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AIIMS Doctor Naval Kishore Vikram tips to protect heatwave | एम्स के डॉक्टर नवल किशोर ने बताए लू से बचने का तरीका

Last Updated:April 30, 2026, 13:48 IST AIIMS Doctor Suggestion on Heatwave: भीषण गर्मी का प्रकोप देश के अधिकांश हिस्सों में शुरू हो गया है. इस गर्मी में कमजोर लोगों को हीटवेव का खतरा दोगुना हो जाता है. इस गर्मी में अक्सर हम वही पुरानी गलतियां दोहराते हैं जो हमारे शरीर के कूलिंग सिस्टम को ठप कर सकती हैं. ऐसे में एम्स के बहुत बड़े डॉक्टर और प्रोफेसर डॉ. नवल किशोर विक्रम ने इस हीट इमरजेंसी से निपटने के लिए खास टिप्स दिए हैं. एम्स के प्रोफेसर डॉ. नवल विक्रम. AIIMS Doctor Suggestion on Heatwave: भीषण गर्मी को देखते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के बड़े डॉक्टर नवल किशोर विक्रम ने खास सलाह दी है. उन्होंने कहा कि इस तपिश भरी गर्मी से बचने के लिए लोगों को गलतियां नहीं दोहरानी चाहिए. इससे शरीर का कुदरती कूलिंग सिस्टम कमजोर हो सकता है और अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ सकती है. ऐसे में हर व्यक्ति को सतर्क रहने की जरूरत है. डॉ. नवल विक्रम ने कहा कि इस गर्मी में बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को खास ध्यान देना चाहिए. इन लोगों पर गर्मी का असर बहुत तेजी से हो सकता है. डॉ. नवल विक्रम ने इस भीषण गर्मी से बचने के लिए खान-पान पर भी बात की है. आइए इसके बारे में जानते हैं. डॉ. नवल विक्रम की सलाह 1. धूप से बचाव और पहनावा- डॉ. नवल विक्रम कहते हैं कि इस भीषण गर्मी में सबसे पहले गर्मी से बचना अपनी प्राथमिकता में रखें. जहां तक संभव हो धूप के सीधे संपर्क में आने से बचे. कोशिश करें कि दोपहर के समय जब सूरज की किरणें सबसे तीखी होती हैं, तब बाहर न निकलें. यदि बाहर जाना एकदम जरूरी हो तो पूरे शरीर को ढीले कपड़े से ढककर बाहर निकले. टाइट कपड़े न पहनें. सूती कपड़े पहनें क्योंकि ये पसीने को सोखने और शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं. 2. हाइड्रेशन – शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें. जैसे ही प्यास लगे तुरंत पानी पिएं. शरीर में पानी की कमी गर्मी की सबसे बड़ी समस्या है. डॉ. नवल विक्रम बताते हैं कि गर्मी में पसीने के जरिए शरीर का पानी और जरूरी सॉल्ट तेजी से बाहर निकल जाते हैं.इस स्थिति में प्यास लगने का इंतजार न करें. नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें. अगर आपको पसीना ज्यादा आता है तो जल्दी-जल्दी पानी पिए. शरीर को बेहतर तरीके से इलेक्ट्रोलाइट्स देना चाहिए. इसके लिए सिर्फ सादा पानी ही काफी नहीं है. नींबू पानी, शिकंजी, लस्सी, छाछ और आम पन्ना जैसे पारंपरिक पेय पदार्थों का भी सेवन करें. इससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बना रहता है. 3. हीट एक्सर्शन के लक्षणों को पहचानें-अगर आपको गर्मी लग रही है तो इसके लक्षणों को पहचानें. बीमारी गंभीर रूप ले, उससे पहले लक्षणों को पहचानना जरूरी है. डॉ. नवल विक्रम ने चेतावनी दी है कि यदि आपको गर्मी के दिनों में ज्यादा थकान, कमजोरी, सिर दर्द या चक्कर जैसी समस्याएं आ रही है या महसूस हो रही है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं. अगर मांसपेशियों में ऐंठन या दर्द हो तो व्यक्ति को तुरंत किसी ठंडी या छायादार जगह पर जाकर आराम करना चाहिए और ओआरएस या अन्य तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए. 4. बाहर काम करने वालों को सावधानी-कई लोगों को इतनी धूप में भी बाहर काम करना पड़ता है. ऐसे लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि खुले में कड़ी मेहनत करने वालों में हीट स्ट्रोक का खतरा सबसे अधिक होता है. ऐसे लोगों को धूप में काम के बीच-बीच में ब्रेक लेना चाहिए और खुद को हाइड्रेटेड रखने के लिए लगातार तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए. बीच-बीच में छांव में जाना चाहिए और नमक-चीनी और पानी वाला घोल का ज्यादा सेवन करना चाहिए. 5. क्या खाएं-गर्मी के मौसम में ऐसी चीजों का सेवन ज्यादा करना चाहिए जिसमें पानी की मात्रा ज्यादा हो. तरबूज, खीरा, ककड़ी आदि फलों का सेवन करें और हरी पत्तीदार सब्जियों को भोजन में ज्यादा शामिल करें. क्या न खाएंडॉ. नवल विक्रम कहते हैं कि गर्मी में अगर आप बाहर से खाने-पीने की खरीददारी करते हैं तो किसी भी हाल में अगर कोई भी खाद्य पदार्थ कटा हुआ है तो उसे न खरीदे. इससे इंफेक्शन का खतरा रहता है. हमेशा साबुत फल खरीदें और उन्हें घर पर अच्छी तरह धोकर ही खाएं. भोजन में अधिक नमक, तला-भुना और फैट वाली चीजों का सेवन कम करें, क्योंकि ये शरीर के तापमान और पाचन पर बुरा असर डालते हैं. जिन लोगों को डायबिटीज, हार्ट, किडनी या लिवर की बीमारी है उन्हें धूप में नहीं निकलना चाहिए. उन्हें घर के अंदर रहना चाहिए. इन लोगों को खान-पान में अपने डॉक्टरों की बात माननी चाहिए. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 30, 2026, 13:48 IST

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आम खाने का सही तरीका क्या है? जानिए गर्मियों में आम खाते समय किन बातों का रखें ध्यान, वरना बढ़ सकती है परेशानी!

