Sunday, 05 Apr 2026 | 08:04 AM

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बमोरी में दो सट्टे के कारोबारी पकड़ाए:11 लोगों पर कैंट पुलिस ने की कार्रवाई; सात बैंक अकाउंट, कई आईडी मिलीं ईरान ने ट्रम्प का 48 घंटे का अल्टीमेटम ठुकराया:कहा- बेबस और घबराकर धमकी दे रहे, तुम्हारे लिए नरक के दरवाजे खोल देंगे सिवनी में जेबकतरा गिरफ्तार:मंदिर से श्रद्धालु का उड़ाया था पर्स, 17 हजार लेकर हुआ था फरार गर्मी में भूलकर भी नहीं रखें फ्रिज में ये चीजें, फायदे की जगह हो जाएगा नुकसान, हेल्थ एक्सपर्ट से जानें जोधपुर में रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत, 8 करोड़ की मशीन से कैंसर ऑपरेशन अब शहर में संभव – News18 हिंदी क्रिकेट खेलते-खेलते 3 दोस्तों ने साफ कर दी नदी:पॉकेट मनी से ग्लव्स-जूते खरीदे, लोग मजाक उड़ाते तो भी जुटे रहते, अब देश–दुनिया में चर्चा
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ईरान ने ट्रम्प का 48 घंटे का अल्टीमेटम ठुकराया:कहा- बेबस और घबराकर धमकी दे रहे, तुम्हारे लिए नरक के दरवाजे खोल देंगे

ईरान ने ट्रम्प का 48 घंटे का अल्टीमेटम ठुकराया:कहा- बेबस और घबराकर धमकी दे रहे, तुम्हारे लिए नरक के दरवाजे खोल देंगे

ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के 48 घंटे में होर्मुज खोलने के अल्टीमेटम को ठुकरा दिया है। ईरानी सेना ने कहा है कि अमेरिका बेबस और घबराकर धमकियां दे रहा है। ईरान के केंद्रीय सैन्य मुख्यालय खातम अल-अनबिया के जनरल अली अब्दोल्लाही अलीअबादी ने ट्रम्प की चेतावनी को मूर्खतापूर्ण कार्रवाई बताया और इसे सिरे से खारिज कर दिया। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह की धमकियों का मतलब है कि “तुम्हारे लिए भी नरक के दरवाजे खोल दिए जाएंगे।” इससे पहले ट्रम्प ने ईरान को 48 घंटे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने या समझौता करने का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने कहा था कि समय खत्म हो रहा है और ऐसा नहीं होने पर ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया जाएगा। ट्रम्प अब तक होर्मुज खोलने के लिए ईरान को तीन बार अल्टीमेटम दे चुके हैं, जिससे इस मुद्दे पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान बोला- बुशहर न्यूक्लियर साइट पर 4 बार हमला हुआ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका और इजराइल ने बुशहर न्यूक्लियर साइट पर चार बार हमला किया है। उन्होंने कहा कि इन हमलों से न केवल ईरान बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि न्यूक्लियर साइट के पास हमले बेहद जोखिम भरे हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के जापोरिज्जिया न्यूक्लियर प्लांट को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो चिंता दिखाई जाती है, वैसी संवेदनशीलता बुशेहर के मामले में नहीं दिख रही है। अराघची ने यह भी कहा कि पेट्रोकेमिकल ठिकानों पर हमले इस बात का संकेत हैं कि रणनीतिक ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे हमलों से पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता फैल सकती है। ईरान जंग से जुड़ी 4 तस्वीरें… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

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Jeffrey Epstein Claimed White House Insider; Hundreds of Messages with Anil Ambani

Jeffrey Epstein Claimed White House Insider; Hundreds of Messages with Anil Ambani

न्यूयॉर्क6 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने 2017 में उद्योगपति अनिल अंबानी के सामने खुद को डोनाल्ड ट्रम्प के पहले कार्यकाल के व्हाइट हाउस के ‘इनसाइडर’ की तरह पेश किया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के बीच दो साल तक सैकड़ों मैसेज और ईमेल हुए। इनमें एपस्टीन ने ट्रम्प प्रशासन की नियुक्ति व विदेश नीति से जुड़ी जानकारियां साझा कीं, जो बाद में सही भी निकलीं। हालांकि, इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि एपस्टीन की व्हाइट हाउस तक सीधी पहुंच थी। मैसेज में अनिल अंबानी ने एपस्टीन को लिखा था- ‘भारत के रिश्ते और रक्षा सहयोग के लिए व्हाइट हाउस से डील करने में आपकी गाइडेंस चाहिए।’ जवाब में एपस्टीन ने ‘इनसाइड’ जानकारी देने का वादा किया। सिग्नल-टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर होती थी बात न्यूयॉर्क टाइम्स ने जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा जारी मैसेज के रिव्यू के आधार पर बताया कि अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच बातचीत सिग्नल और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर होती थी, जहां अंबानी ‘अरमानी ए’ नाम से सक्रिय थे। यह संपर्क उस दौर का है जब एपस्टीन नाबालिगों से जुड़े अपराधों में जेल काट चुका था। इनका परिचय दुबई की कंपनी डीपी वर्ल्ड के चेयरमैन सुल्तान अहमद बिन सुलायेम ने कराया था। एपस्टीन ने जब दीपक चोपड़ा से अंबानी के बारे में राय मांगी, तो चोपड़ा ने उन्हें ‘बेहद अमीर, चर्चा में रहने का शौकीन और सेलेब्स के प्रति सजग’ व्यक्ति बताया था। टाइपो से भरे इन संदेशों में एपस्टीन खुद को असरदार पावर ब्रोकर के रूप में पेश करता दिखा। मार्च 2017 में अनिल अंबानी ने एपस्टीन से पूर्व सीआईए डायरेक्टर डेविड पेट्रेयस के भारत में अमेरिकी राजदूत बनने की संभावना पूछी थी। एपस्टीन ने जवाब दिया था- वे प्राथमिकता में नहीं हैं। बाद में केनेथ जस्टर राजदूत बने। जुलाई 2017 में एपस्टीन ने यह ‘इनसाइड’ जानकारी भी दी कि जॉन बोल्टन नए सुरक्षा सलाहकार (NSA) होंगे। हालांकि, तब ट्रम्प ने मौजूदा NSA मैकमास्टर का बचाव किया था। हालांकि, 8 महीने बाद एपस्टीन की बात सच साबित हुई और बोल्टन ने ही पद संभाला। एपस्टीन ने अनिल अंबानी को ट्रम्प के बेहद करीबी लोगों, जैसे स्टीफन बैनन और थॉमस बैरक जूनियर से मिलवाने का प्रस्ताव दिया था। बैरक उस वक्त ट्रम्प की इनॉगरेशन कमेटी के अध्यक्ष थे। एपस्टीन ने दिग्गजों को यह भरोसा दिलाया कि अंबानी से जुड़ना उनके लिए फायदेमंद होगा। वहीं, अनिल अंबानी ने खुद को भारत में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली बताते हुए मैसेज लिखा कि ‘लीडरशिप’ चाहती है कि एपस्टीन उनकी मुलाकात जेरेड कुश्नर और बैनन से कराने में मदद करे। अनिल अंबानी की अमेरिकी डिफेंस पॉलिसी में दिलचस्पी की वजह यह भी बताई गई है कि 2016 में उन्हें राफेल के पार्ट्स से जुड़ी डील मिली थी। उस वक्त आलोचकों ने भारत सरकार पर अंबानी को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए थे, जिन्हें सरकार ने खारिज किया था। अंबानी ने लिखा था कि भारत के लिए अमेरिकी राजदूत का चयन उनके लिए बेहद ‘अहम’ है। वे चाहते थे कि पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से निपटने के लिए इस पद पर कोई ‘मजबूत’ व्यक्ति आए। रिपोर्ट के मुताबिक संदेशों से स्पष्ट है कि अनिल अंबानी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पैठ मजबूत करना चाहते थे। उन्होंने खुद को अटलांटिक काउंसिल के एडवाइजरी बोर्ड में ‘इकलौते भारतीय’ के रूप में पेश किया। वहीं, एपस्टीन ने उन्हें कार्नेगी एंडोमेंट के विलियम जे. बर्न्स और थॉमस जे. प्रिट्जकर जैसे प्रभावशाली वैश्विक दिग्गजों से मिलवाने का वादा किया। एपस्टीन ने अंबानी को अपने घर डिनर पर बुलाकर बड़े राजनेताओं से नेटवर्किंग का मौका भी दिया। 2019 में जब अनिल अंबानी की कंपनियों पर आर्थिक संकट गहराया और उन्हें कर्ज चुकाने के लिए भाई मुकेश अंबानी की मदद लेनी पड़ी, तब एपस्टीन उन्हें मानसिक रूप से मजबूत रहने की सलाह दे रहा था। हालांकि एपस्टीन ने संदेशों में लिखा कि उसे पैसे की जरूरत नहीं है, लेकिन एक ईमेल में ‘ट्रांजैक्शन डन’ का जिक्र मिला। रिपोर्ट के अनुसार, 23 मई 2019 को भारत में चुनावी नतीजों के दिन अनिल अंबानी न्यूयॉर्क में एपस्टीन के घर गए थे। इसके कुछ ही हफ्तों बाद एपस्टीन को नाबालिगों की यौन तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Jeffrey Epstein Claimed White House Insider; Hundreds of Messages with Anil Ambani

