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स्वाद के साथ सेहत का खजाना है यह चमत्कारी तेल, शरीर में अकड़न हो या जकड़न होगा तुरंत छूमंतर! – News18 हिंदी बुद्ध पूर्णिमा पर तुलाई बंद, किसानों ने किया चक्काजाम:आगर मालवा में बिना सूचना केंद्र बंद होने से भड़के किसान, आश्वासन के बाद खुला मार्ग खंडवा में जनगणना कार्य को लेकर सख्ती:अधिकारी और कर्मचारियों के अवकाश पर रोक, पहले से ली गई छुट्टियां भी रद्द Govt Citizenship Rules 2026 | Online OCI Application कश्मीरी मटन यखनी रेसिपी: घर पर असली मटन यखनी, उगलियाँ चाटते रह जायेंगे लोग; नोट करें स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी बिजली तार से गला घोंटा, सुसाइड दिखाने पेड़ पर लटकाया:कटनी में आम के पेड़ पर लटकी मिली थी लाश, प्रेमिका सहित तीन आरोपी गिरफ्तार
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अगर गाय खा रही है प्लास्टिक या कागज, तो हो सकती है ये गंभीर बीमारी

Last Updated:April 29, 2026, 23:29 IST Cow Pica Disease: अक्सर पशुपालक यह समझ नहीं पाते कि गायों का जूता, चप्पल या प्लास्टिक जैसी चीजें खाना कोई सामान्य आदत नहीं, बल्कि एक गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार इसे पाइका रोग कहा जाता है, जो कुपोषण और शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है. समय पर पहचान न होने पर यह समस्या पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इसके लक्षणों को समझना और सही देखभाल करना बेहद जरूरी है. अक्सर पशुपालक इस बात से परेशान रहते हैं कि उनकी गायें जूता, चप्पल, प्लास्टिक, कागज या चमड़ा जैसी चीजें खाने लगती हैं. पहली नजर में यह एक साधारण आदत लग सकती है, लेकिन एक्सपर्ट इसे गंभीर बीमारी मानते हैं. ऐसे में बोकारो के चास पेट क्लीनिक के पशु चिकित्सक और एक्सपर्ट डॉ. अनिल कुमार ने पाइका रोग के गंभीरता को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है. आइये जानते हैं इसके बारे में. डॉ. अनिल कुमार के अनुसार पाइका पशुओं में होने वाली एक गंभीर बीमारी है. जो मुख्य रूप से कुपोषण और फास्फोरस की कमी से होती है, जिस कारण पशुओं का खान-पान और व्यवहार बदलने लगता है और वे असामान्य चीजों को चबाने या खाने लगते हैं और कई बार गौशाला में बंधे होने के बावजूद गाय रस्सी, लकड़ी के खूटे या आसपास पड़ी अनुपयोगी वस्तुओं को चबाने लगते हैं, जिससे उनका पाचन बुरी तरह से प्रभावित होता है. Add News18 as Preferred Source on Google वहीं, पाइका बीमारी के बढ़ने पर इसका सीधा असर पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों पर दिखाई देता है, जिससे पशु के शरीर की चमक कम होने लगती है, बाल झड़ने लगते हैं और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं. इसकी वजह से गायें कमजोर दिखने लगती हैं. वहीं, कई बार गाय गलती से प्लास्टिक या लकड़ी खाने से पाचन संबंधित समस्या उत्पन्न होता है, जिससे पशुओं का पेट बुरी तरह से फूल जाता है और कई बार गंभीर स्थिति में सर्जरी तक की जरूरत पड़ जाती है. वही, लंबे समय तक असंतुलित आहार देने से यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है. ऐसे में लक्षण दिखने पर पशुपालकों को तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. वहीं, डॉ, अनिल कि मानें तो पाइका रोग से बचाव के लिए संतुलित आहार सबसे अहम उपाय है. इसलिए पशुओं को नियमित रूप से हरा चारा, सूखा चारा और दाना मिश्रण देना चाहिए. साथ ही पशु चिकित्सक की सलाह से विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट भी देना चाहिए. इसके अलावा गाय की डी-वॉर्मिंग कराना बेहद जरूरी है. First Published : April 29, 2026, 23:29 IST

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रोज सुबह नींबू और एप्पल साइडर विनेगर पीने से शरीर में दिखेंगे ये 8 चौंकाने वाले फायदे, जानकर रह जाएंगे हैरान

