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फेंकने से पहले जान लें आम की गुठली के फायदे, शुगर से लेकर मोटापे तक कंट्रोल करती है ये घरेलू औषधि

X फेंकने से पहले जान लें आम की गुठली के फायदे, शुगर से मोटापा तक करती है कंट्रोल   Aam Ki Guthli Ke Fayde: आम का गूदा खाने के बाद फेंक दी जाने वाली गुठली सेहत के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है, जो ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और वजन घटाने जैसी कई समस्याओं में बेहद फायदेमंद साबित होती है. मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर के आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, इसका उपयोग करने के लिए गुठली को धूप में अच्छी तरह सुखाकर उसके अंदर का हिस्सा निकाल लें और फिर उसका पाउडर बनाकर या सीधे खाली पेट ताजे पानी के साथ सीमित मात्रा में सेवन करें. हालांकि, इसके बेहतरीन फायदों के बावजूद इसका जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसानदेह हो सकता है, इसलिए किसी गंभीर बीमारी या पहले से दवा चलने की स्थिति में व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य के हिसाब से इसकी सही खुराक तय करने के लिए आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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Health Tips: गर्मी में अमृत समान हरा पुदीना, पेट, त्वचा और शरीर को देता है ठंडक व ताजगी, जाने इसके फायदे

गर्मी के मौसम में हरा पुदीना शरीर को ठंडक देने, पेट की समस्याओं से राहत पहुंचाने और ताजगी बनाए रखने में बेहद फायदेमंद माना जाता है. चटनी, शरबत और घरेलू नुस्खों में इस्तेमाल होने वाला पुदीना त्वचा, सिरदर्द और मुंह की बदबू जैसी समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है.

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प्लेट छोड़िए, पत्ता अपनाइए, जानिए केले के पत्ते पर खाने के फायदे और परंपरा के पीछे का विज्ञान

Last Updated:May 21, 2026, 21:25 IST Benefits of Eating Food on Banana Leaves: दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन परोसने की परंपरा स्वास्थ्य, संस्कृति और पर्यावरण का अनूठा संगम माना जाता है. इसमें पत्ते की प्राकृतिक संरचना का उपयोग कर भोजन को अधिक स्वादिष्ट और सुरक्षित बनाया जाता है. गरम भोजन परोसने से पत्ते के प्राकृतिक यौगिक भोजन में मिलकर पाचन और इम्युनिटी को लाभ पहुंचाते हैं. पत्ते में मौजूद पॉलीफेनोल्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स गरम भोजन के संपर्क में आकर स्वास्थ्य लाभ देते हैं. यह परंपरा प्लास्टिक मुक्त और इको-फ्रेंडली है और पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाती है. मंदिरों और घरों में इसका विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है. दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन करना स्वास्थ्य, पर्यावरण और संस्कृति का अनूठा संगम माना जाता है. गरमा-गरम भोजन परोसने से पत्ते में मौजूद पॉलीफेनोल्स जैसे प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट भोजन में मिल जाते हैं जो पाचन और सेहत के लिए लाभकारी होते हैं. यह परंपरा केमिकल-मुक्त और इको-फ्रेंडली मानी जाती है और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है. इसके साथ ही यह मेहमान-नवाजी और समृद्धि का प्रतीक है. पत्ते को बिछाने, धोने और मोड़ने की प्रक्रिया में सांस्कृतिक शिष्टाचार भी जुड़ा होता है. दक्षिण भारतीय घरों और मंदिरों में इसका विशेष महत्व है और यह परंपरा आज भी प्रचलित है. केले के पत्तों में पॉलीफेनोल्स एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो ग्रीन टी में भी मौजूद होते हैं. जब गरम भोजन इन पत्तों पर परोसा जाता है तो इनमें मौजूद जैव सक्रिय यौगिक भोजन में मिल जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं. ये तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को मजबूत करते हैं और पाचन तंत्र को सुधारते हैं. यह परंपरा सांस्कृतिक के साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी उपयोगी मानी जाती है. केले के पत्तों का उपयोग पर्यावरण के लिए सुरक्षित और इको-फ्रेंडली है. यह भोजन को प्राकृतिक सुगंध भी प्रदान करते हैं स्वाद बढ़ाता है. होटलों या शादियों में अक्सर प्लास्टिक या धातु की प्लेटों को साफ करने के लिए डिटर्जेंट और केमिकल वाले डिशवॉशर का उपयोग किया जाता है, जिनके सूक्ष्म अंश सतह पर रह जाने की संभावना रहती है. इसके विपरीत, केले के पत्ते प्राकृतिक रूप से शुद्ध और केमिकल-मुक्त होते हैं. इन्हें इस्तेमाल करने से पहले केवल साफ पानी से हल्का धोना पर्याप्त होता है. इनमें किसी भी प्रकार का कृत्रिम कोटिंग या प्रसंस्करण नहीं होता, जिससे भोजन पूरी तरह प्राकृतिक सतह पर परोसा जाता है. यह न केवल स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी टिकाऊ और इको-फ्रेंडली विकल्प है. Add News18 as Preferred Source on Google केले के पत्ते की ऊपरी सतह पर प्राकृतिक रूप से एक मोम जैसी पतली परत पाई जाती है. जब इस पर गरमा-गरम भोजन जैसे चावल, सांभर या रसम परोसा जाता है तो यह परत हल्की गर्मी से सक्रिय होकर भोजन में एक खास सुगंध और स्वाद जोड़ देती है. इससे खाने का स्वाद और भी अधिक बढ़ जाता है और एक पारंपरिक देसी अनुभव मिलता है. यह प्राकृतिक प्रक्रिया भोजन को हल्की