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Heat Stroke Precautions; Treatment, Prevention Tips Heatwave

Heat Stroke Precautions; Treatment, Prevention Tips Heatwave
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  • Heat Stroke Precautions; Treatment, Prevention Tips Heatwave | Summer High Temperature Risk

25 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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भारत के ज्यादातर राज्यों में (पूर्वोत्तर छोड़कर) अधिकतम तापमान 40°C से 47°C के बीच है। रविवार को यूपी, राजस्थान और महाराष्ट्र के 7 शहरों में तापमान 46°C के पार चला गया। तापमान 40°C के पार जाने पर ‘हीट स्ट्रोक’ का रिस्क बढ़ जाता है।

इस कंडीशन में बॉडी कोर टेम्परेचर मेन्टेन नहीं कर पाती। इससे ब्रेन, हार्ट और किडनी जैसे वाइटल ऑर्गन्स डैमेज हो सकते हैं। समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह कंडीशन जानलेवा भी हो सकती है।

बच्चे, बुजुर्ग और धूप में बाहर काम करने वाले लोगों को हीट स्ट्रोक का ज्यादा रिस्क होता है।

इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज हीट स्ट्रोक की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • इसके शुरुआती संकेत कैसे पहचानें?
  • हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए क्या करें?

सवाल- हीट स्ट्रोक क्या होता है?

जवाब- हीट स्ट्रोक एक इमरजेंसी मेडिकल कंडीशन है, जिसमें बॉडी टेम्परेचर बहुत ज्यादा (40°C यानी 104°F या इससे ऊपर) हो जाता है।

  • ऐसा तेज धूप या लंबे समय तक गर्म वातावरण में रहने से होता है।
  • इस कंडीशन में बॉडी की टेम्परेचर कंट्रोल करने की क्षमता (थर्मोरेगुलेशन) फेल हो जाती है।
  • इसमें सिरदर्द, उल्टी, चक्कर, बेहोशी और तेज पल्स जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
  • इससे ब्रेन, हार्ट जैसे वाइटल ऑर्गन्स डैमेज हो सकते हैं।

सवाल- हीट स्ट्रोक के शुरुआती और गंभीर लक्षण क्या हैं?

जवाब- इसके शुरुआती लक्षण डिहाइड्रेशन जैसे होते हैं। इसमें तेज प्यास, सिरदर्द और चक्कर जैसे संकेत दिख सकते हैं। समय पर इलाज न मिले तो लक्षण गंभीर हो सकते हैं। सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक में क्या अंतर है?

जवाब- हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक दोनों गर्मी से जुड़ी समस्याएं हैं, लेकिन असर और गंभीरता अलग है।

हीट एग्जॉशन

  • यह कंडीशन ज्यादा पसीने से बॉडी डिहाइड्रेट होने पर बनती है।
  • बॉडी टेम्परेचर सामान्य से थोड़ा ज्यादा (37-40°C) हो जाता है।
  • यह संकेत है कि बॉडी के कूलिंग सिस्टम को काम करने में दिक्कत हो रही है।
  • आराम करने और बॉडी हाइड्रेट करने पर इससे राहत मिल सकती है।

हीट स्ट्रोक

  • यह एक इमरजेंसी मेडिकल कंडीशन है।
  • इसमें बॉडी टेम्परेचर 40°C या उससे ज्यादा हो जाता है।
  • इसमें शरीर का कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है।
  • पसीना आना बंद हो सकता है।
  • बेहोशी, कन्फ्यूजन, तेज पल्स जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
  • तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट जरूरी होता है।

सवाल- हीट स्ट्रोक कब और किन परिस्थितियों में ज्यादा खतरनाक हो सकता है?