Last Updated:April 29, 2026, 23:20 IST नींबू और एप्पल साइडर विनेगर दो ऐसी चीजें हैं, जिन्हें हेल्दी लाइफस्टाइल में काफी पसंद किया जाता है. कई लोग सुबह खाली पेट इन्हें पानी में मिलाकर पीते हैं, तो कुछ लोग डिटॉक्स ड्रिंक के रूप में इस्तेमाल करते हैं. नींबू में विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं, जबकि एप्पल साइडर विनेगर में एसिटिक एसिड और कुछ लाभकारी तत्व मौजूद होते हैं. जब इन दोनों का सही मात्रा में इस्तेमाल किया जाए, तो शरीर को कई फायदे मिल सकते हैं. हालांकि इसका सेवन सीमित मात्रा में और सही तरीके से करना जरूरी है. नींबू और एप्पल साइडर विनेगर का हल्का मिश्रण पाचन तंत्र को सपोर्ट कर सकता है. कुछ लोगों को इसे खाने से पहले लेने पर भारीपन कम महसूस होता है. यह पेट में एसिड बैलेंस बनाए रखने में मदद कर सकता है, जिससे खाना पचाने में आसानी होती है. अगर इसे संतुलित डाइट के साथ लिया जाए, तो यह भूख को थोड़ा कंट्रोल करने में मदद कर सकता है. एप्पल साइडर विनेगर कुछ लोगों में पेट भरा महसूस कराने में मदद करता है, जिससे ओवरईटिंग कम हो सकती है. हालांकि वजन घटाने के लिए सिर्फ इसी पर निर्भर रहना सही नहीं है. नींबू विटामिन C का अच्छा स्रोत है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करता है. बदलते मौसम में इसे सीमित मात्रा में लेना फायदेमंद माना जाता है. एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google कुछ रिसर्च में पाया गया है कि एप्पल साइडर विनेगर ब्लड शुगर लेवल को बेहतर तरीके से मैनेज करने में सहायक हो सकता है, खासकर खाने के बाद. हालांकि डायबिटीज के मरीज डॉक्टर की सलाह के बिना इसका सेवन शुरू न करें. नींबू में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन C त्वचा के लिए अच्छे माने जाते हैं. जब शरीर अंदर से हाइड्रेट और हेल्दी रहता है, तो त्वचा पर भी असर दिखता है. हालांकि इसे सीधे चेहरे पर लगाने से पहले सावधानी जरूरी है. अगर सादा पानी पीना पसंद नहीं है, तो हल्के नींबू और पानी का मिश्रण पानी पीने की आदत बढ़ा सकता है. शरीर में पानी की सही मात्रा बनी रहना ऊर्जा, स्किन और पाचन तीनों के लिए जरूरी है. सुबह गुनगुने पानी में नींबू और थोड़ा एप्पल साइडर विनेगर मिलाकर पीने से कई लोग ताजगी महसूस करते हैं. इससे दिन की शुरुआत फ्रेश अंदाज में हो सकती है. हालांकि हर व्यक्ति पर असर अलग हो सकता है. एप्पल साइडर विनेगर हमेशा पानी में मिलाकर ही लें, क्योंकि यह तेज होता है और सीधे पीने से दांतों या गले को नुकसान पहुंचा सकता है. जिन लोगों को एसिडिटी, अल्सर या पेट की परेशानी है, वे डॉक्टर से सलाह लें. First Published : April 29, 2026, 23:20 IST

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वजन घटाने के लिए खाना छोड़ रहे हैं? एक्सपर्ट्स ने बताया ये गलती बना सकती है आपको और मोटा

आजकल बढ़ता वजन बहुत से लोगों की चिंता बना हुआ है. ज्यादा वजन सिर्फ दिखने का मामला नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकता है. मोटापा बढ़ने से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और जोड़ों में दर्द जैसी दिक्कतों का खतरा बढ़ जाता है. यही वजह है कि लोग वजन घटाने के लिए तरह-तरह के तरीके अपनाते हैं. कोई घंटों जिम में पसीना बहाता है, तो कोई डाइटिंग शुरू कर देता है. वहीं कई लोग जल्दी वजन कम करने के चक्कर में खाना छोड़ने जैसी गलती भी कर बैठते हैं. बहुत से लोगों को लगता है कि अगर वे एक समय का खाना छोड़ देंगे या दिनभर कम खाएंगे, तो वजन तेजी से घट जाएगा. लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह सोच पूरी तरह सही नहीं है. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने भी खाने और वजन घटाने से जुड़े कई भ्रमों पर जानकारी दी है. संगठन का कहना है कि मील स्किप करना यानी खाना छोड़ना वजन कम करने का सही तरीका नहीं है. इससे थोड़े समय के लिए वजन कम लगता जरूर है, लेकिन लंबे समय में यह तरीका नुकसान पहुंचा सकता है. जब कोई व्यक्ति खाना छोड़ता है, तो शरीर को जरूरी ऊर्जा नहीं मिल पाती. इससे शरीर कमजोर महसूस करने लगता है और दिनभर थकान बनी रहती है. कई लोगों को काम में मन नहीं लगता, चिड़चिड़ापन होने लगता है और शरीर सुस्त महसूस करता है. अगर यह आदत लंबे समय तक बनी रहे, तो शरीर का संतुलन भी बिगड़ सकता है. इसलिए वजन घटाने के लिए भूखे रहना समझदारी नहीं माना जाता. खाना छोड़ने का एक और बड़ा नुकसान यह है कि बाद में बहुत तेज भूख लगती है. जब लंबे समय तक पेट खाली रहता है, तो अगली बार व्यक्ति जरूरत से ज्यादा खा लेता है. ऐसे में जितनी कैलोरी बचाने की कोशिश की गई थी, उससे ज्यादा कैलोरी शरीर में चली जाती है. यही वजह है कि कई लोग खाना छोड़ने के बाद भी वजन कम नहीं कर पाते. कुछ मामलों में वजन बढ़ भी सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे गैप के बाद खाना खाने से ब्लड शुगर का स्तर भी प्रभावित हो सकता है. कुछ लोगों को कमजोरी, चक्कर आना, हाथ कांपना या ध्यान लगाने में परेशानी महसूस हो सकती है. खासतौर पर जिन लोगों को पहले से शुगर या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उनके लिए यह आदत और ज्यादा नुकसानदायक हो सकती है. स्वस्थ तरीके से वजन कम करने के लिए जरूरी है कि नियमित समय पर संतुलित भोजन किया जाए. दिनभर में छोटे-छोटे हिस्सों में हेल्दी खाना लेना बेहतर माना जाता है. इसमें फल, सब्जियां, दालें, प्रोटीन, साबुत अनाज और पर्याप्त पानी शामिल होना चाहिए. इससे शरीर को जरूरी पोषण मिलता है, भूख कंट्रोल रहती है और एनर्जी भी बनी रहती है. इसके साथ ही शारीरिक गतिविधि भी बहुत जरूरी है. रोजाना वॉक करना, योग करना, जिम जाना या हल्की एक्सरसाइज करना वजन घटाने में मदद करता है. सिर्फ डाइट या सिर्फ एक्सरसाइज से नहीं, बल्कि दोनों के सही संतुलन से बेहतर रिजल्ट मिलता है.

