नीमच में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन ने गांधी वाटिका में सभा की। इस दौरान मजदूर नेताओं ने सरकार की नीतियों और नए लेबर कोड को लेकर जमकर गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने साफ मांग रखी कि काम के घंटे 8 ही रहने चाहिए और कम से कम इतना वेतन जरूर मिले जिससे घर चल सके। सभा में कामरेड विजय बैरागी और निरंजन गुप्ता ने बताया कि आज जो मजदूरों को 8 घंटे काम की सुविधा मिली है, उसके लिए शिकागो के शहीदों ने अपनी जान दी थी। उन्होंने अफसोस जताया कि आज के दौर में मजदूर एक बार फिर उन्हीं पुरानी मुसीबतों से घिर गए हैं, जिनके खिलाफ सालों पहले लड़ाई लड़ी गई थी। पुलिसिया कार्रवाई और शोषण पर नाराजगी सुनील शर्मा और नितेश यादव ने कहा कि दिल्ली, हरियाणा और मध्य प्रदेश के फैक्ट्रियों में हालात खराब हैं। आरोप लगाया गया कि जब मजदूर अपने हक की बात करते हैं, तो उन पर पुलिस का इस्तेमाल किया जाता है और उन्हें जेल में डाल दिया जाता है। नेताओं ने यह भी कहा कि नीमच और आसपास के इलाकों में मजदूरों से 12-12 घंटे काम लिया जा रहा है, जो सरासर शोषण है। महंगाई और कम वेतन की मार कैलाश चंद्र सेन और मुकेश बाबा ने बताया कि आज के दौर में 8 से 10 हजार रुपए की सैलरी में मकान का किराया देना, बच्चों को पढ़ाना और इलाज कराना नामुमकिन हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि दुनिया में चल रहे युद्ध और महंगाई का सारा बोझ मजदूरों और किसानों की कमर तोड़ रहा है। नए लेबर कोड को बताया ‘डेथ वारंट’ आशा कार्यकर्ता सुनीता धाकड़ ने साल 2025 से लागू हुए चार नए लेबर कोड पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने इसे मजदूरों के लिए ‘डेथ वारंट’ (मौत का फरमान) बताते हुए कहा कि इससे पक्की नौकरियां खत्म हो जाएंगी और मजदूर पूरी तरह से ठेकेदारों के रहमोकरम पर बंधुआ बनकर रह जाएंगे। किसान और मजदूर मिलकर लड़ेंगे लड़ाई आखिर में युवा किसान नेता राधेश्याम नागदा ने कहा कि जिस तरह किसानों ने लंबी लड़ाई लड़कर कृषि कानून वापस कराए थे, अब वैसे ही मजदूर और किसान मिलकर सरकार की इन नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। सभा में बड़ी संख्या में मजदूर और कार्यकर्ता मौजूद रहे।















































