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क्या है ऑटिज्म डिसऑर्डर, बच्चों को कैसे करता है प्रभावित, इन 5 संकेतों को नजरअंदाज न करें माता-पिता

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Autism Spectrum Disorder: दुनियाभर में लाखों बच्चे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं. यह एक न्यूरोडेवलपमेंटल कंडीशन होती है, जो बच्चों को बुरी तरह प्रभावित करती है. कई बार माता-पिता बच्चे में शुरुआती दौर में ऑटिज्म की पहचान नहीं कर पाते हैं, जिसकी वजह से समस्या बढ़ जाती है. इस समस्या के कारण बच्चे के बातचीत करने, दूसरों से जुड़ने और व्यवहार करने का तरीका प्रभावित होता है. ऑटिज्म के लक्षण आमतौर पर जन्म के शुरुआती 2-3 वर्षों में दिखने लगते हैं. अगर सही समय पर इन संकेतों को पहचान लिया जाए, तो अर्ली इंटरवेंशन के जरिए बच्चे के जीवन को काफी हद तक बेहतर बनाया जा सकता है. सभी पैरेंट्स को ऑटिज्म से जुड़े संकेत जान लेने चाहिए, ताकि वक्त रहते इसकी पहचान की जा सके.

अमेरिका के मायो क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों का सबसे पहला लक्षण सामाजिक जुड़ाव में कमी होना है. ऐसे बच्चे अक्सर आंखों में आंखें डालकर बात नहीं करते. जब माता-पिता उन्हें पुकारते हैं, तो वे अक्सर कोई प्रतिक्रिया नहीं देते, जिससे कई बार पैरेंट्स को लगता है कि बच्चे को सुनने में समस्या है. वे अपनी दुनिया में खोए रहते हैं और दूसरे बच्चों के साथ खेलने या घुलने-मिलने में दिलचस्पी नहीं दिखाते. अगर आपका बच्चा मुस्कुराने पर पलटकर जवाब नहीं देता या सामाजिक मेलजोल से बचता है, तो यह ऑटिज्म का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है.

बोलने में देरी होना भी ऑटिज्म का एक आम लक्षण है. कुछ बच्चे शब्द तो बोलते हैं, लेकिन वे वाक्यों का सही इस्तेमाल नहीं कर पाते या एक ही शब्द को बार-बार दोहराते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में एकोलालिया कहा जाता है. उदाहरण के लिए अगर आप उनसे पूछें क्या आपको पानी चाहिए, तो वे जवाब देने के बजाय वही सवाल दोहरा सकते हैं. इसके अलावा वे अपनी जरूरतों को बताने के लिए शब्दों के बजाय हाथों के इशारों का इस्तेमाल अधिक करते हैं या दूसरों का हाथ पकड़कर उन्हें उस वस्तु तक ले जाते हैं, जो उन्हें चाहिए.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में अक्सर रिपेटिटिव बिहेवियर देखा जाता है. वे शरीर की कुछ खास गतिविधियों को बार-बार दोहराते हैं, जैसे हाथों को फड़फड़ाना, एक ही जगह पर गोल-गोल घूमना या पंजों के बल चलना. इसके अलावा उन्हें बदलाव पसंद नहीं होता. अगर उनके खिलौनों की जगह बदल दी जाए या उनके दैनिक रूटीन में थोड़ा भी फेरबदल हो, तो वे बहुत ज्यादा परेशान या हिंसक हो सकते हैं. वे अक्सर अपनी चीजों या खिलौनों को एक सीधी लाइन में व्यवस्थित करने के प्रति जुनूनी होते हैं.

ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे रोशनी, आवाज, गंध या स्पर्श के प्रति सामान्य बच्चों से अलग तरह से प्रतिक्रिया करते हैं. इसे सेंसरी प्रोसेसिंग इशू कहा जाता है. ऑटिस्टिक बच्चे अक्सर तेज आवाज जैसे मिक्सर ग्राइंडर या पटाखे से डरकर अपने कान बंद कर लेते हैं. उन्हें कुछ खास तरह के कपड़ों का स्पर्श चुभ सकता है या वे कुछ विशिष्ट बनावट वाले भोजन को खाने से पूरी तरह इनकार कर सकते हैं. कुछ बच्चे दर्द या ठंडे-गर्म के प्रति बिल्कुल भी प्रतिक्रिया नहीं देते, जो कि उनके सेंसरी सिस्टम के अलग तरह से काम करने का संकेत है.

ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के शौक अक्सर बहुत सीमित और असामान्य होते हैं. वे खिलौने के साथ खेलने के बजाय उसके किसी एक हिस्से को घंटों तक देखते रह सकते हैं. उनमें किसी खास विषय या वस्तु के प्रति अत्यधिक लगाव देखा जा सकता है. उनकी एकाग्रता का स्तर कुछ चीजों में बहुत ज्यादा होता है, लेकिन साधारण सामाजिक निर्देशों को समझने में उन्हें कठिनाई होती है. अगर माता-पिता को इनमें से कोई भी लक्षण अपने बच्चे में दिखाई दे, तो बिना देरी किए पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट या चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए ताकि समय पर थैरेपी शुरू की जा सके.