होमफोटोलाइफ़फूड आम खाने का सही तरीका क्या है? गर्मियों में आम खाते समय किन बातों का रखें ध्यान Last Updated:April 30, 2026, 12:40 IST How to eat mango properly: आम गर्मियों का सबसे पसंदीदा फल है, लेकिन इसे सही तरीके से खाना जरूरी है. आम को खाने से पहले पानी में भिगोना चाहिए ताकि इसकी गर्मी कम हो जाए. इसे भारी खाने के तुरंत बाद नहीं खाना चाहिए, इससे पाचन खराब हो सकता है. दही, छाछ या पुदीना के साथ खाने से आम का असर संतुलित रहता है. ज्यादा आम खाने से बचें और हमेशा संतुलित मात्रा में ही सेवन करें. How to eat mango properly: जैसे ही गर्मी शुरू होती है, बाजार में चारों तरफ पीले, रसीले और मीठे आम नजर आने लगते हैं. आम सिर्फ एक फल नहीं बल्कि गर्मियों की पहचान बन जाता है. बच्चे हों या बड़े, हर किसी को आम का इंतजार रहता है. कोई इसे सीधे काटकर खाना पसंद करता है, तो कोई आम का शेक, आइसक्रीम या मिठाई बनाकर इसका मजा लेता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आम खाने का भी एक सही तरीका होता है. अगर इसे गलत तरीके से खाया जाए, तो यह शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है और पेट से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकता है. इसलिए जरूरी है कि आम का स्वाद लेने के साथ साथ उसके सही सेवन के तरीके को भी समझा जाए, ताकि आप बिना किसी परेशानी के इसका पूरा मजा उठा सकें. आम की तासीर और शरीर पर असर: आम की तासीर गर्म मानी जाती है. यही वजह है कि ज्यादा मात्रा में या गलत समय पर आम खाने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है. कई लोगों को आम खाने के बाद मुंह में छाले, पेट में जलन, एसिडिटी या त्वचा पर रिएक्शन भी हो सकता है. इसका मतलब यह नहीं है कि आम नुकसानदायक है, बल्कि इसका सही तरीके से सेवन करना जरूरी है. अगर आप कुछ आसान बातों का ध्यान रखें, तो आम से मिलने वाले फायदे आसानी से मिल सकते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google आम को खाने से पहले भिगोना क्यों जरूरी है: आम खाने का सबसे जरूरी और पारंपरिक तरीका है इसे पानी में भिगोना. बाजार से आम लाने के बाद उसे सीधे खाने की बजाय कम से कम 30 मिनट से लेकर 2 घंटे तक साफ पानी में भिगोकर रखना चाहिए. इससे आम की अतिरिक्त गर्मी कम हो जाती है. साथ ही आम की सतह पर लगे केमिकल या गंदगी भी साफ हो जाती है. भिगोने से आम ज्यादा सुरक्षित और पचने में आसान हो जाता है. आम खाने का सही समय और तरीका: आम खाने का सही समय भी बहुत मायने रखता है. इसे भारी खाने के तुरंत बाद नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इससे पाचन धीमा हो सकता है और पेट फूलने की समस्या हो सकती है. आम को मिड स्नैक या खाने के कुछ समय बाद खाना ज्यादा बेहतर होता है. इसके अलावा आम को दही, पुदीना या छाछ जैसे ठंडे पदार्थों के साथ खाने से इसकी गर्मी संतुलित हो जाती है और पाचन भी आसान हो जाता है. ज्यादा आम खाने से हो सकती है परेशानी: आम स्वाद में इतना अच्छा होता है कि लोग इसे ज्यादा मात्रा में खा लेते हैं, लेकिन यही गलती नुकसान पहुंचा सकती है. ज्यादा आम खाने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है और पेट खराब हो सकता है. इसलिए हमेशा संतुलन बनाए रखना जरूरी है. दिन में एक या दो आम खाना सही माना जाता है. सही आम कैसे पहचानें: आजकल बाजार में कई बार केमिकल से पकाए गए आम भी मिलते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. ऐसे में कोशिश करें कि प्राकृतिक तरीके से पके हुए आम ही खरीदें. आम को पानी में डालकर भी जांच सकते हैं, प्राकृतिक आम आमतौर पर पानी में डूब जाते हैं, जबकि केमिकल से पके आम ऊपर तैर सकते हैं. इसके अलावा बहुत ज्यादा चमकदार या एकदम पीले रंग के आम से भी थोड़ा सावधान रहना चाहिए. आम के साथ क्या खाएं और क्या नहीं: आम को दूध के साथ मिलाकर शेक बनाना ठीक है, लेकिन ज्यादा भारी और मसालेदार खाने के साथ आम खाना सही नहीं माना जाता. इससे पाचन पर असर पड़ सकता है. वहीं अगर आप आम को हल्के खाने या स्नैक के तौर पर लेते हैं, तो यह ज्यादा फायदेमंद होता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : April 30, 2026, 12:40 IST

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Skin Care Tips: गर्मियों में भी बरकरार रहेेगी चेहरे की चमक, अपनाएं ये घरेलू टिप्स, सब पूछेंगे दमकती त्वचा का राज

Last Updated:April 30, 2026, 11:50 IST Summer Skin Care Tips: गर्मियों में स्किन काफी खराब होने लगती है. तेज धूप और गर्म हवाओं का असर हमारे चेहरे पर साफ नजर आने लगता है. खासतौर पर जो लोग रोजाना घर से बाहर काम पर जाते हैं, उन्हें स्किन टैनिंग की समस्या ज्यादा झेलनी पड़ती है. ऐसे में लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स और क्रीम्स का सहारा लेते हैं, जो कई बार नुकसानदायक भी साबित हो सकते हैं. अगर आप चेहरे पर नैचुरल ग्‍लो देखना चाहते हैं या फिर चेहरे पर मौजूद दाग-धब्बों को दूर करना चाहते हैं तो कुछ घरेलू चीजों के नियमित इस्तेमाल कर सकते है. (सावन पाटिल/खंडवा) गर्मी का मौसम आते ही सूरज की किरणें त्वचा पर गहरा असर डालने लगती हैं और टैनिंग एक आम समस्या बन जाती है. ऐसे में चेहरे की देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है. ऐसे में लोग महंगे क्रीम और लोशन पर पैसा खर्च करते हैं, लेकिन उनका असर ज्यादा दिन नहीं टिकता. अगर आप भी नैचुरल ग्लो चाहते हैं, तो आपकी किचन में ही इसका आसान और सस्ता इलाज मौजूद है. कच्चा दूध स्किन के लिए एकदम नेचुरल क्लीनर की तरह काम करता है. इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड चेहरे की गंदगी को गहराई से साफ करता है. बस थोड़ा ठंडा दूध लें, उसमें रुई डुबोकर चेहरे पर लगाएं और हल्के हाथों से साफ करें. कुछ ही दिनों में फर्क दिखने लगेगा. धूप में रहने से अगर चेहरा काला पड़ गया है, तो टमाटर आपके काम का है. टमाटर के रस में थोड़ा बेसन और हल्दी मिलाकर फेस पैक बनाएं और 15-20 मिनट तक लगाएं. इससे टैनिंग कम होगी और स्किन में निखार आएगा. Add News18 as Preferred Source on Google शहद स्किन को सॉफ्ट और हाइड्रेट रखने में मदद करता है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण भी होते हैं, जो पिंपल्स को कम करने में काम आते हैं. चेहरे पर 10 मिनट तक शहद लगाकर धो लें आपको खुद फर्क महसूस होगा. गर्मियों में खीरा स्किन के लिए बेस्ट है. इसके स्लाइस आंखों पर रखें या रस चेहरे पर लगाएं. इससे स्किन को ठंडक मिलती है और डार्क सर्कल भी धीरे-धीरे कम होने लगते हैं. हल्दी और मलाई का कॉम्बिनेशन तो पुराने समय से ही फेमस है. एक चम्मच मलाई में चुटकीभर हल्दी मिलाकर चेहरे पर लगाएं. इससे स्किन को पोषण मिलेगा और नैचुरल ग्लो भी आएगा. बेसन और दही दोनों ही स्किन के लिए काफी बेनेफिशियल हैं और त्वचा को निखारने में मदद करते हैं. आप इस फेस पैक को चेहरे के अलावा हाथों पर भी लगा सकते हैं. ग्लोइंग स्किन देने वाले इस पेस पैक को बनाने के लिए 5 चम्मच बेसन, 3 चम्मच दही और 1 चम्मच शङद मिलाकर पेस्ट बना लें और इसे चेहरे पर लगाएं. ये सारे नुस्खे पूरी तरह नैचुरल हैं, लेकिन इन्हें नियमित रूप से इस्तेमाल करना जरूरी है. साथ ही, किसी भी चीज को लगाने से पहले एक छोटा पैच टेस्ट जरूर कर लें, ताकि आपकी स्किन पर कोई रिएक्शन न हो. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : April 30, 2026, 11:50 IST