सौंधी खुशबू प्रदान करती है जो इंद्रियों को आकर्षित करती है. यही कारण है कि दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन करना स्वाद और संस्कृति दोनों के लिए विशेष माना जाता है. केले के पत्ते पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में माने जाते हैं और डिस्पोजेबल प्लास्टिक या थर्माकोल की प्लेटों का बेहतरीन विकल्प हैं. इनका उपयोग एक बार भोजन परोसने के बाद किया जाता है, जिसके बाद इन्हें आसानी से नष्ट किया जा सकता है. ये प्राकृतिक रूप से जल्दी सड़कर मिट्टी में मिल जाते हैं और कुछ समय बाद जैविक खाद में बदल जाते हैं. इससे न तो प्लास्टिक कचरा बढ़ता है और न ही पर्यावरण प्रदूषण होता है. यह परंपरा टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देती है और प्रकृति संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन परोसने की परंपरा के पीछे सांस्कृतिक और व्यावहारिक मान्यताएं हैं. पत्ता हमेशा इस तरह बिछाया जाता है कि उसका चौड़ा हिस्सा दाईं ओर और नुकीला हिस्सा बाईं ओर रहे. ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि अधिकतर लोग दाएं हाथ से भोजन करते हैं जिससे दाईं ओर अधिक जगह मिलती है और चावल व मुख्य व्यंजन आसानी से परोसे जाते हैं. पत्ते के ऊपरी हिस्से में नमक, अचार, चटनी, सूखी सब्जियां और मिठाई रखी जाती हैं. निचले हिस्से में चावल, सांबर और रसम जैसे मुख्य व्यंजन परोसे जाते हैं. यह परंपरा स्वाद और व्यवस्था दोनों को संतुलित बनाती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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अर्जुन की छाल के फायदे I health benefits of arjun chhaal

Last Updated:May 21, 2026, 20:32 IST Benefits of Arjun Chaal: अर्जुन की छाल को आयुर्वेद में पेट की गर्मी, गैस, एसिडिटी और सीने की जलन से राहत दिलाने वाला प्राकृतिक उपाय माना जाता है. यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने और पेट की सूजन कम करने में मददगार हो सकती है. हालांकि इसका सेवन हमेशा सीमित मात्रा और विशेषज्ञ की सलाह के साथ ही करना चाहिए. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में लोग आज भी कई बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक और पारंपरिक उपचार अपनाते हैं. अर्जुन की छाल भी इन्हीं घरेलू नुस्खों का अहम हिस्सा मानी जाती है. पुराने समय से पेट की गर्मी, गैस और सीने की जलन में इसका उपयोग किया जाता रहा है. पहाड़ों में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों पर लोगों का भरोसा आज भी कायम है. प्राकृतिक चीजों का सही तरीके से उपयोग स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है. हालांकि आधुनिक जीवनशैली और खानपान के कारण कई समस्याएं बढ़ रही हैं. ऐसे में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या अपनाना भी जरूरी माना जाता है. अर्जुन की छाल फायदेमंद जरूर मानी जाती है, लेकिन इसका सेवन सोच-समझकर करना चाहिए. हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और बीमारी अलग होती है, इसलिए बिना सलाह के किसी भी औषधि का अधिक उपयोग नुकसान पहुंचा सकता है. खासकर जिन लोगों को पहले से कोई गंभीर बीमारी है, जो नियमित दवाइयां लेते हैं. उन्हें डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. आयुर्वेदिक चीजों का सही मात्रा और सही तरीके से सेवन ही लाभ देता है. यदि पेट की जलन, गैस या एसिडिटी लगातार बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर जांच और सही उपचार जरूरी होता है. अर्जुन की छाल का सेवन कई तरीकों से किया जाता है. कुछ लोग इसका काढ़ा बनाकर पीते हैं, जबकि कई लोग इसका पाउडर गुनगुने पानी के साथ लेते हैं. सुबह खाली पेट या भोजन के बाद सीमित मात्रा में इसका सेवन किया जा सकता है. काढ़ा बनाने के लिए इसकी छाल को पानी में उबालकर तैयार किया जाता है. यह तरीका पारंपरिक रूप से काफी लोकप्रिय है. वहीं पाउडर रूप में इसका उपयोग करना भी आसान माना जाता है. हालांकि हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति अलग होती है, इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर माना जाता है. सही मात्रा में सेवन करने पर इसके बेहतर परिणाम मिल सकते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google अर्जुन की छाल सिर्फ पेट की गर्मी कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में भी मददगार मानी जाती है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व भोजन को पचाने की प्रक्रिया को बेहतर करते हैं. जिन लोगों को खाना खाने के बाद भारीपन या अपच की शिकायत रहती है, उन्हें इससे लाभ मिल सकता है. अर्जुन की छाल पेट और आंतों को शांत रखने का काम करती है. इससे पाचन धीरे-धीरे बेहतर हो सकता है. ग्रामीण इलाकों में लोग इसे घरेलू औषधि के रूप में इस्तेमाल करते हैं. हालांकि किसी भी आयुर्वेदिक चीज का अत्यधिक सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है. कई लोगों को भोजन के बाद पेट फूलने और गैस बनने की समस्या रहती है. यह परेशानी गलत खानपान, तली-भुनी चीजों और कमजोर पाचन के कारण बढ़ सकती है. डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि अर्जुन की छाल पेट को संतुलित रखने में मदद करती है. इसमें ऐसे गुण मौजूद होते हैं, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं. अर्जुन की छाल का सेवन करने से गैस