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Autism Spectrum Disorder: दुनियाभर में लाखों बच्चे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं. यह एक न्यूरोडेवलपमेंटल कंडीशन होती है, जो बच्चों को बुरी तरह प्रभावित करती है. कई बार माता-पिता बच्चे में शुरुआती दौर में ऑटिज्म की पहचान नहीं कर पाते हैं, जिसकी वजह से समस्या बढ़ जाती है. इस समस्या के कारण बच्चे के बातचीत करने, दूसरों से जुड़ने और व्यवहार करने का तरीका प्रभावित होता है. ऑटिज्म के लक्षण आमतौर पर जन्म के शुरुआती 2-3 वर्षों में दिखने लगते हैं. अगर सही समय पर इन संकेतों को पहचान लिया जाए, तो अर्ली इंटरवेंशन के जरिए बच्चे के जीवन को काफी हद तक बेहतर बनाया जा सकता है. सभी पैरेंट्स को ऑटिज्म से जुड़े संकेत जान लेने चाहिए, ताकि वक्त रहते इसकी पहचान की जा सके.

अमेरिका के मायो क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों का सबसे पहला लक्षण सामाजिक जुड़ाव में कमी होना है. ऐसे बच्चे अक्सर आंखों में आंखें डालकर बात नहीं करते. जब माता-पिता उन्हें पुकारते हैं, तो वे अक्सर कोई प्रतिक्रिया नहीं देते, जिससे कई बार पैरेंट्स को लगता है कि बच्चे को सुनने में समस्या है. वे अपनी दुनिया में खोए रहते हैं और दूसरे बच्चों के साथ खेलने या घुलने-मिलने में दिलचस्पी नहीं दिखाते. अगर आपका बच्चा मुस्कुराने पर पलटकर जवाब नहीं देता या सामाजिक मेलजोल से बचता है, तो यह ऑटिज्म का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है.

बोलने में देरी होना भी ऑटिज्म का एक आम लक्षण है. कुछ बच्चे शब्द तो बोलते हैं, लेकिन वे वाक्यों का सही इस्तेमाल नहीं कर पाते या एक ही शब्द को बार-बार दोहराते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में एकोलालिया कहा जाता है. उदाहरण के लिए अगर आप उनसे पूछें क्या आपको पानी चाहिए, तो वे जवाब देने के बजाय वही सवाल दोहरा सकते हैं. इसके अलावा वे अपनी जरूरतों को बताने के लिए शब्दों के बजाय हाथों के इशारों का इस्तेमाल अधिक करते हैं या दूसरों का हाथ पकड़कर उन्हें उस वस्तु तक ले जाते हैं, जो उन्हें चाहिए.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में अक्सर रिपेटिटिव बिहेवियर देखा जाता है. वे शरीर की कुछ खास गतिविधियों को बार-बार दोहराते हैं, जैसे हाथों को फड़फड़ाना, एक ही जगह पर गोल-गोल घूमना या पंजों के बल चलना. इसके अलावा उन्हें बदलाव पसंद नहीं होता. अगर उनके खिलौनों की जगह बदल दी जाए या उनके दैनिक रूटीन में थोड़ा भी फेरबदल हो, तो वे बहुत ज्यादा परेशान या हिंसक हो सकते हैं. वे अक्सर अपनी चीजों या खिलौनों को एक सीधी लाइन में व्यवस्थित करने के प्रति जुनूनी होते हैं.

ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे रोशनी, आवाज, गंध या स्पर्श के प्रति सामान्य बच्चों से अलग तरह से प्रतिक्रिया करते हैं. इसे सेंसरी प्रोसेसिंग इशू कहा जाता है. ऑटिस्टिक बच्चे अक्सर तेज आवाज जैसे मिक्सर ग्राइंडर या पटाखे से डरकर अपने कान बंद कर लेते हैं. उन्हें कुछ खास तरह के कपड़ों का स्पर्श चुभ सकता है या वे कुछ विशिष्ट बनावट वाले भोजन को खाने से पूरी तरह इनकार कर सकते हैं. कुछ बच्चे दर्द या ठंडे-गर्म के प्रति बिल्कुल भी प्रतिक्रिया नहीं देते, जो कि उनके सेंसरी सिस्टम के अलग तरह से काम करने का संकेत है.

ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के शौक अक्सर बहुत सीमित और असामान्य होते हैं. वे खिलौने के साथ खेलने के बजाय उसके किसी एक हिस्से को घंटों तक देखते रह सकते हैं. उनमें किसी खास विषय या वस्तु के प्रति अत्यधिक लगाव देखा जा सकता है. उनकी एकाग्रता का स्तर कुछ चीजों में बहुत ज्यादा होता है, लेकिन साधारण सामाजिक निर्देशों को समझने में उन्हें कठिनाई होती है. अगर माता-पिता को इनमें से कोई भी लक्षण अपने बच्चे में दिखाई दे, तो बिना देरी किए पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट या चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए ताकि समय पर थैरेपी शुरू की जा सके.

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