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गर्मियों में करते हैं वर्कआउट, तो भूलकर भी न पहनें इस फैब्रिक के जिम वियर, जानें कौन सा कपड़ा है बेस्ट

  Mens gym wear in summer: गर्मी हो या सर्दी, जो लोग जिम जाकर वर्कआउट रेगलुर करते हैं, वे हर दिन जिम जाना पसंद करते हैं. फिर चाहे कितनी भी भीषण गर्मी क्यों न पड़ रही हो. इनके लिए अपनी फिटनेस सबसे बढ़कर होती है. लेकिन, वर्कआउट करते समय एक बात सबसे ज्यादा परेशान करती है पसीने से गीले कपड़े जो शरीर से बार-बार चिपक जाते हैं. यह काफी इर्रिटेट करता है. ऐसे में जिम में भी सही फैब्रिक के कपड़ों का चुनाव करना जरूरी है, ताकि पसीना एब्जॉर्ब हो जाए. गर्मी में पुरुषों के लिए जिम में घंटों वर्कआउट करने के लिए अंडरवियर और फिटनेस वियर का फैब्रिक कैसा होना चाहिए, ताकि पसीने से ये गीले ना हों, तो इस वीडियो में आप सही जानकारी पा सकते हैं. यूट्यूब चैनल Health & Beauty with Arun पर शेयर किए गए इस वीडियो में ये बताया गया है कि गर्मी में अंडरवियर और फिटनेस वियर का फैब्रिक कैसा हो, ताकि आप कंफर्टेबल महसूस करें और स्किन की सेहत भी अच्छी बनी रहे. गलत फैब्रिक के फिटनेस वियर पहनने से पसीना तो अधिक आएगा ही, साथ ही खुजली, बदबू, फंगल इंफेक्शन आदि समस्याएं भी बढ़ सकती हैं. जानिए सही फैब्रिक का चुनाव करके पुरुष वर्कआउट के दौरान स्किन की सेहत और हाइजीन का ध्यान कैसे रखें. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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बार-बार प्यास और थकान? जौ का पानी दे सकता है राहत, एनर्जी, ठंडक और पाचन के लिए परफेक्ट ड्रिंक

