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06 वारंटी गिरफ्तार, 3 इनामी आरोपी पकड़े गए:मंदसौर में रातभर सर्च ऑपरेशन, अवैध शराब भी जब्त शराब पीने के बाद क्या कफ सिरप लेने से मौत हो जाती है? 42 वर्षीय युवक की सांसें थमने के बाद कार्डियोलॉजिस्ट ने दी चेतावनी भोपाल-इंदौर जैसे शहरों ने नहीं दिखाई स्वगणना में रुचि:रायसेन, मंदसौर एमपी के टॉपर जिले जहां एक लाख से अधिक लोगों ने खुद भरी मकान गणना रिपोर्ट वैशाख पूर्णिमा पर 50 हजार श्रद्धालुओं ने किए दर्शन:बूढ़े बाबा के रूप में होगा भगवान का श्रृंगार मूवी रिव्यू: राजा शिवाजी:स्वराज्य की भावना को भव्यता से दिखाती फिल्म, रितेश देशमुख का सधा निर्देशन और स्टारकास्ट का असरदार अभिनय इसकी ताकत मूवी रिव्यू: राजा शिवाजी:स्वराज्य की भावना को भव्यता से दिखाती फिल्म, रितेश देशमुख का सधा निर्देशन और स्टारकास्ट का असरदार अभिनय इसकी ताकत
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शराब पीने के बाद क्या कफ सिरप लेने से मौत हो जाती है? 42 वर्षीय युवक की सांसें थमने के बाद कार्डियोलॉजिस्ट ने दी चेतावनी

Last Updated:May 01, 2026, 14:28 IST Alcohol and cough syrup lethal combination: क्या शराब पीने के बाद कफ सिरप लेने से किसी की मौत हो सकती है. यही सवाल हमने फोर्टिस अस्पताल, नई दिल्ली में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर और मशहूर इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी से जानना चाहा. उन्होंने कहा कि शराब पीने के बाद हार्ट में एरीदिमिया होता है यानी धड़कनें तेज होती है. शराब में पहले से नशा रहती है और कफ सिरप भी सेडेटिव होता है. ऐसे में अगर कोई व्यक्ति बेहोशी की हालत में है और उसे मुंह में कुछ भी पिला दिया जाय तो इससे सांस की नली पूरी तरह से बंद हो सकता है. 42 वर्षीय युवक की मौत के बाद उठे सवाल. बिहार के दरभंगा जिले में एक 42 साल के युवक सतन जी पाठक की शराब पीने के बाद कफ सिरप लेने से मौत हो गई. हुआ दरअसल ये कि सतन जी पहले से शराब पीने के आदी थे. वह अक्सर शराब पीने के बाद बेहोश हो जाया करते थे, फिर घंटों बाद सुध-बुध लौटता था और फिर सामान्य दिनचर्या में वापस आ जाता था. गुरुवार दोपहर अपनी आदत के अनुसार उसने शराब पी और फिर बेहोश हो गया. बेहोशी के आलम में उसे काफी खांसी होने लगी और सांस की नली से घरघराहट होने लगी. घर वालों को लगा कि हमेशा की तरह का ही वाकया है. इसलिए यूं ही छोड़ दिया. जब देर तक होश नहीं आया तो घर वालों ने 3-4 ढक्कन कप सिरप पिला दिया ताकि खांसी कम हो जाए. लेकिन यही बहुत बड़ी भूल साबित हो गई. कुछ देर बाद मरीज को सीवर हार्ट अटैक आया और सांसें थम गई. अस्पताल ले जाया गया लेकिन रास्ते में ही दम तोड़ दिया. हमने फोर्टिस अस्पताल, नई दिल्ली में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर और मशहूर इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी से जानना चाहा कि आखिर मौत के वाजिब कारण क्या-क्या हो सकते हैं. कई कंडीशन एक साथ हुई होंगीडॉ. नित्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि शराब पीने के बाद आमतौर पर लोगों का हार्ट बीट बढ़ जाता है यानी धड़कनें बहुत तेज हो जाती है. इसे एरीदिमिया कहा जाता है. ऐसे लोग शराब पीने के दौरान हमेशा खतरे में रहते हैं. लेकिन मुश्किल तब और ज्यादा हो जाती है जब कोई व्यक्ति अल्कोहल लेने के बाद बेहोश हो जाता है और उसे मुंह से कुछ पिला दिया जाता है. जैसा कि इस व्यक्ति के साथ हुआ. इस केस में कई चीजें एक साथ हुई होगी. शराब पीने के बाद जब धड़कन बहुत तेज होती है तो उसे मेडिकल टर्म में एरीदिमिया (arrhythmia) कहा जाता है. एरीदिमिया से वेंट्रिकुलर ट्रैकियोकार्डिया ( Ventricular Tachycardia (VT) और वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन Ventricular Fibrillation (VF) हो सकता है.  चूंकि मरीज पहले से बेहोश था और उसी हालत में उसे कफ सिरप दिया गया. यह कफ सिरप सांस की नली में अटक गया होगा जिसकी वजह से सांस की नली जाम हो गई होगी. इससे ऑक्सीजन हार्ट तक नहीं पहुंची होगी. जब सांस की नली बंद हो जाए और हार्ट में ऑक्सीजन नहीं पहुंचे तो मरीज में हार्ट के निचले चैंबर में धड़कनें बहुत तेज हो जाती है. यानी हार्ट इतनी तेजी से धड़कता है कि उसे खून को भरने के लिए समय ही नहीं मिलता. जब शरीर में खून की सप्लाई कम हो जाती है तो मरीज को हार्ट अटैक आ जाता है. तत्काल मौत की वजह यही हो सकती है. दूसरी स्थिति में वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन हुआ होगा. इसमें धड़कन के बजाय कपकपी होने लगती है. इसमें हार्ट में बिजली के संकेत पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो जाते हैं. हार्ट को कोई स्पष्ट कमांड नहीं मिलता. इसमें दिल के निचले हिस्से की मांसपेशियां सिर्फ फड़फड़ाने लगती हैं. हार्ट में पंपिंग पूरी तरह से रूक जाती है. इसकी वजह से खून दिमाग में बिल्कुल नहीं पहुंचता. व्यक्ति तुरंत बेहोश हो जाता है और सांसें रूक जाती है. क्या कफ सिरप बना खतरनाक कॉकटेल डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि मरीज पहले से अल्कोहल के नशे में था और कुछ बेहोशी भी थी. ऐसे में उसे कफ सिरप दिया गया. कफ सिरप सेडेटिव होता है. यानी इसमें नींद आती है और एक्सट्रीम कंडीशन में शरीर एकदम शांत हो जाता है. दिमाग सुसुप्तावस्था में चला जाता है. अत्यधिक नींद आने के कारण एक तरह से वह व्यक्ति और बेहोशी की स्थिति में जा सकता है.यानी मरीज पहले से ही बेहोश था, कफ सिरप ने इसे और अधिक बेहोशी की हालत में ला दिया गया होगा. दूसरी स्थिति में जब सांस की नली बंद हो गई होगी तो हार्ट अटैक आया होगा लेकिन चूंकि मरीज बेहोश था, इसलिए वह अपनी तकलीफ को नहीं बता सका और सांस की नली में फंसे कफ सिरप को आगे-पीछे नहीं कर सका. इस तरह एक साथ कई तरह की परेशानियां आई होगी और अंतिम वजह हार्ट अटैक बनी होगी. बेहोशी में मुंह से कुछ भी देना जानलेवा आमतौर पर जब लोग बेहोशी में रहते हैं तो उसे लोग मुंह में पानी या कुछ और चीजें पिला देते हैं. ग्रामीण इलाकों में अक्सर ऐसा होता है. डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी इसकी सख्त चेतावनी देते हुए कहते हैं कि बेहोशी की हालत में कभी भी किसी को भी मुंह में लिक्विड नहीं देना चाहिए. क्योंकि यह सांस की नली को जाम कर सकता है जिसकी वजह से सांस की नली से ऑक्सीजन फेफड़े तक नहीं पहुंचती है. जब ऑक्सीजन फेफड़े तक नहीं पहुंचेगी तो अंजाम सबको पता होगा. डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि कभी-कभी खाते समय या पानी पीते समय लोगों को खांसी होने लगती है इससे ऐसा लगता है कि सांसें अटक गई है क्योंकि पानी अचानक सांस की नली ट्रैकिया में फंस जाता है लेकिन चूंकि तब इंसान जगा रहता है इसलिए वह उस अटके हुए पानी को निकाल देता है लेकिन जो व्यक्ति बेहोश है उसका दिमाग पूरी तरह से सुसुप्तावस्था में रहता है इसलिए दिमाग से कोई सिग्नल नहीं निकलता है और सांसें रूक जाती है. ऐसे में अगर आदमी बेहोश है तो उसे किसी भी तरह से मुंह में कुछ नहीं दिया जाना चाहिए. यही कारण है कि जब किसी का ऑपरेशन होता है और उसके लिए उसे बेहोश किया जाता