बनने की समस्या में राहत मिल सकती है. खासकर खट्टी डकार और पेट में भारीपन महसूस होने पर लोग इसका उपयोग करते हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में कई परिवार आज भी घरेलू नुस्खे के रूप में इसका इस्तेमाल करते हैं. सही खानपान के साथ इसका सेवन अधिक लाभकारी माना जाता है. अर्जुन की छाल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की सूजन को कम करने में सहायक हो सकते हैं. पेट और आंतों में सूजन होने पर कई बार जलन, गैस और दर्द जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. ऐसे में अर्जुन की छाल राहत देने का काम कर सकती है. आयुर्वेद में इसे प्राकृतिक औषधि के रूप में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है. यह पेट को शांत रखने और एसिडिटी कम करने में मददगार साबित हो सकती है. इसके नियमित और संतुलित सेवन से पाचन तंत्र को लाभ मिल सकता है. हालांकि किसी गंभीर बीमारी में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहना सही नहीं माना जाता है. जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है. बागेश्वर समेत पहाड़ी इलाकों में आयुर्वेदिक औषधियों का इस्तेमाल लंबे समय से होता आ रहा है. इन्हीं में अर्जुन की छाल को बेहद उपयोगी माना जाता है. इसकी तासीर ठंडी होती है, जो शरीर और पेट की अतिरिक्त गर्मी को कम करने में मदद करती है. गर्मियों में कई लोगों को पेट में जलन, भारीपन और बेचैनी की समस्या रहती है. ऐसे में अर्जुन की छाल का सेवन राहत पहुंचा सकता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर को अंदर से ठंडक देने का काम करते हैं. इसे पारंपरिक घरेलू उपचार के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. नियमित और सही मात्रा में सेवन करने पर पेट को आराम मिल सकता है. आजकल गलत खानपान और अनियमित दिनचर्या के कारण एसिडिटी की समस्या तेजी से बढ़ रही है. कई लोग सीने में जलन, खट्टी डकार और गले में जलन से परेशान रहते हैं. आयुर्वेद में अर्जुन की छाल को इन समस्याओं में लाभकारी माना गया है. इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो पेट की अंदरूनी सूजन को कम करने में मदद करते हैं. इससे एसिड बनने की समस्या नियंत्रित हो सकती है. अर्जुन की छाल का काढ़ा पीने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और सीने की जलन कम हो सकती है. इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. लंबे समय तक परेशानी रहने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी माना जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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सुबह उठते ही एड़ी में होता है तेज दर्द? अपनाए ये घरेलू नुस्खे, सूजन और खिंचाव दोनों से मिलेगी राहत

Last Updated:May 21, 2026, 20:20 IST Heel Pain Treatment: एड़ी का दर्द अब हर उम्र के लोगों में आम समस्या बनता जा रहा है. हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार के अनुसार लंबे समय तक कठोर सतह पर चलना, गलत जूते पहनना और वजन बढ़ना इसके प्रमुख कारण हैं. घरेलू उपाय जैसे नमक वाले गुनगुने पानी से सिकाई, हल्की मालिश और पैरों को आराम देने से राहत मिल सकती है. लगातार दर्द रहने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी बताया गया है. आजकल एड़ी में दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है. खासकर सुबह उठते समय या लंबे समय तक खड़े रहने के बाद लोगों को एड़ी में तेज चुभन जैसा दर्द महसूस होता है. हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार के अनुसार यह समस्या सामान्य थकान, गलत फुटवियर, मोटापा या प्लांटर फेशियाइटिस जैसी बीमारी का संकेत हो सकती है. प्लांटर फेशियाइटिस में एड़ी के नीचे मौजूद टिश्यू में सूजन आ जाती है, जिससे चलना-फिरना मुश्किल हो सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि सही जूते पहनना, नियमित स्ट्रेचिंग और समय पर इलाज कराने से इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है. उन्होंने बताया कि प्लांटर फेशियाइटिस तब होता है जब पैर के तलवे में मौजूद लिगामेंट में सूजन या खिंचाव आ जाता है. लंबे समय तक खड़े रहने, लगातार चलने, कठोर सतह पर काम करने और गलत जूते पहनने से यह परेशानी बढ़ सकती है. अधिक वजन और फ्लैट फुट वाले लोगों में भी इसका खतरा ज्यादा रहता है. डॉक्टर के अनुसार, यदि दर्द कई हफ्तों तक लगातार बना रहे, सूजन बढ़ जाए या चलने में ज्यादा दिक्कत होने लगे तो तुरंत जांच करानी चाहिए. समय पर इलाज और सही देखभाल से एड़ी के दर्द की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि घरेलू नुस्खे से अगर समस्या आसनी से खत्म हो रही है तो कुछ दिन और इन नुस्खे को जारी रखें, इससे दर्द का असर खत्म होने के साथ साथ लंबे समय तक वापस एड़ी में दर्द की समस्या नहीं आएगी. इस समस्या में सुबह के समय एड़ी का दर्द ज्यादा महसूस होना सबसे बड़ा संकेत माना जाता है. कई लोगों को बिस्तर से उठकर पहला कदम रखते ही तेज चुभन जैसा दर्द होता है. कुछ देर चलने के बाद दर्द में राहत मिल जाती है, लेकिन लंबे समय तक खड़े रहने या ज्यादा चलने पर परेशानी फिर बढ़ सकती है. डॉक्टरों के अनुसार समय रहते ध्यान नहीं देने पर सूजन और दर्द बढ़ सकता है, जिससे चलने-फिरने में दिक्कत होने लगती है और रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं. Add News18 as Preferred