Summer Hydration Drink: गर्मी जब अपने पूरे तेवर में होती है, तब सिर्फ ठंडा पी लेना काफी नहीं होता-शरीर को ऐसा पेय चाहिए जो अंदर से ठंडक दे और लंबे समय तक हाइड्रेशन बनाए रखे. ऐसे में जौ का पानी एक पुराना लेकिन बेहद काम का ऑप्शन बनकर सामने आता है. यह न तो भारी लगता है, न ही इसमें ज्यादा झंझट है. गांवों से लेकर शहरों तक, लोग इसे अलग-अलग तरीकों से पीते रहे हैं. दिलचस्प बात ये है कि भी हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे एक स्मार्ट समर ड्रिंक मान रहे हैं, अगर आप बार-बार पानी पीकर भी थकान या सुस्ती महसूस करते हैं, तो जौ का पानी आपकी रूटीन में एक छोटा लेकिन असरदार बदलाव ला सकता है. जौ का पानी क्यों है खास?जौ के दानों से बना यह हल्का पेय देखने में सादा लगता है, लेकिन इसके अंदर छिपे फायदे इसे खास बनाते हैं. इसमें मौजूद फाइबर, खासकर बीटा-ग्लूकन, शरीर को धीरे-धीरे हाइड्रेट करता है. यानी आप सिर्फ प्यास नहीं बुझाते, बल्कि शरीर को लंबे समय तक संतुलित रखते हैं. शरीर को ठंडा रखने में मददगर्मी में शरीर जल्दी गर्म हो जाता है. जौ का पानी प्राकृतिक तरीके से बॉडी टेम्परेचर को कंट्रोल करने में मदद करता है. यही वजह है कि पुराने समय में भी इसे लू से बचाव के लिए पिया जाता था. पाचन के लिए हल्का और आरामदायकगर्मी में अक्सर भूख कम लगती है और पेट भारी-भारी सा लगता है. ऐसे में जौ का पानी पाचन को सहज बनाता है. यह पेट पर बोझ नहीं डालता, बल्कि हल्का महसूस कराता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. एनर्जी लेवल रहता है स्थिरअगर आप दोपहर में थकान या सुस्ती महसूस करते हैं, तो इसका एक कारण ब्लड शुगर का अचानक गिरना भी हो सकता है. जौ का पानी इस उतार-चढ़ाव को थोड़ा संतुलित रखने में मदद करता है. दिनभर में कैसे शामिल करें जौ का पानी?1. मिड-मॉर्निंग रिफ्रेश ड्रिंकसुबह 11 बजे के आसपास जब शरीर डिहाइड्रेट होने लगता है, तब एक गिलास ठंडा जौ का पानी बहुत काम आता है. इसमें थोड़ा नींबू और चुटकीभर नमक मिलाने से यह एक नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक बन जाता है. 2. लंच के बाद हल्का सपोर्टदोपहर का खाना खाने के बाद अगर भारीपन लगता है, तो थोड़ा-सा जौ का पानी पुदीने के साथ पी सकते हैं. यह पाचन को स्मूद बनाता है और पेट को आराम देता है. 3. दोपहर की थकान का हलजब 3-4 बजे के बीच मीठा या कोल्ड ड्रिंक पीने का मन करता है, तब जौ का पानी बेहतर विकल्प हो सकता है. इसमें भुना जीरा और काला नमक डालकर पीने से स्वाद भी बढ़ जाता है और शरीर को फायदा भी मिलता है. 4. शाम का हल्का कूलरशाम को जब थोड़ी ठंडक चाहिए होती है, तब जौ का पानी हल्का ठंडा करके पीना सही रहता है. बहुत ज्यादा ठंडा करने की जरूरत नहीं-नॉर्मल ठंडा ही ज्यादा फायदेमंद होता है. 5. बाहर जाने से पहलेअगर आपको धूप में निकलना है, तो पहले से एक गिलास जौ का पानी पी लें. यह शरीर को अंदर से तैयार करता है और जल्दी डिहाइड्रेशन नहीं होने देता. घर पर ऐसे बनाएं जौ का पानीजौ का पानी बनाना मुश्किल नहीं है, बस थोड़ा समय चाहिए. -सबसे पहले 2 चम्मच जौ के दानों को अच्छे से धो लें ताकि धूल-मिट्टी निकल जाए. फिर एक पैन में 3 कप पानी डालकर उसमें जौ डालें और उबालें. जब पानी हल्का सफेद और थोड़ा गाढ़ा दिखने लगे, तब गैस धीमी करके 20-25 मिनट तक पकाएं. -अब गैस बंद करके इसे ठंडा होने दें और छानकर अलग कर लें. आप चाहें तो इसमें नींबू का रस, थोड़ा नमक या हल्का-सा गुड़ मिलाकर स्वाद के अनुसार तैयार कर सकते हैं. छोटी-छोटी आदत, बड़ा असरजौ का पानी कोई जादुई पेय नहीं है, लेकिन इसे रोजमर्रा की आदत में शामिल करने से फर्क जरूर महसूस होता है. खासकर जब लोग हेल्दी और नेचुरल ऑप्शन की तरफ लौट रहे हैं, तब यह ड्रिंक एक सिंपल लेकिन असरदार चॉइस बन गया है. अगर आप भी गर्मी में बार-बार थकान, प्यास या सुस्ती से परेशान रहते हैं, तो जौ का पानी आपकी रूटीन में एक स्मार्ट एडिशन हो सकता है-बिना ज्यादा खर्च और बिना किसी साइड इफेक्ट के. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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जब नहीं थे AC-कूलर…तब खुद को ऐसे ठंडा रखते थे राजा-महाराजा, गर्मी से बचने का शाही नुस्खा

Last Updated:April 30, 2026, 06:54 IST Khandwa News: डॉक्टर अनिल पटेल ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि इन तीनों चीजों का सेवन करने का पारंपरिक तरीका बहुत आसान है. रात में एक गिलास पानी में गोंद कतिरा, बावची और धागे वाली मिश्री को भिगो दें. सुबह खाली पेट इसका सेवन करें. इससे शरीर को ठंडक मिलेगी और दिनभर ऊर्जा बनी रहेगी. खंडवा. गर्मियों का मौसम तेजी से बढ़ रहा है और तापमान कई जगहों पर 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है. ऐसे में शरीर को ठंडक और ऊर्जा बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है. आज भले ही लोग एसी, कूलर और कोल्ड ड्रिंक का सहारा लेते हैं लेकिन पुराने समय में राजा-महाराजा प्राकृतिक और आयुर्वेदिक नुस्खों से ही खुद को ठंडा और स्वस्थ रखते थे. पारंपरिक आयुर्वेदिक उपायों में गोंद कतिरा, बावची और धागे वाली मिश्री का खास महत्व रहा है. ये नुस्खे सदियों से शरीर को ठंडक देने, हाइड्रेट रखने और इम्युनिटी मजबूत करने के लिए इस्तेमाल होते आ रहे हैं. आज भी ये देसी उपाय गर्मी से राहत देने में बेहद कारगर माने जाते हैं. गोंद कतिरा गर्मियों में एक प्राकृतिक कूलेंट की तरह काम करता है. यह पेड़ों से निकलने वाला गोंद होता है, जो पानी में भिगोने पर फूलकर जेली जैसा बन जाता है. इसका सेवन शरीर को अंदर से ठंडक देता है और लू, डिहाइड्रेशन और अधिक पसीने से होने वाली कमजोरी से बचाव में मदद करता है. साथ ही यह त्वचा को नमी प्रदान करता है, जिससे गर्मियों में होने वाली जलन, रूखापन और घमौरियों की समस्या कम हो सकती है. वहीं बावची को आयुर्वेद में एक शक्तिशाली औषधि माना गया है. इसके बीजों में एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लामेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने और पाचन तंत्र को मजबूत करने में सहायक होते हैं. नियमित और संतुलित मात्रा में इसका सेवन शरीर को ताकत देता है और गर्मी से होने वाली थकान को कम करता है. धागे वाली मिश्री भी इस पारंपरिक नुस्खे का अहम हिस्सा है. यह सामान्य चीनी की तुलना में कम प्रोसेस्ड होती है और शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करती है. इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर की कमजोरी दूर करने और हल्की ठंडक बनाए रखने में मदद करते हैं. सेवन का आसान पारंपरिक तरीकाखंडवा निवासी डॉक्टर अनिल पटेल ने लोकल 18 से कहा कि इन तीनों चीजों का सेवन करने का पारंपरिक तरीका बेहद आसान है. रात में एक गिलास पानी में गोंद कतिरा, बावची और धागे वाली मिश्री को भिगो दिया जाता है. सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है और दिनभर ऊर्जा बनी रहती है. इसे एक तरह का प्राकृतिक टॉनिक भी माना जाता है, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है. गर्मियों में इस तरह के प्राकृतिक और संतुलित नुस्खे अपनाने से शरीर को बिना किसी साइड इफेक्ट के राहत मिलती है. हालांकि किसी भी चीज का सेवन सीमित मात्रा में और सही सलाह के साथ ही करना चाहिए. शाही और पारंपरिक नुस्खे आज भी उतने ही असरदार हैं, जितने सदियों पहले थे. अगर आप भी गर्मी से बचना चाहते हैं, तो इन प्राकृतिक उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं और बिना एसी के भी ठंडक का अहसास पा सकते हैं. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Khandwa,Madhya Pradesh First Published : April 30, 2026, 06:54 IST

