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दावा- गाजा के 90% इलाके पर हमास का कब्जा:विरोध करने वालों की सजा दे रहा; ट्रम्प बोले- पीस बोर्ड को ₹90 हजार करोड़ देंगे

दावा- गाजा के 90% इलाके पर हमास का कब्जा:विरोध करने वालों की सजा दे रहा; ट्रम्प बोले- पीस बोर्ड को ₹90 हजार करोड़ देंगे


गाजा में अक्टूबर में लागू हुए सीजफायर के बाद हालात फिर बदलते दिख रहे हैं। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक गाजा के एक कार्यकर्ता मोहम्मद दियाब का दावा है कि हमास ने उन इलाकों के 90% से ज्यादा हिस्से पर दोबारा कब्जा जमा लिया है, जहां वह पहले से मौजूद था। दियाब का कहना है कि हमास की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां फिर से सड़कों पर दिखाई दे रही हैं। वे अपराध रोकने के नाम पर कार्रवाई कर रही हैं और जिन लोगों को अपना विरोधी या सहयोगी मानती हैं, उनके खिलाफ कदम उठा रही हैं। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऐलान किया है कि अमेरिका गाजा के लिए बने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को 10 अरब डॉलर (90 हजार करोड़ रुपये) की मदद देगा। यह संगठन अंतरराष्ट्रीय विवाद सुलझाने के लिए बनाया गया है और इसकी शुरुआत गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण के मकसद से हुई थी। बोर्ड ऑफ पीस मीटिंग की 3 तस्वीर… बोर्ड की मीटिंग में 50 देश के नेता शामिल हुए ट्रम्प ने कहा कि यह रकम युद्ध पर होने वाले खर्च के मुकाबले बहुत छोटी है। उन्होंने सदस्य देशों से कहा कि अगर सभी देश साथ आएं तो उस इलाके में स्थायी शांति लाई जा सकती है, जो सदियों से युद्ध और हिंसा झेलता आया है। ट्रम्प की अध्यक्षता में बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक वॉशिंगटन में हो रही है। पहले शिखर सम्मेलन में कम से कम 50 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, विदेश मंत्री या दूत शामिल हुए। बैठक में गाजा के लिए ट्रम्प की शांति योजना पर रिपोर्ट पेश की जानी है। हालांकि टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक बोर्ड के शुरुआती दस्तावेज में गाजा का साफ तौर पर जिक्र नहीं है। ट्रम्प ने कहा कि बोर्ड का मकसद सिर्फ गाजा नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में शांति लाना है। वहीं कई यूरोपीय देशों ने इसे ट्रम्प का निजी प्रोजेक्ट बताते हुए इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है। 9 सदस्य गाजा के लिए 7 अरब डॉलर देने पर सहमत ट्रम्प ने गुरुवार को कहा कि कजाकिस्तान, अजरबैजान, UAE, मोरक्को, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान और कुवैत ने गाजा राहत के लिए 7 अरब डॉलर (63 हजार करोड़ रुपए) से ज्यादा मदद देने के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इंडोनेशिया, मोरक्को, अल्बानिया, कोसोवो और कजाकिस्तान ने गाजा में हालात संभालने के लिए अपने सैनिक और पुलिस बल भेजने का वादा किया है। ट्रम्प ने कहा कि मिस्र और जॉर्डन भी बड़ी मदद कर रहे हैं। वे सैनिक, ट्रेनिंग और एक भरोसेमंद फिलिस्तीनी पुलिस बल तैयार करने में सहयोग दे रहे हैं। ट्रम्प ने कहा कि गाजा पर खर्च किया गया हर डॉलर इलाके में स्थिरता लाने और बेहतर भविष्य बनाने में निवेश है। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि कितने सैनिक भेजे जाएंगे, वे कब तैनात होंगे और दी गई रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा। ट्रम्प के कंट्रोल में होगा पूरा पीस बोर्ड चार्टर के अनुसार, डोनाल्ड ट्रम्प को इनॉगुरल चेयरमैन (प्रथम अध्यक्ष) नामित किया गया है, और यह पद लाइफटाइम उनके द्वारा चुने गए उत्तराधिकारी तक रह सकता है। उनके पास वीटो पावर है। बोर्ड के अधिकांश फैसलों को चेयरमैन की मंजूरी चाहिए होती है, जिसका मतलब है कि ट्रम्प किसी भी निर्णय को रोक सकते हैं। बोर्ड के सदस्यों को जोड़ने, हटाने एजेंडा तय करने, सब्सिडियरी बॉडी बनाने, ग्रुप भंग करने पर ट्रम्प का पूरा कंट्रोल होगा। राष्ट्रपति पद खत्म होने के बाद भी वे चेयरमैन बने रह सकते हैं, क्योंकि यह पद उनकी राष्ट्रपति पद से स्वतंत्र है। केवल एग्जीक्यूटिव बोर्ड के सर्वसम्मति से उन्हें हटाया जा सकता है (जो व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव है, क्योंकि एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी ट्रम्प ही नियुक्त करेंगे)। कई देशों ने शामिल होने से इनकार किया कई देशों ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया है, खासकर यूरोपीय देशों और कुछ सहयोगियों ने। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी आने से इनकार कर दिया है। उनकी जगह विदेश मंत्री गिदोन सार पहुंचे। न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने स्पष्ट कहा कि बोर्ड का काम संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने बोर्ड में शामिल न होने का फैसला लिया, क्योंकि न्यूजीलैंड इसमें खास योगदान नहीं दे पाएगा । अधिकांश यूरोपीय देशों ने भी चिंता जताई है कि यह UN को कमजोर कर सकता है या ट्रम्प के व्यक्तिगत नियंत्रण वाला शरीर बन सकता है। कई G7 देशों ने भी दूरी बनाई है। शुरू में यह गाजा में युद्धविराम (2025 में हुए समझौते) को लागू करने, पुनर्निर्माण और स्थिरता के लिए था। UN सिक्योरिटी काउंसिल रेजोल्यूशन 2803 ने इसे स्वीकार किया था। गाजा में फोर्स के तैनाती की तैयारी में ट्रम्प गाजा में सुधार को लेकर ट्रम्प की 20 सूत्रीय योजना का पहला चरण सितंबर में घोषित हुआ था, जिसे तीन महीने पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने समर्थन दिया। पहले चरण में इजराइल-हमास के बीच आंशिक संघर्षविराम, मानवीय सहायता में बढ़ोतरी और बंधकों की रिहाई शामिल थी। दूसरे चरण में ISF की तैनाती और प्रशासनिक ढांचा खड़ा करना शामिल है। हालांकि, इन कदमों में देरी हो रही है। पिछले महीने एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा था कि ISF के गठन की घोषणा कुछ दिनों में हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। UN के प्रस्ताव के अनुसार, ISF को 2027 तक गाजा की सीमाओं की सुरक्षा, हथियारों को नष्ट करना, गैर-राज्य सशस्त्र समूहों के ढांचे को खत्म करने और नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी जाएगी। अब तक केवल इंडोनेशिया ने सार्वजनिक रूप से करीब 2,000 सैनिक भेजने की बात कही है। वे अप्रैल से पहले तैनात नहीं होंगे और गाजा के उस हिस्से में नहीं जाएंगे जो अभी भी इजराइली सेना के नियंत्रण में है। हमास बोला- जब तक इजराइली सेना यहां है, हथियार नहीं छोड़ेंगे दूसरी ओर हमास ने कहा है कि जब तक इजराइली सेना पूरी तरह नहीं हटती, वह हथियार नहीं डालेगा। हाल ही में हमास लीडर ओसामा हमदान ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में कहा कि संगठन ने अभी तक हथियारों पर कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया है। वहीं, इजराइल का कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं छोड़ता, सेना गाजा से नहीं हटेगी। इजराइल ने हमास को 60 दिन का समय दिया है कि वह पूरी तरह हथियार छोड़ दे। ट्रम्प के दामाद और वार्ताकार जेरेड कुशनर ने दावोस में गाजा के दक्षिणी हिस्से में छह नए शहर बसाने और समुद्री तट पर पर्यटन परियोजना बनाने की योजना पेश की थी। हालांकि, इसके लिए फंडिंग और समय-सीमा अभी तय नहीं है। इजराइल को ट्रम्प के पीस बोर्ड से नाराजगी इजराइल ट्रम्प के पीस बोर्ड को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुका है। नेतन्याहू के ऑफिस के मुताबिक, विदेश मंत्री गिदोन सार इस मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाएंगे। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि बोर्ड का कौन सा हिस्सा इजराइल को आपत्तिजनक लग रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य समस्या तुर्किए विदेश मंत्री हाकान फिदान को शामिल करने से है। तुर्किए को हमास का समर्थक माना जाता है और इजराइल के साथ इसका संबंध तनावपूर्ण हैं। तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगन ने इजराइल की गाजा कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। इजराइल का कहना है कि ऐसे देशों को गाजा के प्रशासन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इजराइली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने नेतन्याहू के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि गाजा को ‘कार्यकारी बोर्ड’ की जरूरत नहीं, बल्कि हमास को पूरी तरह खत्म करने और बड़े पैमाने पर खुद से पलायन की जरूरत है। इजराइल का आरोप- हमास फिर से संगठित हो रहा इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नदाव शोशानी ने कहा, ‘हमास युद्धविराम को फिर से संगठित होने का समय मान रहा है। जब तक उसे निरस्त्र नहीं किया जाता, युद्ध खत्म नहीं माना जा सकता।’ IDF के मुताबिक युद्धविराम के बाद भी हमास की ओर से रोजाना हमले हो रहे हैं और अब तक चार इजराइली सैनिक मारे जा चुके हैं। दूसरी ओर, गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इजराइली हमलों में युद्धविराम के बाद 603 फलस्तीनी मारे गए हैं। हाल में IDF ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें मलबे के बीच दौड़ते कुछ लोगों को हथियारबंद आतंकी बताया गया था। अब गाजा जंग को जानिए…

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राजनीति

दावा- गाजा के 90% इलाके पर हमास का कब्जा:विरोध करने वालों की सजा दे रहा; ट्रम्प बोले- पीस बोर्ड को ₹90 हजार करोड़ देंगे

दावा- गाजा के 90% इलाके पर हमास का कब्जा:विरोध करने वालों की सजा दे रहा; ट्रम्प बोले- पीस बोर्ड को ₹90 हजार करोड़ देंगे


गाजा में अक्टूबर में लागू हुए सीजफायर के बाद हालात फिर बदलते दिख रहे हैं। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक गाजा के एक कार्यकर्ता मोहम्मद दियाब का दावा है कि हमास ने उन इलाकों के 90% से ज्यादा हिस्से पर दोबारा कब्जा जमा लिया है, जहां वह पहले से मौजूद था। दियाब का कहना है कि हमास की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां फिर से सड़कों पर दिखाई दे रही हैं। वे अपराध रोकने के नाम पर कार्रवाई कर रही हैं और जिन लोगों को अपना विरोधी या सहयोगी मानती हैं, उनके खिलाफ कदम उठा रही हैं। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऐलान किया है कि अमेरिका गाजा के लिए बने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को 10 अरब डॉलर (90 हजार करोड़ रुपये) की मदद देगा। यह संगठन अंतरराष्ट्रीय विवाद सुलझाने के लिए बनाया गया है और इसकी शुरुआत गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण के मकसद से हुई थी। बोर्ड ऑफ पीस मीटिंग की 3 तस्वीर… बोर्ड की मीटिंग में 50 देश के नेता शामिल हुए ट्रम्प ने कहा कि यह रकम युद्ध पर होने वाले खर्च के मुकाबले बहुत छोटी है। उन्होंने सदस्य देशों से कहा कि अगर सभी देश साथ आएं तो उस इलाके में स्थायी शांति लाई जा सकती है, जो सदियों से युद्ध और हिंसा झेलता आया है। ट्रम्प की अध्यक्षता में बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक वॉशिंगटन में हो रही है। पहले शिखर सम्मेलन में कम से कम 50 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, विदेश