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कमर दर्द को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, बिना दवा ऐसे पाएं राहत – News18 हिंदी

X कमर दर्द को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, बिना दवा ऐसे पाएं राहत   Kamar Ke Dard Ka Ilaaj: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में महिलाओं के बीच कमर दर्द एक आम लेकिन गंभीर समस्या बनती जा रही है. ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करना, घर की जिम्मेदारियां और लगातार शारीरिक थकान इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं. अक्सर महिलाएं शुरुआत में इस दर्द को हल्के में लेती हैं, लेकिन समय के साथ यही समस्या बड़ी परेशानी का रूप ले सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार खराब पोश्चर, मांसपेशियों की कमजोरी, विटामिन की कमी और हार्मोनल बदलाव भी कमर दर्द को बढ़ाते हैं. हालांकि अच्छी बात यह है कि समय रहते ध्यान दिया जाए तो बिना दवाइयों के भी राहत संभव है. फिजियोथेरेपी, नियमित एक्सरसाइज और सही दिनचर्या अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. साथ ही जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना भी जरूरी है. छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर महिलाएं इस दर्द से राहत पाकर एक बेहतर और स्वस्थ जीवन जी सकती हैं.

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अपने डाइट में जरूर शामिल करें ये 10 हाई प्रोटीन वाली सब्जियां, फैट भी ना के बराबर

