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Vikram Singh Statement: Content is Art Form, Toxic Dhruvant Allowed

Vikram Singh Statement: Content is Art Form, Toxic Dhruvant Allowed

11 घंटे पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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टीवी एक्टर विक्रम सिंह चौहन इन दिनों कलर्स के नए शो ‘दो दुनिया एक दिल’ में ‘शिवाय’ का किरदार निभाते नजर आ रहे हैं। हाल ही में दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान विक्रम ने डिजिटल दुनिया, ऑनलाइन फ्रॉड और दर्शकों की बदलती पसंद पर खुलकर अपनी राय रखी।

उन्होंने फिल्मों में बढ़ रहे एंटी-हीरो और ग्रे किरदारों के ट्रेंड पर भी प्रतिक्रिया दी। विक्रम ने कहा कि धुरंधर और टॉक्सिक जैसी फिल्में भी एक आर्ट फॉर्म हैं और हर क्रिएटर को अपनी कहानी लोगों तक पहुंचाने का अधिकार है।

उनके मुताबिक, अगर किसी को ऐसा कंटेंट सही नहीं लगता तो वह उसे न देखने का चुनाव भी कर सकता है।

पेश है विक्रम सिंह चौहन से हुई बातचीत के कुछ प्रमुख अंश..

सवाल: ‘दो दुनिया एक दिल’ में आपका किरदार दो अलग-अलग दुनिया के बीच कनेक्शन बनाता है। क्या आपको लगता है कि आज की टेक्नोलॉजी लोगों को जोड़ने से ज्यादा अलग कर रही है?

जवाब: मुझे लगता है कि बैलेंस मेंटेन करना बहुत जरूरी है। अगर आप पूरी तरह डिजिटल दुनिया से दूर रहेंगे तो पीछे छूट जाएंगे, क्योंकि आजकल ज्यादातर काम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ही होता है। लेकिन अगर आप इसमें बहुत ज्यादा डूब जाते हैं, तो आपकी पर्सनल ग्रोथ और प्रोडक्टिविटी भी प्रभावित हो सकती है।

इसलिए जरूरी है कि हम दोनों दुनिया के बीच संतुलन बनाए रखें।

सवाल: आज के समय में डिजिटल फ्रॉड और फेक आइडेंटिटी बड़ा मुद्दा बन चुका है। अगर आपको कभी ऑनलाइन फ्रॉड का सामना करना पड़े तो आप कैसे हैंडल करेंगे?

जवाब:हमारे शो में भी बताया गया है कि अगर किसी के साथ ऑनलाइन फ्रॉड होता है, तो वह cyber.gov.in पर जाकर इसकी शिकायत कर सकता है। इसके अलावा कई हेल्पलाइन नंबर भी हैं, जहां कॉल करके रिपोर्ट की जा सकती है और पुलिस की मदद ली जा सकती है।

मेरे साथ व्यक्तिगत रूप से ऐसा कभी नहीं हुआ, लेकिन इस शो के जरिए मुझे भी यह जागरूकता मिली है कि ऐसी स्थिति में कहां संपर्क करना चाहिए।

सवाल: OTT और सोशल मीडिया के दौर में दर्शकों की पसंद काफी बदल गई है। क्या अब दर्शक ज्यादा रियल और अनफिल्टर्ड कहानियां देखना चाहते हैं?

जवाब:मुझे लगता है कि दर्शक हमेशा से ही रियल और अनफिल्टर्ड कहानियां देखना चाहते थे। हर कोई कुछ नया, कुछ रॉ और असली महसूस कराने वाली कहानियां पसंद करता है। जिन कहानियों में ह्यूमन कनेक्शन और इमोशन होते हैं, वही दर्शकों को सबसे ज्यादा छूती हैं।

सवाल: आजकल धुरंधर और टॉक्सिक जैसी फिल्मों में एंटी-हीरो या ग्रे किरदारों का ट्रेंड बढ़ रहा है। क्या टीवी पर भी इसका असर दिख रहा है?