जवाब- इन कंडीशंस में ज्यादा खतरनाक हो सकता है-

1. बहुत ज्यादा तापमान और ह्यूमिडिटी

  • अगर तापमान 40°C से ऊपर और हवा में नमी ज्यादा हो।
  • पसीना नहीं सूखता, जिससे शरीर ठंडा नहीं हो पाता।

2. तेज धूप में लंबा समय

  • दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच धूप में रहने पर।
  • इस दौरान सूरज की किरणें सीधी होने पर ज्यादा प्रभावित करती हैं।

3. वेंटिलेशन न होने पर

  • बिना AC/पंखे वाले कमरे या गाड़ी में बैठने पर।
  • देर तक धूप में खड़ी कार के अंदर ये कंडीशन बन सकती है।

4. ओवर फिजिकल एक्टिविटी

  • इंटेंस एक्सरसाइज करने, ज्यादा खेलने या भारी काम करने पर।
  • गर्मी की आदत न होने पर ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी खतरनाक हो सकती है।

5. कमजोर या सेंसिटिव लोग

  • बुजुर्ग और छोटे बच्चों को ज्यादा रिस्क होता है।
  • हार्ट या किडनी डिजीज होने पर रिस्क बढ़ जाता है।
  • ओबीज और डायबिटिक लोगों को भी रिस्क होता है।

3. डिहाइड्रेटेड बॉडी

  • शरीर में पानी कम होने पर पसीना कम आता है।
  • इससे बॉडी कूलिंग सिस्टम फेल होने का रिस्क ज्यादा होता है।

सवाल- किन लोगों को हीट स्ट्रोक का रिस्क सबसे ज्यादा होता है और क्यों?

जवाब- कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को ज्यादा रिस्क होता है, पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

इसके पीछे की वजह विस्तार से समझें-

  • बुजुर्ग: शरीर की टेम्परेचर कंट्रोल करने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
  • छोटे बच्चे: बॉडी जल्दी डिहाइड्रेट होती है और शरीर जल्दी गर्म हो जाता है।
  • गर्भवती महिलाएं: शरीर में हॉर्मोनल और मेटाबॉलिक बदलाव होते हैं।
  • आउटडोर वर्कर/खिलाड़ी: तेज धूप और फिजिकल एक्टिविटी से बॉडी टेम्परेचर तेजी से बढ़ता है।
  • क्रॉनिक बीमारी या दवाइयां: कुछ दवाइयां पसीना और बॉडी की कूलिंग प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं।

सवाल- क्या हीट स्ट्रोक से जान भी जा सकती है?

जवाब- हां, हीट स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें समय पर इलाज न मिलने पर जान भी जा सकती है। बॉडी टेम्परेचर कंट्रोल न होने पर ब्रेन, हार्ट और किडनी जैसे वाइटल ऑर्गन्स डैमेज होने से मौत हो सकती है।

सवाल- अगर किसी व्यक्ति को हीट स्ट्रोक हो जाए तो उसे तुरंत क्या करना चाहिए?

जवाब- हीट स्ट्रोक हो तो करें ये काम-

  • अगर व्यक्ति धूप या गर्म जगह पर है तो उसे ठंडी, छायादार जगह ले जाएं।
  • आराम से लिटाएं, सिर थोड़ा ऊंचा रखें।
  • कपड़े टाइट हों तो ढीले कर दें, ताकि शरीर की गर्मी बाहर निकल सके।
  • शरीर को ठंडा करने के लिए गीले कपड़े से पोछें या ठंडे पानी की पट्टियां रखें।
  • पंखा या कूलर की हवा दें, ताकि बॉडी टेम्परेचर धीरे-धीरे कम हो।
  • अगर व्यक्ति होश में है, तो उसे थोड़ा-थोड़ा पानी या ORS दें।
  • बेहोशी, उल्टी या दौरे की कंडीशन में तुरंत एंबुलेंस बुलाएं।
  • स्थिति गंभीर लगे तो बिना देर किए अस्पताल ले जाएं।

सवाल- हीट स्ट्रोक होने पर कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?