Last Updated:April 29, 2026, 21:32 IST अगर आप अपनी डाइट में प्रोटीन बढ़ाना चाहते हैं और साथ ही फैट कम रखना चाहते हैं, तो कुछ सब्जियां आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती हैं. ये सब्जियां न सिर्फ शरीर को जरूरी प्रोटीन देती हैं, बल्कि फाइबर, विटामिन और मिनरल्स भी भरपूर मात्रा में देती हैं. खास बात यह है कि इन्हें रोज के खाने में आसानी से शामिल किया जा सकता है, जिससे फिटनेस, वजन कंट्रोल और ओवरऑल हेल्थ को फायदा मिल सकता है. पालक सबसे बेहतरीन हरी पत्तेदार सब्जियों में से एक मानी जाती है, जिसे डाइट में शामिल करना बेहद फायदेमंद हो सकता है. इसमें अच्छी मात्रा में प्रोटीन, आयरन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो मसल्स को मजबूत रखने, लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करने और पाचन को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं. इसमें फैट और कैलोरी बहुत कम होती है, इसलिए वजन घटाने और फिटनेस डाइट के लिए यह शानदार विकल्प है. पालक को स्मूदी, सलाद, सूप या लहसुन के साथ हल्का भूनकर खाया जा सकता है. करीब 100 ग्राम पालक में लगभग 2.9 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है, जिससे यह पौष्टिक और प्लांट बेस्ड प्रोटीन का अच्छा स्रोत बन जाती है. ब्रोकोली एक बेहद पौष्टिक क्रूसीफेरस सब्जी है, जिसमें अच्छी मात्रा में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. यह वजन कंट्रोल रखने, इम्यूनिटी मजबूत करने और पाचन को बेहतर बनाए रखने में मददगार मानी जाती है. इसमें फैट और कैलोरी प्राकृतिक रूप से कम होती है, इसलिए हेल्दी मील प्लान में इसे अक्सर शामिल किया जाता है. ब्रोकोली को स्टीम करके, रोस्ट करके, हल्का भूनकर या सूप में मिलाकर खाया जा सकता है. करीब 100 ग्राम ब्रोकोली में लगभग 2.8 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है, जिससे यह पेट भरने के साथ शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल्स भी देती है. हरी मटर स्वादिष्ट होने के साथ प्रोटीन से भरपूर होती है. इसमें फाइबर भी अच्छा होता है, जिससे पेट देर तक भरा महसूस होता है. इसे पुलाव, सब्जी या स्नैक में इस्तेमाल करें. Add News18 as Preferred Source on Google ब्रसेल्स स्प्राउट्स प्रोटीन से भरपूर और पोषक तत्वों वाली सब्जी है, जो क्रूसीफेरस परिवार से आती है. इसमें प्रोटीन, विटामिन K, विटामिन C और अच्छी मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पाचन, हड्डियों की मजबूती और इम्यूनिटी के लिए फायदेमंद माना जाता है. इसमें फैट बहुत कम होता है, लेकिन यह पेट भरने में मदद करती है. इसे मसालों के साथ रोस्ट करके, सलाद में डालकर या हल्का भूनकर खाया जा सकता है. लगभग 100 ग्राम ब्रसेल्स स्प्राउट्स में करीब 3.4 ग्राम प्रोटीन मिलता है, इसलिए यह प्लांट बेस्ड प्रोटीन का बेहतरीन विकल्प है. केल को बेहद पौष्टिक हरी पत्तेदार सब्जी माना जाता है, इसलिए इसे सुपरफूड भी कहा जाता है. इसमें अच्छी मात्रा में प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन A, विटामिन C और विटामिन K पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, हड्डियों को मजबूत रखने और शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं. इसमें फैट बहुत कम होता है, इसलिए वजन कंट्रोल करने वालों के लिए यह अच्छा विकल्प है. केल को सलाद में कच्चा खाया जा सकता है, स्मूदी में मिलाया जा सकता है या सूप और सब्जी के रूप में भी लिया जा सकता है. करीब 100 ग्राम केल में लगभग 4.3 ग्राम प्रोटीन मिलता है, जिससे यह प्रोटीन, फाइबर और जरूरी पोषक तत्वों का बेहतरीन स्रोत बन जाती है. फूलगोभी एक ऐसी सब्जी है जिसे कई तरीकों से खाने में शामिल किया जा सकता है. इसमें प्रोटीन, फाइबर और विटामिन C अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि फैट और कैलोरी काफी कम होती है. यह पाचन को बेहतर रखने, इम्यूनिटी मजबूत करने और हेल्दी डाइट बनाए रखने में मददगार मानी जाती है. खास बात यह है कि इसे कई हाई कार्ब फूड्स की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है. आप इससे गोभी राइस, मैश, पिज्जा बेस या मसालों के साथ रोस्ट करके स्वादिष्ट स्नैक बना सकते हैं. करीब 100 ग्राम फूलगोभी में लगभग 1.9 ग्राम प्रोटीन होता है. भले ही इसका प्रोटीन बहुत ज्यादा न हो, लेकिन पोषण और उपयोग के कई तरीकों की वजह से यह बेहद शानदार विकल्प है. शतावरी (Asparagus) शतावरी एक पौष्टिक और हल्की सब्जी है, जिसमें अच्छी मात्रा में प्रोटीन के साथ फोलेट, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. इसमें फैट और कैलोरी कम होती है, इसलिए हेल्दी डाइट फॉलो करने वालों के लिए यह बढ़िया विकल्प मानी जाती है. यह पाचन को बेहतर रखने, दिल की सेहत को सपोर्ट करने और शरीर में सूजन कम करने में मददगार हो सकती है. इसका हल्का और स्वादिष्ट फ्लेवर इसे कई डिश में आसानी से शामिल करने लायक बनाता है. आप इसे ग्रिल करके, स्टीम करके, हल्का भूनकर या सलाद और पास्ता में मिलाकर खा सकते हैं. करीब 100 ग्राम शतावरी में लगभग 2.2 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है, जो इसे हल्का लेकिन पोषण से भरपूर विकल्प बनाता है. मशरूम तकनीकी रूप से फंगस है, लेकिन पोषण गुणों की वजह से इसे सब्जियों की श्रेणी में शामिल किया जाता है. इसमें अच्छी मात्रा में प्रोटीन, बी विटामिन्स और सेलेनियम व कॉपर जैसे जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं. मशरूम में फैट और कैलोरी काफी कम होती है, इसलिए वजन कंट्रोल करने वालों के लिए यह बेहतरीन विकल्प माना जाता है. इसे हल्का भूनकर, ग्रिल करके, रोस्ट करके या सूप, पिज्जा, पास्ता और स्टर फ्राई जैसी डिश में मिलाकर खाया जा सकता है. करीब 100 ग्राम मशरूम में लगभग 3.1 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है, जिससे यह स्वाद और पोषण दोनों देने वाला शानदार प्लांट बेस्ड विकल्प बन जाता है. कॉलर्ड ग्रीन्स एक पौष्टिक हरी पत्तेदार सब्जी है, जिसमें अच्छी मात्रा में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन K और फाइबर पाया जाता है. यह हड्डियों को मजबूत रखने, पाचन बेहतर करने और शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मददगार मानी जाती है. इसमें फैट बहुत कम होता है, इसलिए हेल्दी और बैलेंस डाइट के लिए यह अच्छा विकल्प है. कॉलर्ड ग्रीन्स को हल्का भूनकर, सूप या स्टू में डालकर खाया जा सकता है. इसे लो-कार्ब मील्स में रैप की तरह भी इस्तेमाल किया जाता है. करीब 100

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प्री-वर्कआउट के लिए बेस्ट हैं ये 5 फूड कॉम्बिनेशन, आएगी भरपूर एनर्जी, फटाफट बन भी जाती है डिश