Jeffrey Epstein Claimed White House Insider; Hundreds of Messages with Anil Ambani

न्यूयॉर्क48 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने 2017 में उद्योगपति अनिल अंबानी के सामने खुद को डोनाल्ड ट्रम्प के पहले कार्यकाल के व्हाइट हाउस के ‘इनसाइडर’ की तरह पेश किया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के बीच दो साल तक सैकड़ों मैसेज और ईमेल हुए। इनमें एपस्टीन ने ट्रम्प प्रशासन की नियुक्ति व विदेश नीति से जुड़ी जानकारियां साझा कीं, जो बाद में सही भी निकलीं। हालांकि, इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि एपस्टीन की व्हाइट हाउस तक सीधी पहुंच थी। मैसेज में अनिल अंबानी ने एपस्टीन को लिखा था- ‘भारत के रिश्ते और रक्षा सहयोग के लिए व्हाइट हाउस से डील करने में आपकी गाइडेंस चाहिए।’ जवाब में एपस्टीन ने ‘इनसाइड’ जानकारी देने का वादा किया। सिग्नल-टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर होती थी बात न्यूयॉर्क टाइम्स ने जस्टिस डिपार्टमेंट की तरफ से जारी मैसेज के रिव्यू के आधार पर बताया कि अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच बातचीत सिग्नल और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर होती थी, जहां अंबानी ‘अरमानी ए’ नाम से सक्रिय थे। यह संपर्क उस दौर का है जब एपस्टीन नाबालिगों से जुड़े अपराधों में जेल की सजा काट चुका था। इनका परिचय दुबई की कंपनी डीपी वर्ल्ड के चेयरमैन सुल्तान अहमद बिन सुलायेम ने कराया था। एपस्टीन ने जब दीपक चोपड़ा से अंबानी के बारे में राय मांगी, तो चोपड़ा ने उन्हें ‘बेहद अमीर, चर्चा में रहने का शौकीन और सेलेब्स के प्रति सजग’ व्यक्ति बताया था। सुरक्षा सलाहकार की नियुक्ति पर एपस्टीन की बात सच हुई टाइपो से भरे इन संदेशों में एपस्टीन खुद को असरदार पावर ब्रोकर के रूप में पेश करता दिखा। मार्च 2017 में अनिल अंबानी ने एपस्टीन से पूर्व सीआईए डायरेक्टर डेविड पेट्रेयस के भारत में अमेरिकी राजदूत बनने की संभावना पूछी थी। एपस्टीन ने जवाब दिया था- वे प्राथमिकता में नहीं हैं। बाद में केनेथ जस्टर राजदूत बने। जुलाई 2017 में एपस्टीन ने यह ‘इनसाइड’ जानकारी भी दी कि जॉन बोल्टन नए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) होंगे। हालांकि, तब ट्रम्प ने मौजूदा NSA मैकमास्टर का बचाव किया था। हालांकि, 8 महीने बाद एपस्टीन की बात सच साबित हुई और बोल्टन ने ही पद संभाला। एपस्टीन ने अनिल अंबानी को ट्रम्प के बेहद करीबी लोगों, जैसे स्टीफन बैनन और थॉमस बैरक जूनियर से मिलवाने का प्रस्ताव दिया था। बोल्टन 9 अप्रैल, 2018 को NSA बने और ट्रम्प ने 10 सितंबर 2019 को उन्हें पद से हटा दिया। अंबानी ने खुद को भारत में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली बताया बैरक उस वक्त ट्रम्प की इनॉगरेशन कमेटी के अध्यक्ष थे। एपस्टीन ने दिग्गजों को यह भरोसा दिलाया कि अंबानी से जुड़ना उनके लिए फायदेमंद होगा। वहीं, अनिल अंबानी ने खुद को भारत में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली बताते हुए मैसेज लिखा कि ‘लीडरशिप’ चाहती है कि एपस्टीन उनकी मुलाकात जेरेड कुश्नर और बैनन से कराने में मदद करे। अनिल अंबानी की अमेरिकी डिफेंस पॉलिसी में दिलचस्पी की वजह यह भी बताई गई है कि 2016 में उन्हें राफेल के पार्ट्स से जुड़ी डील मिली थी। उस वक्त आलोचकों ने भारत सरकार पर अंबानी को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए थे, जिन्हें सरकार ने खारिज किया था। अंबानी ने लिखा था कि भारत के लिए अमेरिकी राजदूत का चयन उनके लिए बेहद ‘अहम’ है। वे चाहते थे कि पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से निपटने के लिए इस पद पर कोई ‘मजबूत’ व्यक्ति आए। एपस्टीन ने अंबानी को घर बुलाकर बड़े नेताओं से मिलवाया रिपोर्ट के मुताबिक संदेशों से स्पष्ट है कि अनिल अंबानी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पैठ मजबूत करना चाहते थे। उन्होंने खुद को अटलांटिक काउंसिल के एडवाइजरी बोर्ड में ‘इकलौते भारतीय’ के रूप में पेश किया। वहीं, एपस्टीन ने उन्हें कार्नेगी एंडोमेंट के विलियम जे. बर्न्स और थॉमस जे. प्रिट्जकर जैसे प्रभावशाली वैश्विक दिग्गजों से मिलवाने का वादा किया। एपस्टीन ने अंबानी को अपने घर डिनर पर बुलाकर बड़े राजनेताओं से नेटवर्किंग का मौका भी दिया। अनिल अंबानी-एपस्टीन के बीच से पैसों के लेनदेन का भी जिक्र 2019 में जब अनिल अंबानी की कंपनियों पर आर्थिक संकट गहराया और उन्हें कर्ज चुकाने के लिए भाई मुकेश अंबानी की मदद लेनी पड़ी, तब एपस्टीन उन्हें मानसिक रूप से मजबूत रहने की सलाह दे रहा था। हालांकि एपस्टीन ने संदेशों में लिखा कि उसे पैसे की जरूरत नहीं है, लेकिन एक ईमेल में ‘ट्रांजैक्शन डन’ का जिक्र मिला। रिपोर्ट के अनुसार, 23 मई 2019 को भारत में चुनावी नतीजों के दिन अनिल अंबानी न्यूयॉर्क में एपस्टीन के घर गए थे। इसके कुछ ही हफ्तों बाद एपस्टीन को नाबालिगों की यौन तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। —————————– एपस्टीन फाइल्स- अनिल अंबानी की चैट सामने आई:दावा- सुनहरे बालों वाली स्वीडिश महिला की पेशकश हुई, अनिल बोले- अरेंज करो अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने एपस्टीन और उद्योगपति अनिल अंबानी के बीच 2017 से 2019 के दौरान हुई बातचीत से जुड़े दस्तावेज जारी किए। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक 9 मार्च 2017 की बातचीत में अनिल ने एपस्टीन से पूछा- क्या सुझाव है? इस पर एपस्टीन ने लिखा- मुलाकात ‘मजेदार’ बनाने के लिए ‘लंबी स्वीडिश ब्लॉन्ड महिला’ बेहतर होगी। इसके बाद अंबानी ने जवाब दिया, ‘इसे अरेंज करो।’ बातचीत तब की है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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जंग के बीच पैसा बनाने में जुटे ट्रम्प के बेटे:ड्रोन बनाने वाली कंपनी से जुड़े, एक्सपर्ट बोले- युद्ध से फायदा कमाने वाले पहले राष्ट्रपति

