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उत्तराखंड के स्पोर्ट्स कॉलेजों में दाखिले शुरू:महाराणा प्रताप में 60 सीटें, खेल का कोटा फिक्स नहीं; 5 कड़े टेस्ट पास करने वालों को मिलेगी एंट्री

उत्तराखंड के स्पोर्ट्स कॉलेजों में दाखिले शुरू:महाराणा प्रताप में 60 सीटें, खेल का कोटा फिक्स नहीं; 5 कड़े टेस्ट पास करने वालों को मिलेगी एंट्री

उत्तराखंड में खेलों में अपना भविष्य बनाने का सपना देख रहे 10 से 13 साल के बच्चों के लिए प्रदेश के प्रतिष्ठित ‘राज्य वित्तपोषित’ स्पोर्ट्स कॉलेजों (कक्षा 6) में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। आवेदन की अंतिम तिथि 14 मई तय की गई है। एडमिशन की स्थिति, चयन प्रक्रिया और सीटों को लेकर महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज देहरादून के प्रधानाचार्य राजेश ममगाईं से खास जानकारी दी। 120 सीटों पर मुकाबला, किसी खेल का कोई फिक्स कोटा नहीं प्रिंसिपल राजेश ममगाईं ने बताया कि इस साल तीनों स्पोर्ट्स कॉलेजों (महाराणा प्रताप कॉलेज देहरादून, हरि सिंह थापा पिथौरागढ़ और बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज चंपावत) में कुल मिलाकर लगभग 120 सीटों पर प्रवेश होना है। इसमें महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के पास 60 सीटें हैं। अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या क्रिकेट, बॉक्सिंग या एथलेटिक्स जैसे खेलों के लिए सीटें पहले से तय होती हैं। इस पर प्रिंसिपल ने स्पष्ट किया कि, “किसी भी खेल के लिए कोई कोटा तय नहीं होता। यह पूरी तरह से बच्चों की मेरिट पर निर्भर करता है कि किस खेल के कितने बच्चे सेलेक्ट होकर आते हैं। 5 कड़े टेस्ट से गुजरेंगे बच्चे स्पोर्ट्स कॉलेज में एंट्री के लिए बच्चों को कड़े परीक्षण से गुजरना होगा। प्रधानाचार्य ने बताया कि चयन के लिए मुख्य रूप से 5 चरण निर्धारित हैं। सबसे पहले शारीरिक दक्षता (बैटरी टेस्ट), खेल कौशल (गेम टेस्ट), लिखित परीक्षा, इंटरव्यू, मेडिकल टेस्ट हैं। उन्होंने बताया कि ये सभी टेस्ट 10 से 13 साल के बच्चों की शारीरिक क्षमता और उम्र को ध्यान में रखकर ही वैज्ञानिक तरीके से डिजाइन किए गए हैं। इन सभी मानकों पर खरा उतरने वाले बच्चों की ही एक फाइनल मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है। हर खेल का खर्च अलग, इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह तैयार चयनित बच्चों की पढ़ाई, डाइट और ट्रेनिंग के खर्च पर ममगाईं ने बताया कि कॉलेज में सभी खेलों के लिए बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। हालांकि, एक बच्चे पर सरकार का कितना खर्च आता है, यह खेल दर खेल अलग-अलग होता है। एक निशानेबाज और एक एथलीट के उपकरणों और ट्रेनिंग के खर्च को जनरलाइज नहीं किया जा सकता। सरकार की ओर से राज्य के बच्चों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। यहां के छात्र सेना और रेलवे में दिखा रहे दम स्पोर्ट्स कॉलेज के ट्रैक रिकॉर्ड पर बात करते हुए प्रिंसिपल ममगाईं ने बताया कि यहां से निकले बच्चे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। यहां से पेशेवर ट्रेनिंग लेने वाले खिलाड़ी न सिर्फ मेडल जीत रहे हैं, बल्कि स्पोर्ट्स कोटे के तहत भारतीय सेना, वायु सेना, पैरामिलिट्री फोर्सेज और रेलवे सहित कई सरकारी व गैर-सरकारी संस्थानों में शानदार करियर बना रहे हैं। एक नजर में जरूरी जानकारी

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