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Asha Bhosle Ashes Immersed in Ganga Kashi

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आशा भोसले की अस्थियां लेकर बेटे आंनद और पोती जनाई सोमवार को काशी पहुंचे। यहां अस्सी घाट पर गंगा में अस्थियां विसर्जित कीं।

बॉलीवुड प्लेबैक सिंगर आशा भोसले के निधन के बाद सोमवार को उनके बेटे आनंद भोसले और पोती जनाई काशी पहुंचे। अस्सी घाट से नाव के बीच गंगा में जाकर उनकी अस्थियां प्रवाहित कीं।

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अस्थियां विसर्जन के दौरान पोती भावुक हो गई और उनकी आंखों से आंसू निकल गए। पोती जनाई ने कहा- दादी आशा भोसले ने मौत से पहले काशी में अपनी अस्थियां विसर्जन की इच्छा जताई थी। बता दें 12 अप्रैल को मुंबई ब्रीच कैंडी अस्पताल में आशा भोसले का निधन हुआ था।

दादी आशा भोसले की अस्थियां विसर्जन के दौरान पोती जनाई भावुक हो गईं।

बेटे आनंद भोसले ने कहा- मां का भगवान शिव से अटूट रिश्ता

बेटे आनंद भोसले ने कहा- मां जीवन में सिर्फ एक बार काशी आयीं थीं लेकिन उनका भगवान शिव से अटूट रिश्ता था। उनकी ही अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए आज हम लोग यहां अस्थियां लेकर आये थे और उनका पिंडदान भी किया है। इसके बाद बेटे आनंद और पोती जनाई भोसले मुंबई वापस लौट गए।

बेटे आनंद ने विधि-विधान से की पूजा।

बेटे आनंद ने विधि-विधान से की पूजा।

पोती जनाई ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा किया

आशा भोसले के निधन के बाद ज़नाई भोसले ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा किया था। उन्होंने अपनी दादी को अपना सबसे अच्छा दोस्त और जिंदगी का अहम हिस्सा बताया। ज़नाई ने लिखा कि अब उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वह किसके साथ सुबह चाय पियेंगी या अपने मजाक साझा करेंगी।

उन्होंने लिखा कि वह मानती हैं कि उनकी दादी हमेशा उनके साथ रहेंगी और एक दिन फिर से उन्हें गले लगाने लौटेंगी। उन्होंने कहा कि आशा भोसले सिर्फ एक महान कलाकार ही नहीं, बल्कि उनके लिए जिंदगी और खुशियों की पहचान थीं।

पढ़िए आशा भोसले की जिंदगी से जुड़े अनसुने किस्से-

16 की उम्र में भागकर शादी की, बहन से रिश्ते बिगड़े

आशा भोसले को महज 16 साल की उम्र में बड़ी बहन लता के सेक्रेटरी गणपत राव भोसले से प्यार हो गया। गणपत राव उम्र में 15 साल बड़े थे। आशा जानती थीं कि परिवार इस रिश्ते को नहीं अपनाएगा, तो उन्होंने 16 की उम्र में घर से भागकर गणपत राव से शादी कर ली। यह फैसला उनके लिए खुशियों से ज्यादा तकलीफें लेकर आया। शादी के बाद उन्हें अपने पति और ससुराल वालों से अच्छा व्यवहार नहीं मिला। वक्त बीतता गया और रिश्ते में कड़वाहट भी बढ़ती गई।

शक और तनाव से भरे इस रिश्ते ने कुछ साल बाद ही दम तोड़ दिया। गणपतराव ने उन्हें घर से निकाल दिया। उस वक्त आशा दो बच्चों के साथ थीं और तीसरे बच्चे की मां बनने वाली थीं। मजबूरी में उन्हें अपने मायके लौटना पड़ा। साल 1960 में दोनों अलग हो गए।

गणपत राव और बच्चों के साथ आशा भोसले।

गणपत राव और बच्चों के साथ आशा भोसले।

आरडी बर्मन की मां ने कहा था, आशा से शादी करनी है, तो लाश से होकर गुजरना होगा

गणपत राव से तलाक लेने के बाद आशा भोसले की जिंदगी में आरडी बर्मन हमसफर बनकर आए। दोनों की मुलाकात 1966 में हुई, जब वो तीसरी मंजिल में साथ काम कर रहे थे। दोनों ने ओ हसीना जुल्फों वाली…, और ओ मेरे सोना रे सोना रे को आवाज दी।