जंग के बीच पैसा बनाने में जुटे ट्रम्प के बेटे:ड्रोन बनाने वाली कंपनी से जुड़े, एक्सपर्ट बोले- युद्ध से फायदा कमाने वाले पहले राष्ट्रपति

अमेरिका में एक ड्रोन स्टार्टअप को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें राष्ट्रपति ट्रम्प के बेटे एरिक ट्रम्प और डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर जुड़े हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लोरिडा की पावरस कंपनी मिडिल ईस्ट के देशों को अपने ड्रोन सिस्टम बेचने की कोशिश कर रही है। ट्रम्प के बेटे एरिक ट्रम्प और डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर फरवरी के अंत में इस कंपनी से सलाहकार के तौर पर जुड़े थे, ये वही समय था जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया था। हालांकि दोनों को कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी मिलने की उम्मीद है। पावरस से जुड़े अधिकारियों ने अबू धाबी में अधिकारियों से मुलाकात की है। बातचीत इस बात पर हुई कि UAE को हथियार और ड्रोन डिफेंस सिस्टम बेचे जा सकते हैं, क्योंकि वह ईरान के खिलाफ अपने डिफेंस को और मजबूत करना चाहता है। इस घटना के बाद आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रपति के परिवार के लोग युद्ध से फायदा कमा रहे हैं। पावरस के सह-संस्थापक ब्रेट वेलिकोविच ने बताया कि उनकी टीम खाड़ी के कई देशों में ड्रोन डेमो दिखा रही है, ताकि यह समझाया जा सके कि उनके इंटरसेप्टर ड्रोन ईरानी हमलों से बचाव में कैसे मदद कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि किन देशों में यह प्रदर्शन किया जा रहा है। वेलिकोविच ने कहा कि अमेरिका को चीन और रूस जैसे देशों से मुकाबले के लिए तेजी से ड्रोन तकनीक विकसित करनी होगी, नहीं तो वह पीछे रह जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। पावरस ने गार्डियन-1 ड्रोन लॉन्च किया इस पूरे मामले से यह साफ होता है कि ईरान युद्ध के चलते ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम की मांग बढ़ रही है। ईरान सस्ते ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी महंगे मिसाइल सिस्टम से उन्हें गिराने की कोशिश करते हैं। इससे लागत का बड़ा अंतर पैदा हो रहा है। यही वजह है कि सस्ते और असरदार एंटी-ड्रोन सिस्टम बनाने वाली कंपनियों के लिए बड़ा मौका बन रहा है। पावरस ने हाल ही में ‘गार्डियन-1’ नाम का एक इंटरसेप्टर लॉन्च किया है, जो खास तौर पर आत्मघाती ड्रोन, जैसे ईरान के शाहेद-136 को गिराने के लिए बनाया गया है। पावरस की 1.1 अरब डॉलर के फंड पर नजर द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, पावरस की नजर पेंटागन द्वारा ड्रोन निर्माण के लिए रखे गए 1.1 अरब डॉलर के फंड पर है। यह फंड अमेरिका में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के लिए रखा गया है। इस कंपनी का कहना है कि यह समय तेजी से तकनीक विकसित करने का है, क्योंकि दुनिया एक तरह की हथियारों की दौड़ में है। पावरस के साथ कुछ पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारी भी जुड़े हैं। इनमें जनरल चार्ल्स क्यू. ब्राउन और रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल कीथ केलॉग जैसे नाम शामिल हैं, जो कंपनी को रणनीतिक सलाह दे रहे हैं। शेयर मार्केट में लिस्ट होने की तैयारी कर रही पावरस पावरस कंपनी जल्द ही शेयर बाजार में लिस्ट होने की तैयारी कर रही है। इसके लिए वह एक नैस्डैक में लिस्टेड कंपनी के साथ मर्ज करने जा रही है। इस बिजनेस में ट्रम्प जूनियर और एरिक ट्रम्प ने निवेश किया है। दोनों भाई ड्रोन सेक्टर में सक्रिय निवेशक हैं और अमेरिकन वेंचर्स नाम के फंड से जुड़े हैं, जिसने ड्रोन कंपनियों में करीब 1 अरब डॉलर का निवेश किया हुआ है। वे ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एरिक ट्रम्प ने इस निवेश का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें उन कंपनियों में निवेश करने पर गर्व है, जिन पर उन्हें भरोसा है। उनके मुताबिक, ड्रोन भविष्य की बड़ी तकनीक है। विपक्षी नेता ने रक्षा मंत्री को शिकायती चिट्ठी लिखी पूर्व अमेरिकी एथिक्स अधिकारी रिचर्ड पेंटर ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति के परिवार के लोग युद्ध से फायदा कमाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा- यह पहली बार हो सकता है जब किसी राष्ट्रपति का परिवार युद्ध से इतना पैसा कमाए। पेंटर ने कहा कि खाड़ी देशों पर दबाव हो सकता है कि वे राष्ट्रपति के परिवार से जुड़ी कंपनी से खरीदारी करें, ताकि उन्हें अमेरिकी समर्थन मिलता रहे। उन्होंने कहा कि ट्रम्प के बेटों की कंपनी ऐसे समय में बिजनेस कर रही है, जब उनके पिता के फैसलों से ही युद्ध की स्थिति बनी। इससे हितों के टकराव का मुद्दा उठ रहा है। ट्रम्प जूनियर के इन निवेशों पर विपक्षी नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को चिट्ठी लिखकर पूछा है कि क्या इन कंपनियों को सरकारी ठेके सही तरीके से दिए जा रहे हैं, या फिर राष्ट्रपति के परिवार को फायदा पहुंचाया जा रहा है। क्या करती है पॉवरस कंपनी पॉवरस की स्थापना 2025 में की गई थी। यह कंपनी पूर्व सैन्य अधिकारियों और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों ने शुरू की है। शुरुआत से ही इसका फोकस एडवांस ड्रोन और ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी पर रहा है। यह कंपनी आधुनिक ड्रोन, ऑटोनॉमस सिस्टम और सुरक्षा से जुड़े उपकरण बनाती है। इसके ड्रोन सेना, निगरानी, बॉर्डर सुरक्षा और आपदा राहत जैसे कामों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। कंपनी के को-फाउंडर ब्रेट वेलिकोविच हैं, जो अमेरिकी सेना से जुड़े रहे हैं। कंपनी अलग-अलग यूनिट्स के जरिए काम करती है, जो एयर, डिफेंस और समुद्री ड्रोन सिस्टम पर फोकस करती हैं। पॉवरस को अब तक करीब 50 से 60 मिलियन डॉलर का निवेश मिल चुका है। कंपनी में एरिक ट्रम्प और डोनाल्ड ट्रम्प जैसे बड़े नाम भी निवेशक के रूप में जुड़े हैं। कंपनी अभी नई है, इसलिए इसकी कमाई (रेवेन्यू) से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं है। फिलहाल कंपनी का ध्यान प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट पर है। होटल से लेकर टेक्नोलॉजी तक फैला ट्रम्प परिवार का कारोबार डोनाल्ड ट्रम्प का परिवार लंबे समय से बड़े बिजनेस साम्राज्य के लिए जाना जाता है। ट्रम्प परिवार का मुख्य कारोबार ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन के जरिए चलता है, जो कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। ट्रम्प परिवार का पारंपरिक बिजनेस रियल एस्टेट और होटल सेक्टर में रहा है। दुनिया के कई शहरों में उनके लग्जरी होटल, रिसॉर्ट और गोल्फ कोर्स हैं। इसके अलावा वे बड़े-बड़े कमर्शियल बिल्डिंग और प्रॉपर्टी प्रोजेक्ट्स में भी निवेश करते हैं। हाल के वर्षों में

