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खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना बन सकता है ‘जहर’! आखिर क्या कहता आयुर्वेद?

Last Updated:April 13, 2026, 16:46 IST Health Tips: खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना एक साधारण आदत बन गई है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है. सही समय पर पानी पीकर ही हम अपने पाचन और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रख सकते हैं. जौनपुर: ज्यादातर लोग खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना एक सामान्य आदत मानते हैं, लेकिन आयुर्वेद इसे शरीर के लिए हानिकारक बताता है. यह आदत धीरे-धीरे पाचन तंत्र को कमजोर कर सकती है और कई बीमारियों की वजह बन सकती है. आयुर्वेद में भोजन और पानी पीने के सही समय को लेकर विशेष नियम बताए गए हैं. एम.डी. (आयुर्वेद) डॉक्टर कुसुम ने बताया कि गलत समय पर पानी पीना शरीर के पाचन तंत्र पर सीधा असर डालता है. उन्होंने आयुर्वेद के जनक माने जाने वाले भगवान धन्वंतरि के एक प्रसिद्ध श्लोक के माध्यम से इसे समझाया. “अजीर्णे भेषजं वारि, जीर्णे वारि बलप्रदम।भोजने चामृतं वारि, भोजनान्ते विषप्रदम।।” इसका मतलब है कि अपच की स्थिति में पानी औषधि के समान काम करता है. भोजन पच जाने के बाद पानी पीना शरीर को ताकत देता है और भोजन के दौरान थोड़ा-थोड़ा पानी पीना अमृत के समान लाभकारी होता है. लेकिन भोजन के तुरंत बाद पानी पीना ‘विष’ यानी जहर के समान माना गया है. बढ़ सकती है मोटापा जैसी समस्याएंडॉक्टर कुसुम बताती हैं कि जब हम खाना खाते हैं, तब शरीर में पाचन के लिए जठराग्नि (डाइजेस्टिव फायर) सक्रिय होती है. यदि हम तुरंत बाद पानी पी लेते हैं, तो यह अग्नि कमजोर हो जाती है और खाना सही तरीके से पच नहीं पाता. इससे गैस, अपच, एसिडिटी और मोटापा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. समय पर पानी पीना स्वास्थ के लिए जरूरीखाना खाने के कम से कम 30 मिनट बाद ही पानी पीना चाहिए. वहीं, भोजन के दौरान जरूरत के अनुसार थोड़ा-थोड़ा पानी लेना फायदेमंद माना जाता है. यह पाचन को बेहतर बनाता है और शरीर को हाइड्रेट भी रखता है. आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में इस विषय पर अलग-अलग मत हैं, लेकिन आयुर्वेद में इसे लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं. इसलिए संतुलित और सही समय पर पानी पीने की आदत अपनाना स्वास्थ्य के लिए जरूरी माना जाता है. खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना एक साधारण आदत लग सकती है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार, यह शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है. सही समय पर पानी पीकर ही हम अपने पाचन और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रख सकते हैं. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jaunpur,Uttar Pradesh First Published : April 13, 2026, 16:46 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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गर्मियों में आम का सही चुनाव कैसे करें? लू से बचाव और एनर्जी होगी बूस्ट, जानिए डाइटीशियन की राय

