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कम या ज्यादा पका केला क्या है सेहत के लिये ज्यादा फायदेमंद? जानिये इसका सच

केला एक ऐसा फल है जिसे हर उम्र के लोग पसंद करते हैं. लेकिन अक्सर यह सवाल उठता है कि कम पका फायदेमंद है या ज्यादा पका (पीला-भूरा) केला? इसका जवाब आपकी सेहत की जरूरत पर निर्भर करता है, क्योंकि दोनों ही तरह के केले में अलग-अलग पोषक तत्व और फायदे होते हैं. कम पके केले के फायदेकच्चे या कम पके केले में रेजिस्टेंट स्टार्च ज्यादा मात्रा में होता है, जो शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है. पाचन के लिए बेहतर: कच्चा केला आंतों के लिए अच्छा होता है और गुड बैक्टीरिया को बढ़ाता है.ब्लड शुगर कंट्रोल: यह धीरे-धीरे पचता है, जिससे शुगर लेवल तेजी से नहीं बढ़ता.वजन नियंत्रण में सहायक: इसमें फाइबर ज्यादा होता है, जिससे लंबे समय तक पेट भरा रहता है.डायबिटीज मरीजों के लिए अच्छा: कच्चा केला ग्लाइसेमिक इंडेक्स में कम होता है. अगर आप वजन घटाना चाहते हैं या शुगर कंट्रोल करना चाहते हैं, तो कच्चा केला ज्यादा फायदेमंद है. ज्यादा पके केले के फायदेजब केला पूरी तरह पक जाता है, तो उसमें स्टार्च शुगर में बदल जाता है, जिससे वह ज्यादा मीठा और मुलायम हो जाता है. तुरंत ऊर्जा देता है: पका केला जल्दी पचता है और तुरंत एनर्जी देता है.पाचन में आसान: कमजोर या बुजुर्ग लोगों के लिए पका केला ज्यादा उपयुक्त होता है.इम्युनिटी बढ़ाता है: इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा अधिक हो जाती है.मसल्स के लिए अच्छा: इसमें पोटैशियम होता है, जो मांसपेशियों को मजबूत करता है. अगर आपको तुरंत ताकत चाहिए या कमजोरी महसूस हो, तो पका केला आपके लिये ज्यादा फायदेमंद है. किसे कौन खाना चाहिए?डायबिटीज या वजन कम करने वाले: कच्चा या कम पका केलाखिलाड़ी या ज्यादा मेहनत करने वाले: पका केलाकमजोर, बुजुर्ग या बच्चे: पका केला बेहतरडाइजेशन सुधारना चाहते हैं: कच्चा केला मददगार ध्यान रखने वाली बातेंबहुत ज्यादा कच्चा केला खाने से कब्ज हो सकता है.ज्यादा पका केला अधिक मात्रा में लेने से शुगर बढ़ सकती है.दोनों का सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए.

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गर्मियों में आदिवासी पीते हैं देसी ड्रिंक, लू और डिहाइड्रेशन से होगा बचाव, दिनभर रहेंगे कूल-कूल

X गर्मियों में आदिवासी पीते हैं देसी ड्रिंक, लू और डिहाइड्रेशन से होगा बचाव   महुआ की राब: महुआ से बनने वाली कई चीज है, जिससे कई पोषक तत्वों से भरपूर चीजें बनाई जाती है. इन्हीं में से एक राब. जी हां महुआ की राब, जो ताकत का खजाना, पोषण का केंद्र और औषधीय गुणों से भरपूर है. बालाघाट में महुआ के फूलों से तैयार की जाती है. महुए की राब एक पारंपरिक पेय पदार्थ है, जो महुआ के ताजे फूल या सूखे फूलों के रस को निकालकर पकाया जाता है. इससे शरीर को ऊर्जा के साथ ठंडक भी मिलती है. वहीं, स्वाद काफी अच्छा होता है. बुजुर्ग बताते है कि इसमें प्राकृतिक मिठास होती है. ऐसे में इसका सेवन आज की पीढ़ी को भी करना चाहिए. महुए की राब में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसमें प्राकृतिक शर्करा, विटामिन और औषधीय तत्व पाए जाते हैं. यह शरीर को ताजगी और स्फूर्ति देती है. यह पाचन शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है. ग्रामीण अंचलों में गर्मी और थकान से बचने के लिए पिया जाता है. ग्रामीणों का यह भी मानना है कि ग्रामीण अंचलों में प्रसव के बाद मां को शक्ति देने के लिए हर दिन एक चम्मच पिलाया जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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घंटों बैठकर करते हैं लैपटॉप पर काम, तो पड़ सकता है रीढ़ की हड्डी के लिए भारी..यहां जानिए डॉक्टर की सलाह

