Friday, 01 May 2026 | 01:10 PM

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गर्मियों में शहद खाना चाहिए या नहीं? जानें फायदे-नुकसान और सेवन का सही तरीका

Is honey beneficial or harmful in summer: गर्मियों के मौसम में आमतौर पर ऐसी चीज़ें खाने की सलाह दी जाती है,जिनकी तासीर ठंडी हो, क्योंकि इस समय बाहरी गर्मी के साथ शरीर में पित्त भी बढ़ जाता है. हालांकि, लोगों को इस बात की जानकारी सही से नहीं होती है कि कौन से फूड की तासीर ठंडी है या गर्म. ऐसे में वे अनजाने में गर्मियों में गर्म तासीर वाली चीजें भी अधिक खा लेते हैं. इससे शरीर में गर्मी और बढ़ जाती है. शहद भी एक ऐसा ही खाद्य पदार्थ है, जो शरीर की गर्मी को बढ़ाने का काम करता है. ऐसे में ये जानना बहुत जरूरी है कि यदि कोई व्यक्ति शहद अधिक मात्रा में सेवन करता है, तो उसे क्या कोई नुकसान होगा या फिर सेहत को लाभ मिलेगा? जानिए आयुर्वेद के अनुसार यहां कि क्या गर्मियों में शहद लेना सही है और खाएं भी तो किस तरीके और कितनी मात्रा में… आयुर्वेद में शहद का महत्व आयुर्वेद के अनुसार,शहद को अमृत के समान माना गया है. इसकी तासीर गर्म और नमी देने वाली होती है, लेकिन इसे योगवाही भी कहा जाता है. इसका मतलब है कि शहद जिस चीज के साथ लिया जाए, उसी के गुणों को बढ़ा देता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. गर्मियों में सीधे शहद खाने के नुकसानअगर शहद को बिना किसी चीज के सीधे खाया जाए, तो यह शरीर में पित्त बढ़ा सकता है. इससे खासकर गर्मियों में गर्मी और जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. शहद के सेवन का सही तरीका -सुबह नींबू पानी के साथ लें. मिट्टी के घड़े के पानी में शहद और नींबू मिलाकर सुबह खाली पेट लेने से शरीर ठंडा रहता है. वजन नियंत्रण में मदद मिलती है. -सत्तू में मिलाकर भी आप शहद का सेवन कर सकते हैं. चीनी की जगह सत्तू में शहद मिलाने से शरीर को ठंडक और ऊर्जा दोनों मिलती है.यह मिश्रण हाइड्रेशन बनाए रखता है. थकान भी कम करता है. -दही के साथ खाना भी बेस्ट माना जाता है. आप दोपहर में दही और शहद को मिक्स करके खा सकते हैं. इससे पाचन बेहतर होता है. यह लू से बचाने में भी मददगार है. किन चीजों के साथ न लें शहदशहद को कभी भी घी के साथ नहीं लेना चाहिए. आयुर्वेद में इसे ‘विरुद्ध आहार’ माना गया है. इससे शरीर में गर्मी बढ़ सकती है. वात-पित्त का संतुलन बिगाड़ सकता है. नोट: ऐसा नहीं कि आप गर्मियों में शहद का सेवन ही नहीं कर सकते हैं. यह पूरी तरह से हानिकारक नहीं है. इसे सही तरीके और सही संयोजन के साथ लेना जरूरी है. सही उपयोग करने पर यह शरीर को ठंडक, ऊर्जा और कई स्वास्थ्य लाभ दे सकता है.

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भीषण गर्मी ने कर दिया बेहाल? लू और डिहाइड्रेशन से बचाएंगे ये आयुर्वेदिक उपाय, तुरंत मिलेगा आराम

गर्मी का मौसम शुरू होते ही तेज धूप, बढ़ता तापमान और लू का असर लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगता है. इस समय थकान, कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर आना, डिहाइड्रेशन और पेट से जुड़ी दिक्कतें आम हो जाती हैं. ऐसे मौसम में हेल्थ एक्सपर्ट और आयुर्वेद विशेषज्ञ लोगों को अपनी दिनचर्या में बदलाव करने और शरीर का खास ख्याल रखने की सलाह देते हैं. उनका मानना है कि अगर समय रहते सही खानपान और घरेलू उपाय अपनाए जाएं, तो गर्मी से होने वाली कई परेशानियों से बचा जा सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में सबसे जरूरी चीज है शरीर को हाइड्रेट रखना. जब तापमान बढ़ता है, तो शरीर से पसीने के जरिए पानी तेजी से बाहर निकलता है. अगर इसकी भरपाई न की जाए, तो कमजोरी और पानी की कमी हो सकती है. इसलिए दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना चाहिए. सिर्फ सादा पानी ही नहीं, बल्कि नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी, बेल का शरबत और घर के बने प्राकृतिक पेय भी फायदेमंद माने जाते हैं. आयुर्वेद क्या कहता है?आयुर्वेद के अनुसार, गर्मी में शरीर को ठंडक देना और अंदर की नमी बनाए रखना जरूरी है. इसके लिए कुछ आसान और पारंपरिक उपाय अपनाए जा सकते हैं. ये उपाय शरीर को राहत देने के साथ पाचन को भी बेहतर रखने में मदद करते हैं. तुलसी के बीज का सेवनगर्मी में तुलसी के बीज काफी लाभकारी माने जाते हैं. इन्हें रातभर पानी में भिगोकर सुबह उस पानी के साथ लिया जा सकता है. भीगने के बाद ये फूल जाते हैं और ठंडक देने में मदद करते हैं. माना जाता है कि इससे शरीर को राहत मिलती है और पेट भी शांत रहता है. खस, चंदन और मोगरा का उपयोगआयुर्वेद में खस, चंदन और मोगरा को गर्मी के मौसम में उपयोगी माना गया है. इन चीजों को पानी में भिगोकर रखा जा सकता है. इस पानी का सेवन करने से शरीर को प्राकृतिक ठंडक मिलती है और गर्मी से होने वाली बेचैनी कम हो सकती है. इनकी खुशबू भी मन को शांत करने में मदद करती है. सफेद प्याज क्यों फायदेमंद माना जाता है?गर्मी के मौसम में सफेद प्याज का सेवन भी कई लोग करते हैं. माना जाता है कि यह शरीर का तापमान संतुलित रखने में मदद कर सकता है. सलाद के रूप में या खाने के साथ इसे लिया जा सकता है. ग्रामीण इलाकों में लू से बचने के लिए प्याज साथ रखने की परंपरा भी रही है. खानपान में करें बदलावगर्मियों में भारी, तला-भुना और बहुत ज्यादा मसालेदार खाना कम करना चाहिए. ऐसा खाना पाचन पर असर डाल सकता है और शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है. इसके बजाय हल्का, ताजा और पौष्टिक भोजन लें. दही, छाछ, मौसमी फल, खीरा, तरबूज, सलाद, हरी सब्जियां और घर का बना साधारण खाना बेहतर विकल्प हैं.

