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Fugitive Nirav Modi could soon be brought back to India after losing his final case in the European court

Fugitive Nirav Modi could soon be brought back to India after losing his final case in the European court
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लंदन13 मिनट पहले

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भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाने का रास्ता अब साफ हो गया है। नीरव मोदी यूरोपीय मानवाधिकार अदालत में अपना आखिरी केस भी हार गए हैं। जिसके बाद उसको भारत लाने यानी प्रत्यर्पण के मामले में बची आखिरी कानूनी बाधा भी दूर हो गई है।

न्यूज18 द्वारा एक्सेस किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, यूके की अदालतों में अपील के सभी रास्ते बंद होने के बाद नीरव मोदी ने अप्रैल 2026 में यूरोपीय मानवाधिकार अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

यूरोपीय अदालत से भी नीरव मोदी को कोई राहत नहीं मिली है, जिससे अब उसके पास अपने प्रत्यर्पण का विरोध करने के लिए कोई भी कानूनी विकल्प नहीं बचा है।

कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त होने के बाद, यूके सरकार ने नीरव मोदी को भारतीय अधिकारियों को सौंपने की प्रोसेस शुरू कर दी है। अब नीरव मोदी को किसी भी समय भारत लाया जा सकता है।

नीरव मोदी मार्च 2019 से लंदन की एचएमपी वांड्सवर्थ जेल में बंद है। CBI और ED, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के कई हजार करोड़ रुपए के घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रहे हैं।

मानवाधिकार अदालत से भी नहीं मिली राहत

नीरव मोदी ने यूके की अदालतों में अपील के सभी कानूनी विकल्प खत्म होने के बाद अप्रैल 2026 में यूरोपीय मानवाधिकार अदालत का रुख किया था।

हालांकि, यूरोपीय अदालत ने भी नीरव मोदी को राहत देने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद प्रत्यर्पण को चुनौती देने के उसके सारे कानूनी रास्ते अब आधिकारिक रूप से बंद हो गए हैं।

यूके सरकार ने शुरू की भारत भेजने की प्रोसेस

कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह खत्म होने के बाद अब यूके सरकार एक्शन में आ गई है। सूत्रों के मुताबिक, ब्रिटिश सरकार ने नीरव मोदी को भारतीय जांच एजेंसियों को सौंपने के लिए जरूरी फॉर्मेलिटीज शुरू कर दी हैं।

सूत्रों का कहना है कि प्रत्यर्पण की औपचारिकताएं अंतिम चरण में हैं और उसे किसी भी समय भारत लाया जा सकता है।

मार्च 2019 से लंदन की जेल में बंद है नीरव मोदी

भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी पिछले सात सालों से यूके में है और मार्च 2019 से लंदन की एचएमपी वांड्सवर्थ जेल में बंद है।

वह जेल में रहते हुए ही भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा था, जिसमें अब उसे पूरी तरह हार का सामना करना पड़ा है।

PNB घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग केस में है तलाश

भारत की प्रमुख जांच एजेंसियां, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED), नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिए लगातार प्रयास कर रही थीं।

नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के साथ मिलकर कई हजार करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं, जिनकी जांच के लिए उसे भारत लाना जरूरी है।

क्या होती है यूरोपीय मानवाधिकार अदालत (ECHR)?

ECHR क्या है: यह एक अंतरराष्ट्रीय अदालत है जो फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में स्थित है। यह यूरोपीय मानवाधिकार कन्वेंशन के उल्लंघन के मामलों की सुनवाई करती है।

प्रत्यर्पण में भूमिका: अक्सर यूके की अदालतों से केस हारने के बाद अपराधी मानवाधिकारों का हवाला देकर ECHR में अपील करते हैं। नीरव मोदी के पास यह आखिरी अंतरराष्ट्रीय कानूनी कवच था, जो अब खत्म हो चुका है।