Last Updated:May 22, 2026, 12:22 IST आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबे समय तक बैठकर काम करना लोगों की रीढ़ की हड्डी पर बुरा असर डाल रहा है. फरीदाबाद के स्पाइन विशेषज्ञ डॉक्टर आशीष तोमर के अनुसार गलत पोश्चर, लगातार स्क्रीन देखने और व्यायाम की कमी से गर्दन और कमर दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है. नियमित वॉक, योग और सही तरीके से बैठना स्पाइन हेल्थ के लिए बेहद जरूरी है. फरीदाबाद: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना लोगों की मजबूरी बन गया है. दफ्तर हो या घर लगातार मोबाइल और लैपटॉप पर काम करने की आदत अब आम हो चुकी है. लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर हमारी रीढ़ की हड्डी पर पड़ रहा है. शुरुआत में लोग गर्दन, पीठ या कमर में हल्का दर्द समझकर इसे नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन धीरे-धीरे यही परेशानी बड़ी बीमारी का रूप ले सकती है. लंबे वक्त तक बैठकर काम करने से नुकसान Local18 से बातचीत में डॉक्टर आशीष तोमर फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल में ऑर्थोपेडिक्स और मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी विभाग के निदेशक बताते हैं कि लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर की बैक मसल्स कमजोर होने लगती हैं. हमारी मांसपेशियों का काम रीढ़ की हड्डी को सही स्थिति में बनाए रखना होता है लेकिन जब व्यक्ति लगातार बैठा रहता है तो ये मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाती हैं. क्या है काम करने का सही तरीका डॉक्टर आशीष तोमर बताते हैं बैठने के तरीके का भी सीधा असर कमर पर पड़ता है. अगर कोई व्यक्ति सीधे बैठता है तो कमर पर दबाव कम बनता है, लेकिन झुककर बैठने से रीढ़ की हड्डी पर ज्यादा दबाव पड़ता है. यही वजह है कि आगे चलकर डिस्क खिसकने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. कुर्सी पर सीधा बैठने से कमर पर लगभग डेढ़ गुना कम दबाव पड़ता है. गर्दन और कमर दर्द आज के समय में बहुत आम समस्या बन चुकी है. लगातार स्क्रीन देखने और गर्दन झुकाकर लैपटॉप पर काम करने से गर्दन पर काफी दबाव बढ़ जाता है. यही कारण है कि लोगों में गर्दन दर्द, अकड़न और पीठ दर्द तेजी से बढ़ रहा है. रोज थोड़ा बहुत व्यायाम करना बेहद जरूरी डॉक्टर आशीष बताते हैं शरीर को मजबूत रखने के लिए रोज थोड़ा बहुत व्यायाम करना बेहद जरूरी है. रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ रखने के लिए डॉक्टर आशीष तोमर बताते हैं मैं लोगो को रोजमर्रा की कुछ अच्छी आदतें अपनाने की सलाह देता हूं.शरीर की कोर मसल्स और पीठ की मांसपेशियां सबसे ज्यादा जरूरी होती हैं. इन्हें मजबूत रखने के लिए भुजंग आसन जैसे योग करने चाहिए. इसके अलावा नियमित रूप से टहलना और लंबे समय तक लगातार न बैठना भी जरूरी है. अगर कोई व्यक्ति आधे घंटे या एक घंटे से ज्यादा समय तक बैठा है तो उसे बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलना चाहिए. नजरअंदाज नहीं करना चाहिए शरीर के संकेत डॉक्टर आशीष तोमर बताते हैं कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. जैसे गर्दन का दर्द हाथों तक जाने लगे…हाथों में सुन्नपन महसूस हो, कमजोरी आए, रात में दर्द के कारण नींद न आए या गर्दन दबाने पर ज्यादा दर्द हो तो तुरंत विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए. इसी तरह कमर दर्द अगर पैरों तक पहुंचने लगे तो यह भी गंभीर संकेत हो सकता है. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Faridabad,Faridabad,Haryana

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बच्चों में हीट स्ट्रोक कितना घातक? दिखें ये लक्षण तो न करें इग्नोर, इन बातों का रखें खास ध्यान