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Trump Sons Defense Firm | Middle East Drone Demos

Trump Sons Defense Firm | Middle East Drone Demos

1 घंटे पहले कॉपी लिंक एरिक ट्रम्प (बाएं) और डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर (दाएं) अपनी क्रिप्टोकरेंसी कंपनी के शेयर बाजार में लिस्टिंग के मौके पर। यह तस्वीर सितंबर 2025 की है। अमेरिका में एक ड्रोन स्टार्टअप को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें राष्ट्रपति ट्रम्प के बेटे एरिक ट्रम्प और डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर जुड़े हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लोरिडा की पावरस कंपनी मिडिल ईस्ट के देशों को अपने ड्रोन सिस्टम बेचने की कोशिश कर रही है। ट्रम्प के बेटे एरिक ट्रम्प और डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर फरवरी के अंत में इस कंपनी से सलाहकार के तौर पर जुड़े थे, ये वही समय था जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया था। हालांकि दोनों को कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी मिलने की उम्मीद है। पावरस से जुड़े अधिकारियों ने अबू धाबी में अधिकारियों से मुलाकात की है। बातचीत इस बात पर हुई कि UAE को हथियार और ड्रोन डिफेंस सिस्टम बेचे जा सकते हैं, क्योंकि वह ईरान के खिलाफ अपने डिफेंस को और मजबूत करना चाहता है। इस घटना के बाद आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रपति के परिवार के लोग युद्ध से फायदा कमा रहे हैं। फ्लोरिडा की कंपनी Powerus खाड़ी के कई देशों में अपनी तकनीक बेचने की कोशिश कर रही है। पावरस के सह-संस्थापक ब्रेट वेलिकोविच ने बताया कि उनकी टीम खाड़ी के कई देशों में ड्रोन डेमो दिखा रही है, ताकि यह समझाया जा सके कि उनके इंटरसेप्टर ड्रोन ईरानी हमलों से बचाव में कैसे मदद कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि किन देशों में यह प्रदर्शन किया जा रहा है। वेलिकोविच ने कहा कि अमेरिका को चीन और रूस जैसे देशों से मुकाबले के लिए तेजी से ड्रोन तकनीक विकसित करनी होगी, नहीं तो वह पीछे रह जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। एंटी-ड्रोन सिस्टम की बढ़ रही मांग इस पूरे मामले से यह साफ होता है कि ईरान युद्ध के चलते ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम की मांग बढ़ रही है। ईरान सस्ते ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी महंगे मिसाइल सिस्टम से उन्हें गिराने की कोशिश करते हैं। इससे लागत का बड़ा अंतर पैदा हो रहा है। यही वजह है कि सस्ते और असरदार एंटी-ड्रोन सिस्टम बनाने वाली कंपनियों के लिए बड़ा मौका बन रहा है। पावरस ने हाल ही में ‘गार्डियन-1’ नाम का एक इंटरसेप्टर लॉन्च किया है, जो खास तौर पर आत्मघाती ड्रोन, जैसे ईरान के शाहेद-136 को गिराने के लिए बनाया गया है। पावरस की 1.1 अरब डॉलर के फंड पर नजर दि गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, पावरस की नजर पेंटागन द्वारा ड्रोन निर्माण के लिए रखे गए 1.1 अरब डॉलर के फंड पर है। यह फंड अमेरिका में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के लिए रखा गया है। इस कंपनी का कहना है कि यह समय तेजी से तकनीक विकसित करने का है, क्योंकि दुनिया एक तरह की हथियारों की दौड़ में है। पावरस के साथ कुछ पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारी भी जुड़े हैं। इनमें जनरल चार्ल्स क्यू. ब्राउन और रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल कीथ केलॉग जैसे नाम शामिल हैं, जो कंपनी को रणनीतिक सलाह दे रहे हैं। पावरस कंपनी शुरुआत में खेती और जंगल की आग बुझाने जैसे कामों के लिए ड्रोन बना रही थी। अब यह तेजी से सैन्य उपयोग के लिए भी ड्रोन तैयार कर रही है। शेयर मार्केट में लिस्ट होने की तैयारी कर रही पावरस पावरस कंपनी जल्द ही शेयर बाजार में लिस्ट होने की तैयारी कर रही है। इसके लिए वह एक नैस्डैक में लिस्टेड कंपनी के साथ मर्ज करने जा रही है। इस बिजनेस में ट्रम्प जूनियर और एरिक ट्रम्प ने निवेश किया है। दोनों भाई ड्रोन सेक्टर में सक्रिय निवेशक हैं और अमेरिकन वेंचर्स नाम के फंड से जुड़े हैं, जिसने ड्रोन कंपनियों में करीब 1 अरब डॉलर का निवेश किया हुआ है। वे ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एरिक ट्रम्प ने इस निवेश का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें उन कंपनियों में निवेश करने पर गर्व है, जिन पर उन्हें भरोसा है। उनके मुताबिक, ड्रोन भविष्य की बड़ी तकनीक है। विपक्षी नेता ने रक्षा मंत्री को शिकायती चिट्ठी लिखी पूर्व अमेरिकी एथिक्स अधिकारी रिचर्ड पेंटर ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति के परिवार के लोग युद्ध से फायदा कमाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा- यह पहली बार हो सकता है जब किसी राष्ट्रपति का परिवार युद्ध से इतना पैसा कमाए। पेंटर ने कहा कि खाड़ी देशों पर दबाव हो सकता है कि वे राष्ट्रपति के परिवार से जुड़ी कंपनी से खरीदारी करें, ताकि उन्हें अमेरिकी समर्थन मिलता रहे। उन्होंने कहा कि ट्रम्प के बेटों की कंपनी ऐसे समय में बिजनेस कर रही है, जब उनके पिता के फैसलों से ही युद्ध की स्थिति बनी। इससे हितों के टकराव का मुद्दा उठ रहा है। ट्रम्प जूनियर के इन निवेशों पर विपक्षी नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को चिट्ठी लिखकर पूछा है कि क्या इन कंपनियों को सरकारी ठेके सही तरीके से दिए जा रहे हैं, या फिर राष्ट्रपति के परिवार को फायदा पहुंचाया जा रहा है। रिचर्ड पेंटर ने X पर पोस्ट कर ट्रम्प परिवार को ‘युद्ध से फायदा कमाने वाला’ बताया। क्या करती है पॉवरस कंपनी पॉवरस की स्थापना 2025 में की गई थी। यह कंपनी पूर्व सैन्य अधिकारियों और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों ने शुरू की है। शुरुआत से ही इसका फोकस एडवांस ड्रोन और ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी पर रहा है। यह कंपनी आधुनिक ड्रोन, ऑटोनॉमस सिस्टम और सुरक्षा से जुड़े उपकरण बनाती है। इसके ड्रोन सेना, निगरानी, बॉर्डर सुरक्षा और आपदा राहत जैसे कामों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। कंपनी के को-फाउंडर ब्रेट वेलिकोविच हैं, जो अमेरिकी सेना से जुड़े रहे हैं। कंपनी अलग-अलग यूनिट्स के जरिए काम करती है, जो एयर, डिफेंस और समुद्री ड्रोन सिस्टम पर फोकस करती हैं। पॉवरस को अब तक करीब 50 से 60 मिलियन डॉलर का निवेश मिल चुका है। कंपनी में एरिक ट्रम्प और डोनाल्ड ट्रम्प जैसे बड़े नाम भी निवेशक के रूप में जुड़े हैं। कंपनी अभी नई है, इसलिए इसकी कमाई (रेवेन्यू) से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं है। फिलहाल कंपनी

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Iran Missile Arsenal Intact: US Intel Report Reveals