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Last Updated:May 01, 2026, 13:37 IST Hansraj College Wellness Centre: दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज में NBCC के CSR फंड से अत्याधुनिक वेलनेस सेंटर, ओपन जिम और फिजियोथेरेपी केंद्र की शुरुआत हुई है. अब कॉलेज के छात्र और स्टाफ कैंपस के भीतर ही मुफ्त फिटनेस ट्रेनिंग और आधुनिक इलाज की सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे. जिससे उनके स्वास्थ्य और जीवनशैली में बड़ा सुधार आएगा. दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज में छात्रों की सेहत और फिटनेस को ध्यान में रखते हुए एक बड़ी पहल की गई है. कॉलेज में अत्याधुनिक फिजियोथेरेपी सेंटर, वेलनेस सेंटर और ओपन जिम का शुभारंभ किया गया है. जिससे अब छात्र पढ़ाई के साथ-साथ अपनी सेहत का भी बेहतर ख्याल रख सकेंगे. कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. रमा ने बताया कि पहले भी फिजियोथेरेपी और जिम की सुविधाएं मौजूद थीं. लेकिन बढ़ती छात्र संख्या के कारण सभी तक उनकी पहुंच नहीं हो पा रही थी. इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार सुविधाओं को अपग्रेड किया गया और एक नया ओपन जिम भी स्थापित किया गया. जिससे ज्यादा से ज्यादा छात्र लाभ उठा सकें. CSR फंड से तैयार हुआ पूरा सेटअपइस पहल को लेकर सोशल मीडिया पर उठे सवालों का जवाब देते हुए प्रिंसिपल ने स्पष्ट किया कि इस प्रोजेक्ट में किसी भी तरह से स्टूडेंट फंड का इस्तेमाल नहीं किया गया है. यह पूरा सेटअप NBCC (India) Limited के CSR फंड के तहत तैयार किया गया है. NBCC ने खुद ही सभी मशीनें और उपकरण खरीदकर कॉलेज में इंस्टॉल किए हैं. हर किसी के लिए मुफ्त सुविधाइस वेलनेस सेंटर की खास बात यह है कि यह सिर्फ छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि कॉलेज के टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ के लिए भी पूरी तरह मुफ्त है. कॉलेज प्रशासन का उद्देश्य है कि हंसराज परिवार का हर सदस्य शारीरिक रूप से फिट और स्वस्थ रहे. खिलाड़ियों को मिलेगा बड़ा फायदाडॉक्टर गौरव ने बताया हंसराज कॉलेज अपने बेहतरीन स्पोर्ट्स कल्चर के लिए जाना जाता है. यहां कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पढ़ाई करते हैं. ऐसे में अक्सर खिलाड़ियों को चोट लगने की समस्या होती है. अब नए फिजियोथेरेपी सेंटर में उन्हें तुरंत इलाज और रिहैबिलिटेशन की सुविधा मिलेगी. जिससे उनका प्रदर्शन और बेहतर हो सकेगा. ओपन जिम से बढ़ेगी फिटनेस की आदतकॉलेज के फिजिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट के अनुसार वेलनेस सेंटर को दो हिस्सों में विकसित किया गया है एक हाई परफॉर्मेंस एथलीट्स के लिए और दूसरा सामान्य छात्रों के लिए. ओपन जिम के जरिए छात्रों को बिना किसी झिझक के कभी भी फ्री-हैंड एक्सरसाइज करने का मौका मिलेगा. आधुनिक मशीनों से लैस सेंटरफिजियोथेरेपी सेंटर में TENS मशीन, अल्ट्रासाउंड थेरेपी जैसी आधुनिक मशीनें मौजूद हैं. जबकि इंडोर जिम में स्ट्रेंथ और कार्डियो ट्रेनिंग के लिए सभी जरूरी उपकरण उपलब्ध हैं. ओपन जिम में पूरे शरीर के वर्कआउट के लिए अलग-अलग स्टेशन बनाए गए हैं. स्वस्थ शरीर, बेहतर भविष्यकॉलेज प्रशासन का मानना है कि Health is Wealth सिर्फ एक कहावत नहीं, बल्कि छात्रों के जीवन का अहम हिस्सा होना चाहिए. ऐसे में यह पहल न केवल उनकी फिटनेस को बढ़ावा देगी. बल्कि उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव भी लाएगी. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : East Delhi,Delhi