वर्कआउट से पहले क्या खाना चाहिए, यह सवाल अक्सर लोगों के मन में रहता है. कई लोग खाली पेट एक्सरसाइज कर लेते हैं, तो कुछ लोग भारी खाना खाकर जिम पहुंच जाते हैं. दोनों ही तरीके सही नहीं माने जाते. अगर शरीर को सही समय पर सही चीज मिले, तो वर्कआउट के दौरान एनर्जी बनी रहती है, थकान कम होती है और परफॉर्मेंस भी बेहतर होती है. इसलिए प्री-वर्कआउट मील बहुत जरूरी माना जाता है. इसमें ऐसी चीजें होनी चाहिए जो जल्दी पच जाएं, शरीर को ऊर्जा दें और भारीपन महसूस न होने दें. प्री-वर्कआउट फूड का मतलब बहुत ज्यादा खाना नहीं है. इसका मतलब है हल्का, बैलेंस और सही कॉम्बिनेशन वाला स्नैक, जिसे वर्कआउट से 30 से 60 मिनट पहले लिया जा सके. इसमें कार्बोहाइड्रेट से तुरंत ऊर्जा मिलती है, जबकि थोड़ा प्रोटीन मसल्स को सपोर्ट करता है. अच्छी बात यह है कि इसके लिए महंगे सप्लीमेंट या प्रोटीन शेक की जरूरत नहीं होती. घर में मौजूद आसान चीजों से भी बेहतरीन प्री-वर्कआउट स्नैक तैयार किया जा सकता है. केला और पीनट बटरअगर जल्दी में हैं और तुरंत कुछ चाहिए, तो केला और पीनट बटर शानदार विकल्प है. केला शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देता है और पोटैशियम भी देता है, जिससे मसल्स को सपोर्ट मिलता है. वहीं पीनट बटर से थोड़ा प्रोटीन और हेल्दी फैट मिलता है. एक केले पर थोड़ा पीनट बटर लगाकर खा सकते हैं. यह कॉम्बिनेशन स्वादिष्ट भी है और पेट पर भारी भी नहीं लगता. ओट्स और दूधवर्कआउट से पहले लंबे समय तक एनर्जी चाहिए तो ओट्स अच्छा विकल्प है. इसमें कॉम्प्लेक्स कार्ब्स होते हैं, जो धीरे-धीरे ऊर्जा देते हैं. अगर इसे दूध के साथ खाया जाए तो थोड़ा प्रोटीन भी मिल जाता है. आप इंस्टेंट ओट्स को हल्का गुनगुना करके या रातभर भिगोकर भी खा सकते हैं. चाहें तो ऊपर से थोड़ा शहद या केला डाल सकते हैं. ब्राउन ब्रेड और उबला अंडायह एक सिंपल और बैलेंस कॉम्बिनेशन है. ब्राउन ब्रेड से कार्ब्स मिलते हैं और उबले अंडे से अच्छा प्रोटीन. अगर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या जिम वर्कआउट करते हैं, तो यह अच्छा विकल्प हो सकता है. इसे बनाने में भी ज्यादा समय नहीं लगता. दो स्लाइस ब्रेड और एक उबला अंडा काफी है. दही और फलअगर कुछ ठंडा, हल्का और जल्दी पचने वाला खाना चाहते हैं, तो दही और फल का कॉम्बिनेशन लें. दही पेट के लिए हल्का होता है और प्रोटीन देता है. इसमें केला, सेब या बेरीज जैसे फल डाल सकते हैं. इससे शरीर को एनर्जी भी मिलती है और पेट भारी भी नहीं लगता. गर्मियों में यह खासतौर पर अच्छा विकल्प है. मखाना और ड्राई फ्रूट्सअगर सुबह जल्दी वर्कआउट करते हैं और कुछ हल्का चाहिए, तो भुना मखाना और थोड़े ड्राई फ्रूट्स लें. मखाना हल्का होता है और कार्ब्स देता है, जबकि बादाम, किशमिश या अखरोट से हेल्दी फैट और ऊर्जा मिलती है. यह स्नैक जल्दी तैयार हो जाता है और चलते-फिरते भी खाया जा सकता है. ध्यान रखें कि प्री-वर्कआउट फूड हर व्यक्ति के शरीर के हिसाब से अलग असर कर सकता है. बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या भारी खाना वर्कआउट से पहले न लें. साथ ही पानी पीना भी जरूरी है. सही फूड कॉम्बिनेशन चुनेंगे, तो एक्सरसाइज के दौरान शरीर ज्यादा एक्टिव महसूस करेगा और रिजल्ट भी बेहतर मिल सकते हैं.

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दाद हो या फोड़े-फुंसी…तुरंत मिलेगा आराम, चुटकियों में हटेगा पुराने से पुराना मस्सा, आप भी नहीं जानते होंगे मदार के इतने फायदे