Iran Missile Arsenal Intact: US Intel Report Reveals

वॉशिंगटन डीसी58 मिनट पहले कॉपी लिंक फाइल। लगातार पांच हफ्तों से जारी अमेरिका और इजराइल के हमलों के बावजूद ईरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अमेरिकी खुफिया आकलन, जिसका हवाला CNN ने तीन सूत्रों के जरिए दिया, बताता है कि ईरान के करीब आधे मिसाइल लॉन्चर अब भी सुरक्षित हैं और उसके पास हजारों आत्मघाती ड्रोन मौजूद हैं। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लॉन्चर ऐसे हैं जो हमलों के बाद जमीन के नीचे दब गए हैं या पहुंच से बाहर हो गए हैं, लेकिन नष्ट नहीं हुए। एक सूत्र का कहना है कि ईरान अब भी पूरे क्षेत्र में गंभीर नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है। ड्रोन ताकत भी काफी हद तक बची हुई है। अनुमान है कि ईरान की लगभग आधी ड्रोन क्षमता अब भी सक्रिय है। इसके अलावा तटीय रक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाली क्रूज मिसाइलें भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं, जो होर्मुज में जहाजों के लिए खतरा बनी हुई हैं। यह तस्वीर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और उनके प्रशासन के दावों से अलग है। ट्रम्प कई बार कह चुके हैं कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता काफी हद तक खत्म कर दी गई है और उसके हथियार उत्पादन ठिकाने तबाह कर दिए गए हैं। 9 मार्च 2026 को जारी एक वीडियो का स्क्रीनशॉट है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि यह ईरान का मिसाइल लॉन्चर था और इसी जगह पर अमेरिका ने हमला किया था। अमेरिकी मंत्री बोले- ट्रम्प की छवि खराब कर रहे गुमनाम सूत्र व्हाइट हाउस ने इन खुफिया आकलनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि गुमनाम सूत्र ट्रम्प की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार का दावा है कि ईरान की नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है, दो-तिहाई सैन्य उत्पादन क्षमता नष्ट हो गई है और अमेरिका तथा इजराइल को हवाई बढ़त हासिल है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कहा है कि ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों में करीब 90 प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि जमीनी स्थिति इससे अलग संकेत देती है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार 12,300 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद ईरान की क्षमताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुईं। इजराइल का अनुमान है कि केवल 20 से 25 प्रतिशत लॉन्चर सक्रिय हैं, हालांकि इसमें वे सिस्टम शामिल नहीं हैं जो सुरंगों और गुफाओं में छिपे हुए हैं। ईरान की रणनीति का अहम हिस्सा उसके भूमिगत ठिकाने हैं। उसने मिसाइल और लॉन्च सिस्टम को सुरंगों और गुफाओं में छिपाकर रखा है, जिससे उन्हें ढूंढना और नष्ट करना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा मोबाइल लॉन्चर तेजी से जगह बदलते हैं, जिससे उन पर निशाना साधना और भी कठिन हो जाता है। ईरान ने शुक्रवार रात इजराइल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल अटैक किए। जमीन और सुरंगों के नीचे छिपे ईरानी हथियार अमेरिका और इजराइल अब इन ठिकानों के एंट्री पॉइंट और उन्हें फिर से चालू करने वाले उपकरणों को निशाना बना रहे हैं। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी एजेंसियां अब तक यह तय नहीं कर पाई हैं कि ईरान की मिसाइल क्षमता को कितना नुकसान पहुंचाया जा चुका है और कितने लॉन्चर अब भी बचे हैं। अधिकारियों का मानना है कि ईरान के पास अभी भी इतनी बैलिस्टिक मिसाइलें और लॉन्च सिस्टम मौजूद हैं कि वह इजराइल और क्षेत्र के अन्य ठिकानों पर हमला कर सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित करना भी चुनौती बना हुआ है, क्योंकि तटीय मिसाइल क्षमता खत्म नहीं हुई है और संभव है कि यह भी भूमिगत ठिकानों में छिपी हो। जहां ईरान की नियमित नौसेना को नुकसान हुआ है, वहीं रिवोल्यूशनरी गार्ड की समुद्री ताकत अब भी काफी हद तक बची हुई है। उसके पास सैकड़ों छोटी नावें और बिना चालक वाली नौकाएं हैं, जिनका इस्तेमाल समुद्री रास्तों को बाधित करने में किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। उसके पास अभी भी ड्रोन, मिसाइल और सहयोगी नेटवर्क जैसी क्षमताएं मौजूद हैं, जिससे वह जवाबी कार्रवाई जारी रख सकता है। ——————————————————— ईरान जंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… 23 साल बाद दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट:ट्रम्प का ईरानी आसमान पर कब्जे का दावा गलत; अब तक अमेरिका के 7 विमान तबाह ईरान जंग के एक महीने बाद ट्रम्प ने 2 अप्रैल को अमेरिकी जनता को संबोधित किया। 19 मिनट के भाषण में उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की हवाई सेना को तबाह कर दिया है और उनके पास जवाब देने की क्षमता नहीं बची है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर कब्जा हो चुका है। उनके विमान तेहरान के ऊपर उड़ रहे हैं और ईरान कुछ नहीं कर पा रहा है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी ऐसे ही दावे किए। लेकिन हालात अब अलग कहानी बता रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Iran Missile Downs US Jet