Heat stroke in small kids: देशभर में इस समय भीषण गर्मी का असर देखने को मिल रहा है. कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. वहीं, 25 मई से 2 जून तक नौतपा शुरू होने वाला है, जिसके चलते गर्मी और अधिक बढ़ने की संभावना है. ऐसे में भारत सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को सतर्क रहने और सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं. खासकर, शिशुओं और 5-6 साल के बच्चों की सेहत का खास ख्याल रखें. इन्हें घर से बाहर न निकलने दें. शिशुओं को भी तेज धूप में न ले जाएं. जानें, किस तरह से रखें अपने बच्चे को हीट स्ट्रोक से बचाकर और कैसे नजर आते हैं बच्चों में हीट स्ट्रोक के लक्षण… छोटे बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के अनुसार, नवजात शिशु और छोटे बच्चे हीट स्ट्रोक के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं. तेज गर्मी में थोड़ी सी लापरवाही भी उनकी सेहत पर भारी पड़ सकती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि बच्चों का शरीर बहुत जल्दी गर्म हो जाता है और उनमें पसीना भी कम निकलता है. इसकी वजह से शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है, जो हीट स्ट्रोक का कारण बनता है. बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी सावधानियां गर्मी के मौसम में बच्चों की विशेष देखभाल बेहद जरूरी है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कुछ आसान उपाय अपनाकर बच्चों को हीट स्ट्रोक से बचाया जा सकता है. बच्चों को हमेशा ठंडी और हवादार जगह पर रखें.उन्हें तेज धूप या बंद और गर्म कमरे में अकेला न छोड़ें.शरीर का तापमान समय-समय पर चेक करते रहें.बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ पिलाते रहें.छोटे बच्चों को समय-समय पर मां का दूध जरूर पिलाएं.कपड़ों और साफ-सफाई का रखें ध्यान विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को गर्मी में हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनाने चाहिए. ज्यादा कपड़े पहनाने से शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती. इसके अलावा बच्चों को ठंडे पानी से नहलाना या गीले कपड़े से शरीर साफ करना भी फायदेमंद रहता है. इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें यदि बच्चा लगातार रो रहा हो, चिड़चिड़ा हो जाए, ज्यादा नींद आए, उल्टी करे, तेज बुखार हो या सांस लेने में परेशानी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि शिशुओं में हीट स्ट्रोक के लक्षण जल्दी समझ में नहीं आते, इसलिए पेरेंट्स को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है. दोपहर में बाहर ले जाने से बचें डॉक्टरों की सलाह है कि बच्चों को दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच बाहर न ले जाएं. इस दौरान गर्मी और धूप सबसे ज्यादा होती है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

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बादाम और किशमिश खाने का क्या है सबसे सही तरीका, दिन भर में कितने खाने चाहिए?

ड्राई फ्रूट्स में बादाम और किशमिश का सेवन लोग खूब करते हैं. इनका इस्तेमाल भी कई तरह के मीठे, नमकीन व्यंजनों में भी होता है. कुछ लोग तो मुट्ठी भर-भर कर बादाम और किशमिश खा लेते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स भी बादाम और किशमिश के सेवन की सलाह देते हैं. इनमें ढेरों पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर के लिए बहुत जरूरी हैं. हालांकि, इनके पोषण गुण अलग-अलग होते हैं. ये फायदे दो ढेरों पहुंचाते हैं, लेकिन अधिक मात्रा में सेवन से नुकसान भी हो सकता है. ऐसे में ये जरूर जान लेना चाहिए कि एक दिन में कितने बादाम और किशमिश का सेवन आमतौर पर करना फायदेमंद है. बादाम में मुख्य पोषक तत्वबादाम में प्रोटीन, हेल्दी फैट (मोनोअनसैचुरेटेड फैट), फाइबर, विटामिन E, मैग्नीशियम, कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन आदि मौजूद होते हैं. बात करें 100 ग्राम बादाम की तो इसमें औसतन प्रोटीन 21 ग्राम, फैट 49 ग्राम, फाइबर 12 ग्राम तक मौजूद हो सकता है. किशमिश में मुख्य पोषक तत्वकिशमिश में नेचुरल ग्लूकोज और फ्रक्टोज होता है. यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देती है. आयरन, पोटैशियम, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट्स, कैल्शियम, कॉपर और मैंगनीज आदि होते हैं. औसतन 100 ग्राम किशमिश में एनर्जी 300 कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट 79 ग्राम, फाइबर 3–4 ग्राम, आयरन 1.5–2 मि.ग्रा. मौजूद हो सकते हैं. बादाम-किशमिश साथ खाने के फायदे-जब आप बादाम और किशमिश को एक साथ खाते हैं तो ऊर्जा और स्टैमिना बढ़ाने में मदद मिलती है.-कमजोरी और थकान कम करने में सहायक होते हैं. ऐसे में आप इन्हें साथ में जरूर खा सकते हैं.-हड्डियों और दिल की सेहत को लाभ पहुंचाते हैं. यदि आपको हड्डियों में दर्द रहता है तो आप बादाम और किशमिश का सेवन साथ कर सकते हैं.-वजन बढ़ाने या स्वस्थ स्नैक के रूप में उपयोगी हैं. बादाम और किशमिश के सेवन का सही तरीकाहेल्थ डाइट एंड न्यूट्रिशन क्लिनिक की आहार विशेषज्ञ डॉ. सुगिता मुत्रेजा के अनुसार, आप एक दिन में 5 से 10 बादाम खा सकते हैं. इससे अधिक नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं, किशमिश आप 10-15 खाएं. किशमिश और बादाम को पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाना भी अच्छा माना जाता है. आप बादाम को छिलका उतार कर भी खा सकते हैं. इन दोनों सूखे मेवों को जब आप पानी में भिगोकर खाते हैं तो इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है. हार्ट हेल्दी रहता है. शरीर को ताकत और मजबूती मिलती है. बादाम और किशमिश कब खाने चाहिए?बादाम और किशमिश खाने का सबसे अच्छा समय सुबह का होता है. सुबह उठक आप चाय पीने की बजाय खाली पेट भीगे हुए बादाम और किशमिश कुछ दिनों तक खाकर देखें. आपको दिन भर भरपूर एनर्जी मिलेगी. मेटाबॉलिज्म बूस्ट होगा. जो लोग वर्कआउट करते हैं, वे व्यायाम से पहले बादाम और किशमिश खा सकते हैं. इसे आप ब्रेकफास्ट में भी कई तरीके से शामिल कर सकते हैं. इनके सेवन से हार्ट हेल्दी रहता है. आयरन की कमी नहीं होती है. बादाम स्किन और बालों को भी पोषण देता है. बादाम दिमाग को हेल्दी रखता है, याद्दाश्त मजबूत होती है. बादाम बच्चों को जरूर खिलाएं.