Last Updated:April 29, 2026, 19:48 IST Madar Benefits : हमारे गांवों और खेत-खलिहानों में आसानी से मिलने वाला मदार का पौधा (जिसे आक या अकौआ भी कहा जाता है) सिर्फ एक सामान्य झाड़ी नहीं. पुराने समय से ही आयुर्वेद में इसका उपयोग कई तरह की बीमारियों के इलाज में किया जाता रहा है. मदार का पौधा सूखी और बंजर जमीन पर भी उग जाता है. लोकल 18 से गोंडा के वैद्य (डॉ.) अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि मदार के पौधे में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा संक्रमण को कम करने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, इसका रस तेज और जहरीला हो सकता है, इसलिए इसका इस्तेमाल बहुत सावधानी से ही करना चाहिए. मदार का पौधा त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं में लाभकारी है. आयुर्वेद में इसका उपयोग लंबे समय से दाद, खुजली और फोड़े-फुंसी जैसी समस्याओं के इलाज में किया जाता रहा है. लोकल 18 से गोंडा के वैद्य (डॉ.) अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि मदार के पौधे में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा संक्रमण को कम करने में मदद कर सकते हैं. ग्रामीण इलाकों में लोग इसके पत्तों और दूध (सफेद रस) का इस्तेमाल घरेलू उपचार के रूप में करते हैं. खासतौर पर इसके दूध का उपयोग मस्से हटाने के लिए किया जाता है. अगर सही तरीके और सीमित मात्रा में इसका उपयोग किया जाए, तो यह धीरे-धीरे मस्सों को सुखा कर हटा देगा. हालांकि, इसका असर व्यक्ति की त्वचा और समस्या की गंभीरता पर भी निर्भर करता है. आयुर्वेद के अनुसार, मदार का पौधा जोड़ों के दर्द और सूजन में भी उपयोगी है. गांवों में लोग इसके पत्तों को हल्का गर्म करके दर्द वाली जगह पर बांधते हैं, जिससे दर्द और सूजन में राहत मिलती है. माना जाता है कि सही तरीके और सीमित मात्रा में इसका उपयोग करने से फायदा मिल सकता है. हालांकि, इसका रस तेज और जहरीला हो सकता है, इसलिए इसका इस्तेमाल बहुत सावधानी से और विशेषज्ञ की सलाह के साथ ही करना चाहिए. गांवों में आज भी लोग मदार के पत्तों का उपयोग जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत पाने के लिए करते हैं. इसके ताजे पत्तों को हल्का गर्म करके दर्द वाली जगह पर बांध दिया जाता है. इससे सूजन कम होती है और दर्द में आराम मिलता है. खासतौर पर बुजुर्ग लोग इस घरेलू उपाय को काफी प्रभावी मानते हैं. यह तरीका सस्ता और आसानी से उपलब्ध होने के कारण ग्रामीण इलाकों में ज्यादा प्रचलित है. हालांकि, इसका उपयोग करते समय सावधानी जरूरी है, क्योंकि कुछ लोगों की त्वचा पर जलन या एलर्जी हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google आयुर्वेद में मदार की जड़ और छाल का उपयोग पाचन तंत्र को सुधारने के लिए किया जाता है. माना जाता है कि सीमित मात्रा में इसका सही तरीके से इस्तेमाल गैस, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में राहत दे सकता है. ग्रामीण इलाकों में कुछ लोग पारंपरिक ज्ञान के आधार पर इसका उपयोग करते हैं. हालांकि, यह एक शक्तिशाली पौधा है और इसका गलत सेवन नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए बिना किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए. मदार का पौधा सिर्फ औषधीय गुणों के लिए ही नहीं, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी काफी महत्त्वपूर्ण है. हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा में इसके फूल चढ़ाने की परंपरा है. मान्यता है कि मदार के फूल अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. गांवों में लोग इसे आस्था के साथ जोड़कर देखते हैं और इसके पौधे को सम्मान देते हैं. कुछ पारंपरिक उपचारों में मदार के फूल और पत्तों का उपयोग दमा (अस्थमा) और खांसी जैसी समस्याओं में किया जाता है. गांवों में लोग इसके सूखे फूलों का चूर्ण बनाकर सीमित मात्रा में इस्तेमाल करते हैं. माना जाता है कि यह श्वसन तंत्र को राहत देने और सांस लेने में आसानी पैदा करने में सहायक हो सकता है. हालांकि, यह उपाय पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है और हर व्यक्ति पर इसका असर अलग हो सकता है. डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि इसलिए इसका उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, ताकि किसी तरह के दुष्प्रभाव से बचा जा सके. मदार के पौधे का उपयोग छोटे-मोटे घावों को भरने के लिए भी किया जाता है.इसके औषधीय गुण घाव को जल्दी भरने और संक्रमण को कम करने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, मदार का रस तेज और संभावित रूप से जहरीला होता है, जिससे कुछ लोगों की त्वचा पर जलन या एलर्जी हो सकती है. इसलिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. डॉ. अभिषेक बताते हैं कि मदार के इतने फायदे होने के बावजूद इसका उपयोग बहुत सोच-समझकर करना चाहिए. इसके पौधे से निकलने वाला सफेद दूध जहरीला होता है, जो त्वचा पर जलन या एलर्जी पैदा कर सकता है. अगर यह आंखों में चला जाए तो गंभीर समस्या हो सकती है. इसलिए इसका इस्तेमाल करते समय हाथों में दस्ताने पहनना और आंखों से दूर रखना जरूरी है. First Published : April 29, 2026, 19:48 IST