Last Updated:April 13, 2026, 16:10 IST गर्मी आते ही बाजारों में आम की खुशबू और स्वाद दोनों छा जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कच्चा और पका आम सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि सेहत का भी सुपरफूड है? जानिए डाइटीशियन से इसके जबरदस्त फायदे… गर्मियों की शुरुआत होते ही बाजारों में आम की मिठास घुलने लगती है. फलों का राजा कहा जाने वाला आम अब फरीदाबाद की मंडियों में भी पहुंच चुका है और लोगों की थालियों में अपनी खास जगह बना रहा है. कोई कच्चे आम की खट्टी-मीठी चटनी का आनंद ले रहा है तो कोई पके आम के रसदार स्वाद का मजा ले रहा है. तेज धूप और लू के बीच कच्चे आम से बना पन्ना लोगों को राहत देता है, जबकि पके आम शरीर को ऊर्जा से भर देते हैं. लोकल18 से बातचीत में सर्वोदय हॉस्पिटल फरीदाबाद की चीफ डाइटीशियन डॉ. मीना कुमारी बताती हैं कि कच्चा और पका आम दोनों ही अपने-अपने तरीके से सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं. गर्मियों की शुरुआत में आने वाला कच्चा आम अक्सर चटनी और आम पन्ना के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. यह स्वाद में तो लाजवाब होता ही है, साथ ही लू से बचाने में भी मदद करता है और बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए लाभकारी होता है. डॉ. मीना के अनुसार, कच्चे आम का पन्ना शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है. यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और शरीर को ठंडक पहुंचाता है. गर्मियों में यह डिहाइड्रेशन और लू से बचाव में भी अहम भूमिका निभाता है, जिससे त्वचा भी सुरक्षित रहती है.  Add News18 as Preferred Source on Google वहीं दूसरी ओर, पका आम भी पोषण से भरपूर होता है. इसमें प्राकृतिक शुगर पाई जाती है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देती है. इसमें मौजूद विटामिन A आंखों की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है. जो लोग दुबले-पतले हैं, उनके लिए पका आम वजन बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है. इसलिए इसे सीमित मात्रा में डाइट में शामिल किया जा सकता है.  डॉ. मीना यह भी सलाह देती हैं कि घर पर बना मैंगो शेक ज्यादा सुरक्षित और हेल्दी विकल्प है. बाहर मिलने वाले मैंगो शेक में अक्सर अतिरिक्त चीनी और प्रिजर्वेटिव्स मिलाए जाते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. कई बार ये शेक लंबे समय तक स्टोर किए जाते हैं, जिससे इनके स्वाद और गुणवत्ता पर असर पड़ता है.  इसलिए गर्मियों में आम का सेवन जरूर करें, लेकिन संतुलित मात्रा और सही तरीके से करें. कच्चा हो या पका, दोनों ही रूपों में आम न सिर्फ स्वाद बढ़ाता है बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद साबित होता है. बस जरूरत है सही चुनाव और सही सेवन की, ताकि आप इस गर्मी में स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का पूरा आनंद ले सकें.  First Published : April 13, 2026, 16:10 IST

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approval of 12 crore for modernization of samastipur divisional railway hospital health news

Last Updated:April 13, 2026, 16:03 IST Samastipur Rail Hospital: समस्तीपुर मंडल रेल अस्पताल की सूरत बदलने वाली है. 12 करोड़ की भारी-भरकम राशि मंजूर होने के बाद अब अस्पताल में क्या-क्या नया होने जा रहा है? 30 नए ICU बेड और अत्याधुनिक मशीनों के आने से कैसे बदलेगा इलाज का अंदाज, जानिए इस बड़े बदलाव की पूरी कहानी. ख़बरें फटाफट समस्तीपुर: समस्तीपुर जिला वासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है. भारत सरकार की ओर से समस्तीपुर मंडल रेल अस्पताल के आधुनिकीकरण के लिए 12 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त और आधुनिक बनाना है. जिससे मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सके. नए भवन के निर्माण के साथ अस्पताल की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. खासकर रेलकर्मियों और उनके परिवारों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा. यह कदम न केवल समस्तीपुर बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लिए भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा.ओपीडी और भर्ती मरीजों के आंकड़े वर्ष 2025-26 के दौरान समस्तीपुर मंडल रेल अस्पताल की ओपीडी में कुल 1,23,712 मरीजों का इलाज किया गया. जो अस्पताल की बढ़ती उपयोगिता और भरोसे को दर्शाता है. इसी अवधि में 2,145 गंभीर मरीजों को भर्ती कर उनका सफल उपचार किया गया. इसके अलावा शल्य चिकित्सा सेवाओं के तहत 644 लघु ऑपरेशन और 20 बड़े ऑपरेशन भी सफलतापूर्वक संपन्न किए गए. चिकित्सकों की कुशल टीम द्वारा समय पर उपचार और बेहतर देखभाल के कारण मरीजों को सकारात्मक परिणाम मिले हैं. बताते चले की 12 करोड़ की लागत से जब भवन का निर्माण होगा तो लोगों को पहले से और भी ज्यादा सुविधा मिलने की उम्मीद है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Samastipur,Bihar First Published : April 13, 2026, 16:03 IST

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लिवर में जमी गंदगी बिना दवा के हो जाएगी साफ, डॉक्टर शुभम वत्स्य ने बताए 7 आसान तरीके, देखें वीडियो

  Natural Liver Detox Tips: लिवर हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो शरीर से टॉक्सिक एलीमेंट्स को बाहर निकालने, पाचन में मदद करने और मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करने का काम करता है. खराब खानपान, ज्यादा तला-भुना भोजन, शराब का सेवन और अनहेल्दी लाइफस्टाइल के कारण लिवर में धीरे-धीरे गंदगी और फैट जमा होने लगता है, जिससे फैटी लिवर जैसी समस्याएं हो सकती हैं. गैस्ट्रो के मशहूर डॉक्टर शुभम वत्स्य ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो में बताया है कि कुछ फूड्स लिवर डिटॉक्स करने में चमत्कारी होते हैं. इन मैजिक फूड्स का सेवन करने से नेचुरल तरीके से लिवर डिटॉक्स होता है.