मंत्री या दूत शामिल हुए। बैठक में गाजा के लिए ट्रम्प की शांति योजना पर रिपोर्ट पेश की जानी है। हालांकि टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक बोर्ड के शुरुआती दस्तावेज में गाजा का साफ तौर पर जिक्र नहीं है। ट्रम्प ने कहा कि बोर्ड का मकसद सिर्फ गाजा नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में शांति लाना है। वहीं कई यूरोपीय देशों ने इसे ट्रम्प का निजी प्रोजेक्ट बताते हुए इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है। 9 सदस्य गाजा के लिए 7 अरब डॉलर देने पर सहमत ट्रम्प ने गुरुवार को कहा कि कजाकिस्तान, अजरबैजान, UAE, मोरक्को, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान और कुवैत ने गाजा राहत के लिए 7 अरब डॉलर (63 हजार करोड़ रुपए) से ज्यादा मदद देने के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इंडोनेशिया, मोरक्को, अल्बानिया, कोसोवो और कजाकिस्तान ने गाजा में हालात संभालने के लिए अपने सैनिक और पुलिस बल भेजने का वादा किया है। ट्रम्प ने कहा कि मिस्र और जॉर्डन भी बड़ी मदद कर रहे हैं। वे सैनिक, ट्रेनिंग और एक भरोसेमंद फिलिस्तीनी पुलिस बल तैयार करने में सहयोग दे रहे हैं। ट्रम्प ने कहा कि गाजा पर खर्च किया गया हर डॉलर इलाके में स्थिरता लाने और बेहतर भविष्य बनाने में निवेश है। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि कितने सैनिक भेजे जाएंगे, वे कब तैनात होंगे और दी गई रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा। ट्रम्प के कंट्रोल में होगा पूरा पीस बोर्ड चार्टर के अनुसार, डोनाल्ड ट्रम्प को इनॉगुरल चेयरमैन (प्रथम अध्यक्ष) नामित किया गया है, और यह पद लाइफटाइम उनके द्वारा चुने गए उत्तराधिकारी तक रह सकता है। उनके पास वीटो पावर है। बोर्ड के अधिकांश फैसलों को चेयरमैन की मंजूरी चाहिए होती है, जिसका मतलब है कि ट्रम्प किसी भी निर्णय को रोक सकते हैं। बोर्ड के सदस्यों को जोड़ने, हटाने एजेंडा तय करने, सब्सिडियरी बॉडी बनाने, ग्रुप भंग करने पर ट्रम्प का पूरा कंट्रोल होगा। राष्ट्रपति पद खत्म होने के बाद भी वे चेयरमैन बने रह सकते हैं, क्योंकि यह पद उनकी राष्ट्रपति पद से स्वतंत्र है। केवल एग्जीक्यूटिव बोर्ड के सर्वसम्मति से उन्हें हटाया जा सकता है (जो व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव है, क्योंकि एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी ट्रम्प ही नियुक्त करेंगे)। कई देशों ने शामिल होने से इनकार किया कई देशों ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया है, खासकर यूरोपीय देशों और कुछ सहयोगियों ने। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी आने से इनकार कर दिया है। उनकी जगह विदेश मंत्री गिदोन सार पहुंचे। न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने स्पष्ट कहा कि बोर्ड का काम संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने बोर्ड में शामिल न होने का फैसला लिया, क्योंकि न्यूजीलैंड इसमें खास योगदान नहीं दे पाएगा । अधिकांश यूरोपीय देशों ने भी चिंता जताई है कि यह UN को कमजोर कर सकता है या ट्रम्प के व्यक्तिगत नियंत्रण वाला शरीर बन सकता है। कई G7 देशों ने भी दूरी बनाई है। शुरू में यह गाजा में युद्धविराम (2025 में हुए समझौते) को लागू करने, पुनर्निर्माण और स्थिरता के लिए था। UN सिक्योरिटी काउंसिल रेजोल्यूशन 2803 ने इसे स्वीकार किया था। गाजा में फोर्स के तैनाती की तैयारी में ट्रम्प गाजा में सुधार को लेकर ट्रम्प की 20 सूत्रीय योजना का पहला चरण सितंबर में घोषित हुआ था, जिसे तीन महीने पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने समर्थन दिया। पहले चरण में इजराइल-हमास के