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Last Updated:April 29, 2026, 18:58 IST Biryani Watermelon Side Effects Tips: मुंबई में एक ही परिवार के 4 सदस्यों की मौत ने पूरे देश को डरा दिया है. बिरयानी के बाद तरबूज खाने से हुई इस संदिग्ध फूड पॉइजनिंग पर विशेषज्ञों ने बड़ी चेतावनी दी है. डॉ.संजीव बगई के अनुसार गर्मी में बासी नॉन-वेज और इंजेक्शन वाले फलों का सेवन कैसे स्लो पॉइजन बन सकता है जानने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट. ख़बरें फटाफट नई दिल्ली: हाल ही में मुंबई से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. जहां एक ही परिवार के चार सदस्यों की संदिग्ध फूड पॉइजनिंग से मौत हो गई. जानकारी के मुताबिक परिवार ने पहले बिरयानी खाई और उसके बाद तरबूज का सेवन किया. कुछ ही समय में सभी की तबीयत बिगड़ने लगी और हालत इतनी गंभीर हो गई कि चारों की जान चली गई. इस घटना के बाद खाद्य सुरक्षा और गर्मी में खानपान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. ऐसे में इस मामले को लेकर डॉक्टर ने क्या कुछ कहा आइए जानते हैं. क्या है मौत की बड़ी वजह?इस मामले पर बात करते हुए Dr. Sanjeev Bagai, जो कि एक जाने-माने पीडियाट्रिशियन और नेफ्रोलॉजिस्ट हैं. उन्होंने बताया कि गर्मियों में खासतौर पर नॉन-वेज भोजन अगर सही तरीके से पकाया या स्टोर नहीं किया गया हो, तो उसमें खतरनाक बैक्टीरिया पनप सकते हैं. उनके अनुसार बासी या अधपकी बिरयानी में E.coli जैसे ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं. जो शरीर में जाकर गंभीर गैस्ट्रोएंटेराइटिस, उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन और कई मामलों में जानलेवा स्थिति पैदा कर सकते हैं. तरबूज भी बन सकता है खतराडॉ. बगई ने यह भी चेतावनी दी कि बाजार में बिकने वाले फलों, खासकर तरबूज को आकर्षक और मीठा दिखाने के लिए उसमें कृत्रिम रंग और केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है. कई मामलों में इन फलों में इंजेक्शन के जरिए रंग या मिठास बढ़ाने वाले तत्व मिलाए जाते हैं, जो शरीर के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं. ऐसे जहरीले तत्व शरीर में जाकर अचानक गंभीर रिएक्शन पैदा कर सकते हैं. जिससे स्थिति तेजी से बिगड़ती है. गर्मी में बरतें सावधानीविशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है. लोगों को सलाह दी गई है कि बासी खाना न खाएं, खुले में कटे फल खरीदने से बचें. खाने-पीने की चीजों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें. साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी बेहद जरूरी है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : East Delhi,Delhi First Published : April 29, 2026, 18:58 IST

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भीषण गर्मी में बच्चों को नहीं आ रहा पसीना, लेकिन तप रहा शरीर…कानपुर में ये कैसी आफत, जानिए बचाव

Last Updated:April 29, 2026, 18:55 IST Dry heat health tips : ड्राई हीट सामान्य लू से ज्यादा खतरनाक है. इसमें बच्चे का शरीर बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है, लेकिन पसीना नहीं आता. लोकल 18 से कानपुर बाल रोग चिकित्सक डॉ. एसके गौतम बताते हैं कि ऐसी हालत में बच्चे के शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है, जो अंदरूनी अंगों के लिए खतरनाक है. अगर बच्चा बहुत गर्म लगे, चेहरा लाल हो जाए, बार-बार पानी मांगे, उल्टी जैसा लगे, कमजोरी महसूस करे या आंखें बंद करने लगे तो तुरंत ध्यान देने की जरूरत है. कानपुर. यूपी के कानपुर में पड़ रही भीषण गर्मी अब बच्चों की सेहत पर सीधा असर डाल रही है. डॉक्टरों ने माता-पिता को खास सावधानी बरतने की सलाह दी है. उनका कहना है कि इस मौसम में बच्चों में ‘ड्राई हीट’ का खतरा तेजी से बढ़ जाता है. यह सामान्य लू से ज्यादा खतरनाक स्थिति होती है. इसमें बच्चे का शरीर बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है, लेकिन पसीना नहीं आता. अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो हालत गंभीर हो सकती है. लोकल 18 से कानपुर के बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एसके गौतम बताते हैं कि तेज गर्मी में अगर बच्चे के शरीर से पसीना निकल रहा है तो शरीर खुद को ठंडा करने की कोशिश कर रहा होता है. लेकिन अगर बच्चा तप रहा हो, उसकी स्किन बहुत गर्म लगे और पसीना बिल्कुल न आए तो यह खतरे की घंटी है. ऐसी हालत में बच्चे के शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है और अंदरूनी अंगों पर असर पड़ सकता है. बच्चे क्यों आते हैं जल्दी चपेट में डॉ. गौतम के मुताबिक, बच्चों का शरीर बड़ों के मुकाबले गर्मी को जल्दी पकड़ता है. छोटे बच्चे अपनी परेशानी ठीक से बता भी नहीं पाते. कई बार बच्चा खेलते-खेलते अचानक सुस्त हो जाता है, रोने लगता है, चिड़चिड़ा हो जाता है या गोद में चिपक जाता है. यह संकेत हो सकता है कि गर्मी उसे परेशान कर रही है. अगर बच्चा बहुत गर्म लगे, चेहरा लाल हो जाए, बार-बार पानी मांगे, उल्टी जैसा लगे, कमजोरी महसूस करे या आंखें बंद करने लगे तो तुरंत ध्यान देने की जरूरत है. अगर साथ में पसीना भी न आ रहा हो तो देर करना खतरनाक हो सकता है. ये सावधानियां जरूरी ऐसी स्थिति में बच्चे को तुरंत धूप या गर्म जगह से हटाकर ठंडी जगह ले जाएं. उसके कपड़े ढीले करें और शरीर को गीले कपड़े से पोछें. पंखा चलाएं या ठंडी हवा में रखें. अगर बच्चा होश में है तो थोड़ा-थोड़ा पानी पिलाएं, लेकिन अगर बच्चा सुस्त पड़ रहा हो, ठीक से बोल न रहा हो या बेहोशी जैसा लगे तो तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाएं. डॉक्टर गौतम कहते हैं कि दोपहर की तेज धूप में बच्चों को बाहर न भेजें. उन्हें हल्के सूती कपड़े पहनाएं. बार-बार पानी, नींबू पानी, ORS या घर का तरल पदार्थ देते रहें. खेलने के लिए सुबह या शाम का समय बेहतर है. बंद गाड़ी या बिना हवा वाले कमरे में बच्चे को अकेला न छोड़ें. कानपुर में गर्मी लगातार बढ़ रही है. अगर बच्चा गर्म है लेकिन पसीना नहीं आ रहा, तो इसे नजरअंदाज न करें. यह ‘ड्राई हीट’ का संकेत हो सकता है. समय पर इलाज ही बच्चे को सुरक्षित रख सकता है. About the Author Priyanshu Gupta प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kanpur Nagar,Uttar Pradesh First Published : April 29, 2026, 18:55 IST