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घंटों कान में ईयरफोन, ईयरबड लगाकर तेज आवाज में सुनते हैं गाना, न करें कान के साथ खिलवाड़? ईयर को हेल्दी रखेंगे ये टिप्स

Last Updated:April 30, 2026, 21:43 IST आजकल जिसे देखो उसके कानों में ईयरफोन, ईयरबड्स लगे रहते हैं और तेज आवाज में घंटों गाना सुना करते हैं. इस म्यूजिक का साउंड इतना तेज होता है कि आसपास मौजूद लोगों को भी सुनाई देता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी ये आदत आपके कान को कितना नुकसान पहुंचा रही है. कम उम्र में ही आपके सुनने की क्षमता तक प्रभावित हो सकती है. ऐसे में इस आदत को जितनी जल्दी हो छोड़ दें और अपने कानों को हेल्दी रखने के लिए कुछ टिप्स फॉलो करें. कान की सुनने की क्षमता प्रभावित कर सकता है ईयरफोन, ईयरबड्स. कान हमारे शरीर का बेहद अहम हिस्सा हैं, लेकिन अक्सर हम उनकी देखभाल को नजरअंदाज कर देते हैं. यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है. दुनियाभर में 5 से 19 साल के करीब 95 मिलियन से अधिक बच्चे सुनने की समस्या से जूझ रहे हैं, जो एक बड़ा चिंता का विषय है. डब्लूएचओ (WHO) लोगों से अपील करता है कि वे अपनी सुनने की क्षमता की रक्षा करें और कानों की सेहत को प्राथमिकता दें. तेज आवाजों से होने वाले नुकसान से बचने के लिए कुछ आसान लेकिन जरूरी उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है. तेज आवाज से बचाव है जरूरीWHO के अनुसार, छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर हम लंबे समय तक अपनी सुनने की क्षमता को सुरक्षित रख सकते हैं. वॉल्यूम हमेशा 60% से कम रखें.शोर-शराबे वाले माहौल में इयरप्लग का इस्तेमाल करें.तेज आवाजों से दूरी बनाकर रखें. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. म्यूजिक सुनते समय रखें ये सावधानियां संगीत पसंद करने वाले रखें खास ध्यान स्पीकर से थोड़ी दूरी बनाकर रखेंबीच-बीच में कानों को आराम देंशोर वाली जगहों पर इयरप्लग का इस्तेमाल करेंकिसी ईवेंट के बाद कानों को रिकवर करने के लिए एक दिन का आराम देंसाउंड लेवल ट्रैक करने के लिए स्मार्टफोन ऐप्स का उपयोग करें गेमिंग के दौरान भी रहें सतर्क गेम खेलने वाले लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए.सुरक्षित सुनने वाले फीचर्स वाले डिवाइस चुनेंनॉइज-कैंसलिंग हेडफोन का इस्तेमाल करेंलगातार हेडफोन इस्तेमाल से बचेंस्क्रीन टाइम सीमित रखें नियमित जांच है बेहद जरूरी समय-समय पर अपनी सुनने की क्षमता की जांच कराते रहनी चाहिए.अगर सुनने में परेशानी हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.जरूरत पड़ने पर सहायक उपकरणों का इस्तेमाल करें.सुनने में दिक्कत वाले लोगों का करें सम्मान. जिन लोगों को सुनने में समस्या है, उन्हें सहयोग और सम्मान देना बहुत जरूरी है. यह समस्या उनकी जीवन गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है, इसलिए संवेदनशीलता और समझदारी दिखाना बेहद अहम है. यदि आप टीनएजर हैं तो इस आदत को जितनी जल्दी छोड़ देंगे, उतना ही आपके कान की सेहत के लिए अच्छा होगा. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 30, 2026, 21:43 IST

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गर्मी में टैनिंग से परेशान? इस्तेमाल करें ये हर्बल फेस स्क्रब और ग्लोइंग तेल, देगा नेचुरल निखार

गर्मी में टैनिंग से परेशान? इस्तेमाल करें ये हर्बल फेस स्क्रब और ग्लोइंग तेल, देगा नेचुरल निखार