ये खबर भी पढ़ें…

नीरव मोदी को बैंक को ₹108 करोड़ चुकाने होंगे: पर्सनल लोन गारंटी मामले में लंदन हाईकोर्ट का फैसला, 7 साल से जेल में बंद है

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बैंक ऑफ इंडिया (BOI) को 1.15 करोड़ डॉलर यानी करीब 108 करोड़ रुपए चुकाने होंगे। लंदन के हाई कोर्ट ने दुबई की एक कंपनी ‘फायरस्टार डायमंड एफजेडई’ के लिए दी गई पर्सनल लोन गारंटी और उस पर लगे ब्याज से जुड़े मामले में ये फैसला सुनाया है। नीरव बीते 7 सालों से लंदन की जेल में बंद है और भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

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न्यूज18 द्वारा एक्सेस किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, यूके की अदालतों में अपील के सभी रास्ते बंद होने के बाद नीरव मोदी ने अप्रैल 2026 में यूरोपीय मानवाधिकार अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

यूरोपीय अदालत से भी नीरव मोदी को कोई राहत नहीं मिली है, जिससे अब उसके पास अपने प्रत्यर्पण का विरोध करने के लिए कोई भी कानूनी विकल्प नहीं बचा है।

कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त होने के बाद, यूके सरकार ने नीरव मोदी को भारतीय अधिकारियों को सौंपने की प्रोसेस शुरू कर दी है। अब नीरव मोदी को किसी भी समय भारत लाया जा सकता है।

नीरव मोदी मार्च 2019 से लंदन की एचएमपी वांड्सवर्थ जेल में बंद है। CBI और ED, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के कई हजार करोड़ रुपए के घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रहे हैं।

मानवाधिकार अदालत से भी नहीं मिली राहत

नीरव मोदी ने यूके की अदालतों में अपील के सभी कानूनी विकल्प खत्म होने के बाद अप्रैल 2026 में यूरोपीय मानवाधिकार अदालत का रुख किया था।

हालांकि, यूरोपीय अदालत ने भी नीरव मोदी को राहत देने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद प्रत्यर्पण को चुनौती देने के उसके सारे कानूनी रास्ते अब आधिकारिक रूप से बंद हो गए हैं।

यूके सरकार ने शुरू की भारत भेजने की प्रोसेस

कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह खत्म होने के बाद अब यूके सरकार एक्शन में आ गई है। सूत्रों के मुताबिक, ब्रिटिश सरकार ने नीरव मोदी को भारतीय जांच एजेंसियों को सौंपने के लिए जरूरी फॉर्मेलिटीज शुरू कर दी हैं।

सूत्रों का कहना है कि प्रत्यर्पण की औपचारिकताएं अंतिम चरण में हैं और उसे किसी भी समय भारत लाया जा सकता है।

मार्च 2019 से लंदन की जेल में बंद है नीरव मोदी

भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी पिछले सात सालों से यूके में है और मार्च 2019 से लंदन की एचएमपी वांड्सवर्थ जेल में बंद है।

वह जेल में रहते हुए ही भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा था, जिसमें अब उसे पूरी तरह हार का सामना करना पड़ा है।

PNB घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग केस में है तलाश

भारत की प्रमुख जांच एजेंसियां, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED), नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिए लगातार प्रयास कर रही थीं।

नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के साथ मिलकर कई हजार करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं, जिनकी जांच के लिए उसे भारत लाना जरूरी है।

क्या होती है यूरोपीय मानवाधिकार अदालत (ECHR)?

ECHR क्या है: यह एक अंतरराष्ट्रीय अदालत है जो फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में स्थित है। यह यूरोपीय मानवाधिकार कन्वेंशन के उल्लंघन के मामलों की सुनवाई करती है।

प्रत्यर्पण में भूमिका: अक्सर यूके की अदालतों से केस हारने के बाद अपराधी मानवाधिकारों का हवाला देकर ECHR में अपील करते हैं। नीरव मोदी के पास यह आखिरी अंतरराष्ट्रीय कानूनी कवच था, जो अब खत्म हो चुका है।

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