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स्वाद के साथ सेहत का खजाना है यह चमत्कारी तेल, शरीर में अकड़न हो या जकड़न होगा तुरंत छूमंतर! – News18 हिंदी

X स्वाद के साथ सेहत का खजाना है यह तेल, जोड़ों का दर्द होगा तुरंत छूमंतर   Health Tips: औषधीय और बहुगुणी खूबियों से भरपूर महुआ ग्रामीणों के लिए वरदान साबित होता है. इससे न सिर्फ ग्रामीणों को खाद्य तेल प्रचुर मात्रा में मिल जाता है बल्कि अच्छी आमदनी भी होती है. महुआ के बीज से निकला डोरी के तेल के फायदे बताते हुए रीवा आयुर्वेद हॉस्पिटल के डीन (MD) डॉक्टर दीपक कुलश्रेष्ठ ने कहा कि डोरी के फल से अर्थ महुआ के फल से है. इस फल को चुनने के बाद ग्रामीण उसके बीज को निकालते हैं और धूप में सुखाते हैं. सूखे हुए बीज को उबालने के बाद उसका चूर्ण बना लेते हैं. उसके बाद इससे तेल निकालते हैं. डोरी का तेल खाने के साथ-साथ शरीर पर लगाने के भी काम में आता है. इस तेल से शरीर में होने वाले दर्द से राहत मिलती है. जोड़ों के दर्द में भी यह असरदार माना जाता है. शरीर में जकड़न, दर्द और जोड़ों के दर्द में इसका तेल काफी उपयोगी है. इसके लगाने से सिरदर्द से राहत के साथ-साथ अनिद्रा से छुटकारा मिलता है. शरीर और चेहरे पर दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं. महुआ तेल बालों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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आम का मजा लें, मगर सावधानी से... ज्यादा खाना बन सकता है मुसीबत, जानिए डॉक्टर की सलाह

आम का मजा लें, मगर सावधानी से… ज्यादा खाना बन सकता है मुसीबत, जानिए डॉक्टर की सलाह

Last Updated:May 01, 2026, 12:18 IST गर्मी का मौसम आते ही बाजारों में आम की मिठास छा जाती है. फलों का राजा कहलाने वाला आम स्वाद के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसान पहुंचा सकता है. चंदौली की डॉक्टर रिद्धि पांडे ने बताया कि सही मात्रा और सही तरीके से आम खाने पर यह शरीर को ठंडक, ऊर्जा और हाइड्रेशन देता है. चंदौली. गर्मी का मौसम आते ही बाजारों में आम की बहार छा जाती है, आम को फलों का राजा कहा जाता है और इसका स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है. हालांकि, स्वाद के साथ-साथ इसके सेवन में सावधानी बरतना भी बेहद जरूरी है. डॉक्टर ने बताया कि आम स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद तो है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा नुकसान भी पहुंचा सकती है. डॉक्टर रिद्धि पांडे ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि गर्मी के मौसम में जो भी फल प्राकृतिक रूप से उपलब्ध होते हैं, वे शरीर के लिए लाभकारी होते हैं, आम भी उन्हीं फलों में से एक है. Add News18 as Preferred Source on Google इसकी तासीर ठंडी मानी जाती है और यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है. आम में मौजूद पानी और पोषक तत्व शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते, जिससे गर्मी के दिनों में राहत मिलती है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आम का सेवन एक सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. अगर कोई व्यक्ति, खासकर बच्चे, बहुत अधिक मात्रा में आम खाते हैं, तो इसका उल्टा असर भी हो सकता है. ज्यादा आम खाने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है, जिससे फोड़े-फुंसी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. उन्होंने बताया कि बच्चों को आम खाते समय विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. डॉक्टर ने बताया कि कई बार बच्चे आम को बिना छिलका हटाए ही खा लेते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है. आम का छिलका हटाकर ही खाना चाहिए, क्योंकि छिलके में ऐसे तत्व हो सकते हैं, जो त्वचा संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा, आम का अत्यधिक सेवन पाचन तंत्र पर भी असर डाल सकता है. इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को संतुलित मात्रा में ही आम खाने की आदत डालें और उन्हें इसके सही तरीके के बारे में समझाएं. वहीं, डॉक्टर रिद्धि पांडे ने कहा कि अगर सही मात्रा और तरीके से आम का सेवन किया जाए, तो यह शरीर के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. यह न केवल ऊर्जा देता है, बल्कि शरीर को ठंडक भी पहुंचाता है. बता दें कि आम का आनंद जरूर लें, लेकिन संतुलन और सावधानी के साथ, तभी यह स्वादिष्ट फल आपके स्वास्थ्य के लिए वरदान साबित होगा, न कि परेशानी का कारण बने. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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धतूरा का पौधा