जवाब: मुझे लगता है कि यह एक आर्ट फॉर्म है और हर किसी को अपनी कला लोगों तक पहुंचाने का अधिकार है। अगर किसी को लगता है कि ऐसा कंटेंट उसके परिवार या समाज के लिए सही नहीं है, तो वह उसे न देखने का चुनाव कर सकता है।

डिजिटल दुनिया में कई तरह का कंटेंट मौजूद है, जिनमें से कुछ चीजें इन फिल्मों से भी ज्यादा खतरनाक हो सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि दर्शक समझदारी से अपनी पसंद का चुनाव करें।

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11 घंटे पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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उन्होंने फिल्मों में बढ़ रहे एंटी-हीरो और ग्रे किरदारों के ट्रेंड पर भी प्रतिक्रिया दी। विक्रम ने कहा कि धुरंधर और टॉक्सिक जैसी फिल्में भी एक आर्ट फॉर्म हैं और हर क्रिएटर को अपनी कहानी लोगों तक पहुंचाने का अधिकार है।

उनके मुताबिक, अगर किसी को ऐसा कंटेंट सही नहीं लगता तो वह उसे न देखने का चुनाव भी कर सकता है।

पेश है विक्रम सिंह चौहन से हुई बातचीत के कुछ प्रमुख अंश..

सवाल: ‘दो दुनिया एक दिल’ में आपका किरदार दो अलग-अलग दुनिया के बीच कनेक्शन बनाता है। क्या आपको लगता है कि आज की टेक्नोलॉजी लोगों को जोड़ने से ज्यादा अलग कर रही है?

जवाब: मुझे लगता है कि बैलेंस मेंटेन करना बहुत जरूरी है। अगर आप पूरी तरह डिजिटल दुनिया से दूर रहेंगे तो पीछे छूट जाएंगे, क्योंकि आजकल ज्यादातर काम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ही होता है। लेकिन अगर आप इसमें बहुत ज्यादा डूब जाते हैं, तो आपकी पर्सनल ग्रोथ और प्रोडक्टिविटी भी प्रभावित हो सकती है।

इसलिए जरूरी है कि हम दोनों दुनिया के बीच संतुलन बनाए रखें।

सवाल: आज के समय में डिजिटल फ्रॉड और फेक आइडेंटिटी बड़ा मुद्दा बन चुका है। अगर आपको कभी ऑनलाइन फ्रॉड का सामना करना पड़े तो आप कैसे हैंडल करेंगे?

जवाब:हमारे शो में भी बताया गया है कि अगर किसी के साथ ऑनलाइन फ्रॉड होता है, तो वह cyber.gov.in पर जाकर इसकी शिकायत कर सकता है। इसके अलावा कई हेल्पलाइन नंबर भी हैं, जहां कॉल करके रिपोर्ट की जा सकती है और पुलिस की मदद ली जा सकती है।

मेरे साथ व्यक्तिगत रूप से ऐसा कभी नहीं हुआ, लेकिन इस शो के जरिए मुझे भी यह जागरूकता मिली है कि ऐसी स्थिति में कहां संपर्क करना चाहिए।

सवाल: OTT और सोशल मीडिया के दौर में दर्शकों की पसंद काफी बदल गई है। क्या अब दर्शक ज्यादा रियल और अनफिल्टर्ड कहानियां देखना चाहते हैं?

जवाब:मुझे लगता है कि दर्शक हमेशा से ही रियल और अनफिल्टर्ड कहानियां देखना चाहते थे। हर कोई कुछ नया, कुछ रॉ और असली महसूस कराने वाली कहानियां पसंद करता है। जिन कहानियों में ह्यूमन कनेक्शन और इमोशन होते हैं, वही दर्शकों को सबसे ज्यादा छूती हैं।

सवाल: आजकल धुरंधर और टॉक्सिक जैसी फिल्मों में एंटी-हीरो या ग्रे किरदारों का ट्रेंड बढ़ रहा है। क्या टीवी पर भी इसका असर दिख रहा है?

जवाब: मुझे लगता है कि यह एक आर्ट फॉर्म है और हर किसी को अपनी कला लोगों तक पहुंचाने का अधिकार है। अगर किसी को लगता है कि ऐसा कंटेंट उसके परिवार या समाज के लिए सही नहीं है, तो वह उसे न देखने का चुनाव कर सकता है।

डिजिटल दुनिया में कई तरह का कंटेंट मौजूद है, जिनमें से कुछ चीजें इन फिल्मों से भी ज्यादा खतरनाक हो सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि दर्शक समझदारी से अपनी पसंद का चुनाव करें।

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