भारत ने चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के जिक्र को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। भारत ने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) परियोजनाओं पर भी कड़ी आपत्ति जताई। यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की चीन यात्रा के बाद जारी संयुक्त बयान के जवाब में आया है। इसमें कहा गया था कि पाकिस्तान ने चीन को जम्मू-कश्मीर के हालात की जानकारी दी। इसके बाद चीन ने कहा कि जम्मू-कश्मीर मुद्दा इतिहास से जुड़ा विवाद है और इसका समाधान संयुक्त राष्ट्र चार्टर, UNSC प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के तहत शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। भारत ने चीन के CPEC का विरोध भी किया विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि CPEC के कुछ प्रोजेक्ट भारत के उस क्षेत्र से गुजरते हैं, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है। भारत किसी भी ऐसी कोशिश का विरोध करता है, जो पाकिस्तान के कब्जे को मजबूत या वैधता देने की कोशिश करे। भारत ने चीन और पाकिस्तान के बीच कथित ट्रांस-बाउंड्री वाटर रिसोर्सेज कोऑपरेशन पर भी सवाल उठाए और कहा कि दोनों देशों के बीच कोई साझा सीमा नहीं है। भारत ने यह भी दोहराया कि उसने 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी। इस समझौते के तहत पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी का इलाका चीन को सौंप दिया था, जिस पर उसने 1948 में अवैध कब्जा किया था। CPEC प्रोजेक्ट में चीन सड़क, पोर्ट, रेल लाइन बनाएगा चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी योजना है। इसकी शुरुआत 2013 में की गई थी। इसमें चीन के शिंजियांग प्रांत से पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट तक 60 बिलियन डॉलर (करीब 5 लाख करोड़ रुपए) की लागत से आर्थिक गलियारा बनाया जा रहा है। इसके जरिए चीन की अरब सागर तक पहुंच हो जाएगी। CPEC के तहत चीन सड़क, बंदरगाह, रेलवे और ऊर्जा प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। भारत को CPEC से एतराज CPEC से चीन को क्या फायदा?














