होमफोटोलाइफ़फैशन गर्मी में टैनिंग से परेशान? इस्तेमाल करें ये हर्बल फेस स्क्रब और ग्लोइंग तेल Last Updated:April 30, 2026, 20:50 IST Summer skin care tips: इत्र नगरी कन्नौज सदियों से अपनी खुशबू और प्राकृतिक उत्पादों के लिए जानी जाती है. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कन्नौज के व्यापारी विवेक नारायण मिश्रा ने एक अनोखा हर्बल फेस स्क्रब और ग्लोइंग तेल तैयार किया है. यह स्क्रब खासतौर पर गर्मियों में होने वाली त्वचा समस्याओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है. आज जब लोग केमिकल युक्त उत्पादों से दूर रहना चाहते हैं, ऐसे में यह प्राकृतिक स्क्रब और ग्लोइंग तेल लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. इस हर्बल फेस स्क्रब की सबसे बड़ी खासियत है इसकी प्राकृतिक संरचना. इसमें चंदन पाउडर, गुलाब पाउडर, मसूर दाल, दालचीनी, मुल्तानी मिट्टी और चीनी जैसे घरेलू और आयुर्वेदिक तत्वों का इस्तेमाल किया गया है. ये सभी सामग्री त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं. मसूर दाल स्किन को एक्सफोलिएट करती है, मुल्तानी मिट्टी गहराई से सफाई करती है और दालचीनी त्वचा में निखार लाने में मदद करती है. गर्मियों में धूप के कारण त्वचा पर टैनिंग होना आम समस्या है. यह स्क्रब खासतौर पर टैनिंग हटाने में मददगार साबित हो रहा है. नियमित उपयोग से यह त्वचा की ऊपरी परत से डेड स्किन को हटाकर नई और साफ त्वचा को सामने लाता है. इससे चेहरा न केवल साफ दिखता है बल्कि उसका रंग भी निखरता है. वही इस स्क्रब के साथ व्यापारी ने केसर, पिस्ता और चिरौंजी फेस ऑयल भी तैयार किया है जो त्वचा को अंदरूनी निखार और मॉइश्चराइजर पहुंचते हैं. यह स्क्रब सिर्फ सफाई तक ही सीमित नहीं है, बल्कि त्वचा को पोषण भी देता है. इसके इस्तेमाल से त्वचा मुलायम, स्मूद और नेचुरली ग्लोइंग बनती है. चीनी के छोटे कण स्किन को हल्के से स्क्रब करते हैं, जिससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और चेहरे पर प्राकृतिक चमक आती है. यह तेल चेहरे पर ग्लोइंग बनाने में मदद करते हैं, जिससे चेहरा और भी ज्यादा खूबसूरत, चमकदार हो जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google आज के समय में केमिकल युक्त ब्यूटी प्रोडक्ट्स से त्वचा को नुकसान होने का खतरा रहता है, लेकिन यह हर्बल फेस स्क्रब पूरी तरह केमिकल फ्री है. यही कारण है कि इसे हर प्रकार की त्वचा के लिए सुरक्षित माना जा रहा है, चाहे त्वचा ड्राई हो, ऑयली हो या सेंसिटिव इसका प्रयोग हर व्यक्ति कर सकता है. विवेक नारायण मिश्रा का यह प्रयास न सिर्फ लोगों को प्राकृतिक विकल्प दे रहा है, बल्कि कन्नौज के स्थानीय उत्पादों को भी नई पहचान दिला रहा है. यह स्क्रब धीरे-धीरे बाजार में अपनी जगह बना रहा है और लोगों का भरोसा जीत रहा है. अगर आप भी अपनी त्वचा को बिना किसी साइड इफेक्ट के स्वस्थ और खूबसूरत बनाना चाहते हैं, तो यह हर्बल फेस स्क्रब त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद है. यह न सिर्फ आपकी त्वचा को साफ और चमकदार बनाएगा, बल्कि आपको प्रकृति के करीब भी लाएगा. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : April 30, 2026, 20:50 IST

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भारत में मिलने वाले ये 10 गर्मियों के फल, जिन्हें आप भुला चुके हैं, फायदे और स्वाद में जबरदस्त, आपके फलों की लिस्ट में हैं शामिल?