बीच आंशिक संघर्षविराम, मानवीय सहायता में बढ़ोतरी और बंधकों की रिहाई शामिल थी। दूसरे चरण में ISF की तैनाती और प्रशासनिक ढांचा खड़ा करना शामिल है। हालांकि, इन कदमों में देरी हो रही है। पिछले महीने एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा था कि ISF के गठन की घोषणा कुछ दिनों में हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। UN के प्रस्ताव के अनुसार, ISF को 2027 तक गाजा की सीमाओं की सुरक्षा, हथियारों को नष्ट करना, गैर-राज्य सशस्त्र समूहों के ढांचे को खत्म करने और नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी जाएगी। अब तक केवल इंडोनेशिया ने सार्वजनिक रूप से करीब 2,000 सैनिक भेजने की बात कही है। वे अप्रैल से पहले तैनात नहीं होंगे और गाजा के उस हिस्से में नहीं जाएंगे जो अभी भी इजराइली सेना के नियंत्रण में है। हमास बोला- जब तक इजराइली सेना यहां है, हथियार नहीं छोड़ेंगे दूसरी ओर हमास ने कहा है कि जब तक इजराइली सेना पूरी तरह नहीं हटती, वह हथियार नहीं डालेगा। हाल ही में हमास लीडर ओसामा हमदान ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में कहा कि संगठन ने अभी तक हथियारों पर कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया है। वहीं, इजराइल का कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं छोड़ता, सेना गाजा से नहीं हटेगी। इजराइल ने हमास को 60 दिन का समय दिया है कि वह पूरी तरह हथियार छोड़ दे। ट्रम्प के दामाद और वार्ताकार जेरेड कुशनर ने दावोस में गाजा के दक्षिणी हिस्से में छह नए शहर बसाने और समुद्री तट पर पर्यटन परियोजना बनाने की योजना पेश की थी। हालांकि, इसके लिए फंडिंग और समय-सीमा अभी तय नहीं है। इजराइल को ट्रम्प के पीस बोर्ड से नाराजगी इजराइल ट्रम्प के पीस बोर्ड को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुका है। नेतन्याहू के ऑफिस के मुताबिक, विदेश मंत्री गिदोन सार इस मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाएंगे। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि बोर्ड का कौन सा हिस्सा इजराइल को आपत्तिजनक लग रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य समस्या तुर्किए विदेश मंत्री हाकान फिदान को शामिल करने से है। तुर्किए को हमास का समर्थक माना जाता है और इजराइल के साथ इसका संबंध तनावपूर्ण हैं। तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगन ने इजराइल की गाजा कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। इजराइल का कहना है कि ऐसे देशों को गाजा के प्रशासन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इजराइली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने नेतन्याहू के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि गाजा को ‘कार्यकारी बोर्ड’ की जरूरत नहीं, बल्कि हमास को पूरी तरह खत्म करने और बड़े पैमाने पर खुद से पलायन की जरूरत है। इजराइल का आरोप- हमास फिर से संगठित हो रहा इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नदाव शोशानी ने कहा, ‘हमास युद्धविराम को फिर से संगठित होने का समय मान रहा है। जब तक उसे निरस्त्र नहीं किया जाता, युद्ध खत्म नहीं माना जा सकता।’ IDF के मुताबिक युद्धविराम के बाद भी हमास की ओर से रोजाना हमले हो रहे हैं और अब तक चार इजराइली सैनिक मारे जा चुके हैं। दूसरी ओर, गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इजराइली हमलों में युद्धविराम के बाद 603 फलस्तीनी मारे गए हैं। हाल में IDF ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें मलबे के बीच दौड़ते कुछ लोगों को हथियारबंद आतंकी बताया गया था। अब गाजा जंग को जानिए…

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