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500 रुपये किलो बिक रहा झारखंड का ये फूल, जोड़ों के दर्द और डायबिटीज का है रामबाण, यहां साग बनाकर खा रहे हैं लोग

Last Updated:April 30, 2026, 06:31 IST Koderma Korea Phool: झारखंड में कोडरमा के जंगलों में कोरिया फूल बड़ी मात्रा में पाया जाता है. यहां के ग्रामीण इसे साग सब्जी की तरह खाते हैं. इसकी इस समय बाजार में कीमत करीब 500 रुपये किलो है. बता दें कि जोड़ों के दर्द और डायबिटीज के मरीजों के लिए यह रामबाण है. ख़बरें फटाफट कोडरमा: झारखंड का जंगल केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि औषधीय और पोषक वन संपदाओं के लिए भी खास पहचान रखता है. इन्हीं में एक है कोरिया फूल, जो इन दिनों कोडरमा के जंगलों में खूब नजर आ रहा है. सालभर में केवल कुछ महीने मिलने वाला यह सफेद और खुशबूदार फूल स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है. ग्रामीण इसे जंगलों से तोड़कर साग और सब्जी के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. पौष्टिकता और औषधीय गुणों से भरपूर इस फूल की मांग बाजार में भी बढ़ रही है. आइये जानते हैं इस फूल के बारे में. जानें इस फूल की खासियत कोडरमा के स्थानीय लोगों के अनुसार कोरिया फूल स्वादिष्ट होने के साथ शरीर के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है. इसके फूलों से साग, सब्जी और कई पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं. कोरिया का पौधा आमतौर पर 8 से 10 फीट तक ऊंचा होता है. इसका तना खुरदुरा होता है. जबकि पत्तियां नुकीली और मुलायम होती हैं. इस पौधे पर खिलने वाले सफेद रंग के फूल बेहद आकर्षक और सुगंधित होते हैं. जोड़ों की दर्द और डायबिटीज में देता है राहत बता दें कि यह फूल सीमित समय के लिए उपलब्ध होता है. इसलिए इसकी विशेष अहमियत है. जंगलों तक पहुंच रखने वाले लोग ही इसे आसानी से प्राप्त कर पाते हैं. यही वजह है कि बाजार में पहुंचने पर इसकी कीमत 500 रुपये प्रति किलो तक हो जाती है. कृषि विज्ञान केंद्र कोडरमा के वरीय कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए.के. राय ने बताया कि कोरिया फूल न सिर्फ पौष्टिक है. बल्कि इसमें कई औषधीय गुण भी मौजूद हैं. उन्होंने बताया कि इसका सेवन जोड़ों के दर्द और डायबिटीज में भी राहत देने वाला माना जाता है. बरसात में लगा सकते हैं इसका पौधा उन्होंने कहा कि यह जंगली पौधा होने के कारण इसकी देखभाल भी ज्यादा नहीं करनी पड़ती. लोग चाहें तो अपने खेत की मेड़, बागान या खाली जमीन पर इसकी खेती कर सकते हैं. बरसात के मौसम में जंगल या नर्सरी से पौधा मंगाकर इसे आसानी से लगाया जा सकता है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kodarma,Jharkhand First Published : April 30, 2026, 06:31 IST

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Mumbai Watermelon Death Mystery; Summer Food Poisoning Symptoms Health Risks Explained

Mumbai Watermelon Death Mystery; Summer Food Poisoning Symptoms Health Risks Explained