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राजस्थान की देसी सुपरफूड राबड़ी, जो 45 डिग्री गर्मी में भी आपको रखेगी कूल और फिट, Video

X राजस्थान की देसी सुपरफूड राबड़ी, जो 45 डिग्री गर्मी में भी आपको रखेगी कूल   Traditional Rabdi Recipe: बाड़मेर सहित पश्चिमी राजस्थान में ‘राबड़ी’ आधुनिक फास्ट फूड को कड़ी टक्कर दे रही है. बाजरा-ज्वार और छाछ से बनी यह राबड़ी भीषण गर्मी में शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ पाचन में भी सहायक है. बुजुर्ग इसे एक ‘देसी सुपरफूड’ मानते हैं जो डायबिटीज और बीपी जैसी बीमारियों से बचाने में कारगर है. घंटों की मेहनत से तैयार होने वाली राबड़ी आज भी राजस्थान की संस्कृति और सेहत का आधार बनी हुई है. रेगिस्तानी इलाकों में जब तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच जाता है, तब राबड़ी शरीर को ठंडक पहुंचाने और लू के असर को कम करने में रामबाण का काम करती है. ग्रामीण अंचलों में ज्येष्ठ सुदी चतुर्थी को ‘राबड़ी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जहां परिवार के लोग एक साथ बैठकर इस पारंपरिक भोजन का आनंद लेते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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Habit Of Not Saying No Impact; Emotional Physical Fatigue