Forgotten summer fruits from india: खानपान में मौसमी चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए. सर्दियों में जो फल-सब्जियां मिलती हैं, उसे जरूर खाना चाहिए. उसी तरह गर्मियों में मिलने वाले फलों, हरी सब्जियों को भी अपनी डाइट में हर दिन शामिल करना जरूरी है. गर्मी के मौसम में कई ऐसे फल होते हैं, जो पानी से भरपूर होते हैं. जैसे खरबूजा, तरबूज, ककड़ी, खीरा, लीची, आम आदि. इन फलों का सेवन तो आप हर दिन करते हैं, लेकिन गर्मियों में मिलने वाली फलों की लिस्ट यहीं समाप्त नहीं होती है. कई ऐसे फल भी हैं, जिनको लोग भूल चुके हैं. इनमें से कुछ तो मार्केट में मिलते भी हैं, लेकिन लोग इन्हें कम ही खरीदते हैं. आपको यहां कुछ ऐसे फलों के बारे में बता रहे हैं, जो गर्मियों के लिए बेस्ट और बेहद ही फायदेमंद साबित होते हैं, लेकिन लोग इनका सेवन न के बराबर करते हैं. फालसा- डार्क बैंगनी रंग का फालसा फल गर्मियों में खाए जाने वाला फल है, लेकिन काफी लोग इसके बारे में नहीं जानते या इसे बेकार समझ कर खरीदते नहीं हैं. फालसा शरीर को ठंडक देता है. स्वाद में खट्टा-मीठा फालसा खाने से पाचन दुरुस्त रहता है. शरीर को कई फायदे मिलते हैं. लसोड़ा- शायद आपने इस फल का नाम ना सुना हो, लेकिन ये गर्मियों में खाया जाने वाला फल है. इसे इंग्लिश में ग्लू बेरी (Glue berry) कहते हैं. लसोड़ा की तासीर ठंडी होती है. ऐसे में गर्मियों में ये शरीर को ठंडक प्रदान करता है. गैस दूर करता है, पेट को हेल्दी रखता है. पेट की गर्मी, कब्ज आदि को दूर करता है. ये देखने में हरे रंग का गोल और छोटा सा एक जंगली फल है. इससे अचार और सब्जी बनती है. हालांकि, यह सिर्फ दो महीने मई और जून में ही मिलता है. भोजन में इसके कम उपयोग के कारण शहरों में ये बहुत अधिक नजर नहीं आता है. लसोड़ा फल सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. जंगली जलेबी- जलेबी की तरह टेढ़ी-मेढ़ी दिखने वाली जंगली जलेबी एक जंगली फल है. इसके अंदर काला बीज होता है. इसके अंदर मीठा, सफेद रंग का गूदा होता है. ये एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस आदि से भरपूर होती है. इसे खाने से पाचन सही रहता है. इम्यूनिटी बूस्ट होती है. हड्डियां मजबूत होती हैं. हालांकि, अब जंगली जलेबी की खेती बहुत कम होती है, जिससे ये नॉर्मल मार्केट में नहीं मिलती है. जंगली जलेबी करोंदा- यह छोटा सा अंडाकार और रंग में सफेद-गुलाबी होता है, जिसका अचार भी बनता है. स्वाद में खट्टे करोंदे को भारत की जंगली क्रैनबेरी भी कहते हैं. हालांकि, इसका सेवन अब अचार तक ही सीमित हो गया है. वैसे आपको ठेले पर करोंदा दिखे तो जरूर खरीद कर इसे खाएं. सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है ये फल. गर्मियों में आप सब्जी, चटनी बनाकर सेवन कर सकते हैं. विटामिन सी, आयरन से भरपूर करोंदा, पाचन तंत्र, इम्यूनिटी, ब्लड प्रेशर को सही रखता है. शहतूत- इस फल का रंग डार्क बैंगनी होता है. इसका स्वाद मीठा होता है. ये फल जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए मार्केट में ये जल्दी नहीं दिखाई देता है. गर्मियों में ये पाचन सही रखता है. इम्यूनिटी बूस्ट करता है. खून की कमी दूर करता है. कोलेस्ट्रॉल को नॉर्मल करता है. हार्ट डिजीज, कैंसर, शुगर लेवल हाई होने से बचाता है. आपको कहीं भी इस मौसम में शहतूत दिखे तो इसे जरूर खाएं. शहतूत फल कमरख- काटने पर सितारे जैसी बनावट में दिखने वाला कमरख यानी स्टार फ्रूट स्वाद में खट्टा-मीठा होता है. गर्मियों में इसे खाने से शरीर डिहाइड्रेशन से बचा रहता है. हालांकि, कमरख का सेवन लोग बहुत ही कम करते हैं. यह विटामिन सी, फाइबर से भरपूर होता है. पाचन तंत्र के लिए हेल्दी है. रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है. रामफल- ये फल सीताफल (custard apple) का ही एक रिश्तेदार. यह फल तब अधिक पकता है, जब गर्मी अपने चरम पर होती है. इसकी बनावट सीताफल जैसी होती है, लेकिन यह कम मीठा और अधिक मिट्टी जैसा स्वाद वाला होता है. ऐसा माना जाता है कि यह शरीर को भीषण गर्मी और धूप से होने वाली एलर्जी से निपटने में मदद करता है. रामफल खिरनी- ये फल भी गर्मियों का है, जो पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है. यह भारतीय जंगलों में पाया जाता है. पीले-नारंगी रंग का ये छोटा सा फल स्वाद में मीठा होता है. फाइबर, प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ये फल गर्मियों में मई के महीने में कुछ ही दिनों के लिए मिलता है. संभवत: इसलिए भी अधिकतर लोग इस फल के बारे में नहीं जानते होंगे. यह फल जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए व्यावसायिक रूप से ये फल बहुत कम दिखाई देता है. कोकम – यह चमकीला लाल फल गर्मियों में मिलने वाला एक दुर्लभ फ्रूट है. स्वाद में ये बेहद खट्टा होता है. यह कुछ ही दिनों में खराब हो जाता है. गर्मियों में इससे एनर्जी ड्रिंक, शरबत बनाकर पी सकते हैं. कोकम (Garcinia indica) एक प्राकृतिक शीतलक है, जो गर्मियों में शरीर को ठंडक, हाइड्रेशन प्रदान करता है. लू से बचाता है. पाचन दुरुस्त रखता है. वजन घटाता है. इसकी तासीर ठंडी होती है. कोकम फल चलता – पूर्वी भारत के दलदलों और जंगलों में पाया जाने वाला यह फल कठोर, कुरकुरे कवर से सुरक्षित रहता है. इसका स्वाद खट्टा-कड़वा होता है. चटनी और दाल में इसका उपयोग अभी भी होता है, लेकिन आजकल गर्मियों में कच्चे फल के रूप में इसकी खपत तेजी से घट रही है.

