तय करते हैं. यही वजह है कि बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दवाएं देना खतरनाक माना जाता है. इन दवाओं के कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं. कुछ मामलों में शुरुआती दिनों में आत्मघाती विचार बढ़ने का खतरा भी देखा गया है, इसलिए दवा शुरू होने के बाद बच्चे की नियमित निगरानी बेहद जरूरी होती है. माता-पिता को बच्चे के व्यवहार में आने वाले किसी भी असामान्य बदलाव पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

डॉक्टर का मानना है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर पैरेंट्स को भी जागरूक रहना चाहिए. कई बार माता-पिता बच्चों की चिंता, डर या उदासी को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर बच्चा लंबे समय तक चुप रहने लगे, दोस्तों से दूरी बनाने लगे, पढ़ाई में गिरावट आए या व्यवहार अचानक बदल जाए, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए. स्वस्थ दिनचर्या भी बच्चों की मानसिक सेहत को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, फिजिकल एक्टिविटी, परिवार के साथ समय और स्क्रीन टाइम कम करना एंजायटी और तनाव को कम करने में मदद कर सकता है. बच्चों से खुलकर बातचीत करना और उनकी भावनाओं को समझना भी बेहद जरूरी है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

About the Author

authorimg

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.