Iran Missile Downs US Jet

वॉशिंगटन डीसी/तेहरान15 मिनट पहले कॉपी लिंक रिप्रेजेंटेटिव वीडियो ईरान जंग के एक महीने पूरे होने के बाद ट्रम्प ने 2 अप्रैल को अमेरिकी जनता को संबोधित किया। अपने 19 मिनट के भाषण में उन्होंने यह दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की हवाई सेना को तबाह कर दिया है और उनके पास जवाब देने की क्षमता नहीं बची है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर कब्जा हो चुका है। उनके विमान तेहरान के ऊपर उड़ रहे हैं और ईरान अब कुछ नहीं कर पा रहा है। ट्रम्प ही नहीं, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कुछ ऐसे ही दावे किए। लेकिन अब हालात कुछ और कहानी बयां कर रहे हैं। पिछले 24 घंटों में अमेरिका के दो सैन्य विमान और सर्च ऑपरेशन में लगे दो ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर ईरान के हमले का शिकार हुए। न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, 23 साल से ज्यादा समय में पहली बार ऐसा हुआ है कि अमेरिकी लड़ाकू विमान दुश्मन की गोलीबारी में गिराए गए हैं। इससे पहले 2003 में इराक युद्ध के दौरान ऐसा हुआ था। ईरान ने शुक्रवार को अमेरिकी एयरक्राफ्ट A-10 पर हमला किया। यह फुटेज IRGC ने जारी की है। ईरान युद्ध में अमेरिका के 7 विमान तबाह 2 मार्च: कुवैत में ‘फ्रेंडली फायर’ में 3 F-15 गिरे, सभी 6 क्रू मेंबर सुरक्षित निकले। 12 मार्च: इराक में KC-135 टैंकर क्रैश, 6 अमेरिकी एयरक्रू की मौत। 27 मार्च: सऊदी के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर E-3 सेंट्री नष्ट हुआ, एक टैंकर विमान को भी नुकसान हुआ। 3 अप्रैल: F-15 और A-10 नष्ट हुए, पहली बार दुश्मन की फायरिंग में अमेरिकी विमान गिरे। 24 घंटे में 2 अमेरिकी जेट्स गिराए, 2 रेस्क्यू हेलिकॉप्टर पर अटैक ईरानी मीडिया के मुताबिक सबसे पहले अमेरिकी F-15E फाइटर जेट को मार गिराया गया। यह ईरान के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में उड़ान भर रहा था। F-15E फाइटर जेट के क्रू को ढूंढने के लिए अमेरिकी विमान A-10 अटैक एयरक्राफ्ट पहुंचा तो उस पर भी हमला हुआ। A-10 हमले के बाद कुवैत के हवाई क्षेत्र तक पहुंच गया, जहां पायलट ने सुरक्षित तरीके से इजेक्ट किया। पायलट सुरक्षित है, हालांकि विमान कुवैत में क्रैश हो गया। CBS के अनुसार, F-15E में दो क्रू मेंबर थे। इनमें से एक को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि दूसरा लापता है। ईरानी सरकारी मीडिया का कहना है कि पैराशूट के जरिए बाहर निकला यह क्रू सदस्य देश के दक्षिणी हिस्से में उतरने का अनुमान है। वहीं, F-15E फाइटर जेट के रेस्क्यू के लिए 2 ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर भेजे गए थे। उन पर भी हमला हुआ। हालांकि, इन पर मौजूद सभी अमेरिकी सैनिक सुरक्षित बताए जा रहे हैं। ईरान ने जो तस्वीरें जारी की हैं कि उनके आधार पर एक्सपर्ट्स इस प्लेन को F-15E बता रहे हैं। ईरान की रणनीति नहीं समझ पा रहा अमेरिका एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका को ईरान के आसमान में बढ़त जरूर है, लेकिन पूरी तरह कंट्रोल नहीं है। ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। अब सवाल यह है कि कमजोर एयर डिफेंस होने के बावजूद ईरान ने इतने एडवांस अमेरिकी विमानों को कैसे निशाना बनाया? इसका जवाब है ईरान की ‘असिमेट्रिक वॉरफेयर’ यानी अलग तरीके से युद्ध लड़ने की रणनीति। ईरान जानता है कि सीधे युद्ध में अमेरिका से मुकाबला करना मुश्किल है, इसलिए कम संसाधनों में ज्यादा नुकसान पहुंचाने की रणनीति अपना रहा है। वह अक्सर अमेरिका पर चौंकाने वाले हमले कर रहा है। यही वजह है कि जंग शुरू होने के 35 दिन बाद भी अमेरिका अभी भी ईरान की रणनीति को पूरी तरह समझ नहीं पाया है। एक्सपर्ट का मानना है कि अमेरिकी विमानों और हेलिकॉप्टर पर हमले के पीछे मजीद एयर डिफेंस सिस्टम या कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल (शोल्डर-फायर मिसाइल) हो सकती हैं। माना जा रहा है कि अमेरिकी विमान कम ऊंचाई पर उड़ रहे थे, इसलिए वे इन मिसाइलों की रेंज में आ गए। मजीद एयर डिफेंस 6km दूरी तक निशाना लगा सकता है मजिद सिस्टम ईरान ने 2021 के आसपास इस्तेमाल करना शुरू किया था। इसे कम ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रडार पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि इंफ्रारेड तकनीक का इस्तेमाल करता है। मजीद रडार सिग्नल नहीं देता, इसलिए विमान इसे पहले से पकड़ नहीं पाते। इसकी मार करने की दूरी करीब 8 किलोमीटर और ऊंचाई 6 किलोमीटर तक है। इस वजह से यह उन हालात में ज्यादा कारगर होता है, जहां दुश्मन के विमान या ड्रोन को किसी खास इलाके के ऊपर आना पड़ता है। यह एकसाथ कई टारगेट पर नजर रख सकता है और इसमें एकसाथ 8 मिसाइल तैयार रहती हैं। यह सिस्टम आमतौर पर मोबाइल प्लेटफॉर्म पर लगाया जाता है, यानी इसे जरूरत के हिसाब से एक जगह से दूसरी जगह जल्दी शिफ्ट किया जा सकता है। इससे दुश्मन के लिए इसकी सही लोकेशन पता लगाना मुश्किल हो जाता है। मोबाइल डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल एक्सपर्ट्स का कहना है अमेरिकी हमले में नुकसान पहुंचने के बाद ईरान ने अपनी रणनीति बदली है। पहले वह स्थिर एयर डिफेंस सिस्टम इस्तेमाल करता था, लेकिन अब उसने मोबाइल सिस्टम अपनाए हैं। अब उसके कई मिसाइल लॉन्चर भूमिगत ठिकानों, सुरंगों और कठिन इलाकों में छिपे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगातार हमलों के बावजूद उसके करीब आधे मिसाइल लॉन्चर अभी भी सुरक्षित हैं। इसके अलावा, मोबाइल लॉन्चर तेजी से जगह बदल सकते हैं। इसे ‘फायर करो और तुरंत हट जाओ’ रणनीति कहा जाता है, जिससे उन्हें निशाना बनाना मुश्किल हो जाता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान चीन के HQ-9B जैसे उन्नत मिसाइल सिस्टम का भी इस्तेमाल कर सकता है, जिसमें रडार और इंफ्रारेड दोनों तकनीक होती हैं। ———————————- ईरान जंग से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… दावा-ईरान ने हीट ट्रैकिंग मिसाइल से अमेरिकी F-35 को गिराया:यह दुनिया का सबसे एडवांस फाइटर जेट, लेकिन ईरानी खतरे का अंदाजा नहीं लगा पाया ईरान ने 19 मार्च को दुनिया के सबसे एडवांस अमेरिकी फाइटर जेट F-35 को गिराने का दावा किया। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने

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Artemis 2 Astronauts Capture Earth Photos Near Moon; First Human Visit Since 1972

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1 घंटे पहले कॉपी लिंक नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों चंद्रमा के नजदीक जा रहे हैं। उन्होंने रास्ते में पृथ्वी की तस्वीरें खींचीं। नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के तहत चंद्रमा की ओर जाते हुए चार अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी की शानदार तस्वीरें खींचीं हैं। पृथ्वी नीले रंग में बेहद खूबसूरत दिख रही है। एक फोटो में पृथ्वी का घुमावदार हिस्सा दिखा जबकि दूसरी फोटो में पूरी धरती नजर आई, जिस पर सफेद बादल छाए थे। मिशन पर गए चार अंतरिक्ष यात्री (3 अमेरिकी, 1 कनाडाई) फिलहाल पृथ्वी से करीब 1.8 लाख किलोमीटर दूर पहुंच चुके हैं। अभी उन्हें 2.4 लाख किलोमीटर और जाना है। वे 6 अप्रैल तक चंद्रमा के पास पहुंचेंगे। 1 अप्रैल को सुबह 4:05 बजे ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना हुआ था। 1972 के बाद पहली बार कोई इंसान चांद के करीब जाएगा। हालांकि एस्ट्रोनॉट चांद पर कदम नहीं रखेंगे। वे सिर्फ चांद की कक्षा का चक्कर लगाकर वापस आ जाएंगे। मून मिशन के दौरान ली गईं 5 तस्वीरें… 54 साल में कितनी बदली पृथ्वी, 2 तस्वीरें… एक दिन पहले ओरियन कैप्सूल ने पृथ्वी की कक्षा छोड़ी थी आर्टेमिस-2 मिशन अब चांद की ओर बढ़ रहा है। एक दिन पहले शुक्रवार सुबह 5:19 बजे ओरियन कैप्सूल ने थ्रस्टर्स फायर किए और पृथ्वी की कक्षा छोड़ दी। अब यह अगले 4 दिन अंतरिक्ष में सफर करेगा और वहां पहुंचेगा, जहां आज तक केवल 24 इंसान पहुंच सके हैं। पृथ्वी के ऑर्बिट को छोड़कर चांद की तरफ जाने के लिए इंजन फायर करने की इस प्रोसेस को ‘ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न’ कहते हैं। यह करीब 6 मिनट का मैन्यूवर था, जिसने यान की रफ्तार बढ़ाकर 22,000 मील प्रति घंटा यानी करीब 34 हजार किमी/घंटा कर दी। CSA एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसेन और नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन, क्रिस्टीना कोच और विक्टर ग्लोवर नेओरियन स्पेसक्राफ्ट से बातचीत की। मिशन के अगले पड़ाव…अगले 5 दिन पांचवां दिन: चंद्रमा की ग्रेविटी में दाखिल होगा आर्टेमिस-2 5 अप्रैल मिशन के पांचवें दिन तक धरती के गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव की वजह से कैप्सूल की रफ्तार धीमी हो जाएगी। जैसे ही यह चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में दाखिल होगा, इसकी गति फिर से बढ़ने लगेगी और यह चांद की ओर तेजी से बढ़ने लगेगा। छठा दिन: बास्केटबॉल जैसा बड़ा नजर आएगा चंद्रमा छठे दिन ओरियन चांद की सतह से महज 6,400 किमी ऊपर से गुजरेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री चांद के उस हिस्से को अपनी आंखों से देख पाएंगे, जो पृथ्वी से कभी नजर नहीं आता। खिड़की से देखने पर चांद इतना बड़ा दिखेगा, जैसे हाथ के पास कोई बास्केटबॉल रखी हो। 50 मिनट के लिए टूट सकता है संपर्क: जब ओरियन चांद के पीछे से गुजरेगा तो पृथ्वी से उसका संपर्क पूरी तरह कट सकता है। करीब 50 मिनट तक ‘कम्युनिकेशन ब्लैकआउट’ रहेगा। मिशन कंट्रोल को यान से सिग्नल नहीं मिलेगा। पहली बार धरती से इतनी दूर पहुंचेंगे: इसी दिन अपोलो 13 का 1970 में बनाया गया धरती से सबसे ज्यादा दूरी का 400,171.18 km का रिकॉर्ड भी टूट सकता है। आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्रियों के पृथ्वी से 402,336 किमी की दूरी तक पहुंचने की उम्मीद है। सातवां दिन: चांद की ग्रेविटी से पृथ्वी पर लौटेगा यान सातवें दिन चांद के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकलकर यान वापस धरती की ओर अपना सफर शुरू कर देगा। आर्टेमिस-2 का रास्ता काफी हद तक 1970 के अपोलो-13 मिशन जैसा है। यह चांद के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल ‘गुलेल’ की तरह करेगा, जो यान को वापस पृथ्वी की ओर धकेल देगा। पूरे मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्री करीब 11.02 लाख किमी का सफर तय करेंगे। दसवां दिन: 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में गिरेगा यान भारतीय समय के अनुसार 11 अप्रैल को सुबह 6:30 बजे ओरियन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। 6:36 बजे यह सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में ‘स्प्लैशडाउन’ करेगा। इसके बाद ह्यूस्टन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें मिशन की जानकारी दी जाएगी। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… चंद्रमा की कक्षा में पहुँचने वाली पहली महिला बनेंगी क्रिस्टीना: पहली बार फेल हो गईं थीं नासा के मून मिशन आर्टेमिस-2 की चार सदस्यीय टीम में शामिल 47 वर्षीय अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचने वाली दुनिया की पहली महिला बनने जा रही हैं। 2019-20 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 328 दिन बिताकर उन्होंने किसी महिला की सबसे लंबी एकल अंतरिक्ष यात्रा (उड़ान से लैंडिंग तक) का रिकॉर्ड बनाया था। इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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US Israel vs Iran War Live Updates F-35 Jets Trump Netanyahu