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आंवला मुरब्बा के फायदे I lakhimpur kheri news

Last Updated:April 13, 2026, 15:43 IST गर्मियों की शुरुआत के साथ आंवला मुरब्बा की मांग बढ़ जाती है, क्योंकि यह शरीर को ठंडक देने के साथ पाचन सुधारने में मदद करता है. विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आंवला मुरब्बा सुबह खाली पेट खाने से कब्ज, एसिडिटी और पेट की गर्मी से राहत मिलती है. यह इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ खांसी-जुकाम में भी फायदेमंद माना जाता है और त्वचा में निखार लाने में सहायक है. लखीमपुर खीरी. गर्मियों का मौसम शुरू होते ही लोग अपने खान-पान को लेकर ज्यादा सजग हो जाते हैं. इस समय ऐसी चीजों की तलाश रहती है जो शरीर को ठंडक पहुंचाए और साथ ही सेहत के लिए भी फायदेमंद हो. यही कारण है कि पारंपरिक देसी खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है, जिनमें मुरब्बा एक खास स्थान रखता है. गर्मियों के मौसम में मुरब्बा की डिमांड अधिक रहती है क्योंकि मुरब्बा हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद पाया जाता है. खीरी जिले के तराई इलाके में आंवला के पौधे अधिक पाए जाते हैं, ऐसे में सर्दियों के मौसम में आंवला आपको बाजारों में मिल जाएगा. वहीं गर्मियों के मौसम में आंवला का मुरब्बा किसी देसी औषधि से कम नहीं है. आंवला में विटामिन सी और एंटी आक्सीडेंट से भरपूर होता है ऐसे में पाचन से लेकर कई बीमारियों के लिए रामबाण माना जाता है. लोकल 18 से बातचीत करते हुए राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की डॉक्टर ऋचा श्रीवास्तव ने बताया कि गर्मियों के मौसम में सुबह खाली पेट मुरब्बा का सेवन करने से कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याओं से आपको राहत मिल जाएगी. पेट साफ ना हो पाने के कारण मुंह में छाले हो जाते हैं, ऐसे में मुरब्बा का सेवन करने से पेट की गर्मी शांत होती है. आंवला का मुरब्बा इम्यूनिटी बूस्टर होता है, जोकि हमारे शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है. बदलते मौसम के कारण खांसी, जुकाम जैसी समस्याओं से भी राहत दिलाता है, सुबह खाली पेट मुरब्बा खाने से त्वचा में निखार आता हैं. मुरब्बा बनाने की रेसिपीआप आसानी से घर पर मुरब्बा बना सकते हैं इसके लिए सबसे पहले आपको आंवला लेना होगा, उसके बाद आंवला को साफ़ पानी से धो लें. फिर आंवला में छेद कर गर्म पानी में उबाल लें. फिर 1 किलो चीनी की चाशनी तैयार कर ले, चाशनी की सफाई के लिए 1 चम्मच दूध डालें और ऊपर आने वाले जांघ को हटा दें. चिपचिपा होने तक उबालें, इसमें आप इलायची पाउडर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. फिर उसके बाद उबले हुए आंवला को चाशनी में डूबा दे. 4 से 5 दिन के लिए आप मुरब्बा को एक सुरक्षित स्थान पर रख दें, इसके बाद आप इसका सेवन कर सकते हैं. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Lakhimpur,Kheri,Uttar Pradesh First Published : April 13, 2026, 15:43 IST

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माएं-बुआएं सही या गलत…. पीरियड्स में खट्टा खाना सच में नुकसान करता है? डॉक्टर ने बताया पूरा सच

