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Liver Disease: लिवर की ये दो बीमारियां क्यों हैं अलग-अलग? एक्सपर्ट से जानें फैटी लिवर और हेपेटाइटिस का अंतर

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Fatty Liver vs Hepatitis: फैटी लिवर डिजीज और हेपेटाइटिस आज के समय में तेजी से बढ़ने वाली लिवर संबंधी समस्याएं हैं. कई लोग इन दोनों बीमारियों को एक जैसा मान लेते हैं, लेकिन वास्तव में इनके कारण, लक्षण और इलाज अलग-अलग होते हैं. यहां आप एक्सपर्ट से दोनों के बीच के अंतर को समझ सकते हैं.

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लिवर हमारे शरीर का बहुत जरूरी अंग है. खाना पचाने से लेकर शरीर से गंदे तत्व बाहर निकालने और शरीर को ऊर्जा देने का काम करता है. इसलिए लिवर का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है. लेकिन आज के समय में फैटी लिवर और हेपेटाइटिस की समस्या बहुत कॉमन होती जा रही है.

हालांकि दोनों बीमारी ही लिवर में खराबी से संबंधित है, लेकिन फिर भी दोनों में अंतर है. वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर डायरेक्टर एंड हेड डॉ. शुभाशीष मजूमदार ने बताया कि इन दोनों बीमारियों में सबसे बड़ा अंतर यह है कि फैटी लिवर में चर्बी जमा होती है, जबकि हेपेटाइटिस में लिवर में सूजन और संक्रमण होता है. फैटी लिवर ज्यादातर खराब लाइफस्टाइल से जुड़ा होता है, जबकि हेपेटाइटिस कई बार संक्रमण के कारण फैलता है.

फैटी लिवर में क्या होता है?
फैटी लिवर की समस्या तब होती है जब लिवर में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा होने लगती है. यह बीमारी अक्सर गलत खानपान, मोटापा, डायबिटीज, ज्यादा शराब पीने और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण होती है. लंबे समय तक बैठे रहने और बाहर का तला-भुना खाना खाने से भी इसका खतरा बढ़ जाता है.

शुरुआत में फैटी लिवर के लक्षण- कई लोगों को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि उनका लिवर प्रभावित हो रहा है. हालांकि कुछ लोगों को थकान, कमजोरी या पेट के ऊपरी हिस्से में भारीपन महसूस हो सकता है. अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या आगे चलकर लिवर में सूजन और नुकसान का कारण बन सकती है.

हेपेटाइटिस क्या होता है?
हेपेटाइटिस लिवर में सूजन की बीमारी है. यह अक्सर वायरस संक्रमण की वजह से होता है, जैसे हेपेटाइटिस A, B और C. इसके अलावा ज्यादा शराब पीना, कुछ दवाइयों का अधिक सेवन या शरीर की प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी समस्याएं भी इसका कारण बन सकती हैं. हेपेटाइटिस में लिवर की कोशिकाएं सूज जाती हैं और सही तरीके से काम नहीं कर पातीं.

शुरुआती लक्षण- इस बीमारी में बुखार, भूख कम लगना, उल्टी, शरीर दर्द और आंखों या त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. गंभीर मामलों में यह लिवर सिरोसिस या लिवर फेलियर जैसी खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है.

लिवर को हेल्दी रखने का उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ भोजन, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रित रखना और शराब से दूरी बनाकर फैटी लिवर से बचा जा सकता है. वहीं हेपेटाइटिस से बचाव के लिए साफ-सफाई, सुरक्षित इंजेक्शन और जरूरी वैक्सीन लगवाना बहुत जरूरी है. समय-समय पर जांच करवाने से लिवर की बीमारी का जल्दी पता लगाया जा सकता है और गंभीर परेशानी से बचा जा सकता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

About the Author

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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Fatty Liver vs Hepatitis: फैटी लिवर डिजीज और हेपेटाइटिस आज के समय में तेजी से बढ़ने वाली लिवर संबंधी समस्याएं हैं. कई लोग इन दोनों बीमारियों को एक जैसा मान लेते हैं, लेकिन वास्तव में इनके कारण, लक्षण और इलाज अलग-अलग होते हैं. यहां आप एक्सपर्ट से दोनों के बीच के अंतर को समझ सकते हैं.

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लिवर हमारे शरीर का बहुत जरूरी अंग है. खाना पचाने से लेकर शरीर से गंदे तत्व बाहर निकालने और शरीर को ऊर्जा देने का काम करता है. इसलिए लिवर का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है. लेकिन आज के समय में फैटी लिवर और हेपेटाइटिस की समस्या बहुत कॉमन होती जा रही है.

हालांकि दोनों बीमारी ही लिवर में खराबी से संबंधित है, लेकिन फिर भी दोनों में अंतर है. वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर डायरेक्टर एंड हेड डॉ. शुभाशीष मजूमदार ने बताया कि इन दोनों बीमारियों में सबसे बड़ा अंतर यह है कि फैटी लिवर में चर्बी जमा होती है, जबकि हेपेटाइटिस में लिवर में सूजन और संक्रमण होता है. फैटी लिवर ज्यादातर खराब लाइफस्टाइल से जुड़ा होता है, जबकि हेपेटाइटिस कई बार संक्रमण के कारण फैलता है.

फैटी लिवर में क्या होता है?
फैटी लिवर की समस्या तब होती है जब लिवर में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा होने लगती है. यह बीमारी अक्सर गलत खानपान, मोटापा, डायबिटीज, ज्यादा शराब पीने और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण होती है. लंबे समय तक बैठे रहने और बाहर का तला-भुना खाना खाने से भी इसका खतरा बढ़ जाता है.

शुरुआत में फैटी लिवर के लक्षण- कई लोगों को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि उनका लिवर प्रभावित हो रहा है. हालांकि कुछ लोगों को थकान, कमजोरी या पेट के ऊपरी हिस्से में भारीपन महसूस हो सकता है. अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या आगे चलकर लिवर में सूजन और नुकसान का कारण बन सकती है.

हेपेटाइटिस क्या होता है?
हेपेटाइटिस लिवर में सूजन की बीमारी है. यह अक्सर वायरस संक्रमण की वजह से होता है, जैसे हेपेटाइटिस A, B और C. इसके अलावा ज्यादा शराब पीना, कुछ दवाइयों का अधिक सेवन या शरीर की प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी समस्याएं भी इसका कारण बन सकती हैं. हेपेटाइटिस में लिवर की कोशिकाएं सूज जाती हैं और सही तरीके से काम नहीं कर पातीं.

शुरुआती लक्षण- इस बीमारी में बुखार, भूख कम लगना, उल्टी, शरीर दर्द और आंखों या त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. गंभीर मामलों में यह लिवर सिरोसिस या लिवर फेलियर जैसी खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है.

लिवर को हेल्दी रखने का उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ भोजन, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रित रखना और शराब से दूरी बनाकर फैटी लिवर से बचा जा सकता है. वहीं हेपेटाइटिस से बचाव के लिए साफ-सफाई, सुरक्षित इंजेक्शन और जरूरी वैक्सीन लगवाना बहुत जरूरी है. समय-समय पर जांच करवाने से लिवर की बीमारी का जल्दी पता लगाया जा सकता है और गंभीर परेशानी से बचा जा सकता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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