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6 घंटे से कम सो रहे हैं? जानिए कैसे आपका दिमाग और दिल चुका रहे हैं इसकी कीमत, विशेषज्ञों की क्‍या है सलाह

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Chronic sleep deprivation India : रात भर जागकर काम करना या वेब सीरीज देखना अब आम बात हो चुकी है. लेट नाइट जागना अब स्‍टेटस बनता जा रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह आदत आपको मौत के करीब धकेल रही है? बता दें कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे कम सोने वाला देश बन चुका है. भारतीय शहरों में औसत नींद घटकर 8 से घटकर 6 घंटे या उससे भी कम रह गई है. हर 3 में से 1 कामकाजी वयस्क थकान (क्रॉनिक फटीग) की शिकायत करता है, फिर भी हम इसे नजरअंदाज करते हैं.

लेकिन चिकित्सा विज्ञान की मानें तो नींद की कमी कोई ‘स्मार्ट हैक’ नहीं, बल्कि एक गंभीर हेल्थ क्राइसिस बन चुका है. इस विषय पर जब देश के दिग्गज डॉक्टरों से न्‍यूज 18 ने बातचीत की तो उन्‍होने यह बताया कि किस तरह नींद से समझौता आपके दिल और दिमाग के लिए कितना घातक होता जा रहा है.

सही नींद एक ‘लक्जरी’ नहीं, बल्कि एक ‘जरूरत’ समझें.

1. दिमाग चुकाता है सबसे पहले कीमत
डॉ. प्रतिमा मूर्ति (NIMHANS की पूर्व निदेशक)
का कहना है कि नींद कोई निष्क्रिय (passive) अवस्था नहीं है. यह एक सक्रिय जैविक मरम्मत प्रक्रिया है. जब आप सोते हैं तो दिमाग दिन भर जमा हुए जहरीले कचरे को साफ करता है. अगर यह सफाई नहीं होती, तो केवल थकान ही नहीं होती, बल्कि सोचने-समझने की क्षमता कम होने लगती है और भावनात्मक संतुलन बिगड़ जाता है.

सलाह देते  हुए डॉ. मूर्ति का कहना है कि नींद की स्वच्छता (Sleep Hygiene) को गंभीरता से लें. रात में हल्का भोजन करें, कैफीन से बचें, और सोने से पहले फोन को खुद से दूर रखें. उनका कहना है कि नींद एक बहुत ही कोमल प्रक्रिया है, लेकिन यह हमारे जीवन का सबसे शक्तिशाली हिस्सा है.

2. दिल रखता है हर पल का हिसाब
डॉ. पुरुषोत्तम लाल (मेट्रो हॉस्पिटल्स के चेयरमैन और प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट)
ने नींद की कमी और दिल की बीमारियों के बीच के खतरनाक संबंध को समझाया. उनका कहना है कि नींद की कमी से धमनियों की दीवारें सख्त हो जाती हैं. इससे कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं, जो ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को खतरनाक स्तर पर ले जाते हैं.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉ. लाल ने चेतावनी दी कि आज के युवा प्रोफेशनल प्रेशर और देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत के कारण अपने दिल की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. लगभग हर हृदय रोगी की मेडिकल हिस्ट्री में नींद की समस्या जरूर पाई जाती है.

3. पल्मोनोलॉजिस्ट की गंभीर चेतावनी
डॉ. रणदीप गुलेरिया (AIIMS दिल्ली के पूर्व निदेशक)
ने बताया कि एक पीढ़ी पहले तक इंसान 8-9 घंटे सोता था, जो आज सिमटकर 5-6 घंटे रह गया है. नींद की कमी होने से यह अपने साथ मोटापा, स्लीप एपनिया, डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियाँ लेकर आती है. उन्‍होंने कहा कि लोग अक्सर गर्व से कहते हैं कि वे सिर्फ 4 घंटे सोकर भी ठीक काम कर लेते हैं. जबकि यह एक भ्रम है. लंबे समय में यह आपकी सेहत को अंदर से खोखला कर देता है.