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तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी9 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी C-130 हरक्यूलिस विमान पायलट की तलाश के दौरान फ्लेयर्स छोड़ते हुए। अमेरिका ईरान में गिराए गए अपने फाइटर जेट के पायलट की तलाश में लगा हुआ है। इस मिशन के लिए C-130 हरक्यूलिस जैसे बड़े विमान का इस्तेमाल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें यह विमान ईरान के ऊपर बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते हुए फ्लेयर्स छोड़ रहा है। विमान से फ्लेयर छोड़ने का मतलब है कि फाइटर जेट खुद को मिसाइलों से बचाने के लिए पीछे की तरफ गर्म फ्लेयर्स छोड़ते हैं। मिसाइल विमान के इंजन की गर्मी की जगह इन फ्लेयर्स को अपना टारगेट समझ लेती है और उन पर हमला कर देती है, जबकि असली विमान बच जाता है। इसी बीच इजराइल के एक अधिकारी ने दावा किया है कि अमेरिकी जेट के एक पायलट को ईरान के अंदर से जिंदा बचा लिया गया है। दूसरे पायलट की तलाश अभी भी जारी है। हालांकि इस दावे की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले ईरान ने दावा किया था कि उसने अमेरिकी F-35 फाइटर जेट गिराया है, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वह F-15E विमान हो सकता है। ईरान में अमेरिकी पायलट को पकड़ने पर ₹55 का लाख इनाम ईरान ने अमेरिकी फाइटर जेट के पायलट को पकड़ने पर 10 बिलियन ईरानी तोमान (लगभग 55 लाख रुपए) के इनाम का ऐलान किया है। ईरान के सरकारी मीडिया IRIB के एक एंकर ने नागरिकों से अपील की है कि वे अमेरिकी पायलट को जिंदा पकड़कर सरकारी अधिकारी या सेना को सौंपे। ईरान जंग से जुड़ी 4 तस्वीरें… ईरान ने शुक्रवार को उत्तरी इजराइल के शहर किरयात अता पर मिसाइल हमला किया, जिससे कई गाड़ियां जल गईं और आसपास की इमारतों को नुकसान पहुंचा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शुक्रवार को ईरान की एक मिसाइल तकनीकी खराबी के कारण तेहरान में गिर गई। इजराइल के पेटाह टिकवा शहर पर शुक्रवार को ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल के हमले का वीडियो। ईरान ने शुक्रवार रात इजराइल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल अटैक किए। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… लाइव अपडेट्स 9 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी सांसद बोले- संसद की मंजूरी के बिना युद्ध फंडिंग का समर्थन नहीं अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद जॉन कर्टिस ने कहा है कि वह ईरान के खिलाफ ट्रम्प की कार्रवाई का समर्थन करते हैं, लेकिन आगे के सैन्य अभियानों के लिए फंडिंग तभी देंगे जब संसद औपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा करे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, “मैं सैन्य तैयारी बनाए रखने और हथियारों के भंडार को भरने का समर्थन करता हूं, लेकिन युद्ध घोषणा के बिना आगे के सैन्य अभियानों के लिए फंडिंग का समर्थन नहीं कर सकता।” अमेरिकी संविधान के अनुसार, युद्ध घोषित करने का अधिकार संसद के पास है। हालांकि, पिछले कई वर्षों में अमेरिकी राष्ट्रपति बिना औपचारिक घोषणा या संसद की मंजूरी के भी सैन्य कार्रवाई करते रहे हैं। 22 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी विमानों को गिराने के बाद ईरान में जश्न ईरान में अमेरिकी विमानों को गिराने के दावों के बाद सड़कों पर जश्न का माहौल देखा जा रहा है। ईरान में इन घटनाओं को लेकर काफी गर्व और उत्साह का माहौल है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वे शुरुआत से ही ऐसे कदमों का वादा कर रहे थे और उनके पास ऐसी क्षमताएं हैं जो अभी तक पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हुई हैं। उनका कहना है कि आज की घटनाओं से यह साफ हो गया है। ईरान ने आगे और हमले करने की भी बात कही है और कहा है कि अमेरिका ने उनकी सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) की ताकत को कम आंका है। 33 मिनट पहले कॉपी लिंक इराकी समूह का दावा- अमेरिकी ठिकानों पर एक दिन में 19 हमले इराक के सशस्त्र संगठन इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने पिछले एक दिन में इराक और आसपास के क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर 19 हमले किए हैं। समूह के अनुसार, इन हमलों में कई दर्जन ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इन दावों को लेकर अभी तक अमेरिकी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। 44 मिनट पहले कॉपी लिंक इजराइली वायुसेना ने हिजबुल्लाह के रॉकेट लॉन्चर पर हमला किया इजराइल की वायुसेना ने लेबनान में हिजबुल्लाह के एक रॉकेट लॉन्चर को निशाना बनाकर हमला किया। इजराइली सेना (IDF) के अनुसार, इस लॉन्चर का इस्तेमाल कुछ ही मिनट पहले उत्तरी इजराइल पर रॉकेट दागने के लिए किया गया था। सेना ने बताया कि हमले के कुछ ही मिनटों बाद इस लॉन्चर को बमबारी कर नष्ट कर दिया गया। IDF के मुताबिक, हिजबुल्लाह की ओर से किए गए रॉकेट हमले में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। 53 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरानी पुल पर हमले में 13 लोगों की मौत ईरान में तेहरान और कराज के बीच स्थित B1 पुल पर हुए हमले में अब मरने वालों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान में शाहिद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी पर भी हवाई हमला किया गया। पिछले कुछ दिनों में कई आम नागरिकों से जुड़े संस्थानों को नुकसान पहुंचा है या वे पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। इसके अलावा, तेहरान में वैक्सीन बनाने वाले पाश्चर इंस्टीट्यूट पर भी 24 घंटे पहले हमला हुआ था। 02:35 AM4 अप्रैल 2026 कॉपी लिंक ईरानी मिसाइल हमले से इजराइल के कई इलाकों में नुकसान ईरानी मिसाइल हमले के बाद इजराइल में नुकसान और अफरा-तफरी की खबरें सामने आई हैं। इजराइल की वल्ला न्यूज एजेंसी के अनुसार, तेल अवीव के पास बनी ब्राक इलाके में कांच के टुकड़ों से एक व्यक्ति घायल हो गया। साथ ही, इंटरसेप्ट किए गए ईरानी मिसाइल के टुकड़े 17 अलग-अलग जगहों पर गिरे। एजेंसी ने बताया कि रोश हआयिन के एक रिहायशी इलाके में भी मिसाइल का असर हुआ, जिससे काफी नुकसान हुआ और वहां बिजली भी चली गई। वहीं, एक किंडरगार्टन (बच्चों के स्कूल) के पास भी मलबा मिला है। 02:25 AM4 अप्रैल 2026 कॉपी लिंक पायलट की तलाश के लिए 2 ऑपरेशन चला रहा