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मोटापे की ये कैसी आहट, 14 में से 1 बच्चे का भी वजन कर रहा लिमिट क्रॉस, क्या होगा इसका परिणाम

भारत में डायबिटीज, हाई बीपी और दिल की बीमारियों को लेकर चिंता पहले से बनी हुई है, लेकिन अब एक नई समस्या तेजी से सामने आ रही है. मोटापा अब सिर्फ बड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहा है. हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, स्कूल जाने वाले लगभग हर 14 में से 1 बच्चे का वजन सामान्य सीमा से ज्यादा है. यानी बड़ी संख्या में बच्चे कम उम्र में ही मोटापे की चपेट में आ रहे हैं. यह सिर्फ दिखने का मामला नहीं, बल्कि आने वाले समय में गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकता है. TOI में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की जीवनशैली पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदली है. पहले बच्चे मैदान में खेलते थे, दौड़ते थे और ज्यादा एक्टिव रहते थे. अब उनका समय मोबाइल, टीवी, टैबलेट और वीडियो गेम में ज्यादा बीतता है. घंटों स्क्रीन के सामने बैठने से फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है, जिससे कैलोरी बर्न नहीं होती और वजन बढ़ने लगता है. खानपान भी इस समस्या की बड़ी वजह बन चुका है. आजकल बच्चों को घर के ताजे खाने से ज्यादा पैकेट वाले स्नैक्स, चिप्स, बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज और मीठे ड्रिंक्स पसंद आने लगे हैं. इनमें कैलोरी ज्यादा होती है, लेकिन जरूरी पोषण कम मिलता है. बार-बार कुछ न कुछ खाते रहना, मीठी चीजें ज्यादा लेना और समय पर भोजन न करना भी वजन बढ़ाने का कारण बनता है. कम नींद और पढ़ाई का दबाव भी बच्चों की सेहत पर असर डाल रहा है. कई बच्चे देर रात तक जागते हैं, सुबह जल्दी उठते हैं और पूरा आराम नहीं कर पाते. नींद पूरी न होने से हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे भूख ज्यादा लग सकती है और वजन बढ़ने की संभावना रहती है. पढ़ाई और कोचिंग के कारण खेलकूद का समय भी कम हो गया है. डॉक्टरों के अनुसार, बचपन का मोटापा आगे चलकर बड़ी बीमारियों की वजह बन सकता है. ज्यादा वजन वाले बच्चों में कम उम्र में ही ब्लड शुगर बढ़ना, इंसुलिन रेजिस्टेंस, फैटी लिवर, सांस फूलना, घुटनों पर दबाव और हार्मोनल गड़बड़ी जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं. यही बच्चे बड़े होकर डायबिटीज, दिल की बीमारी और हाई कोलेस्ट्रॉल के शिकार हो सकते हैं. यह समस्या अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. छोटे शहरों और कस्बों में भी बच्चों की जीवनशैली तेजी से बदल रही है. बाहर का खाना, कम खेलकूद और ज्यादा स्क्रीन टाइम हर जगह आम होता जा रहा है. इसलिए मोटापा अब देशभर में बढ़ती चुनौती बन गया है. इससे बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि बच्चों की दिनचर्या सुधारी जाए. रोज कम से कम एक घंटा आउटडोर खेल या फिजिकल एक्टिविटी जरूरी है. घर का ताजा खाना, फल, सब्जियां, दाल, दूध और प्रोटीन वाली चीजें ज्यादा दें. मीठे ड्रिंक्स, पैकेज्ड स्नैक्स और जंक फूड सीमित करें. साथ ही बच्चों की नींद पूरी हो, यह भी ध्यान रखें. माता-पिता की भूमिका भी बहुत अहम है. अगर घर में सभी हेल्दी खानपान अपनाएंगे और एक्टिव रहेंगे, तो बच्चे भी वही सीखेंगे. उन्हें डांटने के बजाय प्यार से सही आदतें सिखाना जरूरी है.

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नो शुगर ड्रिंक में जब नहीं होती चीनी तो मीठा करने के लिए क्या डाला जाता है? क्या यह फायदेमंद!