ध्‍यान देने वाली बात यह है कि हम अक्सर डाइट और एक्सरसाइज पर तो खूब चर्चा करते हैं, लेकिन नींद को भूल जाते हैं. यदि आप भी अपनी नींद से समझौता कर रहे हैं, तो याद रखिए कि आप अपनी उम्र कम कर रहे हैं. डॉक्टरों की सलाह से ही बात समझ आती है कि अपनी नींद का सम्मान करें. इसे एक ‘लक्जरी’ नहीं, बल्कि एक ‘जरूरत’ समझें. आज रात, अपना फोन दूर रखें और अपने शरीर को वह मरम्मत करने का समय दें जिसका वह हकदार है.

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लेकिन चिकित्सा विज्ञान की मानें तो नींद की कमी कोई ‘स्मार्ट हैक’ नहीं, बल्कि एक गंभीर हेल्थ क्राइसिस बन चुका है. इस विषय पर जब देश के दिग्गज डॉक्टरों से न्‍यूज 18 ने बातचीत की तो उन्‍होने यह बताया कि किस तरह नींद से समझौता आपके दिल और दिमाग के लिए कितना घातक होता जा रहा है.

सही नींद एक ‘लक्जरी’ नहीं, बल्कि एक ‘जरूरत’ समझें.

1. दिमाग चुकाता है सबसे पहले कीमत
डॉ. प्रतिमा मूर्ति (NIMHANS की पूर्व निदेशक)
का कहना है कि नींद कोई निष्क्रिय (passive) अवस्था नहीं है. यह एक सक्रिय जैविक मरम्मत प्रक्रिया है. जब आप सोते हैं तो दिमाग दिन भर जमा हुए जहरीले कचरे को साफ करता है. अगर यह सफाई नहीं होती, तो केवल थकान ही नहीं होती, बल्कि सोचने-समझने की क्षमता कम होने लगती है और भावनात्मक संतुलन बिगड़ जाता है.

सलाह देते  हुए डॉ. मूर्ति का कहना है कि नींद की स्वच्छता (Sleep Hygiene) को गंभीरता से लें. रात में हल्का भोजन करें, कैफीन से बचें, और सोने से पहले फोन को खुद से दूर रखें. उनका कहना है कि नींद एक बहुत ही कोमल प्रक्रिया है, लेकिन यह हमारे जीवन का सबसे शक्तिशाली हिस्सा है.

2. दिल रखता है हर पल का हिसाब
डॉ. पुरुषोत्तम लाल (मेट्रो हॉस्पिटल्स के चेयरमैन और प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट)
ने नींद की कमी और दिल की बीमारियों के बीच के खतरनाक संबंध को समझाया. उनका कहना है कि नींद की कमी से धमनियों की दीवारें सख्त हो जाती हैं. इससे कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं, जो ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को खतरनाक स्तर पर ले जाते हैं.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉ. लाल ने चेतावनी दी कि आज के युवा प्रोफेशनल प्रेशर और देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत के कारण अपने दिल की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. लगभग हर हृदय रोगी की मेडिकल हिस्ट्री में नींद की समस्या जरूर पाई जाती है.

3. पल्मोनोलॉजिस्ट की गंभीर चेतावनी
डॉ. रणदीप गुलेरिया (AIIMS दिल्ली के पूर्व निदेशक)
ने बताया कि एक पीढ़ी पहले तक इंसान 8-9 घंटे सोता था, जो आज सिमटकर 5-6 घंटे रह गया है. नींद की कमी होने से यह अपने साथ मोटापा, स्लीप एपनिया, डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियाँ लेकर आती है. उन्‍होंने कहा कि लोग अक्सर गर्व से कहते हैं कि वे सिर्फ 4 घंटे सोकर भी ठीक काम कर लेते हैं. जबकि यह एक भ्रम है. लंबे समय में यह आपकी सेहत को अंदर से खोखला कर देता है.

ध्‍यान देने वाली बात यह है कि हम अक्सर डाइट और एक्सरसाइज पर तो खूब चर्चा करते हैं, लेकिन नींद को भूल जाते हैं. यदि आप भी अपनी नींद से समझौता कर रहे हैं, तो याद रखिए कि आप अपनी उम्र कम कर रहे हैं. डॉक्टरों की सलाह से ही बात समझ आती है कि अपनी नींद का सम्मान करें. इसे एक ‘लक्जरी’ नहीं, बल्कि एक ‘जरूरत’ समझें. आज रात, अपना फोन दूर रखें और अपने शरीर को वह मरम्मत करने का समय दें जिसका वह हकदार है.

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