Habit Of Not Saying No Impact; Emotional Physical Fatigue

18 मिनट पहले कॉपी लिंक सवाल– मैं 34 साल की शादीशुदा महिला हूं और स्कूल टीचर हूं। मेरी सबसे बड़ी समस्या यह है कि मैं किसी को ‘ना’ नहीं कह पाती। घर हो या ऑफिस, मैं हमेशा दूसरों की जरूरतों को अपनी जरूरतों से पहले रखती हूं। ऑफिस में सहकर्मी अक्सर अपना काम भी मुझसे करवा लेते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि मैं मना नहीं करूंगी। ससुराल वालों की भी हर बात मान लेती हूं। भले ही उससे मुझे मानसिक-शारीरिक थकान हो रही हो। मैं जानती हूं, लोग मुझे यूज करते हैं, लेकिन फिर भी मना करने में गिल्ट होता है। मैं खुद को बदलना चाहती हूं। इस आदत से बाहर कैसे निकलूं? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। मदद करना अच्छी बात है, लेकिन जब दूसरों को खुश रखने के लिए आप अपनी जरूरतों और मानसिक शांति को नजरअंदाज करने लगें, तो यह आदत बोझ बन सकती है। “ना” कहना गलत नहीं, बल्कि इमोशनल हेल्थ के लिए जरूरी है। समस्या की असली जड़ कहां हैं? क्या आप हर बात पर “हां” कहती हैं। जब दिल “ना” कहना चाहता है, तब भी आपके मुंह से “हां” निकल जाता है। अगर आप ऐसा महसूस करती हैं, तो यह समझना जरूरी है कि समस्या सिर्फ आपकी “अच्छाई” नहीं है। असली समस्या यह है कि आप भीतर से तो मना करना चाहती हैं, लेकिन कर नहीं पाती हैं। इसलिए हर बार “हां” कह देती हैं। धीरे-धीरे इसका असर दिखाई देने लगता है और आप– थकने लगती हैं। मन में चिड़चिड़ापन आता है। लोगों पर गुस्सा आता है। खुद पर भी गुस्सा आता है। मानसिक और शारीरिक थकान के साथ कई बार खुद पर भी नाराजगी होने लगती है। फिर भी अगली बार आप दोबारा “हां” कह देती हैं। यही चक्र बार-बार चलता रहता है। इसके पीछे अक्सर कुछ गहरे डर काम करते हैं, जैसेकि- “अगर मैंने मना किया तो लोग बुरा मान जाएंगे।” “अच्छी बहू, पत्नी या टीचर वही है, जो हमेशा सबके काम आए।” “किसी बात के लिए ना कहना असल में स्वार्थी होना होता है।” “अगर मैंने बाउंड्री ड्रॉ कर दी तो लोग मुझे पसंद नहीं करेंगे।” यानी बाहर से तो आप लोगों की मदद कर रही हैं, लेकिन अंदर से आपके कारण कुछ और हैं। आपके मन में डर और गिल्ट है और आपको सबके अप्रूवल की जरूरत है। यानी की आपकी “हां” मदद के लिए कही गई “हां” नहीं, बल्कि गिल्ट और डर से कही गई “हां” है। इमोशनल पैटर्न आप सोचती हैं, “मैं तो बस सबका भला चाहती हूं।” लेकिन कई बार इसके पीछे सिर्फ मदद करने की भावना नहीं होती, बल्कि कुछ गहरे इमोशनल पैटर्न भी काम कर रहे होते हैं। हो सकता है कि आप टकराव से बचना चाहती हों। हो सकता है कि आपको रिजेक्शन या लोगों की नाराजगी का डर हो। हो सकता है, दूसरों की नाराजगी सहना आपके लिए मुश्किल हो। हो सकता है, आपने बचपन से यही सीखा हो कि प्यार और तारीफ पाने के लिए हमेशा “हां” कहना जरूरी है। ऐसे में धीरे-धीरे यह सिर्फ एक आदत नहीं रहती, बल्कि आपकी पहचान का हिस्सा बन जाती है। फिर आप अपनी जरूरतों से पहले दूसरों की उम्मीदों को पूरा करने लगती हैं, चाहे इसके बदले आपको मानसिक थकान और भीतर ही भीतर नाराजगी क्यों न महसूस हो। अपने मनोविज्ञान को समझें करें एक जरूरी सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट यहां हम आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहे हैं। इसमें 10 ब्लैंक कॉलम हैं। यहां आपको पिछले 7 दिनों की वो 10 सिचुएशंस लिखनी हैं, जब आपने ‘हां’ कहा। जैसकि– पूजा ने बाजार जाने को कहा तो मैं उसके साथ चली गई। प्रभा ने स्कूल में अपनी क्लास लेने के लिए कहा तो मैंने हां कर दी। सभी सिचुएशंस से जुड़े 5 सवाल हैं, जैसेकि– 1. क्या मैं सचमुच यह करना चाहती थी? 2. मना करने पर कितना गिल्ट होता? 3. कितना डर था कि सामने वाला नाराज होगा? 4. हां कहने के बाद कितनी थकान या पछतावा हुआ? 5. इससे मेरे काम, आराम या स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ा? इन पांचों सवालों को आपको 0 से 4 के स्केल पर रेट करना है, अपना टोटल स्कोर निकालना है और अंत में अपने स्कोर की एनालिसिस करनी है। डिटेल्स नीचे ग्राफिक में देखिए– 4 हफ्ते का CBT आधारित सेल्फ हेल्प प्लान सप्ताह 1 अपनी आदत को समझें लक्ष्य: इस हफ्ते का लक्ष्य खुद को बदलना नहीं, बल्कि अपनी आदत को समझना है। ध्यान दें कि आप किन परिस्थितियों में बिना मन के “हां” कह देती हैं। हर बार “हां” कहने के बाद ये बातें नोट करें: सिचुएशन क्या थी? यानी सामने कौन था और क्या कहा गया? उस समय मन में क्या विचार आए? जैसे— “अगर मना किया तो बुरा मान जाएंगे।” आपने क्या महसूस किया? जैसे— डर, guilt, घबराहट या दबाव। आपने सामने वाले से क्या कहा? आप वास्तव में क्या कहना चाहती थीं? इस हफ्ते की छोटी प्रैक्टिस तुरंत जवाब देने की बजाय यह वाक्य बोलने की आदत डालें: “मैं सोचकर बताऊंगी।” “अभी तुरंत जवाब देना मुश्किल है।” “मुझे थोड़ा समय चाहिए।” यह छोटा-सा पॉज आपको बिना सोचे “हां” कहने से रोकने में मदद करेगा। सप्ताह 2: अपने विचारों को चुनौती दें लक्ष्य: हरेक गिल्ट को पहचानना और उसे परखना। कई बार हमारा डर सच नहीं, सिर्फ एक आदत होता है। एक उदाहरण: विचार: “अगर मैंने मना किया तो लोग मुझे बुरा समझेंगे।” अब खुद से ये सवाल पूछिए: क्या इसका कोई ठोस सबूत है? क्या हर हेल्दी रिश्ता एक “ना” से टूट जाता है? क्या सामने वाला सच में इतना नाराज होगा, या ये सिर्फ मेरा डर है? क्या मैं किसी और को सलाह दूंगी कि वह हमेशा सबकी बात माने? क्या मैं दूसरों को खुश रखने के लिए खुद को लगातार थका रही हूं? अब एक नया बैलेंस्ड थॉट बनाइए। पुरानी सोच की जगह ज्यादा रियलिस्टिक और हेल्दी सोच विकसित करिए: “ना कहना गलत नहीं है।” “मेरी जरूरतें भी महत्त्वपूर्ण हैं।” “हर बार उपलब्ध रहना जरूरी नहीं है।” “खुद हमेशा परेशान रहने से बेहतर है, दूसरों को थोड़ा निराश करना।” सप्ताह 3: छोटे-छोटे