Last Updated:April 30, 2026, 18:16 IST नो शुगर ड्रिंक्स में चीनी की जगह अलग-अलग तरह के स्वीटनर, प्राकृतिक मिठास देने वाले तत्व या फ्लेवर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है. ये सामान्य चीनी का विकल्प हो सकते हैं, लेकिन इन्हें भी समझदारी से लेना चाहिए. सबसे अच्छा विकल्प हमेशा सादा पानी, नारियल पानी या घर के हेल्दी ड्रिंक्स ही माने जाते हैं. आर्टिफिशियल स्वीटनर सेहत के लिए फायदेमंद या नुकसानदायक. आजकल बाजार में नो शुगर, जीरो शुगर और शुगर फ्री ड्रिंक्स तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं. कई लोग वजन कम करने, डायबिटीज कंट्रोल करने या कम कैलोरी लेने के लिए इन्हें चुनते हैं. लेकिन जब बोतल पर साफ लिखा होता है कि इसमें चीनी नहीं है, तब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि फिर इसका स्वाद मीठा कैसे होता है? आखिर बिना चीनी के कोई ड्रिंक मीठी कैसे लग सकती है. इसका जवाब स्वाद बढ़ाने वाले खास तत्वों में छिपा होता है, जिन्हें कम मात्रा में मिलाकर मीठापन दिया जाता है. असल में इन ड्रिंक्स में साधारण चीनी की जगह ऐसे पदार्थ डाले जाते हैं, जो जीभ के स्वाद रिसेप्टर्स को मीठा महसूस कराते हैं. यानी शरीर को मीठा स्वाद मिलता है, लेकिन उसमें सामान्य चीनी जैसी कैलोरी या ब्लड शुगर बढ़ाने वाला असर कम या बिल्कुल नहीं होता. यही वजह है कि ये ड्रिंक्स उन लोगों के बीच लोकप्रिय हैं जो मीठा स्वाद चाहते हैं, लेकिन चीनी से बचना चाहते हैं. आर्टिफिशियल स्वीटनर क्या होते हैंकई नो शुगर ड्रिंक्स में आर्टिफिशियल स्वीटनर देने वाले तत्व मिलाए जाते हैं. इनमें एस्पार्टेम, सुक्रालोज और एसेसल्फेम पोटैशियम जैसे नाम शामिल हैं. ये सामान्य चीनी से कई गुना ज्यादा मीठे होते हैं, इसलिए बहुत कम मात्रा में ही इस्तेमाल किए जाते हैं. थोड़ी सी मात्रा में भी ये ड्रिंक को मीठा स्वाद दे देते हैं. इसी वजह से कैलोरी भी काफी कम रहती है. नेचुरल विकल्प भी होते हैंकुछ कंपनियां प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाली मिठास का इस्तेमाल करती हैं. जैसे स्टीविया और मोंक फ्रूट एक्सट्रैक्ट. स्टीविया एक पौधे की पत्तियों से मिलता है और यह बिना चीनी के मीठा स्वाद देता है. इसी तरह मोंक फ्रूट भी प्राकृतिक विकल्प माना जाता है. ये दोनों आमतौर पर उन लोगों को पसंद आते हैं जो आर्टिफिशियल चीजों से बचना चाहते हैं. शुगर अल्कोहल क्या हैकई जीरो शुगर या लो कार्ब ड्रिंक्स और प्रोडक्ट्स में एरिथ्रिटॉल, जाइलिटॉल जैसे तत्व मिलाए जाते हैं. इन्हें शुगर अल्कोहल कहा जाता है. ये स्वाद में मीठे होते हैं, लेकिन सामान्य चीनी की तुलना में कम कैलोरी देते हैं. हालांकि कुछ लोगों को ज्यादा मात्रा में लेने पर पेट फूलना या गैस जैसी परेशानी हो सकती है. बिना मीठा डाले भी मीठा स्वाद कैसे बढ़ता हैकुछ ड्रिंक्स में फ्लेवर एन्हांसर, एसिड्स और खुशबू वाले तत्व भी डाले जाते हैं. ये दिमाग को मीठा स्वाद ज्यादा महसूस कराने में मदद करते हैं. यानी कभी-कभी वास्तविक मिठास कम होने पर भी स्वाद मीठा लग सकता है. यह स्वाद विज्ञान का हिस्सा है. क्या ये फायदेमंद हैंअगर कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा चीनी वाले ड्रिंक्स पीता है और उसकी जगह सीमित मात्रा में नो शुगर ड्रिंक चुनता है, तो यह बेहतर विकल्प हो सकता है. इससे कैलोरी कम हो सकती है और शुगर इनटेक भी घट सकता है. खासकर वजन कंट्रोल या डायबिटीज मैनेजमेंट में कुछ लोगों को फायदा मिल सकता है. नो शुगर का मतलब यह नहीं कि आप इसे जितना चाहें उतना पी सकते हैं. ज्यादा मात्रा में लेने से मीठे स्वाद की आदत बनी रह सकती है. कुछ लोगों को कुछ स्वीटनर सूट नहीं करते. इसलिए लेबल पढ़ना जरूरी है और सीमित मात्रा में सेवन करना बेहतर है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 30, 2026, 18:16 IST

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प्याज का रस बाल झड़ना रोकता है या सिर्फ घरेलू मिथक, जानें सच

Last Updated:April 30, 2026, 17:34 IST बाल झड़ने की समस्या से परेशान लोग अक्सर प्याज के रस को घरेलू उपाय के तौर पर अपनाते हैं. माना जाता है कि इससे हेयर फॉल कम होता है और नई ग्रोथ भी शुरू हो सकती है, लेकिन इसका सच जानना जरूरी है. ख़बरें फटाफट प्याज के रस से बाल होते हैं हेल्दी. बाल झड़ना आजकल बहुत आम समस्या बन चुकी है. बदलती लाइफस्टाइल, तनाव, खराब खानपान, हार्मोनल बदलाव, डैंड्रफ और प्रदूषण जैसी कई वजहों से लोग हेयर फॉल का सामना कर रहे हैं. ऐसे में जब भी घरेलू उपायों की बात होती है, तो प्याज का रस सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है. कई लोग मानते हैं कि प्याज का रस लगाने से बाल झड़ना कम हो जाता है और नए बाल भी उगने लगते हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या सचमुच ऐसा होता है या यह सिर्फ एक घरेलू मिथक है. सच यह है कि प्याज का रस कुछ मामलों में बालों के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसे जादुई इलाज समझना सही नहीं होगा. इसके असर व्यक्ति की स्कैल्प कंडीशन, हेयर फॉल की वजह और नियमित उपयोग पर निर्भर करते हैं. अगर बाल झड़ने के पीछे पोषण की कमी, तनाव या हार्मोनल कारण हैं, तो सिर्फ प्याज का रस लगाने से पूरी समस्या हल नहीं होती. प्याज के रस में क्या होता है?हेल्थलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, प्याज का रस बालों के झड़ने में कुछ हद तक मददगार माना जाता है, क्योंकि इसमें सल्फर अच्छी मात्रा में पाया जाता है. सल्फर एक जरूरी पोषक तत्व है, जो शरीर में प्रोटीन बनाने वाले अमीनो एसिड का हिस्सा होता है. बाल मुख्य रूप से केराटिन नाम के प्रोटीन से बने होते हैं, और केराटिन में भी सल्फर पाया जाता है. ऐसे में प्याज का रस स्कैल्प और बालों पर लगाने से जड़ों को अतिरिक्त पोषण मिल सकता है, जिससे बाल मजबूत बनने में मदद मिलती है. माना जाता है कि इससे बाल टूटना कम हो सकता है और नई ग्रोथ को भी सपोर्ट मिल सकता है. प्याज में मौजूद तत्व कोलेजन बनने में भी मदद कर सकते हैं, जो स्वस्थ स्किन सेल्स और बालों की बढ़त के लिए जरूरी माना जाता है. क्या इससे बाल झड़ना कम होता है?इसके अलावा यह भी माना जाता है कि प्याज का रस स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर कर सकता है. जब जड़ों तक खून का प्रवाह अच्छा होता है, तो हेयर फॉलिकल्स को ज्यादा पोषण मिलता है और बालों की ग्रोथ बेहतर हो सकती है. साल 2002 की एक स्टडी में पाया गया था कि जिन लोगों ने प्याज का रस लगाया, उनमें सामान्य पानी इस्तेमाल करने वालों की तुलना में बालों की बढ़त ज्यादा देखी गई. हालांकि इस विषय पर अभी और रिसर्च की जरूरत है. यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि प्याज का रस गंजापन, एलोपेशिया या पैटर्न बाल्डनेस का इलाज नहीं है, लेकिन यह मौजूदा बालों को मजबूत रखने और हेयर फॉल कम करने में मदद कर सकता है. लगाने का सही तरीकाएक प्याज को पीसकर उसका रस निकाल लें. इसे कॉटन की मदद से स्कैल्प पर लगाएं. 20 से 30 मिनट तक छोड़ दें, फिर हल्के शैंपू से धो लें. हफ्ते में 2 बार इस्तेमाल काफी है. ज्यादा लगाने से स्कैल्प में जलन हो सकती है. चाहें तो इसमें थोड़ा नारियल तेल या एलोवेरा जेल मिला सकते हैं. किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिएअगर आपकी स्कैल्प बहुत संवेदनशील है, खुजली होती है या एलर्जी रहती है, तो पहले पैच टेस्ट करें. प्याज का रस तेज होता है और कुछ लोगों को जलन या लालपन दे सकता है. अगर ज्यादा परेशानी हो तो तुरंत धो लें बालों की अच्छी ग्रोथ के लिए शरीर को भी पोषण चाहिए. प्रोटीन, आयरन, बायोटिन, विटामिन D और पर्याप्त नींद बहुत जरूरी है. तनाव कम करना और सही हेयर केयर रूटीन भी उतना ही अहम है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 30, 2026, 17:25 IST