Last Updated:April 13, 2026, 15:00 IST Diet During Periods: पीरियड्स हर महिला के लिए अलग-अलग अनुभव लेकर आते हैं. किसी के लिए यह केवल सामान्य थकान होती है, तो किसी के लिए पेट में असहनीय मरोड़ यानी क्रैम्प्स (Cramps), कमर दर्द और मूड स्विंग्स (Mood Swings) जैसी बड़ी परेशानी. अक्सर इन दिनों सिर्फ मीठा या जंक फूड खाने का मन करता है. अक्सर महिलाएं पूछती हैं कि पीरियड्स में क्या खाना चाहिए ताकि दर्द कम हो और शरीर में कमजोरी न आए. पीरियड्स को लेकर हमारे यहां अब भी कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं. खासकर खान-पान को लेकर अक्सर माएं-बुआएं सलाह देती हैं कि इन दिनों खट्टा या ठंडा नहीं खाना चाहिए. कई लड़कियां बिना किसी ठोस कारण को जाने अपनी पसंदीदा चीजें छोड़ देती हैं. असल में क्या पीरियड्स में खट्टा खाने से कोई नुकसान होता है या ये सिर्फ सुनी-सुनाई बातें हैं? सही जानकारी ज्यादा जरूरी है, वरना लोग बेवजह परेशान रहते हैं. आइए डॉक्टर से जानते हैं पूरी सच्चाई. लोकल18 को सर्वोदय अस्पताल फरीदाबाद की गाइनॉकॉलोजिस्ट डॉ. रैना चावला ने बताया कि पीरियड्स एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो हर महिला के जीवन का हिस्सा होती है और आमतौर पर 12 से 50 साल की उम्र तक रहती है. इसके बावजूद समाज में इसे लेकर कई गलतफहमियां फैली हुई हैं. खासकर खट्टा या ठंडा खाने से जुड़ी बातें इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. न इससे पीरियड्स का फ्लो बदलता है और न ही दर्द पर कोई असर पड़ता है. यानी ये सिर्फ एक बाद झूठ हैं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है. Add News18 as Preferred Source on Google डॉ. रैना बताती हैं कि पीरियड्स के दौरान सबसे जरूरी है पोषक और संतुलित आहार लेना. इस समय शरीर में खून की कमी होना आम बात है, खासकर जब ब्लीडिंग ज्यादा हो रही हो. ऐसे में आयरन और प्रोटीन से भरपूर चीजें खाना फायदेमंद होता है, जैसे पालक, मेथी, गुड़, चना, दाल, सेब और केला। ये शरीर को जरूरी ताकत देते हैं. साथ ही, पानी और जूस का भरपूर सेवन करना चाहिए, ताकि शरीर डिहाइड्रेट न हो. वह आगे बताती हैं कि इन दिनों कमजोरी और दर्द लगभग हर लड़की और महिला को होता है. दर्द कम करने में काजू, बादाम, पिस्ता जैसे ड्राई फ्रूट्स, जिनमें मैग्नीशियम होता है, मददगार हो सकते हैं. हालांकि ऐसा कोई एक फूड नहीं है, जिससे दर्द पूरी तरह खत्म हो जाए, लेकिन सही खान-पान से काफी फर्क पड़ता है. जिन महिलाओं को ज्यादा दर्द या ब्लीडिंग होती है, उन्हें अपनी डाइट पर खास ध्यान देना चाहिए. वह बताती हैं कि पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और बाहर का खाना कम ही खाना चाहिए. इस समय घर का हल्का-फुल्का और हेल्दी भोजन सबसे बेहतर होता है. साथ ही, थोड़ा-बहुत योग या हल्की एक्सरसाइज भी फायदेमंद रहती है. शरीर थोड़ा एक्टिव रहता है तो आराम भी मिलता है. असल में पीरियड्स के दौरान खट्टा खाने से कुछ भी नुकसान नहीं होता. बस सही जानकारी रखें और अपनी डाइट व व्यवहार को संतुलित रखें, यही सबसे बेहतर है. यानी पीरियड्स में खट्टा खाया जा सकता है, इसमें कोई दिक्कत नहीं है.  First Published : April 13, 2026, 15:00 IST

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दिखने में आम, असर में जबरदस्त! पहाड़ों में उगने वाला ये पौधा देता है पथरी से राहत, जानें इस्तेमाल का तरीका

