इंदौर में आयोजित फेडरेशन ऑफ स्मॉल एनिमल प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FSAPAI) की 17वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का रविवार को समापन हुआ। तीन दिवसीय इस कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के वेटनरी एक्सपर्ट्स ने भाग लिया और आधुनिक पशु चिकित्सा सुविधाओं पर विस्तृत
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वेटनरी एक्सपर्ट डॉ. हेमंत मेहता ने बताया कि इंदौर में अब पालतू जानवरों के लिए वर्ल्ड क्लास सुविधाएं उपलब्ध हैं। शहर में 3-4 ऐसे प्राइवेट हॉस्पिटल हैं, जहां 24 घंटे एडमिशन और इमरजेंसी सेवाएं मिलती हैं। इसके साथ ही एम्बुलेंस सुविधा और क्रिटिकल केयर यूनिट भी उपलब्ध है। पहले गंभीर स्थिति वाले डॉग्स को एडमिट करना मुश्किल होता था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।
एडवांस जांच तकनीकें: बीमारी पहले ही पकड़ में
इंदौर में अब अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकें उपलब्ध हैं, जिनसे बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही पहचान संभव है:
बायोमार्कर टेस्ट: संभावित बीमारी का शुरुआती संकेत
PCR टेस्ट: संक्रमण की सटीक और तेज पहचान
इकोकार्डियोग्राफी: हृदय रोगों की एडवांस जांच
इन तकनीकों से समय पर इलाज शुरू कर रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है।
जटिल सर्जरी अब शहर में ही संभव
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अब डॉग्स के लिए कई जटिल सर्जरी इंदौर में ही हो रही हैं। इनमें बड़े ट्यूमर की सर्जरी, ओवरी स्पे, कास्ट्रेशन, ऑर्थोपेडिक सर्जरी (फ्रैक्चर/जॉइंट), कॉर्निया और अन्य नेत्र सर्जरी शामिल हैं। इससे अब गंभीर मामलों में बाहर जाने की जरूरत कम हो गई है।
डॉ. हेमंत मेहता
डिजिटल एक्सरे से लेकर डायलिसिस तक सभी सुविधाएं उपलब्ध
कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. नरेंद्र चौहान ने बताया कि इंदौर में अब पेट्स के लिए मेट्रो सिटीज जैसी सभी सुविधाएं मौजूद हैं। इनमें डिजिटल एक्सरे, अल्ट्रासोनोग्राफी, इकोकार्डियोग्राफी, डायलिसिस और सीटी स्कैन शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पेट्स की आई सर्जरी की शुरुआत भी इंदौर में 2016 में हो चुकी है।

डॉ. नरेंद्र चौहान
‘प्रिस्क्राइब्ड डाइट’ का बढ़ता ट्रेंड, दवाओं की जरूरत कम
डॉ. सतीश कुमार शर्मा के अनुसार, अब वेटनरी चिकित्सा में “प्रिस्क्राइब्ड डाइट” का चलन तेजी से बढ़ रहा है। यह बीमारी के अनुसार तैयार विशेष आहार होता है। मोटापे के लिए ओबेसिटी डाइट, किडनी रोग के लिए रीनल डाइट, पाचन समस्याओं के लिए स्पेशल फूड उपलब्ध है।
इन डाइट्स में जरूरी औषधीय तत्व होते हैं, जिससे लंबे समय तक दवाओं की जरूरत कम हो जाती है।
कच्चा मांस खिलाने से बचें, एक्सपर्ट्स की चेतावनी
एक्सपर्टस ने चेतावनी दी कि बाजार से कच्चा मांस खरीदकर डॉग्स को खिलाना जोखिम भरा हो सकता है। इसमें यह सुनिश्चित नहीं होता कि पशु पूरी तरह स्वस्थ था या नहीं। संक्रमित मांस से पैरासाइट्स और संक्रामक रोग हो सकते हैं।
हड्डी के टुकड़े निगलने से ‘फॉरेन बॉडी’ की समस्या हो सकती है, जिससे सर्जरी तक की नौबत आ सकती है। इसके विपरीत, प्रोसेस्ड और टेस्टेड पेट फूड नियंत्रित गुणवत्ता मानकों से गुजरता है, जिससे संक्रमण का खतरा लगभग नगण्य रहता है।

डॉ. सतीश कुमार शर्मा
पेट्स की देखभाल: एक्सपर्ट के जरूरी टिप्स
पुणे से आई वेटनरी विशेषज्ञ डॉ. अदिती चिटनिस ने पालतू जानवरों की बेहतर देखभाल के लिए ये अहम सुझाव दिए
- पालतू जानवरों को मानव भोजन न दें, यह उनके लिए हानिकारक हो सकता है।
- पेट्स को केवल स्टेटस सिंबल नहीं, परिवार का सदस्य मानें।
- 6 महीने तक दिन में 3 बार, उसके बाद 2 बार संतुलित भोजन दें।
- अंगूर, चॉकलेट, बीज वाली सब्जियां, टमाटर और विदेशी फल डॉग्स को न खिलाएं।
- पार्वो और डिस्टेम्पर जैसी बीमारियों के टीके समय पर लगवाना जरूरी है।
- डॉग और कैट पर रंग या परफ्यूम का उपयोग न करें।
- बाल बहुत छोटे न कटवाएं, ये मौसम से सुरक्षा देते हैं।
- विदेशी नस्ल पालने से पहले उसकी जरूरतें समझें; वर्किंग ब्रीड फ्लैट में उपयुक्त नहीं होती।
- 3 महीने की उम्र से बेसिक ट्रेनिंग शुरू करें।
- फ्लैट में बिल्ली रखने पर बालकनी/खिड़कियों में जाली लगाना जरूरी है।
















