Hindi News Lifestyle Mumbai Watermelon Death Mystery; Summer Food Poisoning Symptoms Health Risks Explained 17 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक 25 अप्रैल को मुंबई में एक परिवार के चार लोगों की डायरिया और उल्टी के कारण मौत हो गई। पूरे परिवार ने डिनर के बाद देर रात तरबूज खाया था। अटॉप्सी रिपोर्ट में फूड पॉइजनिंग की पुष्टि हुई है। एक हफ्ते पहले, गुजरात के दाहोद में एक शादी समारोह में खाने के बाद 400 से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए। इन्हें उल्टी- दस्त होने लगे। कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। ‘अमेरिकन सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ (CDC) के अनुसार, गर्मियों में फूड पॉइजनिंग के मामले ज्यादा सामने आते हैं। इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि- गर्मियों में फूड पॉइजनिंग क्यों होती है? क्या यह संक्रामक भी हो सकती है? इसके लक्षण क्या हैं? एक्सपर्ट: डॉ. अली शेर, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- फूड पॉइजनिंग क्या होती है? जवाब- यह खराब या संक्रमित भोजन से होने वाली बीमारी है। इसमें उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बुखार जैसे लक्षण दिखते हैं। सवाल- फूड पॉइजनिंग क्यों होती है? जवाब- फूड पॉइजनिंग की मुख्य वजह खराब या दूषित भोजन है। गर्मियों में भोजन में जर्म्स या टॉक्सिन्स जल्दी पैदा हो जाते हैं। यह खराब फूड हैंडलिंग और हाइजीन की कमी के कारण होता है। अधपका या बासी खाना खाने से बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं। गंदे हाथ, बर्तन या किचन से खाना दूषित हो सकता है। कच्चे और पके भोजन को साथ रखने (क्रॉस-कंटैमिनेशन) से जर्म्स फैलते हैं। दूषित पानी या खुला स्ट्रीट फूड भी वजह है। आमतौर पर फूड पॉइजनिंग इन कीटाणुओं के कारण होती है– बैक्टीरिया साल्मोनेला (Salmonella) ई. कोलाई (E. coli) वायरस नोरोवायरस (Norovirus) हेपेटाइटिस A पैरासाइट जियार्डिया (Giardia) क्रिप्टोस्पोरिडियम (Cryptosporidium) टॉक्सिन्स स्टैफिलोकोकस ऑरियस (Staphylococcus aureus) क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम (Clostridium botulinum) सवाल- गर्मी के मौसम में फूड पॉइजनिंग के केस क्यों बढ़ जाते हैं? जवाब- गर्मी के मौसम में तापमान और नमी (ह्यूमिडिटी) बढ़ जाती है, जो बैक्टीरिया पनपने और बढ़ने के लिए एकदम अनुकूल है। 4°C से 60°C के बीच का तापमान ‘डेंजर जोन’ होता है, जिसमें जर्म्स तेजी से बढ़ते हैं। इस दौरान साल्मोनेला, ई. कोलाई और स्टैफिलोकोकस जैसे बैक्टीरिया जल्दी फैलते हैं। इससे गर्मियों में खाना जल्दी खराब हो जाता है। यही कारण है कि इस मौसम में फूड पॉइजनिंग के मामले ज्यादा आते हैं। सवाल- क्या फूड पॉइजनिंग संक्रामक भी हो सकती है? जवाब- फूड पॉइजनिंग सीधे तौर पर संक्रामक बीमारी नहीं है। अगर इसकी वजह टॉक्सिन्स हैं, तो ये एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता। अगर कारण बैक्टीरिया या वायरस हैं तो ये फैल सकते हैं। गंदे हाथ, संक्रमित भोजन या पानी से बैक्टीरिया दूसरों के शरीर में भी जा सकते हैं। खासकर नोरोवायरस जैसे वायरस तेजी से फैल सकते हैं। इसलिए साफ-सफाई रखना और हाथ धोना जरूरी है। सवाल- फूड पॉइजनिंग और फूड इन्फेक्शन में क्या फर्क है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझते हैं- फूड पॉइजनिंग भोजन में पनपे टॉक्सिन शरीर में जाकर इन्फेक्शन पैदा करते हैं। टॉक्सिन सीधे पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं। आमतौर पर कुछ घंटों के भीतर ही लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इसके मुख्य लक्षण उल्टी, मतली, पेट दर्द और दस्त हैं। फूड इन्फेक्शन भोजन के साथ जीवित बैक्टीरिया, वायरस शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। ये जर्म्स शरीर के अंदर बढ़ते हैं और संक्रमण पैदा करते हैं। आमतौर पर 12-48 घंटे या उससे अधिक समय बाद लक्षण दिखाई देते हैं। इसके मुख्य लक्षण दस्त, पेट दर्द, बुखार और कमजोरी है। सवाल- फूड पॉइजनिंग के लक्षण क्या होते हैं? जवाब- फूड पॉइजनिंग होने पर पाचन तंत्र से जुड़े लक्षण दिखते हैं। ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या खाने से फूड पॉइजनिंग का रिस्क सबसे ज्यादा होता है? जवाब- कुछ फूड्स में बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं। इसलिए इनसे फूड पॉइजनिंग का रिस्क ज्यादा होता है। नीचे पॉइंटर्स में देखिए– कच्चे या अधपके मांस और अंडे में बैक्टीरिया हो सकते हैं। अनपॉश्चराइज्ड दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स से भी जोखिम होता है। कटे हुए फल-सब्जियां और स्ट्रीट फूड जल्दी दूषित हो सकते हैं। बासी या लंबे समय तक बाहर रखा खाना भी खतरनाक होता है। दूषित पानी और बर्फ भी बड़ी वजह हैं। ग्राफिक में सभी फूड्स की लिस्ट देखिए- सवाल- अगर फूड पॉइजनिंग हो जाए तो सबसे पहले क्या घरेलू उपाय करने चाहिए? जवाब- फूड पॉइजनिंग होने पर शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। इसलिए बॉडी को हाइड्रेटेड रखना जरूरी है। साथ ही डाइजेशन को आराम देने वाली चीजें खाएं। सभी उपाय ग्राफिक में देखिए- सवाल- फूड पॉइजनिंग होने पर क्या खाएं और क्या बिल्कुल न खाएं? जवाब- फूड पॉइजनिंग के दौरान ऐसी चीजें खानी चाहिए, जो पेट पर ज्यादा दबाव न डालें और आसानी से पच जाएं। ग्राफिक में देखते हैं, क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए- सवाल- फूड पॉइजनिंग से बचाव के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? जवाब- थोड़ी सी सावधानी और हाइजीन अपनाकर इससे आसानी से बचा जा सकता है। ग्राफिक्स में देखिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए- सवाल– क्या फूड पॉइजनिंग जानलेवा भी हो सकती है? जवाब- ज्यादातर मामलों में फूड पॉइजनिंग कुछ घंटों या कुछ दिनों में ठीक हो जाती है। हालांकि संक्रमण गंभीर होने पर यह खतरनाक भी हो सकती है। सवाल– फूड पॉइजनिंग होने पर कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है? जवाब- अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें या ज्यादा गंभीर हो जाएं, तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए। पॉइंटर्स से समझते हैं कौन से लक्षण गंभीर हो सकते हैं- लगातार उल्टी या दस्त। तेज बुखार। चक्कर, कमजोरी और मुंह सूखना। मल में खून आना। छोटे बच्चे, बुजुर्ग या गर्भवती महिला में लक्षण गंभीर होने का इंतजार न करें, उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाएं। …………………… ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- फर्मेंटेड फूड खाने से बच्ची की मौत:गर्मियों में ओवर फर्मेंटेशन से इन हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क, बरतें 5 सावधानियां ओडिशा के मयूरभंज जिले के एक सरकारी स्कूल में फर्मेंटेड चावल खाने के बाद एक 12 साल की बच्ची की मौत हो गई। वहीं 150 से ज्यादा बच्चे बीमार पड़ गए। बच्चों ने पखाला भात (फर्मेंटेड चावल), आलू भरता और आम की चटनी खाई थी। पूरी खबर पढ़ें…

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Adopted Child Challenges; How To Tell Truth