Last Updated:April 13, 2026, 14:45 IST Pattharchatta for Kidney Stone: पहाड़ों की पथरीली जमीन पर उगने वाला पत्थरचट्टा आयुर्वेद का वह अनमोल तोहफा है, जो अपने नाम के अनुरूप ही शरीर की पथरी को काटकर बाहर निकालने की ताकत रखता है. किडनी स्टोन से लेकर पेट की गैस और यूरिन इन्फेक्शन तक, यह छोटा सा पौधा बड़े-बड़े रोगों में रामबाण की तरह काम करता है. खास बात यह है कि इसके मोटे और रसीले पत्तों का सही इस्तेमाल आपको बिना किसी महंगी दवा के स्वस्थ रख सकता है. डॉक्टर से जानिए इस पौधे के फायदे, इस्तेमाल का सही तरीका और वो सावधानियां जो आपके लिए जानना बेहद जरूरी हैं. उत्तराखंड में पाया जाने वाला पत्थरचट्टा एक औषधीय पौधा है, जिसे आयुर्वेद में बेहद खास माना गया है. पहाड़ी क्षेत्रों में यह आसानी से पाया जाता है, लोग इसे घरेलू इलाज के रूप में लंबे समय से इस्तेमाल करते आ रहे हैं. इसके मोटे और रसीले पत्तों में कई प्रकार के औषधीय गुण मौजूद होते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद करते हैं. खास बात यह है कि यह पौधा बिना ज्यादा देखभाल के भी उग जाता है. इसका नियमित और सही तरीके से उपयोग कई छोटी-बड़ी बीमारियों में राहत दिला सकता है. यही वजह है कि आज भी ग्रामीण इलाकों में लोग इसे प्राकृतिक दवा के रूप में भरोसे के साथ अपनाते हैं. डॉ. ऐजल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि पत्थरचट्टा को किडनी स्टोन यानी पथरी की समस्या में खास तौर पर फायदेमंद माना जाता है. इसके पत्तों में ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में बनने वाले कैल्शियम ऑक्सलेट क्रिस्टल को तोड़ने में मदद करते हैं. इससे पथरी धीरे-धीरे छोटे टुकड़ों में बदलकर पेशाब के रास्ते बाहर निकल सकती है. नियमित सेवन से नई पथरी बनने की संभावना भी कम हो सकती है. हालांकि यह असर व्यक्ति की स्थिति और पथरी के आकार पर निर्भर करता है. इसलिए अगर पथरी बड़ी हो या तेज दर्द हो रहा हो तो घरेलू उपाय के साथ डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी होता है, ताकि किसी भी तरह की जटिलता से बचा जा सके. पत्थरचट्टा सिर्फ किडनी स्टोन ही नहीं, बल्कि पेट से जुड़ी कई समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है. इसके सेवन से कब्ज, गैस, अपच और पेट दर्द जैसी परेशानियों में राहत मिल सकती है. यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है, आंतों की सफाई में मदद करता है. जिन लोगों को बार-बार पेट में जलन या अल्सर की समस्या होती है, उनके लिए भी यह पौधा उपयोगी हो सकता है. इसका नियमित सेवन शरीर को हल्का और स्वस्थ महसूस कराता है. हालांकि, किसी भी पुरानी या गंभीर पेट की बीमारी में इसे अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है, ताकि सही मात्रा और तरीका तय किया जा सके. Add News18 as Preferred Source on Google पत्थरचट्टा में सूजन-रोधी और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो इसे बाहरी उपयोग के लिए भी उपयोगी बनाते हैं. अगर शरीर में कहीं सूजन, चोट या घाव हो जाए, तो इसके