शंकर जी का प्रिय धतूरा सिर्फ पूजा नहीं, कई बीमारियों का रामबाण इलाज, जानिए फायदे

Last Updated:May 01, 2026, 11:48 IST Datura Plant benefits: धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव को धतूरा का फूल और फल बेहद प्रिय माना जाता है. मंदिरों में पूजा के दौरान भक्त शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाते हैं. मगर, क्या आप जानते हैं कि यह पौधा सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर है. आयुर्वेद में धतूरा का उपयोग कई प्रकार की बीमारियों के इलाज में किया जाता रहा है. आयुर्वेद में धतूरा को एक प्रभावशाली औषधीय पौधे के रूप में माना गया है. जमुना प्रसाद यादव के अनुसार, इसमें दर्द निवारक (Pain Relief), सूजन कम करने (Anti-inflammatory) और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो कई प्रकार की बीमारियों में लाभ पहुंचाते हैं. प्राचीन समय से वैद्य धतूरा का उपयोग विभिन्न रोगों के इलाज में करते आ रहे हैं. खासकर जोड़ों के दर्द, त्वचा रोग, सूजन और सांस से जुड़ी समस्याओं में इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसके पत्तों का लेप दर्द और सूजन में राहत देने के लिए लगाया जाता है, जबकि कुछ पारंपरिक उपचारों में इसके बीज और फूलों का भी उपयोग होता है. धतूरा का उपयोग त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं में पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है. इसके पत्तों या बीजों से बना लेप फोड़े-फुंसी, खुजली और दाद जैसी परेशानियों में राहत देने में मदद करता है. इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा के संक्रमण को कम करने और घाव को जल्दी भरने में सहायक माने जाते हैं. ग्रामीण इलाकों में लोग इसे घरेलू उपचार के रूप में अपनाते हैं. हालांकि, धतूरा जहरीला होता है, इसलिए इसका उपयोग बहुत सावधानी से और सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. बेहतर है कि किसी विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही इसका प्रयोग करें. जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि धतूरा के पत्ते जोड़ों के दर्द में राहत देने के लिए पुराने समय से उपयोग किए जाता हैं. इसके पत्तों को हल्का गर्म करके दर्द वाली जगह पर बांधने से सूजन कम होती है और दर्द में आराम मिलता है. ग्रामीण इलाकों में यह आसान और असरदार घरेलू उपाय काफी लोकप्रिय है. धतूरा के पत्तों में मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर को राहत पहुंचाते हैं. हालांकि, इसका उपयोग करते समय सावधानी जरूरी है, क्योंकि यह पौधा जहरीला भी होता है. इसलिए इसका प्रयोग करने से पहले किसी वैद्य या डॉक्टर से सलाह जरूर लें और सीमित मात्रा में ही प्रयोग करना चाहिए. Add News18 as Preferred Source on Google धतूरा एक जंगली पौधा है, जो आमतौर पर खेतों, सड़कों के किनारे और खाली जगहों पर आसानी से उग जाता है. यह पौधा बिना ज्यादा देखभाल के भी तेजी से बढ़ता है, इसलिए ग्रामीण इलाकों में यह अक्सर खुद-ब-खुद दिखाई दे जाता है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि धतूरा के फूल सफेद या बैंगनी रंग के होते हैं, जो देखने में काफी आकर्षक लगते हैं. इसका फल गोल और कांटेदार होता है, जिसके अंदर छोटे-छोटे बीज पाए जाते हैं. धतूरा में प्राकृतिक दर्द निवारक गुण पाए जाते हैं, जिनकी वजह से इसे पारंपरिक उपचार में उपयोग किया जाता रहा है. सिर दर्द, मांसपेशियों के दर्द और चोट लगने पर इसके पत्तों का लेप लगाने से आराम मिलने की बात कही जाती है. यह दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है, जिससे शरीर को राहत मिलती है. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे एक आसान घरेलू उपाय के रूप में अपनाते हैं. हालांकि, धतूरा जहरीला होता है, इसलिए इसका इस्तेमाल बहुत सावधानी से और सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. धतूरा में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं. इसके पत्तों का लेप या हल्का गर्म करके लगाने से प्रभावित जगह पर राहत मिल सकती है. खासकर चोट, मोच या जोड़ों की सूजन में इसे पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता रहा है. यह सूजन के साथ-साथ दर्द को भी कम करने में सहायक माना जाता है. हालांकि, धतूरा जहरीला पौधा है, इसलिए इसका प्रयोग सावधानी से और सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, बेहतर होगा कि किसी विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही इसका उपयोग करें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब विष निकला, तो भगवान शिव ने उसे ग्रहण किया था. मान्यता है कि उस विष के प्रभाव को कम करने में धतूरा का उपयोग किया गया. इसी वजह से धतूरा भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है और पूजा-पाठ में विशेष रूप से अर्पित किया जाता है. सावन और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर भक्त शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं और इसे पवित्र व शुभ मानते हैं. धतूरा का उपयोग आयुर्वेद में सांस से जुड़ी समस्याओं, खासकर अस्थमा में पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है. पुराने समय में इसके सूखे पत्तों का धुआं लेने से सांस की तकलीफ में राहत मिलने की बात कही जाती थी. माना जाता है कि इसमें मौजूद कुछ तत्व श्वसन मार्ग को खोलने में मदद करते हैं. हालांकि, यह तरीका जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि धतूरा जहरीला पौधा है. इसलिए बिना किसी विशेषज्ञ या आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए. वरना नुकसान भी हो सकता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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भीषण गर्मी में जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, जानिए डिहाइड्रेशन के लक्षण और बचाव के आसान तरीके