जवाब- हीट स्ट्रोक होने पर इन गलतियों से बचें-

  • व्यक्ति को गर्म या भीड़भाड़ वाली जगह पर न छोड़ें।
  • बेहोश व्यक्ति को जबरदस्ती पानी या ORS न पिलाएं।
  • शरीर पर बहुत ठंडा या बर्फ वाला पानी न डालें।
  • हॉस्पिटल ले जाने और इलाज में देरी न करें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न दें।

सवाल- गर्मियों में हीट स्ट्रोक से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब- इसके लिए बरतें ये सावधानियां-

  • दिनभर पर्याप्त पानी पिएं। ORS या नींबू पानी भी लेते रहें।
  • दोपहर 12-4 बजे के बीच तेज धूप में बाहर जाने से बचें।
  • हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनें।
  • बाहर जाते समय टोपी, छाता और सनग्लास का उपयोग करें।
  • अगर धूप में रहना मजबूरी है तो बीच-बीच में छायादार जगह पर आराम करें।
  • शराब, कैफीन और ऑयली फूड न लें।

सवाल- अगर किसी के जॉब का नेचर ऐसा है कि उसे बहुत ज्यादा आउटडोर रहना पड़ता है तो उसे गर्मियों में हीट स्ट्रोक से बचने के लिए किन बातों का ख्याल रखना चाहिए?

जवाब- अगर दिन में बाहर रहकर काम करना मजबूरी है तो करें ये काम-

  • काम के बीच में हर आधे घंटे में छायादार या ठंडी जगह पर ब्रेक लें।
  • हर 20-30 मिनट में पानी या ORS लेते रहें।
  • धूप से बचाव करें। टोपी, कैप या गमछा जरूर पहनें।
  • हल्के रंग के, ढीले और सूती कपड़े पहनें।
  • दोपहर की तेज गर्मी में भारी काम न करें या समय बदलें।
  • चक्कर, थकान या सिरदर्द हो तो तुरंत रुककर आराम करें।
  • संतुलित डाइट लें और रोज नींद पूरी करें।

सवाल- कौन-से ड्रिंक्स हीट स्ट्रोक से बचाने में मददगार हैं?

जवाब- गर्मियों में शरीर से पसीने के साथ पानी और इलेक्ट्रोलाइट (सोडियम, पोटेशियम) निकल जाते हैं। इसलिए इन्हें पूरा करना जरूरी होता है। इसके लिए ये ड्रिंक्स लें-

सवाल- बच्चों, बुजुर्गों को हीट स्ट्रोक से प्रोटेक्ट करने के लिए क्या करें?

जवाब- बच्चों और बुजुर्गों को हीट स्ट्रोक से बचाने के उपाय-

  • दोपहर 12-4 बजे के बीच धूप में बाहर न जाने दें।
  • उन्हें समय-समय पर पानी, नींबू पानी या अन्य समर ड्रिंक्स देते रहें।
  • हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनाएं।
  • घर को ठंडा रखें, वेंटिलेशन बनाए रखें।
  • बाहर जाते समय टोपी, छाता या गमछा लेने को कहें।
  • लंबे समय तक धूप या गर्म कमरे में न रहने दें।
  • कमजोरी या ज्यादा प्यास लगे तो तुरंत ठंडी जगह पर आराम कराएं।

सवाल- कैसे पता करेंगे कि स्थिति गंभीर है और तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है?

जवाब- ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत हॉस्पिटल ले जाएं-

  • बॉडी टेम्परेचर बहुत ज्यादा (104°F या इससे ऊपर) हो जाए।
  • व्यक्ति बेहोश हो जाए या जवाब देना बंद कर दे।
  • बार-बार उल्टी हो या लगातार तेज सिरदर्द बना रहे।
  • कन्फ्यूजन या अजीब व्यवहार दिखे।
  • स्किन बहुत गर्म, रेड और ड्राई लगे।
  • हार्ट बीट तेज हो या सांस लेने में दिक्कत हो।
  • दौरे पड़ें या चलने-बोलने में परेशानी हो।
  • एनवार्नमेंट ठंडा करने के बाद भी हालत में सुधार न हो।

……………… ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- गर्मियों में बढ़ता हार्ट अटैक का रिस्क: कार्डियोलॉजिस्ट से समझें इसका साइंस, हार्ट को करें प्रोटेक्ट, 6 बातें ध्यान रखें

गर्मियों में पसीने और थकान की समस्या कॉमन है। इस दौरान हार्ट बीट में बदलाव भी होता है। अमूमन लोग इसे मौसम का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन तेज गर्मी में डिहाइड्रेशन के कारण ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है। इसके चलते हार्ट पर वर्कलोड बढ़ सकता है। आगे पढ़िए…