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Water Crisis 2026; Summer Nautapa Water Shortage Storage Tips And Methods

Water Crisis 2026; Summer Nautapa Water Shortage Storage Tips And Methods

35 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक गर्मियों में तेज धूप और पसीने की वजह से प्यास ज्यादा लगती है। साथ ही नहाने, खाना पकाने और साफ-सफाई जैसे रोजमर्रा के कामों में भी पानी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में सही तरीके से पर्याप्त मात्रा में पानी स्टोर करना जरूरी हो जाता है। थोड़ी सी लापरवाही से नहाने, खाना पकाने और साफ-सफाई जैसे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि थोड़ी-सी प्लानिंग और कुछ आसान आदतों से इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज हम पानी को सही तरीके से स्टोर करने के आसान टिप्स समझेंगे। साथ ही जानेंगे- गर्मियों में पानी की किल्लत क्यों हाेती है? गर्मियों में घर में कितने पानी का स्टोरेज होना चाहिए? एक्सपर्ट: रामबाबू तिवारी, जल संरक्षण विशेषज्ञ, 75+ तालाबों को पुनर्जीवित करने वाले एक्टिविस्ट सवाल- गर्मियों में पानी की किल्लत क्यों हाेती है? जवाब– इसके कई कारण हैं- डेली खाने-पीने, नहाने, कूलर में डालने और खेती के कामों में पानी की खपत बढ़ जाती है। शहरों में एक साथ ज्यादा पानी इस्तेमाल होने से सप्लाई सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता है। जरूरत से ज्यादा बोरवेल और ट्यूबवेल चलाने से ग्राउंड वाटर सोर्स नीचे चला जाता है। बारिश कम होने और लगातार पानी की खपत से ग्राउंड वाटर सोर्स सीमित हो जाते हैं। कई घरों में पर्याप्त पानी स्टोर करने की व्यवस्था नहीं होती तो समस्या होती है। सवाल- गर्मियों में पानी स्टोर करना क्यों जरूरी है? जवाब- गर्मियों में पानी की जरूरत बढ़ती है, लेकिन सप्लाई कम होती है। इसलिए पानी स्टोर करने से मदद मिलती है, जैसे- गर्मी में प्यास ज्यादा लगती है। इसलिए घर में एक्स्ट्रा पीने का पानी रखना चाहिए। नहाने, खाना बनाने और साफ-सफाई जैसे जरूरी काम के लिए भी पानी स्टोर करना जरूरी है। पाइपलाइन खराब होने, बिजली सप्लाई बाधित होने या अन्य इमरजेंसी में स्टोर किया पानी बैकअप का काम करता है। बार-बार पानी भरने की परेशानी से बचने और सभी जरूरतें बिना तनाव के पूरी करने के लिए पानी स्टोर करके रखना जरूरी है। सवाल- गर्मियों में घर में कितने पानी का स्टोरेज होना चाहिए? जवाब- जल संरक्षण विशेषज्ञ रामबाबू तिवारी बताते हैं कि गर्मियों में पानी का स्टोरेज परिवार के सदस्यों की संख्या और जरूरत पर निर्भर करता है। एक व्यक्ति को पीने से लेकर बेसिक इस्तेमाल तक औसतन 100-135 लीटर पानी की जरूरत होती है। ड्रिंकिंग वॉटर औसतन 5-7 लीटर प्रति व्यक्ति के हिसाब से स्टोर करना चाहिए। अचानक सप्लाई बंद होने की स्थिति को देखते हुए हर घर में 2-3 दिन का पानी स्टोर होना चाहिए। अगर घर में 4 लोग हैं तो रोज लगभग 500-600 लीटर पानी लग सकता है। ऐसे में कम-से-कम 1000-1500 लीटर स्टोरेज रखना सुरक्षित माना जाता है। अगर कूलर, गार्डनिंग या ज्यादा पानी वाले काम हैं तो स्टोरेज क्षमता और बढ़ानी चाहिए। सवाल- पानी स्टोर करने के सही तरीके क्या हैं? जवाब- पानी स्टोर करते समय साफ-सफाई का खास ख्याल रखना जरूरी है, ताकि पानी दूषित न हो। पानी हमेशा साफ, ढके हुए और फूड-ग्रेड बर्तनों में स्टोर करना चाहिए। स्टोरेज कंटेनर को नियमित रूप से धोना और सुखाना जरूरी है, ताकि उसमें बैक्टीरिया या काई न जमे। वाटर स्टोरेज का सही तरीका ग्राफिक में देखिए- सवाल- पानी कितने समय तक स्टोर किया जा सकता है? जवाब- साफ और ढके हुए कंटेनर में रखा पानी आमतौर पर 1-2 दिन तक सुरक्षित रहता है। ध्यान रखने वाली बातें- पीने का पानी साफ और ढके हुए बर्तन में सीमित समय तक ही स्टोर करना चाहिए। आमतौर पर फिल्टर या उबला हुआ पानी 24 से 48 घंटे तक सुरक्षित माना जाता है। इसके बाद उसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं। अगर पानी का स्वाद, स्मेल या रंग बदलने लगे, तो उसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पानी स्टोर करने वाले बर्तन की नियमित सफाई जरूरी है। सवाल- पानी दूषित होने से कैसे बचाएं? जवाब- दूषित पानी पीने से डायरिया, उल्टी या इन्फेक्शन जैसी समस्याओं का रिस्क बढ़ता है। इसलिए पानी को हमेशा साफ बर्तनों में स्टोर करें और लंबे समय से रखा पानी इस्तेमाल करने से बचें। साथ ही ग्राफिक में दी गई कुछ बातों का खास ख्याल रखें- सवाल- डेली लाइफ में पानी की बचत कैसे करें? जवाब- रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके काफी मात्रा में पानी बचाया जा सकता है। बेवजह नल खुला न छोड़ें, लीकेज तुरंत ठीक कराएं और जरूरत के अनुसार ही पानी इस्तेमाल करें। इसके अलावा ग्राफिक में दी गई कुछ बाताें का ध्यान रखें- सवाल- क्या प्लास्टिक कंटेनर में लंबे समय तक पानी स्टोर करना सही है? जवाब- नहीं, केवल फूड-ग्रेड प्लास्टिक ही सुरक्षित होता है। धूप में रखने से केमिकल रिलीज हो सकते हैं। बार-बार इस्तेमाल से बोतल खराब हो सकती है। लंबे समय के लिए स्टील या कांच बेहतर विकल्प है। ……………… ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- टेंपरेचर बढ़ने पर बढ़ता गुस्सा, चिड़चिड़ापन:समझें ब्रेन और इमोशंस पर हीट का असर, जानें दिमाग को कैसे शांत रखें ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एनवायर्नमेंटल रिसर्च एंड पब्लिक हेल्थ’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, गर्मियों में मेंटल हेल्थ डिपार्टमेंट के केस 8% तक बढ़ जाते हैं। डिहाइड्रेशन, खराब स्लीप पैटर्न और डेली रूटीन में बदलाव मिलकर ‘मेंटल बैलेंस’ को प्रभावित करते हैं। आगे पढ़िए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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फल कहलाए, लेकिन बनती है सब्जी, इसके आगे मटन भी फेल, वजन करे कंट्रोल, बीज भी होते हैं बेहद फायदेमंद