पत्तों का लेप लगाने से राहत मिल सकती है. यह घाव को जल्दी भरने और संक्रमण से बचाने में मदद करता है. ग्रामीण इलाकों में लोग छोटे-मोटे घावों पर इसका उपयोग पारंपरिक उपचार के रूप में करते हैं. इसके अलावा कीड़े के काटने या हल्की जलन में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि गहरे या गंभीर घाव में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी होता है, क्योंकि हर स्थिति में घरेलू इलाज पर्याप्त नहीं होता है. पत्थरचट्टा को ब्लड शुगर कंट्रोल करने में भी सहायक माना जाता है. इसके नियमित सेवन से शरीर में शुगर का स्तर संतुलित रखने में मदद मिल सकती है. यह यूरिन इन्फेक्शन यानी पेशाब से जुड़ी समस्याओं में भी राहत देता है. इसके प्राकृतिक गुण बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते हैं, जिससे जलन और संक्रमण कम हो सकता है. हालांकि, डायबिटीज या गंभीर यूरिन इन्फेक्शन के मरीजों को इसे दवा का विकल्प नहीं समझना चाहिए. इसे केवल सहायक उपाय के रूप में ही अपनाना बेहतर होता है, डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं को जारी रखना जरूरी है. पत्थरचट्टा का सेवन करना बेहद आसान है, लेकिन सही मात्रा और तरीका जानना जरूरी है. आमतौर पर इसके 1-2 ताजे पत्ते सुबह खाली पेट चबाना सबसे सरल और प्रभावी तरीका माना जाता है. इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर भी पिया जा सकता है. कुछ लोग इसका जूस बनाकर भी सेवन करते हैं. बाहरी उपयोग के लिए पत्तों को पीसकर लेप बनाया जा सकता है. ध्यान रखें कि अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है. इसलिए हमेशा सीमित मात्रा में और जरूरत के अनुसार ही इसका उपयोग करना चाहिए, ताकि इसके लाभ सुरक्षित तरीके से मिल सकें. जहां पत्थरचट्टा के कई फायदे हैं, वहीं इसका अधिक सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है. जरूरत से ज्यादा पत्ते खाने पर गले में सूखापन, थकान या कमजोरी महसूस हो सकती है. कुछ लोगों को इससे एलर्जी या पेट में हल्की परेशानी भी हो सकती है. गर्भवती महिलाओं, बच्चों और गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. साथ ही, अगर किसी को पहले से कोई दवा चल रही है, तो उसके साथ इसका सेवन करने से पहले विशेषज्ञ से पूछना जरूरी होता है. सही जानकारी और सावधानी के साथ ही इसका उपयोग सुरक्षित और लाभकारी साबित हो सकता है. पत्थरचट्टा एक असरदार घरेलू औषधि है, लेकिन हर स्थिति में यह पूरी तरह इलाज नहीं हो सकता. खासतौर पर किडनी स्टोन अगर बड़ा हो या तेज दर्द, उल्टी या पेशाब में खून जैसी समस्या हो रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. इसी तरह, लंबे समय तक पेट दर्द, ब्लड शुगर या यूरिन इन्फेक्शन की समस्या बनी रहने पर भी मेडिकल जांच जरूरी होती है. घरेलू उपाय केवल शुरुआती या हल्की समस्याओं में ही कारगर होते हैं. सही समय पर डॉक्टर की सलाह लेने से गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है और सही इलाज मिल पाता है. First Published : April 13, 2026, 14:45 IST