Adopted Child Challenges; How To Tell Truth

41 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सवाल- मैं हरियाणा से हूं। हमने कुछ साल पहले एक बेटी को गोद लिया था। मैं उससे बहुत प्यार करती हूं। बेटी अब 9 साल की हो चुकी है। कुछ दिनों पहले पड़ोस के कुछ बच्चों ने मजाक-मजाक में उसे बताया कि वह एडॉप्टेड (गोद ली हुई) है, उसके असली पेरेंट्स कोई और है। इसके बाद से बच्ची ने कई बार मुझसे पूछा कि वह हमारे पास कैसे आई और उसके असली माता-पिता कौन हैं। हम अक्सर उसके सवालों को टाल देते हैं। हालांकि हम उसे सच बताना चाहते हैं, लेकिन डर है कि कहीं ये सब सुनकर वह परेशान न हो जाए। इसका सही समय और तरीका क्या है? एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। यह सवाल बहुत से एडोप्टिव पेरेंट्स के मन में आता है। सबसे पहले यह समझें कि आपने जिस बच्ची को अपनाया है, उसके प्रति आपका प्यार और जिम्मेदारी ही असली पेरेंटिंग है। इसलिए खुद को दोषी महसूस न करें। ये बात परेशान करने वाली है कि बच्ची को आपकी बजाय दोस्तों से यह बात सुनने को मिली है। ऐसे में जरूरी है कि विषय को टालने या छिपाने की बजाय शांत, सच्चे और संवेदनशील तरीके से उससे बात करें। साइकोलॉजी के मुताबिक, एडॉप्टेड चाइल्ड को उसके जीवन की सच्चाई बताना जरूरी है, लेकिन यह उम्र, समझ और भावनात्मक तैयारी के अनुसार होना चाहिए। सच बताने का उद्देश्य बच्चे को झटका देना नहीं, बल्कि उसके भीतर विश्वास और सुरक्षा की भावना बनाए रखना होना चाहिए। गोद लिए बच्चे को सच बताना क्यों जरूरी? ज्यादातर पेरेंट्स सोचते हैं कि एडॉप्टेड चाइल्ड को सच नहीं बताने से वह इमोशनली ज्यादा सेफ महसूस करेगा। बतौर साइकोलॉजिस्ट मेरा मानना है कि सच छिपाने की बजाय धीरे-धीरे और सही तरीके से बच्चे को इस बारे में बताना बेहतर है। अगर बच्चे को यह बात किसी दूसरे से पता चलती है तो उसे शॉक लग सकता है कि माता-पिता ने उससे ये सच छिपाया। इससे उसके मन में भ्रम या अविश्वास भी पैदा हो सकता है। इसलिए बेहतर यही है कि पेरेंट्स ही बच्चे को उसकी कहानी प्यार और अपनत्व के साथ समझाएं। बच्चे को सच से रूबरू कराना कई कारणों से जरूरी है। एडॉप्टेड चाइल्ड को सच बताने का सही समय क्या है? साइकोलॉजी के अनुसार, बच्चे को उसके एडॉप्शन के बारे में बताने के लिए कोई ‘परफेक्ट उम्र’ तय नहीं है। 7 से 10 साल की उम्र में बच्चे धीरे-धीरे रिश्तों और परिवार को समझने लगते हैं। आपकी बेटी 9 साल की है और उसने खुद यह सवाल पूछा है। इसका मतलब है कि वह इस विषय में जानने के लिए तैयार है। इस स्थिति में सच छिपाने की कोशिश करना या विषय बदल देना उसके मन में और ज्यादा सवाल पैदा कर सकता है। गोद लिए बच्चे को सच कैसे बताएं? गोद लिए बच्चे को सच बताना एक संवेदनशील प्रक्रिया है। इसमें शब्दों का चुनाव और तरीका दोनों बहुत मायने रखते हैं। इसके लिए सरल और उम्र के अनुसार शब्दों का इस्तेमाल करें। अगर बात आसान होगी, तो बच्चा उसे बिना डर या भ्रम के स्वीकार कर पाएगा। आप उसे इस तरह समझा सकते हैं कि “हर परिवार बनने का तरीका अलग होता है। कुछ बच्चों का जन्म उनके माता-पिता के घर होता है, जबकि कुछ बच्चों को उनके माता-पिता दिल से चुनकर अपने परिवार में लाते हैं।” इसके अलावा कुछ और बातों का खास ख्याल रखें। पेरेंट्स बच्चे की प्रतिक्रिया से निपटने को तैयार रहें जब बच्चे को पता चलता है कि उसे गोद लिया गया है, तो वे भावनात्मक रूप से आहत हो सकते हैं। वे कुछ दिनों तक नाराज रह सकते हैं, बातें करना कम सकते हैं या अपने कमरे में अकेले रहने लगते हैं। कई बार बच्चे के मन में यह भावना भी आ सकती है कि- “क्या मुझे बचपन में छोड़ दिया गया था?” “क्या मेरे असली माता-पिता ने मुझे स्वीकार नहीं किया?” ऐसी स्थिति में बच्चे के मन में रिजेक्शन (अस्वीकार किए जाने) की भावना पैदा हो सकती है। इसलिए पेरेंट्स को पहले से मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए कि शुरुआत में बच्चे की प्रतिक्रिया थोड़ी कठिन हो सकती है। इस समय बच्चे की भावनाओं को समझना और धैर्य बनाए रखना जरूरी है। बच्चे को समय दें और बार-बार भरोसा दिलाएं कि वह उनके जीवन में बेहद महत्वपूर्ण है। यही भरोसा धीरे-धीरे उसके मन की उलझन और असुरक्षा को कम करने में मदद करता है। एडॉप्टेड चाइल्ड को कैसे सेफ महसूस कराएं? इस समय बच्चे को इमोशनल सपोर्ट की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। उसे महसूस कराएं कि वह आपके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। बच्चे को यह समझाएं कि परिवार केवल जन्म से नहीं, बल्कि प्यार, केयर और सपोर्ट से बनता है। बच्चे की डेली रूटीन मेन्टेन बनाए रखें, ताकि स्कूल, खेल, दोस्तों और परिवार के साथ उसका जुड़ाव पहले की तरह बना रहे। उसे इमोशनल सपोर्ट देने के लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें- पेरेंट्स किन गलतियों से बचें? बातचीत के दौरान पेरेंट्स अक्सर बच्चे के सवालों को टाल देते हैं, लेकिन इससे उसकी भावनाएं दब जाती हैं। इसलिए पेरेंट्स को कुछ बातों से बचना चाहिए- सच छिपाने या बात टालने की कोशिश न करें। बच्चे के सवालों को नजरअंदाज न करें। बहुत ज्यादा डर या तनाव न व्यक्त करें। बच्चे की तुलना किसी दूसरे से न करें। एडॉप्शन को ‘फेवर’ की तरह पेश न करें। जबरदस्ती जल्दी एडजस्ट होने की उम्मीद न रखें। भावनाओं को गलत या ‘ओवररिएक्शन’ न कहें। अंत में यही कहूंगी कि एडॉप्टेड बच्चे को प्यार, सुरक्षा और भरोसा देना जरूरी है। आपकी बेटी ने सवाल पूछा इसका मतलब है कि वह आप पर भरोसा करती है। यही भरोसा बनाए रखना महत्वपूर्ण है। याद रखें, सच्चाई और भरोसे के साथ बनाया गया रिश्ता मजबूत होता है। ……………… ये खबर भी पढ़िए पेरेंटिंग- मैं सिंगल मदर हूं: पति मारता था, इसलिए छोड़ दिया, अब बेटा अपने पापा के बारे में सवाल पूछता है, उसे कैसे समझाऊं आपने कठिन परिस्थिति में अपने और बच्चे के लिए सुरक्षित जीवन चुना, यह साहस की बात है। किसी भी अब्यूसिव

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Shant Man Safal Jeevan Book Review; Calm Your Emotions