कटहल (Jackfruit) ऐसा फल है, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ कई पोषक तत्वों से भी भरपूर माना जाता है. प्रकृति ने हमें कई ऐसे फल और सब्जियां दी हैं, जो शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. कटहल उनमें से एक है. आयुर्वेद में भी इसे फाइबर, विटामिन सी और औषधीय गुणों से भरपूर फल माना गया है. जानिए यहां कटहल के क्या फायदे होते हैं. कटहल के फायदे (Kathal ke fayde) बिहार सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अनुसार, कटहल केवल पौष्टिक फल ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए बेहद उपयोगी है. विभाग का कहना है कि इसका सेवन बेहतर पोषण को बढ़ावा देता है और पर्यावरण संरक्षण में भी अहम योगदान निभाता है. सरकारी जानकारी के मुताबिक, कटहल का पेड़ स्थानीय आजीविका को मजबूत करने में भी मदद करता है. इसकी खेती किसानों के लिए अच्छी आमदनी का स्रोत बन सकती है. कटहल के पेड़ के फायदे अधिक मात्रा में ऑक्सीजन प्रदान करता है.मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद करता है.पर्यावरण संतुलन को मजबूत करता है. क्या है कटहल का वैज्ञानिक नाम? कटहल का वैज्ञानिक नाम Artocarpus heterophyllus है. यह एक मध्यम आकार का सदाबहार पेड़ होता है. इसकी सबसे बड़ी पहचान इसका बड़ा आकार वाला फल है, जिसकी बाहरी सतह छोटी-छोटी नुकीली संरचनाओं से ढकी रहती है. कटहल में पाए जाने वाले पोषक तत्व विटामिन Cफाइबरएंटीऑक्सीडेंटप्राकृतिक ऊर्जा देने वाले तत्वइम्यूनिटी और पाचन के लिए लाभकारी इसके सेवन से होने वाले फायदे कटहल में मौजूद विटामिन C शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है. संक्रमण से बचाव में सहायक माना जाता है. वहीं, इसमें मौजूद भरपूर फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है. कब्ज की समस्या कम करने में मदद करता है. पेट को स्वस्थ रखने में सहायक होता है. त्वचा और ऊर्जा के लिए भी उपयोगी है. कटहल में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. इसके सेवन से होने वाले अन्य लाभ शरीर को ऊर्जा मिलती है.थकान कम महसूस हो सकती है.लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है.वजन नियंत्रण में भी मददगार. कटहल में कैलोरी अपेक्षाकृत कम और फाइबर अधिक मात्रा में होता है. यही कारण है कि इसे वजन नियंत्रित रखने वाले आहार में भी शामिल किया जाता है. कटहल के बीज भी हैं पौष्टिक सिर्फ फल ही नहीं, बल्कि कटहल के बीज भी पोषण से भरपूर होते हैं. इन्हें उबालकर या भूनकर खाया जा सकता है. बीजों में प्रोटीन अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है.