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अस्पताल में चूहे-बिल्ली आना मरीजों के लिए कितना खतरनाक? किन बीमारियों का बढ़ेगा रिस्क, डॉक्टर से समझें

Diseases Linked to Rats and Cats: अस्पतालों को मरीजों के लिए सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है. उम्मीद की जाती है कि अस्पताल में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाएगा, लेकिन देश के कई नामी अस्पताल इस पर खरे नहीं उतर रहे हैं. खासतौर से सरकारी अस्पतालों का हाल-बेहाल है. पिछले साल इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में चूहों के काटने से नवजात बच्ची की मौत का मामला सामने आया था, जिसने अस्पतालों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे. अब भोपाल एम्स से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्हें देखकर आप हैरान रह जाएंगे. भोपाल एम्स के NICU में चूहों का आतंक देखने को मिल रहा है. एम्स प्रशासन का कहना है कि पेस्ट कंट्रोल के बावजूद चूहे कंट्रोल नहीं हो रहे हैं. कई अस्पतालों में कुत्ते और बिल्ली घूमते हुए भी नजर आते हैं. अब सवाल है कि अस्पतालों में कुत्ते-बिल्ली और चूहे घूमना मरीजों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है और इससे कौन-कौन सी बीमारियां फैल सकती हैं. इस बारे में डॉक्टर से जरूरी बातें जान लेते हैं. गुरुग्राम के मारेंगो एशिया हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट की फिजीशियन डॉ. दीक्षा गोयल ने News18 को बताया कि अस्पताल में कुत्ता, बिल्ली और चूहे घूमने से कई गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है. प्रेग्नेंट महिलाओं, नवजात शिशुओं और कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीजों को सबसे ज्यादा जोखिम होता है. कुत्ते के काटने से रेबीज हो सकता है, बिल्ली के काटने से कैट स्क्रैच डिजीज और चूहे के काटने से लेप्टोस्पायरोसिस जैसी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं. चूहे और बिल्लियां कई खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस लेकर घूमते हैं. इनके संपर्क में आने से भी जानलेवा कंडीशंस पैदा हो सकती हैं. ऐसे में अस्पतालों में इनकी मौजूदगी मरीजों के लिए गंभीर समस्या है. इससे अस्पताल के स्टाफ के लिए भी खतरा पैदा हो जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. कुत्ते बन सकते हैं रेबीज का कारण डॉक्टर दीक्षा के मुताबिक अस्पतालों में आवारा कुत्ते घूमना गंभीर समस्या है, क्योंकि अगर कुत्ता किसी को काट ले, तो इससे लोगों में रेबीज वायरस फैल सकता है. ऐसी कंडीशन में सही समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवानी पड़ेगी और अगर इसमें लापरवाही बरती गई, तो व्यक्ति की जान जा सकती है. अगर कुत्ता किसी खुले घाव को चाट ले, तब भी उसकी लार में मौजूद वायरस शरीर में पहुंच सकता है. कुत्ते की जरा सी खरोंच भी रेबीज की वजह बन सकती है. बच्चों को कुत्ते जल्दी टारगेट करते हैं और लोगों को इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए. कुत्ते से जितना दूर रहेंगे, उतना सुरक्षित रहेंगे. बिल्ली फैला सकती है कई बीमारियां एक्सपर्ट ने बताया कि अस्पताल में बिल्ली आने से कई बीमारियां फैल सकती हैं. बिल्ली के काटने से कैट स्क्रैच डिजीज हो सकती है, जिसकी वजह बिल्ली में पाया जाने वाला बार्टोनेला बैक्टीरिया होता है. इस डिजीज में प्रभावित हिस्से के पास लिम्फ नोड्स में सूजन और बुखार शामिल है. इसका रिस्क 20 साल से कम उम्र के लोगों को ज्यादा होता है. इसके अलावा बिल्लियों के मल के संपर्क में आने से टॉक्सोप्लाज्मोसिस इंफेक्शन हो सकता है. यह इंफेक्शन टॉक्सोप्लाज्मा गॉन्डियाइ नामक पैरासाइट के कारण होता है. यह बिल्ली के आसपास घूमने से हो सकता है. पालतू बिल्ली से बच्चों और लोगों में यह इंफेक्शन फैल सकता है. बच्चों में यह बेहद खतरनाक हो सकता है. इसमें बहुत ज्यादा तेज फीवर और मिर्गी होने लगती है. यह बिल्ली के मल से फैलता है और जो उसे क्लीन करता है, उसे भी इस इंफेक्शन का रिस्क सबसे ज्यादा होता है. अगर प्रेग्नेंट लेडी को टॉक्सोप्लाज्मोसिस इंफेक्शन हो जाए, तो यह सीरियस कंडीशन पैदा कर सकता है. कई बार बिल्लियां टाइफाइड बैक्टीरिया और क्रिप्टोस्पोरिडियम पैरासाइट को फैला देती हैं. ये इंफेक्शन आमतौर पर तब होते हैं, जब बिल्ली आपके खाने में मुंह मार दे या उसका लार खाने में गिर जाए. इस समस्या में पेट में ऐंठन और दस्त अचानक शुरू हो सकते हैं. कभी-कभी मतली, उल्टी, बुखार और कमजोरी जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं. कई मरीजों को एंटीपैरासाइट दवाई लेनी पड़ती है, ताकि इस परेशानी से छुटकारा मिल सके. इसके अलावा भी बिल्ली कई अन्य बीमारियां फैला सकती है. अस्पताल में चूहे घूमने से क्या खतरे हैं? डॉक्टर दीक्षा गोयल कहती हैं कि अस्पताल में चूहे घूमने से भी कई तरह के संक्रमण फैल सकते हैं. इसमें लेप्टोस्पायरोसिस सबसे ज्यादा कॉमन है. यह चूहे की यूरिन और फीकल मैटर से फैलता है. चूहे अगर खाने में मुंह मार दें, तब भी यह बीमारी फैल सकती है. इसके अलावा रैट बाइट फीवर बहुत खतरनाक होता है, जो चूहे के काटने से फैलता है. इसमें 7 से 10 दिन में व्यक्ति की मौत हो सकती है और रैट बाइट के 2 से 10 दिन के बाद इसके लक्षण शुरू हो सकते हैं. घर के अंदर भी अगर किसी को चूहा काट ले, तो यह समस्या हो सकती है. इससे बचने के लिए रैट बाइट के बाद उस जगह को साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ किया जाता है. इसके बाद टिटनेस का इंजेक्शन दिया जाता है और फिर एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं. इन समस्याओं से बचने के लिए अस्पतालों में पेस्ट कंट्रोल कराना जरूरी है. घरों में लोग DEET वाले रिपेलेंट यूज कर सकते हैं.