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क्या बालों को डाई करने से काले बाल भी हो जाते हैं सफेद? मन में हैं कंफ्यूजन तो दूर कर लीजिए अपना भ्रम

Last Updated:April 29, 2026, 18:17 IST क्या बार-बार हेयर डाई करने से काले बाल भी सफेद होने लगते हैं? बहुत से लोगों के मन में यह सवाल रहता है और इसे लेकर कई तरह की बातें भी सुनने को मिलती हैं. अगर आप भी इस कंफ्यूजन में हैं, तो सच्चाई जान लेना जरूरी है. ख़बरें फटाफट हेयर डाई सीधे तौर पर काले बालों को सफेद नहीं बनाती. बालों में सफेदी दिखते ही बहुत से लोग हेयर डाई का सहारा लेते हैं. कोई फैशन के लिए बाल रंगता है तो कोई सफेद बाल छिपाने के लिए. लेकिन इसी बीच एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि क्या बार-बार डाई करने से काले बाल भी धीरे-धीरे सफेद होने लगते हैं? कई लोग मानते हैं कि हेयर कलर लगाने से बाल खराब हो जाते हैं और नए बाल सफेद निकलने लगते हैं. अगर आपके मन में भी ऐसा कंफ्यूजन है, तो इस भ्रम को समझना जरूरी है. असल बात यह है कि हेयर डाई सीधे तौर पर काले बालों को सफेद नहीं बनाती. बालों का रंग हमारे शरीर में बनने वाले मेलेनिन नाम के पिगमेंट पर निर्भर करता है. जब उम्र बढ़ने लगती है या जेनेटिक कारण होते हैं, तो मेलेनिन कम बनने लगता है और बाल सफेद दिखने लगते हैं. यानी बाल सफेद होने की मुख्य वजह डाई नहीं, बल्कि शरीर के अंदर होने वाले बदलाव, उम्र, खानपान, तनाव और आनुवंशिक कारण होते हैं. इसलिए यह कहना गलत होगा कि सिर्फ डाई लगाने से काले बाल सफेद हो जाते हैं. गलत प्रोडक्ट आपके बालों को बनाते हैं बेजानहालांकि, लगातार और गलत तरीके से हेयर डाई इस्तेमाल करने से बालों को नुकसान जरूर हो सकता है. कई हेयर कलर में केमिकल्स होते हैं, जो बालों को रूखा, बेजान और कमजोर बना सकते हैं. अगर डाई बार-बार की जाए, लंबे समय तक लगी रहे या सही देखभाल न की जाए, तो बाल टूटने लगते हैं और उनकी चमक कम हो सकती है. ऐसे में लोगों को लगता है कि बाल सफेद हो रहे हैं, जबकि कई बार बाल सिर्फ डैमेज और बेजान नजर आ रहे होते हैं. डाई आपके रूट्स को नहीं डैमेज करताकुछ लोग डाई करने के बाद नए उगे बालों में सफेदी देखकर घबरा जाते हैं. दरअसल, डाई केवल पहले से मौजूद बालों को रंगती है, सिर की जड़ों या नए उगने वाले बालों पर इसका असर नहीं होता. जब कुछ दिनों बाद जड़ों से नए बाल निकलते हैं और वे सफेद दिखाई देते हैं, तो लोगों को लगता है कि डाई की वजह से ऐसा हुआ है. जबकि सच्चाई यह है कि वे बाल पहले से ही सफेद आने वाले थे, बस डाई के कारण पहले नजर नहीं आ रहे थे. अच्छी क्वालिटी का प्रोडक्ट चुनेंअगर आप हेयर डाई करते हैं, तो कुछ सावधानियां रखना जरूरी है. हमेशा अच्छी क्वालिटी का प्रोडक्ट चुनें और बहुत ज्यादा सस्ते या नकली रंगों से बचें. डाई लगाने से पहले पैच टेस्ट करें, ताकि एलर्जी का खतरा कम हो. बार-बार बाल रंगने के बजाय जरूरत पड़ने पर ही इस्तेमाल करें. साथ ही डाई के बाद अच्छे शैम्पू, कंडीशनर और हेयर ऑयल से बालों की देखभाल करें, ताकि बाल स्वस्थ रहें. ऐसे बचाएं बालों को सफेद होने सेबालों को समय से पहले सफेद होने से बचाने के लिए लाइफस्टाइल भी बहुत मायने रखती है. तनाव कम लें, अच्छी नींद लें और संतुलित आहार खाएं. शरीर में विटामिन B12, आयरन, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की कमी भी बालों की सेहत पर असर डाल सकती है. इसलिए सिर्फ बाहर से रंग लगाने के बजाय अंदर से पोषण देना भी जरूरी है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 29, 2026, 18:17 IST

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