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25 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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भारत के ज्यादातर राज्यों में (पूर्वोत्तर छोड़कर) अधिकतम तापमान 40°C से 47°C के बीच है। रविवार को यूपी, राजस्थान और महाराष्ट्र के 7 शहरों में तापमान 46°C के पार चला गया। तापमान 40°C के पार जाने पर ‘हीट स्ट्रोक’ का रिस्क बढ़ जाता है।

इस कंडीशन में बॉडी कोर टेम्परेचर मेन्टेन नहीं कर पाती। इससे ब्रेन, हार्ट और किडनी जैसे वाइटल ऑर्गन्स डैमेज हो सकते हैं। समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह कंडीशन जानलेवा भी हो सकती है।

बच्चे, बुजुर्ग और धूप में बाहर काम करने वाले लोगों को हीट स्ट्रोक का ज्यादा रिस्क होता है।

इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज हीट स्ट्रोक की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • इसके शुरुआती संकेत कैसे पहचानें?
  • हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए क्या करें?

सवाल- हीट स्ट्रोक क्या होता है?

जवाब- हीट स्ट्रोक एक इमरजेंसी मेडिकल कंडीशन है, जिसमें बॉडी टेम्परेचर बहुत ज्यादा (40°C यानी 104°F या इससे ऊपर) हो जाता है।

  • ऐसा तेज धूप या लंबे समय तक गर्म वातावरण में रहने से होता है।
  • इस कंडीशन में बॉडी की टेम्परेचर कंट्रोल करने की क्षमता (थर्मोरेगुलेशन) फेल हो जाती है।
  • इसमें सिरदर्द, उल्टी, चक्कर, बेहोशी और तेज पल्स जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
  • इससे ब्रेन, हार्ट जैसे वाइटल ऑर्गन्स डैमेज हो सकते हैं।

सवाल- हीट स्ट्रोक के शुरुआती और गंभीर लक्षण क्या हैं?

जवाब- इसके शुरुआती लक्षण डिहाइड्रेशन जैसे होते हैं। इसमें तेज प्यास, सिरदर्द और चक्कर जैसे संकेत दिख सकते हैं। समय पर इलाज न मिले तो लक्षण गंभीर हो सकते हैं। सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक में क्या अंतर है?

जवाब- हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक दोनों गर्मी से जुड़ी समस्याएं हैं, लेकिन असर और गंभीरता अलग है।

हीट एग्जॉशन

  • यह कंडीशन ज्यादा पसीने से बॉडी डिहाइड्रेट होने पर बनती है।
  • बॉडी टेम्परेचर सामान्य से थोड़ा ज्यादा (37-40°C) हो जाता है।
  • यह संकेत है कि बॉडी के कूलिंग सिस्टम को काम करने में दिक्कत हो रही है।
  • आराम करने और बॉडी हाइड्रेट करने पर इससे राहत मिल सकती है।

हीट स्ट्रोक

  • यह एक इमरजेंसी मेडिकल कंडीशन है।
  • इसमें बॉडी टेम्परेचर 40°C या उससे ज्यादा हो जाता है।
  • इसमें शरीर का कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है।
  • पसीना आना बंद हो सकता है।
  • बेहोशी, कन्फ्यूजन, तेज पल्स जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
  • तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट जरूरी होता है।

सवाल- हीट स्ट्रोक कब और किन परिस्थितियों में ज्यादा खतरनाक हो सकता है?

