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कुछ लोगों को दूसरों को परेशान करने में मजा क्यों आता है? क्या यह मानसिक बीमारी, एक्सपर्ट से जानिए

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Is Troubling Others Mental Disorder: कुछ लोग दूसरों को खुश नहीं देखना चाहते हैं और उन्हें परेशान करने का मौका ढूंढते रहते हैं. साइकेट्रिस्ट की मानें तो दूसरों को परेशान करने में मजा आना मानसिक समस्या हो सकती है. इसके अलावा भी इसकी कई वजग होती हैं और इसे समझकर समय पर सुधार करना जरूरी है.

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एंटी सोशल मेंटल डिसऑर्डर के शिकार हुए लोग दूसरों को परेशान करते हैं.

The Psychology Behind Bullying: आजकल समाज में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ गई है, जो दूसरों को खुश देखना पसंद नहीं करते हैं. चाहें ऑफिस हो, पड़ोस हो या फिर रिश्तेदार हों, ऐसे लोग अक्सर नजर आ जाएंगे. ऐसे लोग दूसरों को परेशान करके अलग सा सुकून महसूस करते हैं. कभी यह मजाक के नाम पर होता है, तो कभी जानबूझकर किसी को मानसिक रूप से असहज करने के लिए. ऐसे व्यवहार को अक्सर लोग हल्के में ले लेते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार इसके पीछे गहरे मानसिक और भावनात्मक कारण हो सकते हैं. यह समझना जरूरी है कि यह किसी समस्या का संकेत भी हो सकता है.

नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और साइकेट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया कुछ लोगों में दूसरों को परेशान करने की प्रवृत्ति पावर और कंट्रोल की भावना से जुड़ी होती है. जब वे किसी को असहज या दुखी देखते हैं, तो उन्हें खुद पर कंट्रोल और श्रेष्ठता का अहसास होता है. यह व्यवहार कई बार बचपन के अनुभवों से भी जुड़ा होता है. अगर किसी व्यक्ति ने खुद बुलीइंग का सामना किया हो, तो वह बड़ा होकर दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार दोहरा सकता है. इसे बुलीइंग के पैटर्न से भी जोड़ा जाता है. बचपन के ऐसे कड़ने अनुभव लोगों के अजीबोगरीब व्यहार की वजह बन सकते हैं.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर ने बताया कि कुछ मामलों में यह आदत पर्सनैलिटी से जुड़ी समस्याओं का हिस्सा भी हो सकती है. नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर या एंटीसोशल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर जैसी मानसिक समस्याओं के कारण भी व्यक्ति दूसरों की भावनाओं की परवाह कम करता है. ऐसे लोग अपने फायदे या मनोरंजन के लिए दूसरों को नुकसान पहुंचाने से भी नहीं हिचकते हैं. हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति जो दूसरों को परेशान करता है, उसे कोई मानसिक बीमारी ही हो.

एक्सपर्ट के मुताबिक कई बार यह व्यवहार असुरक्षा, तनाव या अटेंशन पाने की चाह से भी पैदा होता है. कुछ लोग खुद को महत्वपूर्ण महसूस कराने के लिए या लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए दूसरों को परेशान करते हैं. सोशल मीडिया के दौर में ट्रोलिंग का चलन भी बढ़ा है, जहां लोग बिना सामने आए दूसरों को परेशान करते हैं और इसे मनोरंजन मानते हैं. अगर यह व्यवहार बार-बार हो रहा है और किसी के रिश्तों या मेंटल हेल्थ को प्रभावित कर रहा है, तो इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए. ऐसे व्यक्ति को काउंसलिंग या थेरेपी की जरूरत हो सकती है, ताकि वह अपने व्यवहार को समझ सके और उसे बदल सके.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और साइकेट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया कुछ लोगों में दूसरों को परेशान करने की प्रवृत्ति पावर और कंट्रोल की भावना से जुड़ी होती है. जब वे किसी को असहज या दुखी देखते हैं, तो उन्हें खुद पर कंट्रोल और श्रेष्ठता का अहसास होता है. यह व्यवहार कई बार बचपन के अनुभवों से भी जुड़ा होता है. अगर किसी व्यक्ति ने खुद बुलीइंग का सामना किया हो, तो वह बड़ा होकर दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार दोहरा सकता है. इसे बुलीइंग के पैटर्न से भी जोड़ा जाता है. बचपन के ऐसे कड़ने अनुभव लोगों के अजीबोगरीब व्यहार की वजह बन सकते हैं.

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डॉक्टर ने बताया कि कुछ मामलों में यह आदत पर्सनैलिटी से जुड़ी समस्याओं का हिस्सा भी हो सकती है. नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर या एंटीसोशल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर जैसी मानसिक समस्याओं के कारण भी व्यक्ति दूसरों की भावनाओं की परवाह कम करता है. ऐसे लोग अपने फायदे या मनोरंजन के लिए दूसरों को नुकसान पहुंचाने से भी नहीं हिचकते हैं. हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति जो दूसरों को परेशान करता है, उसे कोई मानसिक बीमारी ही हो.

एक्सपर्ट के मुताबिक कई बार यह व्यवहार असुरक्षा, तनाव या अटेंशन पाने की चाह से भी पैदा होता है. कुछ लोग खुद को महत्वपूर्ण महसूस कराने के लिए या लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए दूसरों को परेशान करते हैं. सोशल मीडिया के दौर में ट्रोलिंग का चलन भी बढ़ा है, जहां लोग बिना सामने आए दूसरों को परेशान करते हैं और इसे मनोरंजन मानते हैं. अगर यह व्यवहार बार-बार हो रहा है और किसी के रिश्तों या मेंटल हेल्थ को प्रभावित कर रहा है, तो इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए. ऐसे व्यक्ति को काउंसलिंग या थेरेपी की जरूरत हो सकती है, ताकि वह अपने व्यवहार को समझ सके और उसे बदल सके.

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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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