अंबाला: हरियाणा में इन दिनों लगातार बढ़ती गर्मी और उच्च तापमान ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है. चिलचिलाती धूप और लू के कारण लोगों की सेहत पर भी गंभीर असर पड़ रहा है और ऐसे मौसम में जरा-सी लापरवाही भारी पड़ सकती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि अंबाला समेत हरियाणा के कई जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है. दोपहर के समय अंबाला के बाजार और मुख्य मार्ग भी सूने नजर आते हैं, क्योंकि बढ़ती गर्मी से लोगों में डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ रहा है. शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी इस बारे में जानकारी देते हुए अंबाला नागरिक अस्पताल की आरएमओ डॉ. अदिति गौतम ने बताया कि गर्मी के मौसम में शरीर से पसीने के रूप में पानी तेजी से निकलता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए दिन की शुरुआत सुबह उठते ही एक से दो गिलास पानी पीकर करनी चाहिए और पूरे दिन नियमित अंतराल पर पानी का सेवन करते रहना चाहिए.उन्होंने बताया कि दोपहर के समय तापमान काफी अधिक रहता है, इसलिए घर से बाहर निकलते समय आंखों पर चश्मा (गॉगल्स) लगाएं और छाता साथ रखें. केवल पानी ही नहीं, बल्कि पानी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन भी जरूरी है. क्या खाएं और क्या न खाएं गर्मियों में तरबूज, खरबूजा, खीरा और नारियल पानी जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थ शरीर को ठंडक देते हैं और जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति करते हैं. इसके अलावा नींबू पानी और छाछ जैसे पेय पदार्थ भी शरीर को तरोताजा बनाए रखते हैं. डॉ. गौतम ने सलाह दी कि घर का ताजा भोजन ही करें और रात का बचा हुआ खाना बिल्कुल न खाएं. उन्होंने चेतावनी दी कि कोल्ड ड्रिंक्स, अधिक चाय और कॉफी का सेवन सीमित करें, क्योंकि इनमें मौजूद शुगर और कैफीन शरीर को और अधिक डिहाइड्रेट कर सकते हैं. साथ ही बाहर का अस्वच्छ और बासी भोजन खाने से बचें, क्योंकि इससे फूड पॉइजनिंग और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. डिहाइड्रेशन के लक्षण पहचानें उन्होंने बताया कि त्वचा में रूखापन, आंखों के नीचे कालापन, अत्यधिक थकान या पेशाब का गहरा पीला रंग ये सभी शरीर में पानी की कमी के संकेत हो सकते हैं. ऐसे में तुरंत तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाना चाहिए.यदि किसी व्यक्ति को चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय गर्मी से बचाव के लिए दोपहर के समय सिर ढककर ही बाहर निकलें. हल्के और ढीले सूती कपड़े पहनें और अनावश्यक रूप से बाहर जाने से बचें. घर लौटने के तुरंत बाद ठंडा पानी न पिएं, बल्कि पहले शरीर का तापमान सामान्य होने दें, फिर सामान्य पानी का सेवन करें. अस्पताल में विशेष व्यवस्था डॉ. गौतम ने बताया कि अंबाला नागरिक अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं 24 घंटे उपलब्ध हैं. यहां हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए विशेष कक्ष भी बनाया गया है. इमरजेंसी वार्ड में ORS पैकेट के लिए अलग काउंटर है, जहां से लोग निशुल्क ORS ले सकते हैं.मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल में एसी, कूलर और पंखों की व्यवस्था भी की गई है, ताकि बढ़ती गर्मी में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो.

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गर्मियों में सिर्फ पानी पीना पर्याप्त नहीं, किस तरह पी रहे हैं यह भी है अहम; भूलकर भी न करें पानी पीने से जुड़ी ये गलतियां

गर्मियों में सिर्फ पानी पीना पर्याप्त नहीं, किस तरह पी रहे हैं यह भी है अहम; भूलकर भी न करें पानी पीने से जुड़ी ये गलतियां