Source on Google घरेलू उपायों से भी एड़ी के दर्द में काफी राहत मिल सकती है. डॉक्टरों के अनुसार दिन में 2 से 3 बार 10 से 15 मिनट तक बर्फ से सिंकाई करना फायदेमंद माना जाता है, इससे सूजन और दर्द कम होता है. वहीं गुनगुने पानी में नमक डालकर पैरों की सिकाई करने से भी आराम मिलता है. सरसों या नारियल तेल से हल्की मालिश करने पर रक्त संचार बेहतर होता है और मांसपेशियों को राहत मिलती है. हालांकि दर्द लगातार बना रहे तो डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. एड़ी के दर्द से राहत पाने के लिए पैरों को पर्याप्त आराम देना बेहद जरूरी माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार सुबह उठने के बाद पिंडली और तलवे की हल्की स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियों का खिंचाव कम होता है और दर्द में राहत मिलती है. इसके अलावा नरम और आरामदायक जूते पहनना भी जरूरी है, ताकि एड़ी पर दबाव कम पड़े. डॉक्टर हील पैड या कुशन वाले सोल इस्तेमाल करने की भी सलाह देते हैं, जिससे चलने के दौरान झटका कम लगता है और एड़ी को सहारा मिलता है. डॉ. अमित कुमार के अनुसार लंबे समय तक नंगे पैर कठोर फर्श पर चलने से एड़ी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे दर्द बढ़ सकता है. ऐसे में आरामदायक फुटवियर का इस्तेमाल जरूरी है. उन्होंने बताया कि रोजाना हल्का व्यायाम और वजन नियंत्रित रखना भी एड़ी के दर्द को कम करने में मददगार साबित होता है. इसके अलावा रात को सोने से पहले पैरों को थोड़ी ऊंचाई पर रखकर आराम करने से सूजन और खिंचाव में राहत मिल सकती है. लगातार दर्द रहने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. ऐसे में एड़ी के दर्द से राहत पाने के लिए पैरों को पर्याप्त आराम देना बेहद जरूरी माना जाता है. डॉ. अमित के अनुसार, सुबह उठने के बाद पिंडली और तलवे की हल्की स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियों का खिंचाव कम होता है और दर्द में राहत मिलती है. इसके अलावा नरम और आरामदायक जूते पहनना भी जरूरी है, ताकि एड़ी पर ज्यादा दबाव न पड़े. डॉक्टर एड़ी के नीचे हील पैड या कुशन लगाने की सलाह भी देते हैं, जिससे चलने के दौरान झटका कम लगता है और पैरों को बेहतर सहारा मिलता है. इससे सूजन और दर्द दोनों में राहत मिल सकती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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Last Updated:May 21, 2026, 19:31 IST Social Media Mental Health Impact: डिजिटल दुनिया की चकाचौंध भारतीय युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रही है. मशहूर डॉक्टर संजीव बगई ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया की लत के चलते युवाओं में डिप्रेशन, एंग्जायटी और अनिद्रा जैसी गंभीर समस्याएं पैर पसार रही हैं. साथ ही आपसी रिश्तों में भी कड़वाहट आ रही है. इस संकट से निपटने के लिए उन्होंने सरकार से सोशल मीडिया इस्तेमाल की उम्र सीमा तय करने और सख्त गाइडलाइंस बनाने की मांग की है. इसके साथ ही उन्होंने जोर दिया कि बच्चों को इस चक्रव्यूह से निकालने में माता-पिता और स्कूलों को आगे आना होगा. दिल्ली: भारत में युवाओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. डिप्रेशन, एंग्जायटी और क्रॉनिक स्ट्रेस जैसी परेशानियां अब केवल उदासी या मूड स्विंग्स तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि युवाओं की सेहत, पढ़ाई, रिश्तों और भविष्य पर गहरा असर डाल रही हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की वजह क्या है. इसी सवाल का जवाब जानने के लिए हमने बात की डॉ.संजीव बगई से. उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बताया. सोशल मीडिया की लत बन रही बड़ी समस्याडॉ. संजीव बगई के मुताबिक, किशोर, युवा और खासकर युवा महिलाएं सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा समय बिता रही हैं. उन्होंने बताया कि कई अंतरराष्ट्रीय स्टडीज में सामने आया है कि 80% से ज्यादा किशोर सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. भारत में भी स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाली बड़ी आबादी इस लत का शिकार बनती जा रही है. डॉक्टर के अनुसार, सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल दिमाग में डोपामाइन (Dopamine) का तेज उछाल पैदा करता है. जिसे हैप्पी हार्मोन कहा जाता है. यही वजह है कि बार-बार फोन चेक करने और रील्स देखने की आदत बन जाती है. दिमाग और दिल दोनों पर पड़ रहा असरडॉ. बगई ने बताया कि जरूरत से ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से दिमाग और शरीर दोनों प्रभावित होते हैं. खासकर रात में सोने से पहले घंटों तक मोबाइल चलाना सबसे ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है.उनके मुताबिक, इससे एंग्जायटी और पैनिक अटैक बढ़ सकते हैं याददाश्त कमजोर हो सकती है पढ़ाई और ध्यान लगाने की क्षमता कम हो सकती है नींद का पैटर्न बिगड़ सकता है लोगों से बातचीत और रिश्तों में दूरी बढ़ सकती है लगातार खराब नींद से शरीर में कॉर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को नुकसान पहुंचाता है. रील्स की दुनिया में बच्चे खो रहे असली दुनियाडॉ. संजीव बगई का मानना है कि कम उम्र में बच्चे सोशल मीडिया के जरिए एक अवास्तविक दुनिया Unreal World में जीने लगते हैं. लाइक्स, फॉलोअर्स और वायरल होने की दौड़ बच्चों पर मानसिक दबाव बनाती है. इससे वे अपने असली लक्ष्य, करियर और सामाजिक जिम्मेदारियों से भटक सकते हैं.उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी के लिए यह समझना जरूरी है कि जिंदगी सिर्फ रील्स, पोस्ट और लाइक्स तक सीमित नहीं है. भारत में उम्र सीमा तय करने की वकालतडॉ. बगई ने कई देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ देशों में किशोरों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल पर उम्र सीमा तय की गई है. उनका मानना है कि भारत में भी 15–16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कुछ प्रतिबंध या सख्त नियम होने चाहिए, ताकि बच्चों के मानसिक विकास पर नकारात्मक असर कम हो. माता-पिता और स्कूल की अहम भूमिकाडॉ. बगई ने कहा कि केवल सरकार ही नहीं, बल्कि माता-पिता और स्कूलों की भी बड़ी जिम्मेदारी है. अभिभावकों को बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए और सही मूल्य सिखाने चाहिए. वहीं स्कूलों में सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों पर अलग अध्याय पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि बच्चे शुरुआत से ही इसके फायदे और नुकसान समझ सकें. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : East Delhi,Delhi

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महिलाओं में क्यों बढ़ रहा मर्दों वाला हार्मोन? कानपुर में ये कैसी आफत, इस मुसीबत की जड़ 6 गलतियां

Last Updated:May 21, 2026, 19:17 IST Women health tips : कानपुर में सामने आया है कि बड़ी संख्या में महिलाओं और युवा लड़कियों में पुरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) का स्तर तेजी से बढ़ रहा है. देर रात तक जागना, घंटों मोबाइल और लैपटॉप पर समय बिताना, जंक फूड खाना, शारीरिक मेहनत कम होना और लगातार तनाव से उनका हार्मोन बैलेंस बिगड़ रहा है. इसका असर अब कम उम्र की लड़कियों में भी दिखाई देने लगा है. लोकल 18 से कानपुर की चिकित्सक डॉ. सीमा द्विवेदी बताती हैं कि हार्मोन असंतुलन के कारण महिलाओं में अंडे बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है. कानपुर. कानपुर के GSVM Medical College और LLR अस्पताल में सामने आए मामलों ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है. अस्पताल की ओपीडी और रिसर्च के दौरान यह सामने आया कि बड़ी संख्या में महिलाओं और युवा लड़कियों में पुरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) का स्तर तेजी से बढ़ रहा है. मेडिकल भाषा में इसे ‘हाइपरएंड्रोजेनिज्म’ कहा जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि खराब लाइफस्टाइल, तनाव और अनियमित दिनचर्या इसकी सबसे बड़ी वजह बन रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक, देर रात तक जागना, घंटों मोबाइल और लैपटॉप पर समय बिताना, जंक फूड खाना, शारीरिक मेहनत कम होना और लगातार तनाव में रहना महिलाओं के शरीर का हार्मोन बैलेंस बिगाड़ रहा है. इसका असर अब कम उम्र की लड़कियों में भी दिखाई देने लगा है. कई महिलाओं में चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल उगना, बाल झड़ना, मुंहासे बढ़ना और पीरियड्स गड़बड़ होना जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. आगे चलकर ये दिक्कत कानपुर के एलएलआर अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में जब ऐसे मामले पहुंचे तो डॉक्टर भी एक पल के लिए हैरान रह गए. जांच में महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन सामान्य से ज्यादा मिला. विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सीमा द्विवेदी ने बताया कि पहले इस बीमारी को पीसीओएस कहा जाता था, लेकिन अब इसे पीएमओएस यानी “पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम” के रूप में देखा जा रहा है. उन्होंने बताया कि हार्मोन असंतुलन के कारण महिलाओं में अंडे बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है. इससे माहवारी अनियमित होने लगती है और आगे चलकर गर्भधारण में भी परेशानी आती है. कई मामलों में बांझपन जैसी गंभीर स्थिति भी सामने आ रही है. मोटापा से कैंसर तक की दिक्कत डॉक्टरों के मुताबिक, हार्मोन गड़बड़ी केवल पीरियड्स तक सीमित नहीं रहती. शरीर में एस्ट्रोजन और इंसुलिन का स्तर बढ़ने से डायबिटीज, मोटापा, बच्चेदानी का कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. प्रो. सीमा द्विवेदी के अनुसार तनाव, प्रदूषण और केमिकल्सयुक्त खानपान इस बीमारी की बड़ी वजह बन चुके हैं. महिलाओं को नियमित व्यायाम करने, वजन नियंत्रित रखने, संतुलित भोजन अपनाने और तनाव से दूर रहने की सलाह दी है. दवाओं से ज्यादा जरूरी ये चीज विशेषज्ञों का कहना है कि केवल दवाओं से इस समस्या पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सकता. समय पर सोना, रोजाना व्यायाम करना, जंक फूड से दूरी बनाना और मानसिक तनाव कम करना ही सबसे बड़ा बचाव है. डॉक्टरों के मुताबिक, अगर समय रहते महिलाएं अपनी लाइफस्टाइल सुधार लें तो इस बढ़ती समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है. About the Author Priyanshu Gupta प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kanpur Nagar,Uttar Pradesh

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हीटवेव का हो जाएं शिकार तो कैसे बचें? पैरासिटामोल दवा भी नहीं आती काम, डॉक्टर से जानिए आखिर करें तो क्या करें?