आरडी बर्मन, पिता एसडी बर्मन की लेगेसी से कुछ अलग करना चाहते थे। जैज, कैबरे का ट्रेंड लाते हुए उन्हें आशा भोसले की आवाज का सहारा मिला। दोनों ने पिया तू अब तो आजा…, दम मारो दम…. जैसे गानों बनाए, जिसे आशा भोसले को कैबरे क्वीन कहा जाने लगा।

पंचम दा के साथ रिहर्सल करतीं आशा भोसले।

पंचम दा के साथ रिहर्सल करतीं आशा भोसले।

प्रोफेशनल रिश्ता जल्द ही नजदीकियां बढ़ने की वजह बना। पंचम दा, उम्र में आशा से 6 साल छोटे थे। उनका 1971 में पहली पत्नी रीटा से तलाक हो चुका था। उनकी शादी विवादों में थी। घरेलू झगड़े बढ़ने से वो घर छोड़कर होटल में रहने लगे थे। 9 साल बाद जब उन्होंने आशा से शादी करने का फैसला किया तो परिवार खिलाफ हो गया। मां ने साफ इनकार कर दिया।

आरडी बर्मन की मां दोनों के रिश्ते से इतनी खफा थीं कि उन्होंने साफ कह दिया कि जब तक वो जिंदा हैं, तब तक दोनों की शादी नहीं हो सकती और अगर वो ये शादी करना चाहते हैं तो आशा को अपनी मां की लाश के ऊपर से घर में लाना होगा।

ये सुनकर आरडी बर्मन बिना कुछ कहे ही वहां से चले गए। वे शादी करना चाहते थे, लेकिन मां की नाराजगी के चलते ऐसा मुमकिन नहीं था। कुछ सालों के बाद आरडी बर्मन की मां बेहद बीमार रहने लगीं और उन्होंने किसी को भी पहचाना बंद कर दिया। इसके बाद आरडी बर्मन और आशा ने 1980 में शादी कर ली।

शादी के 14 साल बाद 1994 में आरडी बर्मन का निधन हो गया। आशा एक बार फिर अकेली हो गईं। आरडी के निधन से पहले उनकी फाइनेंशिल कंडीशन ठीक नहीं थी जिसके चलते आशा और वे अलग रहा करते थे।

————————- ये खबर भी पढ़ें विराट और अनुष्का संत प्रेमानंद से मिलने पहुंचे:अक्षय तृतीया पर्व पर गुरु के साथ सत्संग किया; दोनों की बाबा से यह पांचवीं मुलाकात

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बॉलीवुड प्लेबैक सिंगर आशा भोसले के निधन के बाद सोमवार को उनके बेटे आनंद भोसले और पोती जनाई काशी पहुंचे। अस्सी घाट से नाव के बीच गंगा में जाकर उनकी अस्थियां प्रवाहित कीं।

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अस्थियां विसर्जन के दौरान पोती भावुक हो गई और उनकी आंखों से आंसू निकल गए। पोती जनाई ने कहा- दादी आशा भोसले ने मौत से पहले काशी में अपनी अस्थियां विसर्जन की इच्छा जताई थी। बता दें 12 अप्रैल को मुंबई ब्रीच कैंडी अस्पताल में आशा भोसले का निधन हुआ था।

दादी आशा भोसले की अस्थियां विसर्जन के दौरान पोती जनाई भावुक हो गईं।

बेटे आनंद भोसले ने कहा- मां का भगवान शिव से अटूट रिश्ता

बेटे आनंद भोसले ने कहा- मां जीवन में सिर्फ एक बार काशी आयीं थीं लेकिन उनका भगवान शिव से अटूट रिश्ता था। उनकी ही अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए आज हम लोग यहां अस्थियां लेकर आये थे और उनका पिंडदान भी किया है। इसके बाद बेटे आनंद और पोती जनाई भोसले मुंबई वापस लौट गए।