Last Updated:May 01, 2026, 10:47 IST Mistakes While Drinking Water: गर्मी के मौसम में सिर्फ पानी पीना ही काफी नहीं है, बल्कि आपका तरीका भी मायने रखता है. जानें पानी पीने से जुड़ी उन 5 बड़ी गलतियों के बारे में, जो आपकी सेहत और पाचन बिगाड़ सकती हैं. Common water drinking mistakes : पानी तो सभी पीते हैं, लेकिन इसे पीने का तरीका आपके शरीर के कामकाज में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अक्सर लोग केवल पानी की “सही मात्रा” पर ध्यान देते हैं, लेकिन समय, पानी पीने की गति और आपका पोश्‍चर जैसे अन्य कारकों को नजरअंदाज कर देते हैं। पानी बहुत तेजी से पीना, इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी और प्यास लगने तक इंतजार करना जैसी गलतियां हाइड्रेशन की प्रभावशीलता को कम कर सकती हैं. क्यों जरूरी है सही तरीका? दरअसल, आपका हाइड्रेशन लेवल सीधे तौर पर आपकी एनर्जी, डाइजेशन और ओवरऑल कम्फर्ट से जुड़ा है. जब शरीर सही तरह से हाइड्रेटेड नहीं होता, तो थकान और सुस्ती महसूस होना आम है. अपनी डेली रूटीन में थोड़े से ‘स्मार्ट’ बदलाव करके आप न केवल अपनी आदतों को सुधार सकते हैं, बल्कि खुद को पहले से कहीं ज्यादा एक्टिव और हेल्दी महसूस करा सकते हैं. ‘सिपिंग’ शुरू करें- ज्यादातर लोगों को लगता है कि एक साथ ढेर सारा पानी पीने से वे जल्दी हाइड्रेट हो जाएंगे, लेकिन यह एक मिथ है. हकीकत यह है कि शरीर एक बार में बहुत ज्यादा पानी एब्जॉर्ब नहीं कर पाता और वह बिना किसी फायदे के सिस्टम से बाहर निकल जाता है. इसका सही और ‘प्रो’ तरीका यह है कि पूरे दिन छोटे-छोटे घूँट (sips) लेकर पानी पिएं ताकि शरीर उसे ढंग से इस्तेमाल कर सके. Add News18 as Preferred Source on Google कब पीना है सबसे जरूरी? इर्रेगुलर तरीके से पानी पीने से शरीर ‘डिहाइड्रेशन मोड’ में चला जाता है, जिससे फोकस की कमी और थकान होती है. हाइड्रेशन में टाइमिंग बहुत बड़ा रोल प्ले करती है. सुबह उठने के बाद, मील (meal) से पहले और बाद में, और वर्कआउट के बाद पानी पीना आपके एनर्जी लेवल को कंसिस्टेंट रखता है और शरीर का बैलेंस बनाए रखता है. खाने के साथ ‘नो वॉटर’ जोन- भोजन के दौरान बहुत अधिक पानी पीना आपके पेट के एसिड्स और एंजाइम्स को ‘डाइल्यूट’ कर सकता है, जो डाइजेशन के लिए सही नहीं है. इससे अक्सर ब्लोटिंग या भारीपन महसूस होता है. एक्सपर्ट्स की मानें तो खाने के दौरान सिर्फ एक-दो घूँट ही पिएं और पानी की असली मात्रा को मील से पहले या करीब 30 मिनट बाद के लिए बचाकर रखें. सिर्फ पानी काफी नहीं, इलेक्ट्रोलाइट्स भी हैं मस्ट- खासकर गर्मियों में या इंटेंस वर्कआउट के दौरान, पसीने के जरिए शरीर से सोडियम जैसे मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं. ऐसे में सिर्फ सादा पानी पीने से शरीर का बैलेंस वापस नहीं आता और आप थका हुआ महसूस करते हैं. इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने के लिए नींबू-पानी या नारियल पानी जैसे नेचुरल ड्रिंक्स को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं. चिल्ड वॉटर सेहत के लिए खतरा? टीओटी की खबर के मुताबिक, बर्फ जैसा ठंडा पानी पीने में तो रिफ्रेशिंग लगता है, लेकिन यह डाइजेशन को स्लो कर सकता है. खाली पेट या खाने के साथ ‘आइस-कोल्ड’ वॉटर पीना बेस्ट ऑप्शन नहीं है. इसके बजाय रूम टेम्परेचर या हल्का ठंडा पानी पिएं, क्योंकि हमारा शरीर इसे ज्यादा आसानी से एब्जॉर्ब करता है और यह पेट के लिए भी आरामदायक होता है. प्यास का इंतजार करना है आपकी सबसे बड़ी भूल- जब आपको प्यास लगती है, तो असल में वह इस बात का सिग्नल है कि आपका शरीर पहले ही डिहाइड्रेटेड हो चुका है. प्यास लगने पर पानी पीने से आपकी हाइड्रेशन साइकिल अनइवेन हो जाती है. इसलिए प्यास का वेट न करें, बल्कि एक कंसिस्टेंट रूटीन बनाएं ताकि शरीर में पानी का लेवल हमेशा स्टेबल रहे. बोतल को बनाएं अपना बेस्ट फ्रेंड- अक्सर बिजी शेड्यूल के चक्कर में हम पानी पीना ही भूल जाते हैं. इसका सबसे आसान सॉल्यूशन यह है कि पानी की बोतल को हमेशा अपनी नजरों के सामने रखें. चाहे ऑफिस हो, ट्रैवलिंग या जिम, पास में बोतल होने से आपको बार-बार याद दिलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और आप बिना ज्यादा सोचे हाइड्रेटेड रहेंगे. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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इस गर्मी घर में लगाएं ये 5 खास पौधे, शरबत-चटनी से लेकर स्किन केयर तक देंगे पूरा सुरक्षा कवच

Last Updated:May 01, 2026, 10:43 IST Sidhi News: गर्मियों में लेमन ग्रास बेहद उपयोगी पौधा है. इसकी खुशबू तनाव को कम करती है. यह घास मच्छरों को दूर रखने में मदद करती है. इसकी चाय पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर को ठंडक मिलती है. सीधी. गर्मी का मौसम शुरू होते ही सेहत से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं. तेज धूप, लू और बढ़ते तापमान के बीच शरीर को ठंडा और स्वस्थ बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है. ऐसे में आयुर्वेदिक विशेषज्ञ घर में औषधीय पौधे लगाने की सलाह दे रहे हैं, जो न केवल वातावरण को शुद्ध करते हैं बल्कि कई बीमारियों से बचाव में भी मददगार साबित होते हैं. सीधी के आयुर्वेदिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ आरपी परौहा ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि गर्मी के मौसम में शरीर को अंदर से ठंडा रखने और लू से बचने के लिए हर्बल पौधे सबसे कारगर और प्राकृतिक उपाय हैं. आयुर्वेद में इन पौधों का उपयोग सदियों से होता आ रहा है और इनका शरीर पर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता. खास बात यह है कि इन्हें आप अपने घर के गमलों या छोटे बगीचे में आसानी से उगा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल कर सकते हैं. तुलसी को प्रकृति की औषधि कहा जाता है. यह न केवल हवा को शुद्ध करती है बल्कि मानसिक शांति देने में भी सहायक है. वहीं एलोवेरा त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसकी ठंडी तासीर त्वचा को राहत देती है और यह घर में नमी बनाए रखने में भी मदद करता है. पुदीना गर्मी में किसी वरदान से कम नहीं है. इसकी ठंडी तासीर शरीर को तुरंत राहत देती है. पुदीने का शर्बत या चटनी पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है और गर्मी के असर को कम करती है. कड़ी पत्ता (करी पत्ता) भी केवल स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह हवा को शुद्ध करने और शरीर को ठंडक देने में सहायक होता है. लेमन ग्रास भी फायदेमंदलेमन ग्रास भी गर्मियों में बेहद उपयोगी पौधा है. इसकी खुशबू तनाव को कम करती है और मच्छरों को दूर रखने में मदद करती है. इसकी चाय पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर को ठंडक मिलती है. इसके अलावा दूर्वा घास और रोजमेरी जैसे पौधे भी काफी फायदेमंद माने जाते हैं. दूर्वा शरीर के पित्त दोष को कम करती है जबकि रोजमेरी याददाश्त बढ़ाने और मानसिक ताजगी बनाए रखने में मदद करती है. स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अहम भूमिकाडॉ आरपी परौहा का मानना है कि ये सभी पौधे न केवल घर के वातावरण को ठंडा रखते हैं बल्कि प्राकृतिक रूप से स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं. ऐसे में अगर आप भी स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो इस गर्मी अपने घर में इन आयुर्वेदिक पौधों को जरूर लगाएं और प्राकृतिक तरीके से खुद को फिट रखें. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sidhi,Madhya Pradesh