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Sonipat Youth Death in Netherlands Work Accident

Sonipat Youth Death in Netherlands Work Accident

सोनीपत5 घंटे पहले कॉपी लिंक नीदरलैंड के अस्पताल में सागर राणा चार दिन तक जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा। इनसेट में सागर का फाइल फोटो। हरियाणा में सोनीपत के युवक की नीदरलैंड में मौत हो गई। परिवार ने करीब 25 लाख रुपए का कर्ज लेकर उसे दो साल पहले फ्रांस भेजा था। मगर, कुछ दिन फ्रांस में रहने के बाद युवक नीदरलैंड चला गया और काम की तलाश शुरू की। कई दिन तक रोजगार की तलाश करने के बाद उसे पेड़ काटने का काम मिला। पेड़ काटते वक्त वह गिर गया। कई दिन तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। अब हालात ऐसे हैं कि उसका पार्थिव शरीर भी विदेश में ही फंसा हुआ है और परिवार आर्थिक तंगी के चलते उसे भारत नहीं ला पा रहा। परिजन लगातार सरकार और प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं कि उनके बेटे का शव वतन लाने में मदद की जाए, ताकि वे अंतिम बार उसका चेहरा देख सकें और अपने हाथों से अंतिम संस्कार कर सकें। सागर राणा 24 नवंबर 2024 को टूरिस्ट वीजा पर भारत से फ्रांस गया था। नीली ड्रेस में सागर अपने छोटे भाई कमल के साथ। (फाइल फोटो) पहले जानिए कैसे हुआ युवक के साथ हादसा… दो साल पहले टूरिस्ट वीजा पर गया था: सोनीपत के मोई माजरी गांव के रहने वाले कमल राणा ने बताया कि उसका बड़ा भाई सागर राणा (23) 24 नवंबर 2024 को टूरिस्ट वीजा पर भारत से फ्रांस गया था। वह पेरिस में रहकर अपने लिए बेहतर अवसर तलाश रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि वह विदेश में कुछ कर दिखाएगा और घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा। नीदरलैंड में लंबे समय तक नहीं मिला काम: परिजनों के अनुसार, फ्रांस जाने के बाद सागर जनवरी 2026 में नीदरलैंड पहुंचा। वहां करीब दो महीने तक उसे कोई काम नहीं मिला और वह लगातार रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटकता रहा। काफी संघर्ष के बाद करीब 15 दिन पहले ही उसे एक व्यक्ति के घर पर पेड़ काटने का काम मिला। 20-21 मार्च को एक घर में पेड़ काटने गया था: परिजनों के अनुसार, नीदरलैंड में पूरी मेहनत और लगन के साथ काम कर रहा था ताकि अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभा सके। 20 और 21 मार्च को छुट्टी के दौरान एक स्थानीय निवासी ने सागर को पेड़ काटने बुलाया। आरोप है कि इस दौरान उसे कोई भी सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए और न ही जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया। पेड़ गिरने से हुआ हादसा, सिर में लगी गंभीर चोट: परिवार के मुताबिक, कटान करते समय अचानक पेड़ उसकी ओर गिरने लगा। उस समय सागर सीढ़ी पर खड़ा था। पेड़ गिरते वक्त सीढ़ी उसमें उलझ गई, जिससे वह संतुलन खो बैठा और पीछे की ओर जमीन पर गिर पड़ा। गिरने के दौरान उसके सिर में गंभीर चोट आई। नाक और कान से खून बहने लगा। चार दिन तक चलता रहा इलाज, नहीं बची जान: हादसे के तुरंत बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां वह चार दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा, लेकिन 25 मार्च को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसकी जानकारी उसके मामा को फोन पर मिली, जिसके बाद परिवार में मातम छा गया। सागर राणा का परिवार का अपना मकान जर्जर है, इसलिए परिजन काका के मकान में किराए पर रहते हैं।-फाइल फोटो ऐसे रहा युवक का सोनीपत से फ्रांस और नीदरलैंड का सफर… आर्थिक तंगी ने विदेश जाने को किया मजबूर कमल राणा ने बताया कि उनके परिवार के हालात लंबे समय से ठीक नहीं थे। परिवार के पास केवल एक बीघा जमीन है और आय का कोई स्थायी साधन नहीं है। गांव में अपना मकान जर्जर हालात में है, इसलिए वे गांव में अपने चाचा के मकान में किराए पर रह रहे हैं। पिता किराए की गाड़ी चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जिससे घर का खर्च किसी तरह चलता है। सागर ने विदेश जाकर मेहनत करने और परिवार का कर्ज उतारने के साथ-साथ अपना खुद का मकान बनाने का सपना देखा था। सागर ने अपनी 12वीं की पढ़ाई कसांडी गांव से पूरी की थी। कर्ज लेकर भेजा था विदेश कमल राणा ने बताया कि सागर को विदेश भेजने के लिए परिवार ने करीब 20 से 25 लाख रुपए तक का कर्ज लिया था। उम्मीद थी कि सागर विदेश में कमाकर इस कर्ज को उतार देगा और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बना देगा। सागर रोजाना अपनी मां और परिवार के अन्य सदस्यों से बात करता था, लेकिन 20 मार्च को उसका फोन नहीं आया। परिवार ने उसे मैसेज भी किए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बाद में उसकी मौत की खबर आई। सागर को विदेश भेजने के लिए परिवार ने करीब 20 से 25 लाख रुपए तक का कर्ज लिया था।-फाइल फोटो विदेश में फंसा पार्थिव शरीर, सरकार से मदद की गुहार वर्तमान में सागर का पार्थिव शरीर नीदरलैंड में ही है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, जिसके कारण वे खुद शव को भारत नहीं ला पा रहे हैं। परिजन लगातार सरकार और प्रशासन से मदद की अपील कर रहे हैं, ताकि सागर का अंतिम संस्कार उसके अपने देश और अपने लोगों के बीच हो सके और परिवार आखिरी बार अपने बेटे को देख सके। ————————– ये खबर भी पढ़ें…. यूक्रेन युद्ध में धकेले गए फतेहाबाद के युवक की मौत:दिल्ली पहुंचा शव; 8 महीने पहले जबरन रूसी सेना में किया था भर्ती रूस की सेना में जबरन भर्ती करके यूक्रेन में युद्ध में धकेले गए फतेहाबाद जिले के गांव कुम्हारिया के दो युवकों में से एक की मौत हो गई है। युवक अंकित जांगड़ा की डेडबॉडी दिल्ली पहुंच गई है। जहां परिजन डेडबॉडी लेने पहुंच गए हैं। आज (शनिवार) दोपहर बाद तक डेडबॉडी दिल्ली से गांव कुम्हारिया लाई जाएगी। (पूरी खबर पढ़ें) दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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