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1 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक किताब- शांत मन, सफल जीवन (बेस्टसेलर किताब ‘काम योर इमोशंस’ का हिंदी अनुवाद) लेखक- निक ट्रेंटन अनुवाद- डॉ. रोहिणी प्रकाशक- पेंगुइन मूल्य- 299 रुपए अमेरिकी लेखक निक ट्रेंटन की किताब ‘शांत मन सफल जीवन’ भावनाओं को समझने, उन्हें नियंत्रित करने और जीवन में बैलेंस लाने पर केंद्रित है। यह किताब बताती है कि भावनाएं हमारी दुश्मन नहीं हैं। इन्हें समझकर हम मानसिक शांति और मजबूती पा सकते हैं। बिहेवियरल साइकोलॉजी में मास्टर निक ट्रेंटन एक मशहूर एक्सपर्ट हैं। वे जटिल भावनाओं को बहुत आसान भाषा में समझाते हैं ताकि हर व्यक्ति इन्हें अपनी लाइफ में लागू कर सके। किताब क्या कहती है? मुश्किलें हर किसी के जीवन में आती हैं, लेकिन हार माननी है या दोबारा उठना है, यह चुनाव हमारा होता है। किताब ‘शांत मन, सफल जीवन’ आपकी तकलीफों को समझती है और आपको अपनी जिंदगी पर पूरा कंट्रोल पाने में मदद करती है। यह किताब हमारे इमोशनल ट्रिगर्स और गलत फैसलों के पीछे की वजहों को पहचानने में मदद करती है। खास बात यह है कि लेखक ‘शांति से सोचो’ जैसी किताबी बातें नहीं करते। वह साइकोलॉजी, बिहेवियर साइंस और बौद्ध दर्शन पर आधारित असली टूल्स देते हैं। ये किताब क्यों है इतनी खास? अक्सर गुस्सा, चिंता या उदासी हम पर हावी हो जाती है। हम बिना सोचे रिएक्ट करते हैं और बाद में पछताते हैं। निक ट्रेंटन के अनुसार, भावनाएं हर मिनट बदलती हैं। अगर हम इन्हें मैनेज करना सीख लें, तो हमारी मेंटल हेल्थ, रिश्ते और फैसले बेहतर होंगे। किताब में दी गई 23 प्रैक्टिकल टेक्नीक्स तनाव घटाने और ओवरथिंकिंग रोकने में मददगार हैं। ग्राफिक में किताब से मिले 8 बड़े सबक देखिए- अब इन सबको थोड़ा विस्तार से समझिए, क्योंकि ये किताबी बातें नहीं, जिंदगी की सच्चाई हैं। भावनाओं को रेगुलेट करना सीखें कभी-कभी ऐसा लगता है कि भावनाएं हमें कंट्रोल कर रही हैं। हम गुस्सा आने पर चिल्ला पड़ते हैं, फिक्र सिर पर इस कद्र हावी होती है कि रात भर सो नहीं पाते हैं। किताब कहती है कि भावनाएं हर मिनट बदलती हैं। इन्हें कंट्रोल करना प्रैक्टिस से आता है, जैसे मसल्स ट्रेन करते हैं। क्या करें? गुस्सा आने पर रुकें, सांस लें और सोचें कि रिएक्शन के नतीजे क्या होंगे। धीरे-धीरे आदत बन जाएगी। चिंता को इंगेज मत करो, वो खुद चली जाएगी चिंता का गोला तब बड़ा होता है, जब हम उसे बार-बार सोचते हैं। किताब कहती है कि चिंता को टाइम दो, एक फिक्स ‘वरी टाइम’ सेट करें। ज्यादातर चिंताएं उस टाइम तक भूल जाती हैं। क्या करें? रोज 15 मिनट का वरी टाइम रखें। बाकी समय चिंता आए तो कहो, “बाद में सोचूंगा।” सिर्फ खुद से कंपटीशन करो सोशल मीडिया पर दूसरों को देखकर लगता है हम पीछे रह गए। किताब कहती है कि कंपेयर करने का गेम कभी जीत नहीं सकते। खुद के पुराने वर्जन से कंपेयर करें। क्या करें? हर दिन एक छोटा इम्प्रूवमेंट टारगेट सेट करें। ये ‘कान्ट लूज’ सिचुएशन है। इमोशंस को सही नाम दें ज्यादातर लोग कहते हैं मूड खराब है। किताब कहती है इमोशंस को सही तरीके से पहचानना सीखें। ये फ्रस्ट्रेशन है या डिसअपॉइंट? सटीक तरीके से समझने से कारण पता चलता है। क्या करें? जब भी मन परेशान हो, खुद से पूछें कि यह असल में कैसी फीलिंग है। जर्नलिंग से प्रॉब्लम सॉल्व करें दिमाग में उलझन हो तो लिख डालें। किताब कहती है जर्नलिंग से प्रॉब्लम क्लियर होती है और एक्शन स्टेप्स दिखते हैं। क्या करें? समस्या लिखें और उसके संभावित समाधानों की एक लिस्ट बनाएं। असफलता से खुद को न जोड़ें अगर कुछ गलत हो जाए, तो खुद को “फेलियर” न मानें। असफलता एक घटना है, आपकी पहचान नहीं। क्या करें? खुद से कहें, “यह परिस्थिति खराब थी, मैं नहीं। मैं अगली बार बेहतर कोशिश करूंगा।” रिएक्ट न करें, रिस्पॉन्ड करें रिएक्शन बिना सोचे होता है, जबकि रिस्पॉन्स सोच-समझकर दिया जाता है। अपने ट्रिगर्स को पहचानें और जागरूक बनें। क्या करें? कोई बात चुभे, तो फौरन जवाब देने के बजाय रुकें और विचार करें। इस किताब को क्यों पढ़ें? यह किताब एक सच्चे दोस्त की तरह है। यह सरल उदाहरणों के जरिए छात्रों, प्रोफेशनल्स की मदद करती है। ग्राफिक में देखिए ये किताब किसे पढ़नी चाहिए- किताब के बारे में मेरी राय यह किताब इमोशनल सक्सेस का एक बेहतरीन नक्शा है। निक ट्रेंटन की कहानियां इसे बहुत प्रभावी बनाती हैं। 5-4-3-2-1 जैसी तकनीकें बहुत आसान हैं और तुरंत असर दिखाती हैं। अगर आप चिंता और नेगेटिविटी के जाल से निकलना चाहते हैं, तो यह किताब आपके लिए ही है। जर्नलिंग जैसी आदतें शुरू में कठिन लग सकती हैं, पर ये आपकी जिंदगी बदल देंगी। यह किताब आपको भावनाओं का गुलाम नहीं, बल्कि मालिक बनाती है। ……………… ये खबर भी पढ़िए बुक रिव्यू- जिंदगी सिर्फ 4000 हफ्तों की कहानी है: जिस चीज पर वश नहीं, उसे नियति पर छोड़ दो, सब जाने दो, बस खुशी और सुकून रख लो इंसान की औसत उम्र लगभग 80 वर्ष होती है। अगर हम इसे हफ्तों में गिनें तो हमारे पास केवल 4,000 हफ्ते होते हैं। सुनने में यह संख्या बहुत बड़ी लग सकती है, लेकिन ये हफ्ते कब बीत जाते हैं, पता ही नहीं चलता है। आगे पढ़िए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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