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DJ की आवाज से मर गईं मुर्गियां…क्या इंसानों के लिए भी है खतरा? डॉक्टर के जवाब से चौंक जाएंगे

Loud Sound Effect on Humans: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में एक शादी में बजने वाले डीजे की तेज आवाज से 140 मुर्गियों के मरने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. पोल्ट्री फार्म संचालक साबिर अली ने तेज संगीत और शोर का आरोप लगाते हुए एफआईआर भी दर्ज करा दी है और कहा है कि शोर के कारण मुर्गियों को कार्डियक अरेस्ट हुआ और उनकी मौत हो गई. विशेषज्ञों की मानें तो तेज आवाज पक्षी सहन नहीं कर पाते और उनकी मौत हो सकती है. हालांकि मुर्गियों को लेकर हुई इस घटना के बाद एक सबसे बड़ा सवाल इंसानों की सेहत को लेकर भी पैदा हो गया है. लोगों के मन में ये सवाल आ रहा है कि जब भी बहुत तेज साउंड में डीजे बजता है तो एक धमक जैसी महसूस होती है और कभी-कभी लगता है कि दिल की धड़कन बढ़ गई है. यहां तक कि कुछ लोगों को तेज आवाज में बजते संगीत से उलझन भी होती है, तो क्या डीजे की तेज आवाज इंसानों के लिए भी खतरा है? और क्या डीजे की आवाज से इंसानों की भी जान जा सकती है? इन तमाम सवालों पर डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल नई दिल्ली के प्रोफेसर ईएनटी डॉ. सुधीर माझी ने विस्तार से जानकारी दी है. डॉ. माझी कहते हैं कि मानव शरीर पर तेज आवाज का कई तरह से असर होता है. सबसे पहला असर कानों पर पड़ता है और बहरापन होता है जो आमतौर पर सभी जानते हैं. इसके अलावा ईयर टेनाइटस भी होता है, जिसमें कानों में अजीब सी आवाज आती है, सीटी बजती है या भिनभिनाने की आवाज आती है. तीसरा जो सबसे गंभीर असर पड़ता है वह शरीर के अन्य अंगों पर पड़ता है. तेज आवाज से आर्टरीज सिकुड़ जाती हैं और ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है. ऐसे में बीपी बढ़ने से हार्ट अटैक या सडन कार्डियक अरेस्ट हो सकता है. डॉ. माझी कहते हैं कि तेज आवाज से हार्ट अटैक बहुत कॉमन नहीं है लेकिन अगर 120 डेसीबल से ज्यादा साउंड में रहा जाए तो ये संभावना मजबूत हो जाती है. डीजे में तो इससे भी ज्यादा डेसीबल होता है, जो नुकसान पहुंचा सकता है. हाई साउंड से तनाव भी बढ़ता है. अगर आप सामान्य साउंड से एकाएक डीजे की तेज साउंड में रह गए तो कान के अंदर की नर्व भी डैमेज हो जाती है और स्थाई रूप से बहरापन आ जाता है. कई बार इसे वापस ठीक कर पाना भी संभव नहीं होता. तेज आवाज का शरीर पर क्या असर पड़ता है?तेज आवाज शरीर पर गहरा असर डालती है. कानों से लेकर हार्ट और ब्रेन को भी तेज साउंड से नुकसान होता है. यहां तक कि ज्यादा देर तक हाई साउंड में रहने से जान भी जा सकती है. डीजे जब बजता है तो धड़कन क्यों बढ़ती है?यह स्ट्रैस की वजह से होता है. डीजे की तेज आवाज में आर्टरीज सिकुड़ती हैं, बीपी बहुत बढ़ जाता है. तनाव बढ़ता है और दिल की धड़कन बढ़ जाती है. अगर पहले से कोई हार्ट की बीमारी है तो उस स्थिति में डेथ भी हो सकती है. क्या ब्रेन हेमरेज भी हो सकता है?हां, हो सकता है. आर्टरीज पूरे शरीर में ब्लड की सप्लाई करती हैं और अगर ब्रेन की आर्टरी सिकुड़ जाती है तो ब्लीडिंग हो सकती है, ब्रेन स्ट्रोक या ब्रेन हेमरेज होना संभव है. क्या शरीर के अन्य अंगों पर भी असर पड़ता है?आर्टरी की वजह से सभी अंगों पर असर पड़ सकता है लेकिन ब्रेन और हार्ट में खासतौर पर असर पड़ सकता है और यह घातक हो सकता है. कितनी देर तक आवाज में रहना खतरनाक है?अगर दो-तीन घंटे का बहुत ज्यादा तेज साउंड का एक्सपोजर है तो यह हार्ट या ब्रेन को नुकसान पहुंचा सकता है. हार्ट का मरीज भी दो घंटे झेल सकता है?अगर कोई पहले से बीमार है और उसकी आर्टरी कमजोर हैं या हार्ट की बीमारी है तो ऐसा व्यक्ति हो सकता है कि तेज आवाज को पांच मिनट भी न सहन कर पाए और उसे कार्डियक अरेस्ट आ जाए.