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वजन घटाने का नेचुरल फॉर्मूला: 6 हर्बल चाय जो मेटाबोलिज़्म बढ़ाकर फैट बर्न करें, असर खुद दिखेगा

वजन घटाने का नेचुरल फॉर्मूला: 6 हर्बल चाय जो मेटाबोलिज़्म बढ़ाकर फैट बर्न करें, असर खुद दिखेगा

Last Updated:May 01, 2026, 09:15 IST Herbal Tea For Belly Fat: सुबह उठते ही आईने में खुद को देखना कभी-कभी थोड़ा भारी पड़ जाता है, खासकर जब पेट की चर्बी नजर आने लगे. फिटनेस का ट्रेंड बदल चुका है-अब लोग जिम के साथ-साथ नेचुरल और आसान तरीकों की ओर ज्यादा झुक रहे हैं. ऐसे में हर्बल चाय एक साइलेंट गेम-चेंजर बनकर सामने आई हैं. ये ना सिर्फ पेट हल्का रखती हैं, बल्कि धीरे-धीरे मेटाबोलिज़्म को भी बेहतर करती हैं. अच्छी बात ये है कि इन्हें बनाना आसान है और ये आपकी रोज़मर्रा की लाइफ में आसानी से फिट हो जाती हैं, अगर आप भी बिना ज्यादा स्ट्रिक्ट डाइट या एक्सट्रीम वर्कआउट के पेट की चर्बी कम करना चाहते हैं, तो ये 6 हर्बल चाय आपके लिए काम की साबित हो सकती हैं. ग्रीन टी: मेटाबोलिज़्म को देती है बूस्ट ग्रीन टी का नाम आपने कई बार सुना होगा, और भी इसका क्रेज कम नहीं हुआ है. इसमें मौजूद कैटेचिन्स बॉडी के मेटाबोलिज़्म को तेज करते हैं, जिससे फैट बर्निंग प्रोसेस बेहतर हो जाता है. खासकर अगर आप इसे सुबह खाली पेट पीते हैं, तो इसका असर धीरे-धीरे नजर आने लगता है. दिन में दो कप ग्रीन टी पीना एक सिंपल लेकिन असरदार आदत बन सकती है. 1. अदरक की चाय: सूजन और ब्लोटिंग से राहत कैसे काम करती है अदरक की चाय पेट की सूजन और गैस को कम करने में काफी मददगार होती है. कई लोग शिकायत करते हैं कि उनका पेट फूला-फूला रहता है, ऐसे में अदरक एक नेचुरल सॉल्यूशन है. ये पाचन को तेज करती है और खाने के बाद भारीपन को कम करती है. इस्तेमाल का तरीका ताजे अदरक के टुकड़े पानी में उबालकर 5 मिनट तक पकाएं और फिर इसे गरम-गरम पिएं. इसे आप खाने से पहले या बाद में ले सकते हैं. 2. पुदीने की चाय: तुरंत राहत और कम क्रेविंग पुदीने की चाय उन लोगों के लिए परफेक्ट है जो बार-बार कुछ खाने का मन होने से परेशान रहते हैं. ये पाचन तंत्र को रिलैक्स करती है और गैस से तुरंत राहत देती है. इसके साथ ही ये भूख को कंट्रोल करने में भी मदद करती है, जिससे अनावश्यक स्नैकिंग कम हो जाती है. Add News18 as Preferred Source on Google 3. दालचीनी की चाय: शुगर कंट्रोल और फैट स्टोरेज पर असर क्यों है खास दालचीनी की चाय ब्लड शुगर लेवल को स्टेबल रखने में मदद करती है. जब शुगर लेवल संतुलित रहता है, तो ओवरईटिंग की आदत खुद-ब-खुद कम हो जाती है. कैसे पिएं एक छोटा दालचीनी का टुकड़ा उबलते पानी में डालें और सुबह इसे पिएं. ये दिन की शुरुआत के लिए अच्छा ऑप्शन बन सकता है. 4. सौंफ की चाय: हल्का पेट और बेहतर डाइजेशन सौंफ की चाय पुराने घरेलू नुस्खों में से एक है, लेकिन फिर से ट्रेंड में आ गई है. ये पेट फूलने को कम करती है और शरीर में जमा अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने में मदद करती है. एक चम्मच सौंफ को 10 मिनट तक गर्म पानी में भिगोकर पीना फायदेमंद रहता है. 5. अजवाइन की चाय: देसी नुस्खा, दमदार असर अजवाइन की चाय खासकर भारी खाने के बाद बहुत राहत देती है. गैस, अपच और पेट फूलने की समस्या में ये जल्दी असर दिखाती है. एक चम्मच अजवाइन को पानी में उबालकर छान लें और गुनगुना पीएं. ये पेट को हल्का और फ्लैट महसूस कराने में मदद कर सकती है. रोजमर्रा में कैसे शामिल करें इन हर्बल चाय का असर तभी दिखता है जब इन्हें नियमित रूप से लिया जाए. साथ ही ध्यान रखें कि इनमें चीनी ना मिलाएं. आप अपनी पसंद के हिसाब से दो या तीन चाय चुन सकते हैं और उन्हें अपनी डेली रूटीन का हिस्सा बना सकते हैं. हल्का वॉक और बैलेंस्ड डाइट के साथ इनका असर और बेहतर हो सकता है. कई लोगों ने अपनी लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव करके अच्छे रिजल्ट पाए हैं. जरूरी नहीं कि हर बदलाव बड़ा हो-कभी-कभी एक कप सही चाय भी फर्क डाल सकती है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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SMS Hospital: 4.61 करोड़ की लैब शुरू, फ्री में जांच की सुविधा, 32 लाख की मशीन से पथरी का होगा इलाज