जवाब- इन कंडीशंस में ज्यादा खतरनाक हो सकता है-

1. बहुत ज्यादा तापमान और ह्यूमिडिटी

  • अगर तापमान 40°C से ऊपर और हवा में नमी ज्यादा हो।
  • पसीना नहीं सूखता, जिससे शरीर ठंडा नहीं हो पाता।

2. तेज धूप में लंबा समय

  • दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच धूप में रहने पर।
  • इस दौरान सूरज की किरणें सीधी होने पर ज्यादा प्रभावित करती हैं।

3. वेंटिलेशन न होने पर

  • बिना AC/पंखे वाले कमरे या गाड़ी में बैठने पर।
  • देर तक धूप में खड़ी कार के अंदर ये कंडीशन बन सकती है।

4. ओवर फिजिकल एक्टिविटी

  • इंटेंस एक्सरसाइज करने, ज्यादा खेलने या भारी काम करने पर।
  • गर्मी की आदत न होने पर ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी खतरनाक हो सकती है।

5. कमजोर या सेंसिटिव लोग

  • बुजुर्ग और छोटे बच्चों को ज्यादा रिस्क होता है।
  • हार्ट या किडनी डिजीज होने पर रिस्क बढ़ जाता है।
  • ओबीज और डायबिटिक लोगों को भी रिस्क होता है।

3. डिहाइड्रेटेड बॉडी

  • शरीर में पानी कम होने पर पसीना कम आता है।
  • इससे बॉडी कूलिंग सिस्टम फेल होने का रिस्क ज्यादा होता है।

सवाल- किन लोगों को हीट स्ट्रोक का रिस्क सबसे ज्यादा होता है और क्यों?

जवाब- कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को ज्यादा रिस्क होता है, पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

इसके पीछे की वजह विस्तार से समझें-

  • बुजुर्ग: शरीर की टेम्परेचर कंट्रोल करने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
  • छोटे बच्चे: बॉडी जल्दी डिहाइड्रेट होती है और शरीर जल्दी गर्म हो जाता है।
  • गर्भवती महिलाएं: शरीर में हॉर्मोनल और मेटाबॉलिक बदलाव होते हैं।
  • आउटडोर वर्कर/खिलाड़ी: तेज धूप और फिजिकल एक्टिविटी से बॉडी टेम्परेचर तेजी से बढ़ता है।
  • क्रॉनिक बीमारी या दवाइयां: कुछ दवाइयां पसीना और बॉडी की कूलिंग प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं।

सवाल- क्या हीट स्ट्रोक से जान भी जा सकती है?

जवाब- हां, हीट स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें समय पर इलाज न मिलने पर जान भी जा सकती है। बॉडी टेम्परेचर कंट्रोल न होने पर ब्रेन, हार्ट और किडनी जैसे वाइटल ऑर्गन्स डैमेज होने से मौत हो सकती है।

सवाल- अगर किसी व्यक्ति को हीट स्ट्रोक हो जाए तो उसे तुरंत क्या करना चाहिए?

जवाब- हीट स्ट्रोक हो तो करें ये काम-

  • अगर व्यक्ति धूप या गर्म जगह पर है तो उसे ठंडी, छायादार जगह ले जाएं।
  • आराम से लिटाएं, सिर थोड़ा ऊंचा रखें।
  • कपड़े टाइट हों तो ढीले कर दें, ताकि शरीर की गर्मी बाहर निकल सके।
  • शरीर को ठंडा करने के लिए गीले कपड़े से पोछें या ठंडे पानी की पट्टियां रखें।
  • पंखा या कूलर की हवा दें, ताकि बॉडी टेम्परेचर धीरे-धीरे कम हो।
  • अगर व्यक्ति होश में है, तो उसे थोड़ा-थोड़ा पानी या ORS दें।
  • बेहोशी, उल्टी या दौरे की कंडीशन में तुरंत एंबुलेंस बुलाएं।
  • स्थिति गंभीर लगे तो बिना देर किए अस्पताल ले जाएं।

सवाल- हीट स्ट्रोक होने पर कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?