बेटे आनंद ने विधि-विधान से की पूजा।

बेटे आनंद ने विधि-विधान से की पूजा।

पोती जनाई ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा किया

आशा भोसले के निधन के बाद ज़नाई भोसले ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा किया था। उन्होंने अपनी दादी को अपना सबसे अच्छा दोस्त और जिंदगी का अहम हिस्सा बताया। ज़नाई ने लिखा कि अब उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वह किसके साथ सुबह चाय पियेंगी या अपने मजाक साझा करेंगी।

उन्होंने लिखा कि वह मानती हैं कि उनकी दादी हमेशा उनके साथ रहेंगी और एक दिन फिर से उन्हें गले लगाने लौटेंगी। उन्होंने कहा कि आशा भोसले सिर्फ एक महान कलाकार ही नहीं, बल्कि उनके लिए जिंदगी और खुशियों की पहचान थीं।

पढ़िए आशा भोसले की जिंदगी से जुड़े अनसुने किस्से-

16 की उम्र में भागकर शादी की, बहन से रिश्ते बिगड़े

आशा भोसले को महज 16 साल की उम्र में बड़ी बहन लता के सेक्रेटरी गणपत राव भोसले से प्यार हो गया। गणपत राव उम्र में 15 साल बड़े थे। आशा जानती थीं कि परिवार इस रिश्ते को नहीं अपनाएगा, तो उन्होंने 16 की उम्र में घर से भागकर गणपत राव से शादी कर ली। यह फैसला उनके लिए खुशियों से ज्यादा तकलीफें लेकर आया। शादी के बाद उन्हें अपने पति और ससुराल वालों से अच्छा व्यवहार नहीं मिला। वक्त बीतता गया और रिश्ते में कड़वाहट भी बढ़ती गई।

शक और तनाव से भरे इस रिश्ते ने कुछ साल बाद ही दम तोड़ दिया। गणपतराव ने उन्हें घर से निकाल दिया। उस वक्त आशा दो बच्चों के साथ थीं और तीसरे बच्चे की मां बनने वाली थीं। मजबूरी में उन्हें अपने मायके लौटना पड़ा। साल 1960 में दोनों अलग हो गए।

गणपत राव और बच्चों के साथ आशा भोसले।

गणपत राव और बच्चों के साथ आशा भोसले।

आरडी बर्मन की मां ने कहा था, आशा से शादी करनी है, तो लाश से होकर गुजरना होगा

गणपत राव से तलाक लेने के बाद आशा भोसले की जिंदगी में आरडी बर्मन हमसफर बनकर आए। दोनों की मुलाकात 1966 में हुई, जब वो तीसरी मंजिल में साथ काम कर रहे थे। दोनों ने ओ हसीना जुल्फों वाली…, और ओ मेरे सोना रे सोना रे को आवाज दी।

आरडी बर्मन, पिता एसडी बर्मन की लेगेसी से कुछ अलग करना चाहते थे। जैज, कैबरे का ट्रेंड लाते हुए उन्हें आशा भोसले की आवाज का सहारा मिला। दोनों ने पिया तू अब तो आजा…, दम मारो दम…. जैसे गानों बनाए, जिसे आशा भोसले को कैबरे क्वीन कहा जाने लगा।

पंचम दा के साथ रिहर्सल करतीं आशा भोसले।

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आरडी बर्मन की मां दोनों के रिश्ते से इतनी खफा थीं कि उन्होंने साफ कह दिया कि जब तक वो जिंदा हैं, तब तक दोनों की शादी नहीं हो सकती और अगर वो ये शादी करना चाहते हैं तो आशा को अपनी मां की लाश के ऊपर से घर में लाना होगा।

ये सुनकर आरडी बर्मन बिना कुछ कहे ही वहां से चले गए। वे शादी करना चाहते थे, लेकिन मां की नाराजगी के चलते ऐसा मुमकिन नहीं था। कुछ सालों के बाद आरडी बर्मन की मां बेहद बीमार रहने लगीं और उन्होंने किसी को भी पहचाना बंद कर दिया। इसके बाद आरडी बर्मन और आशा ने 1980 में शादी कर ली।

शादी के 14 साल बाद 1994 में आरडी बर्मन का निधन हो गया। आशा एक बार फिर अकेली हो गईं। आरडी के निधन से पहले उनकी फाइनेंशिल कंडीशन ठीक नहीं थी जिसके चलते आशा और वे अलग रहा करते थे।

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