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हीट वेव से बचने के लिए क्या करें? एम्स डॉक्टर ने दी अहम सलाह

Last Updated:May 21, 2026, 23:24 IST Heat Waves Tips: गर्मी के मौसम में लू के कारण सिचुएशन सीरियस हो जाती है. कई बार ये जानलेवा भी साबित हो सकता है. ऐसे एम्स के डॉक्टर ने सुरक्षित रहने के कुछ आसान उपायों को बताया है, जो आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं. ख़बरें फटाफट देश के कई राज्यों में लगातार बढ़ती गर्मी और लू लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रही है. तेज धूप और ऊंचे तापमान की वजह से लोगों में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिल रही हैं. एम्स के डॉ. नीरज निश्चल ने आइएनएस लोगों को गर्मी से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है. डॉक्टर ने बताया कि गर्मी में सबसे आम समस्या डिहाइड्रेशन होती है. इसका मतलब है कि शरीर में पानी और जरूरी नमक की कमी हो जाना. ज्यादा पसीना आने से शरीर कमजोर होने लगता है और अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है. कई बार यह हीट स्ट्रोक यानी लू में बदल जाता है. हीट स्ट्रोक होने पर शरीर का तापमान बहुत बढ़ जाता है और व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है. हीट वेव से बचने के उपायडॉक्टर का कहना है कि दोपहर के समय धूप सबसे ज्यादा तेज होती है. इसलिए सुबह 11 बजे से शाम 4 या 5 बजे तक बाहर निकलने से बचना चाहिए. अगर किसी जरूरी काम से बाहर जाना पड़े तो शरीर को पूरी तरह ढककर निकलें. ढीले और हल्के रंग के कपड़े पहनें, सिर पर टोपी, गमछा या पगड़ी रखें और छाते का इस्तेमाल करें. कोशिश करें कि ज्यादा समय धूप में न बिताएं. गर्मी में शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है. घर से निकलने से पहले पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए. डॉक्टर ने सलाह दी है कि दिनभर में ओआरएस या इलेक्ट्रोलाइट्स वाले पेय लेते रहें. केवल पानी पीना काफी नहीं होता, क्योंकि पसीने के साथ शरीर से नमक और जरूरी मिनरल्स भी बाहर निकल जाते हैं. ओआरएस शरीर में पानी और नमक का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है. डॉ. नीरज निश्चल ने बताया कि बेल का शरबत, शिकंजी और दाल का पानी जैसे घरेलू पेय गर्मी में काफी फायदेमंद होते हैं. ये शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ ऊर्जा भी बनाए रखते हैं. अस्पतालों में इन दिनों कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, उल्टी, ज्यादा पसीना और ब्लड प्रेशर कम होने जैसी समस्याओं वाले मरीज बढ़ रहे हैं. गंभीर मामलों में हीट स्ट्रोक के कारण तेज बुखार, भ्रम, बेहोशी और दौरे तक पड़ सकते हैं. बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग सबसे ज्यादा खतरे में रहते हैं. इसलिए गर्मी के मौसम में हल्का भोजन करें, छांव में रहें और शरीर में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज न करें. समय पर सावधानी बरतने से गर्मी से होने वाली गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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