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बेल से मिटेगा ब्रेस्ट कैंसर..! गर्मियों में मिलने वाला सुपरफूड, दवा बनाने में होगा उपयोग, वैज्ञानिकों का रिसर्च

पटना. देश में स्तन कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. बिहार भी इससे अछूता नहीं है. यह गंभीर बीमारी अब केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि पुरुषों को भी अपनी चपेट में ले रही है. इस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक लगातार नए शोध में जुटे हुए हैं, ताकि सटीक इलाज खोजा जा सके. इसी दिशा में पटना स्थित महावीर कैंसर संस्थान के वैज्ञानिकों ने एक अहम खोज की है. शोध के दौरान गर्मियों में सुपर ड्रिंक माने जाने वाले बेल के गूदे में ऐसे तत्व पाए गए हैं, जो स्तन कैंसर को रोकने में सहायक हो सकते हैं. चूहों पर इसका परीक्षण भी किया गया. इससे पॉजिटिव रिजल्ट सामने आए हैं. इस महत्वपूर्ण शोध में संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार की प्रमुख भूमिका रही है. चूहों पर किया गया शोधवरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उनके शोध में यह सामने आया है कि बेल के पल्प में ऐसे तत्व मौजूद हैं, जो कैंसररोधी प्रभाव रखते हैं. इस दावे की पुष्टि के लिए टीम ने चूहों पर प्रयोग किया. रिसर्च के दौरान चूहों को एक विशेष केमिकल दिया गया, जिससे करीब छह महीने में उनके स्तन में ट्यूमर विकसित हो गया. इसके बाद चूहों को मिश्रित मात्रा में बेल का पल्प दिया गया. कुछ समय बाद यह देखा गया कि ट्यूमर का आकार धीरे-धीरे सिकुड़ने लगा और कुछ दिनों बाद पूरी तरह समाप्त हो गया. इसके बाद चूहे पूरी तरह स्वस्थ हो गए. इस शोध के आधार पर वैज्ञानिकों का मानना है कि बेल में ऐसे तत्व मौजूद हो सकते हैं, जो कैंसर के इलाज में सहायक साबित हो सकते हैं. हालांकि, इस पर अभी और विस्तृत शोध और मानव परीक्षण की आवश्यकता है. पेटेंट करने की तैयारीउन्होंने आगे बताया कि अब उनकी टीम बेल के पल्प में मौजूद मॉलिक्यूल को अलग यानी आइसोलेट कर दोबारा चूहों पर परीक्षण करेगी. अगर इस चरण में भी पॉजिटिव परिणाम मिलते हैं, तो शोध को पेटेंट कराया जाएगा और प्रकाशित किया जाएगा. इसके बाद अगला चरण मानवों पर क्लीनिकल ट्रायल का होगा, ताकि इसके प्रभाव की विस्तृत जांच की जा सके. उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरे शोध में करीब तीन से चार साल का समय लगा है और प्रक्रिया अभी भी जारी है. इस महत्वपूर्ण अध्ययन को इंग्लैंड की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर जर्नल में भी प्रकाशित किया गया है. सस्ती हो जाएंगी दवाएंउन्होंने जानकारी दी कि शोध के अनुसार बेल के गूदे में कई प्रकार के फाइटोकेमिकल यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें कैरोटेनॉइड, फिनोलिक यौगिक, टैनिन, एल्कलॉइड, टरपेनॉइड, कूमरिन, स्टेरॉयड सैपोनिन, इनुलिन, कार्डियक ग्लाइकोसाइड्स और लिग्निन शामिल हैं. अध्ययन में पाया गया कि ये तत्व कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने में सहायक हो सकते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में कैंसर की दवाएं काफी महंगी हैं. कुछ दवाएं हजारों रुपये की होती हैं, जबकि कई की कीमत लाखों तक पहुंच जाती है. ऐसे में अगर इस शोध से प्रभावी मॉलिक्यूल विकसित हो जाता है, तो ब्रेस्ट कैंसर के इलाज की लागत कम हो सकती है और मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं.

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