Last Updated:May 21, 2026, 18:29 IST Heatwave Prevention Tips: अक्सर लू लग जाने पर या गर्मी में बुखार आ जाने पर लोग सीधी पैरासिटामोल दवा का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन, इससे राहत नहीं मिलती. डॉक्टरों का कहना है कि लू लगने पर बिना सलाह पैरासिटामोल खाने से अंग फेल हो सकता है. जानें लू लगने पर क्या करना चाहिए… Heatwave Prevention Tips: मध्य प्रदेश के उज्जैन में भीषण गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. तेज धूप और झुलसा देने वाली गर्म हवाओं ने जनजीवन पर गहरा असर डाला है. पिछले एक सप्ताह से शहर का दिन का तापमान लगातार 44 डिग्री के पार बना है, जबकि रात में भी लोगों को राहत नहीं है. रात का पारा करीब 30 डिग्री तक पहुंचने से उमस और गर्मी ने परेशानी बढ़ा दी है. दिनभर सड़कों पर सन्नाटा नजर आ रहा है. लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं. लगातार बढ़ती गर्मी अब लोगों के सब्र की कड़ी परीक्षा ले रही है. जीवाजीराव वेधशाला के रिकॉर्डनुसार, गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है. हालात यह है कि दिन के साथ रात में भी तापमान कम होने का नाम नहीं ले रहा है. वर्ष 2025 में इस समय दिन का तापमान 43.4 डिग्री ओर रात का 27 डिग्री था. वहीं, शुक्रवार को दिन में 45 डिग्री तक पहुंच गया है. वहीं, मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दिनों में पारा और अधिक बढ़ने की संभावना हैं. सड़कें सूनीं, ठंडे पेय का सहारातेज धूप और गर्म हवाओं के चलते सुबह 10 बजे से ही सड़कें लगभग सूनी नजर आईं. लोग केवल जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं. निकलना भी पड़ रहा है तो लोग सिर पर कपड़ा बांधकर निकलते दिखाई दिए. वहीं, कई लोग गर्मी से राहत पाने के लिए शीतल पेय, जूस और ठंडी चीजों का सहारा लेते नजर आए. डॉक्टर की सलाह अनुसार भी लोग दोपहर में बाहर निकलने से बचे और बाहर निकलने पर मुंह ढककर निकले ओर पर्याप्त पानी पीते रहे. क्या कहते हैं डॉक्टर?एमबीबीएस, आरसीजीपी चिकित्सा अधिकारी, जिला चिकित्सालय, डॉ. जितेन्द्र शर्मा ने बताया कि हीट स्ट्रोक या लू लगने की स्थिति सामान्य बुखार से बिल्कुल अलग होती है. सामान्य बुखार में इन्फेक्शन के कारण दिमाग का थर्मोस्टेट (तापमान तय करने वाला हिस्सा) बढ़ जाता है, जिसे पैरासिटामोल कम कर देती है. लेकिन, हीट स्ट्रोक के दौरान, शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम (पसीना आना आदि) फेल हो जाता है और शरीर बाहर की अत्यधिक गर्मी को झेल नहीं पाता. ऐसी अवस्था में पैरासिटामोल खाने से कोई फायदा नहीं होता और उल्टे अंगों को नुकसान (ऑर्गन फेलियर) पहुंच सकता है. हीट वेव (लू) लगने पर क्या करें?यदि कोई व्यक्ति हीट स्ट्रोक या हीट एग्जॉशन का शिकार हो जाए, तो उन्हें तुरंत कुछ उपचार चालू कर देना चाहिए. अगर किसी व्यक्ति को तेज गर्मी या लू लगने के लक्षण दिखें, तो सबसे पहले उसे तुरंत धूप से हटाकर ठंडी और हवादार जगह पर ले जाएं. शरीर के तंग या भारी कपड़े ढीले कर दें, ताकि गर्मी बाहर निकल सके. इसके बाद ठंडे पानी से शरीर को पोंछें या स्पंज करें और पंखे की हवा दें. गर्दन, बगल और जांघों के जोड़ पर ठंडी पट्टियां या आइस पैक रखें, इससे शरीर का तापमान तेजी से कम होता है. यदि मरीज होश में हो तो उसे धीरे-धीरे पानी या ओआरएस दें. साथ ही बिना देरी किए तुरंत अस्पताल पहुंचाएं. About the Author Rishi mishra एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ujjain,Madhya Pradesh Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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चेहरा चमकाने के लिए स्किन में इंजेक्शन घुसेड़ा तो खैर नहीं, ब्यूटी क्लिनिकों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश, लड़कियां भी ध्यान दें

CDSCO Warn against Injectable Cosmetic Products: शहरों में ब्यूटी क्लिनिकों की कोई कमी नहीं है. ऐसे कई ब्यूटी क्लिनिक मिल जाएंगे जहां दावा किया जाएगा कि हमारे पास प्रतिष्ठित संस्थानों से ट्रेंड डर्मेटोलॉजिस्ट है. कुछ क्लिनिकों में चेहरे काया पलट करने के लिए खास सलाह दी जाती है. इसमें कहा जाता है कि जो क्रीम आप चेहरे पर लगाते हैं वह जल्दी असर नहीं करती, इसलिए इसका इंजेक्शन लगा लीजिए. कुछ लोग इस झांसे में आ जाते हैं और झट से इस इंजेक्शन को लगा लेते हैं. इस प्रैक्टिस पर सख्त नराजगी जताते हुए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी CDSCO ने एक नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में कहा गया है कि किसी भी हाल में कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में मंजूरी नहीं है. इसलिए यदि कोई ब्यूटी क्लीनिक ऐसा करता है तो उसके खिलाफ सख्स से सख्त कार्रवाई की जाएगी. कॉस्मेटिक का इस्तेमाल इंजेक्शन के लिए नहीं दरअसल, कई ऐसी शिकायतें आ रही थी जिनमें किसी व्यक्ति ने चेहरे में इंजेक्शन लगाया और उसे कई तरह की परेशानियां हो गईं. इसी के बाद CDSCO ने यह नोटिस जारी की. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएससीओ ने साफ किया है कि किसी भी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर कोई कंपनी, क्लीनिक या विक्रेता कॉस्मेटिक उत्पादों को इंजेक्शन के जरिए इस्तेमाल करने का दावा करता है या उसका प्रचार करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. भारत के औषधि महानियंत्रक डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि कॉस्मेटिक कंपनियां ऐसे दावे नहीं कर सकतीं जो लोगों को गुमराह करें. किसी भी उत्पाद के लेबल, पैकेजिंग या विज्ञापन में झूठे, बढ़ा-चढ़ाकर या इलाज जैसे दावे करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा. कॉस्मेटिक्स को इलाज के रूप में पेश करना कानूनन अपराध सरकार ने स्पष्ट किया है कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत कॉस्मेटिक वे उत्पाद हैं, जो शरीर पर लगाने, छिड़कने या बाहरी इस्तेमाल के लिए होते हैं. इनका उद्देश्य केवल सफाई, सुंदरता बढ़ाना और आकर्षक दिखाना है. इन्हें इलाज या इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. नोटिस में यह भी कहा गया है कि असुरक्षित या प्रतिबंधित सामग्री वाले कॉस्मेटिक उत्पादों का इस्तेमाल और कॉस्मेटिक्स को इलाज के रूप में पेश करना कानूनन अपराध है. सीडीएससीओ ने लोगों से अपील की है कि अगर कहीं कॉस्मेटिक उत्पादों का गलत इस्तेमाल, भ्रामक प्रचार या इंजेक्शन के जरिए उपयोग होता दिखे, तो इसकी जानकारी तुरंत नियामक एजेंसियों या राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण को दें. अधिकारियों के मुताबिक यह चेतावनी खास तौर पर एस्थेटिक, ब्यूटी और वेलनेस क्लीनिकों के लिए अहम है, जहां स्किन ग्लो, एंटी-एजिंग और ब्यूटी ट्रीटमेंट के नाम पर इंजेक्शन आधारित प्रक्रियाएं की जा रही हैं. सीडीएससीओ के पास हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए थे, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया है. क्यों खतरनाक हैं ये ब्यूटी इंजेक्शन  हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो किसी भी तरह के कॉस्मेटिक प्रोडेक्ट में कई तरह के केमिकल होते हैं. इसलिए कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स को इस तरह से बनाया जाता है कि इसमें मौजूद खतरनाक भारी मेटल स्किन के अंदर न घुसे. अगर स्किन की सतह पर लगाए जाने वाले कॉस्मेटिक्स को सीधे इंजेक्शन के जरिए स्किन की भीतरी परतों में डाल दिया जाए, तो यह एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी बन सकती है. यह कोशिकाओं के स्तर पर विनाशकारी साबित हो सकता है. इसके कई कारण है. इन कॉस्मेटिक प्रोडक्ट में पैराबेंस, फेथलेट्स, फॉर्मलडिहाइड, मर्करी, पारा, लेड, सीसा जैसे अत्यंत हानिकारक तत्व होते हैं. इसलिए इसमें सिलिकॉन और मिनिरल ऑयल मिले होते हैं तो त्वचा में लगाने के साथ तुरंत एक सिंथेटिक परत बना लें लेकिन जब ये भारी टॉक्सिक तत्व स्किन के अंदर घुस जाएंगे तो खून में पहुंचकर किडनी और लिवर को नुकसान पहुंचाने लगते है. मर्करी, लेड जैसे तत्व सीधे नर्वस सिस्टम को अटैक करते हैं. फॉर्मेल्डिहाइड जैसे तत्व कैंसर का कारण भी बन सकता है. कभी-कभी गलत डोज के कारण चेहरा संवारने के बजाय चेहरा बदसूरत होने लगता है. गलत डोज या गलत तरीके से सुई लगाने से चेहरे पर परमानेंट निशान, सूजन या पैरालिसिस तक हो सकता है. लड़कियां खास ध्यान दें  इन ब्यूटी क्लिनिकों में अधिकांश लड़कियां जाती हैं. उन्हें इस बात पर खास ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि उन्हें नहीं पता होता है कि कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में लेने के बाद इसका क्या अंजाम होता है. अगर कोई इंजेक्शन या लेजर ट्रीटमेंट का सुझाव दे रहा है, तो पहले सुनिश्चित करें कि वह डर्मेटोलॉजिस्ट है या नहीं. उसका लाइसेंस देखें, उस क्लिनिक के पास हेल्थ डिपार्टमेंट से सर्जिकल या कॉस्मेटिक प्रक्रिया का लाइसेंस है या नहीं यह भी देखना चाहिए. आप किस डॉक्टर से इलाज करा रहे हैं, उसके बारे में सब कुछ पहले पता करें. सबसे बेहतर यही है कि नेचुरल पर भरोसा करें. इंस्टेंट निखार के बजाय अच्छी डाइट, पर्याप्त पानी, नींद और तनाव रहित जीवन को अपनाएं.