जवाब- हीट स्ट्रोक होने पर इन गलतियों से बचें-

  • व्यक्ति को गर्म या भीड़भाड़ वाली जगह पर न छोड़ें।
  • बेहोश व्यक्ति को जबरदस्ती पानी या ORS न पिलाएं।
  • शरीर पर बहुत ठंडा या बर्फ वाला पानी न डालें।
  • हॉस्पिटल ले जाने और इलाज में देरी न करें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न दें।

सवाल- गर्मियों में हीट स्ट्रोक से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब- इसके लिए बरतें ये सावधानियां-

  • दिनभर पर्याप्त पानी पिएं। ORS या नींबू पानी भी लेते रहें।
  • दोपहर 12-4 बजे के बीच तेज धूप में बाहर जाने से बचें।
  • हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनें।
  • बाहर जाते समय टोपी, छाता और सनग्लास का उपयोग करें।
  • अगर धूप में रहना मजबूरी है तो बीच-बीच में छायादार जगह पर आराम करें।
  • शराब, कैफीन और ऑयली फूड न लें।

सवाल- अगर किसी के जॉब का नेचर ऐसा है कि उसे बहुत ज्यादा आउटडोर रहना पड़ता है तो उसे गर्मियों में हीट स्ट्रोक से बचने के लिए किन बातों का ख्याल रखना चाहिए?

जवाब- अगर दिन में बाहर रहकर काम करना मजबूरी है तो करें ये काम-

  • काम के बीच में हर आधे घंटे में छायादार या ठंडी जगह पर ब्रेक लें।
  • हर 20-30 मिनट में पानी या ORS लेते रहें।
  • धूप से बचाव करें। टोपी, कैप या गमछा जरूर पहनें।
  • हल्के रंग के, ढीले और सूती कपड़े पहनें।
  • दोपहर की तेज गर्मी में भारी काम न करें या समय बदलें।
  • चक्कर, थकान या सिरदर्द हो तो तुरंत रुककर आराम करें।
  • संतुलित डाइट लें और रोज नींद पूरी करें।

सवाल- कौन-से ड्रिंक्स हीट स्ट्रोक से बचाने में मददगार हैं?

जवाब- गर्मियों में शरीर से पसीने के साथ पानी और इलेक्ट्रोलाइट (सोडियम, पोटेशियम) निकल जाते हैं। इसलिए इन्हें पूरा करना जरूरी होता है। इसके लिए ये ड्रिंक्स लें-

सवाल- बच्चों, बुजुर्गों को हीट स्ट्रोक से प्रोटेक्ट करने के लिए क्या करें?

जवाब- बच्चों और बुजुर्गों को हीट स्ट्रोक से बचाने के उपाय-

  • दोपहर 12-4 बजे के बीच धूप में बाहर न जाने दें।
  • उन्हें समय-समय पर पानी, नींबू पानी या अन्य समर ड्रिंक्स देते रहें।
  • हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनाएं।
  • घर को ठंडा रखें, वेंटिलेशन बनाए रखें।
  • बाहर जाते समय टोपी, छाता या गमछा लेने को कहें।
  • लंबे समय तक धूप या गर्म कमरे में न रहने दें।
  • कमजोरी या ज्यादा प्यास लगे तो तुरंत ठंडी जगह पर आराम कराएं।

सवाल- कैसे पता करेंगे कि स्थिति गंभीर है और तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है?

जवाब- ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत हॉस्पिटल ले जाएं-

  • बॉडी टेम्परेचर बहुत ज्यादा (104°F या इससे ऊपर) हो जाए।
  • व्यक्ति बेहोश हो जाए या जवाब देना बंद कर दे।
  • बार-बार उल्टी हो या लगातार तेज सिरदर्द बना रहे।
  • कन्फ्यूजन या अजीब व्यवहार दिखे।
  • स्किन बहुत गर्म, रेड और ड्राई लगे।
  • हार्ट बीट तेज हो या सांस लेने में दिक्कत हो।
  • दौरे पड़ें या चलने-बोलने में परेशानी हो।
  • एनवार्नमेंट ठंडा करने के बाद भी हालत में सुधार न हो।

……………… ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- गर्मियों में बढ़ता हार्ट अटैक का रिस्क: कार्डियोलॉजिस्ट से समझें इसका साइंस, हार्ट को करें प्रोटेक्ट, 6 बातें ध्यान रखें

गर्मियों में पसीने और थकान की समस्या कॉमन है। इस दौरान हार्ट बीट में बदलाव भी होता है। अमूमन लोग इसे मौसम का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन तेज गर्मी में डिहाइड्रेशन के कारण ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है। इसके चलते हार्ट पर वर्कलोड बढ़ सकता है। आगे पढ़िए…

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