Last Updated:May 01, 2026, 07:34 IST Jaipur SMS Hospital New Facility: जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए 4.61 करोड़ की लागत से न्यूरोओटोलॉजी लैब और कॉक्लियर इंप्लांट ओटी शुरू की गई है. इससे अब चक्कर आना, बहरेपन की जांच और बिना चीरा पथरी इलाज जैसी सुविधाएं एक ही जगह मुफ्त मिलेंगी. पहले इन जांचों के लिए मरीजों को बाहर जाना पड़ता था. नई लैब में आधुनिक मशीनें और स्किल लैब के जरिए डॉक्टरों को प्रशिक्षण भी मिलेगा. अस्पताल का ईएनटी विभाग अब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित हो रहा है. ख़बरें फटाफट जयपुर. राजधानी जयपुर स्थित प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल सवाई मानसिंह अस्पताल में लोगों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं देने के लिए लगातार नए नवाचार किए जा रहे हैं. इसी के तहत अस्पताल में अलग-अलग बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं के लिए इंस्टीट्यूट और अत्याधुनिक सेंटर शुरू किए जा रहे हैं. पिछले 2 सालों में सवाई मानसिंह अस्पताल में जेनेटिक टेस्टिंग लैब और टॉक्सिकोलॉजी लैब जैसी कई हाईटेक लैब शुरू की गई हैं. इसी कड़ी में अब अस्पताल के ईएनटी विभाग में 4.61 करोड़ रुपए की लागत से न्यूरोओटोलॉजी लैब व कॉक्लियर इंप्लांट ओटी शुरू की गई है. इसके बाद अब यहां लोगों को चक्कर आने, बहरेपन की जांच और पथरी का बिना चीरा इलाज जैसी सुविधाएं मिलेंगी. पहले इन जांचों के लिए मरीजों को अस्पताल के बाहर जाना पड़ता था, जहां हजारों रुपए खर्च होते थे, लेकिन अब ये सभी जांचें यहीं मुफ्त में उपलब्ध होंगी, जिससे मरीजों को राहत मिलेगी. हाल ही में सवाई मानसिंह अस्पताल के ईएनटी विभाग में न्यूरोओटोलॉजी लैब के साथ स्किल लैब, सेमिनार रूम, ऑडियोलॉजी रूम और कॉक्लियर इंप्लांट ओटी का उद्घाटन कर इन्हें मरीजों के लिए शुरू कर दिया गया है. करोड़ों की लागत से तैयार लैब में मिलेंगी ये खास सुविधाएं जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में 800 वर्ग फीट क्षेत्र में 10 स्टेशनों वाला आधुनिक स्किल लैब तैयार किया गया है. इस लैब में इलाज के साथ रेजिडेंट डॉक्टरों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. वर्टिगो जैसे रोगों के समग्र उपचार के लिए न्यूरो-ओटोलॉजी लैब विकसित की गई है. यहां उन मरीजों की जांच हो सकेगी, जो ईएनटी से जुड़ी गंभीर समस्याओं के कारण बार-बार बेहोश हो जाते हैं. साथ ही जटिल कान सर्जरी और श्रवण क्षमता बहाली से जुड़े मरीजों को बेहतर ऑपरेशन सुविधा मिलेगी. इस आधुनिक ईएनटी विभाग को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया गया है, जो उन्नत चिकित्सा सेवाओं और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा. 32 लाख की लगाई गई है सियालेंडोस्कोपी मशीन अस्पताल में नई लैब्स में आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं. न्यूरोओटोलॉजी लैब में विशेष रूप से उन मरीजों का इलाज किया जाएगा, जिन्हें चक्कर आना या कान में आवाजें आने जैसी समस्याएं होती हैं. पहले इन जांचों के लिए मरीजों को बाहर हजारों रुपए खर्च करने पड़ते थे, लेकिन अब यह सुविधा यहां मुफ्त में मिलेगी. लैब में 32 लाख रुपए की सियालेंडोस्कोपी मशीन लगाई गई है, जिससे लार ग्रंथि की पथरी का इलाज बिना चीरा लगाए मुंह के रास्ते एंडोस्कोपी तकनीक से किया जाएगा. इसके अलावा स्किल लैब और सेमिनार रूम में यूजी और पीजी छात्रों को प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जाएगा. SMS में तैयार हो रहा नया IPD टावर सवाई मानसिंह अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एक नया IPD टावर बनाया जा रहा है. इस 24 मंजिला भवन में 1200 बेड की क्षमता होगी. इसके बनने के बाद अस्पताल में कुल बेड की संख्या करीब 4000 हो जाएगी. वर्तमान में अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग में 2850 बेड हैं. 116 मीटर ऊंचे इस टावर की टॉप फ्लोर पर हेलीपैड भी बनाया जाएगा, जिससे मरीजों को एयरलिफ्ट की सुविधा मिल सकेगी. IPD टावर में 792 जनरल बेड, 150 कॉटेज बेड, 166 ICU बेड और 92 प्रीमियम रूम होंगे. इसके अलावा यहां वेटिंग हॉल, मेडिकल साइंस गैलरी, 20 ऑपरेशन थिएटर और रेडियोलॉजी व माइक्रोबायोलॉजी से जुड़ी एडवांस लैब्स भी बनाई जाएंगी. About the Author deep ranjan दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jaipur,Rajasthan

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