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गर्मियों में दादी-नानी के ये देसी नुस्खे हैं रामबाण! डॉक्टर बोले…शरीर रहेगा कूल-कूल, नहीं होगी पानी की कमी

Last Updated:May 21, 2026, 17:44 IST Summer Health Tips: गर्मियों के मौसम में आसमान से बरसती आग और भयंकर लू ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. ऐसे में डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और कमजोरी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. रामपुर के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल ने इस भीषण गर्मी से बचने के लिए आयुर्वेद के कुछ बेहद आसान और असरदार घरेलू नुस्खे बताए हैं. आखिर बिना ज्यादा पैसे खर्च किए आप अपने शरीर को अंदर से कैसे ठंडा और तरोताजा रख सकते हैं, आइए जानते हैं. रामपुर: उत्तर प्रदेश में इस समय रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है. तेज धूप, बढ़ते तापमान और उमस ने लोगों की दिनचर्या को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है. हालात ऐसे हैं कि दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है और लोग घरों से बाहर निकलने में भी कतरा रहे हैं. इस मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है जिन्हें काम के सिलसिले में लगातार धूप में बाहर रहना पड़ता है. तेज धूप में ज्यादा पसीना निकलने के कारण शरीर बहुत जल्दी थक जाता है और बॉडी में पानी की कमी होने लगती है. जिसकी वजह से लू, डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और थकान जैसी परेशानियां सामने आ रही हैं. खासकर बच्चे, बुजुर्ग और कामकाजी लोग इसकी चपेट में ज्यादा आ रहे हैं. ऐसे में रामपुर के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल ने कुछ ऐसे पुराने घरेलू नुस्खे बताए हैं जो आपको इस गर्मी में एकदम फिट रखेंगे. फ्रिज के ठंडे पानी से बेहतर हैं ये देसी पेय डॉक्टर मोहम्मद इकबाल के मुताबिक, गर्मी के इस मौसम में सबसे ज्यादा जरूरी अपने शरीर को अंदर से ठंडा रखना है. आजकल लोग गर्मी से तुरंत राहत पाने के लिए बाजार में मिलने वाली ज्यादा ठंडी चीजें या कोल्ड ड्रिंक पी लेते हैं. इससे कुछ देर के लिए तो राहत मिलती है, लेकिन यह शरीर को असली फायदा नहीं पहुंचाती. इसके बजाय हमारे घरों में बनने वाले पारंपरिक और देसी पेय सबसे ज्यादा असरदार होते हैं. बेल का शरबत, सत्तू, छाछ और नींबू पानी जैसी चीजें न सिर्फ शरीर को अंदरूनी ठंडक देती हैं, बल्कि दिनभर काम करने के लिए जरूरी एनर्जी भी बनाए रखती हैं. यह भी पढ़ें: पार्क-मैदानों में दिखने वाली इस मामूली हरी घास में छिपा है सेहत का बड़ा राज, इसके फायदे जान चौंक जाएंगे पानी पीने में कभी न करें ये बड़ी गलतीअक्सर लोग इस मौसम में सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि वे पानी बहुत कम पीते हैं. डॉक्टर इकबाल ने बताया कि कई बार हमें प्यास का अहसास नहीं होता, लेकिन शरीर के अंदर पानी की कमी लगातार होती रहती है. यही कारण है कि लोगों को अचानक चक्कर आने लगते हैं, सिर भारी हो जाता है और कमजोरी महसूस होने लगती है. इससे बचने के लिए जरूरी है कि आप थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें. इसके अलावा जब भी घर से बाहर निकलें, तो कभी भी खाली पेट न जाएं. धूप में निकलने से पहले अपने सिर को किसी हल्के कपड़े से जरूर ढक लें. मिट्टी के घड़े का पानी है वरदानआयुर्वेद भी मानता है कि गर्मियों के दिनों में हमारा खानपान बेहद हल्का होना चाहिए. ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और गर्म तासीर वाला भोजन शरीर की गर्मी को और ज्यादा बढ़ा देता है. इसकी जगह अपने दैनिक आहार में दही, खीरा, तरबूज, ककड़ी और मौसमी फलों को शामिल करना चाहिए. ये चीजें शरीर को ठंडक और तरोताजा बनाए रखती हैं. इसके साथ ही गांवों में आज भी लोग मिट्टी के घड़े का पानी पीते हैं, जिसे आयुर्वेद में सबसे उत्तम माना गया है. घड़े का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है और इसका शरीर पर कोई भी गलत असर नहीं पड़ता. दोपहर 12 से 3 बजे की धूप से बचेंडॉक्टर इकबाल ने खास तौर पर सलाह दी है कि दोपहर 12 बजे से लेकर 3 बजे तक की धूप सबसे ज्यादा खतरनाक होती है. इस दौरान बहुत जरूरी काम होने पर ही घर या ऑफिस से बाहर निकलें. धूप में जाते समय हमेशा हल्के और सूती (कॉटन) कपड़े ही पहनें, क्योंकि सूती कपड़ों में हवा का प्रवाह अच्छा रहता है और पसीना आसानी से सूख जाता है. इस मौसम में सूखे और गर्म वातावरण के कारण सेहत बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए इन छोटे-छोटे घरेलू उपायों को अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करें. About the Author Seema Nath सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Rampur,Uttar Pradesh

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