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organ donation in RML delhi: दिल्ली आरएमएल में ब्रेन डेड महिला का अंगदान, तीन मरीजों को नई जिंदगी

होमताजा खबरDelhi ब्रेन डेड महिला का दान बना रक्षा कवच, दिल्ली से लखनऊ तक बचीं तीन जिंदगियां Last Updated:April 13, 2026, 13:23 IST Organ donation in Delhi: एक ब्रेन डेड 45 महिला के दान की बदौलत तीन लोगों को नई ज‍िंदगी म‍िली. दिल्‍ली के आरएमएल अस्‍पताल में पर‍िवार ने मह‍िला के किडनी, लिवर, हार्ट दान किए, जो दिल्ली और लखनऊ के तीन गंभीर मरीजों को लगाए गए. ऑर्गन डोनेशन से ब्रेन डेड मह‍िला ने बचाई 3 लोगों की जान. RML Delhi News: अंगदान कितना महान होता है, ये इस घटना से आपको समझ में आ सकता है. दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में उस वक्त मरीजों, तीमारदारों से लेकर डॉक्टरों के सिर इन ब्रेन डेड महिला के सम्मान में झुक गए, जिनके दान की बदौलत दिल्ली से लखनऊ तक तीन लोगों की जिंदगियां वापस लौट आईं और इनके दर्जनों परिजनों के चेहरों पर खुशी की लहर आ गई. वहीं दर्द की इस कठिन घड़ी में भी मानवता की मिसाल पेश करते हुए एक परिवार ने तीन अन्य परिवारों को नई जिंदगी का तोहफा दिया है. 12 अप्रैल 2026 को अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (ABVIMS) एंड डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल ने अपना छठा मल्टी-ऑर्गन रिट्रीवल सफलतापूर्वक पूरा किया. 45 वर्षीय एक महिला सिर में खून के रिसाव (cerebral hemorrhage) के कारण ब्रेन डेड हो गई थीं. उनके परिवार ने बेहद मुश्किल समय में भी बहुत ही उदार और नेक फैसला लिया. उन्होंने अपनी बेटी/पत्नी/मां के किडनी, लीवर और हार्ट दान करने की सहमति दे दी. मौत से जूझ रहे 3 मरीजों के बचे प्राण . महिला के ऑर्गन डोनेशन में से एक किडनी आरएमएल अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के एंड-स्टेज किडनी डिजीज मरीज को लगाई गई. . महिला का लिवर दिल्ली के आर्मी अस्पताल (रिसर्च एंड रेफरल) RR अस्पताल के एंड-स्टेज लीवर डिजीज मरीज को लगाया गया. . जबकि महिला का हार्ट लखनऊ के SGPGI अस्पताल में भेजा गया जहां कार्डियक फेलियर से जूझ रहे मरीज को ट्रांसप्लांट किया गया. इस दौरान अस्पताल के मेडिसिन और क्रिटिकल केयर विभाग के डॉक्टरों ने परिवार को ब्रेन डेड की स्थिति समझाई. ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर ने अंगदान के बारे में विस्तार से बताया. परिवार की स्वैच्छिक सहमति के बाद नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लंट ऑर्गनाइजेशन (National Organ and Tissue Transplant Organisation) ने अंगों को जरूरत के अनुसार 3 अलग-अलग संस्थानों में देने का फैसला किया. 13 अप्रैल की सुबह 3 बजकर 30 मिनट पर कार्डियक एनेस्थीसिया और एनेस्थीसिया टीम की मदद से CTVS टीम ने हार्ट, लिवर ट्रांसप्लांट टीम ने लिवर और यूरोलॉजी टीम ने महिला की किडनी रिट्रीव की. हार्ट को एयर एंबुलेंस से लखनऊ भेजा गया, जबकि लीवर को दिल्ली पुलिस द्वारा बनाए गए ग्रीन कॉरिडोर से RR अस्पताल पहुंचाया गया. अंगदान के बाद मृतक का शरीर परिवार को पूरे सम्मान के साथ सौंप दिया गया. पूरी प्रक्रिया ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर और नोडल ऑफिसर (ट्रांसप्लांट) अस्पताल के डायरेक्टर, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और एडिशनल मेडिकल सुपरिंटेंडेंट की निगरानी में की गई. इस दौरान इस अंगदान ने फिर साबित कर दिया कि मौत भी जिंदगी बन सकती है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 13, 2026, 13:23 IST

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पीठ पीछे बात करने में मिलनसार लोग सबसे आगे:गॉसिप बुरी नहीं, समाज को जोड़ने में इसकी बड़ी भूमिका - मनोवैज्ञानिक

पीठ पीछे बात करने में मिलनसार लोग सबसे आगे:गॉसिप बुरी नहीं, समाज को जोड़ने में इसकी बड़ी भूमिका – मनोवैज्ञानिक

अक्सर पीठ पीछे बात करने को लोग बुराई मानते हैं, लेकिन मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यह इंसानी व्यवहार का बुनियादी हिस्सा है। अमेरिका में नॉक्स कॉलेज के मनोवैज्ञानिक फ्रैंक मैकएंड्रयू के मुताबिक गॉसिप सिर्फ किसी की छवि बिगाड़ना नहीं, बल्कि किसी गैर-मौजूद व्यक्ति के बारे में चर्चा भी है। दशकों की रिसर्च बताती है कि गॉसिप ने सभ्यता की शुरुआत से समाज को जोड़े रखने में बड़ी भूमिका निभाई है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर मेगन रॉबिन्स के मुताबिक गॉसिप से लोग बिना खुद गलती किए सामाजिक नियम सीख लेते हैं। ज्यादातर गॉसिप न्यूट्रल, जेंडर मिथक भी टूटा रॉबिन्स की रिसर्च के अनुसार, गॉसिप का बड़ा हिस्सा न तो बुरा होता है और न ही अच्छा, बल्कि यह न्यूट्रल जानकारी होती है। स्टडी ने उस मिथक को भी तोड़ दिया कि केवल महिलाएं गॉसिप करती हैं। सच यह है कि पुरुष भी इसमें बराबर के भागीदार हैं। ज्यादा मिलनसार लोग गॉसिप करने में सबसे आगे पाए गए। अच्छी गॉसिप दूसरों को जवाबदेह बनाती है विशेषज्ञों के अनुसार, गॉसिप की अच्छाई या बुराई इरादे पर टिकी है। अच्छी गॉसिप दूसरों को जवाबदेह बनाती है। बुरी गॉसिप का मकसद केवल अपमान करना होता है। इसलिए, बोलने से पहले यह जरूर सोचें कि आप रिश्ते जोड़ रहे हैं या तोड़ रहे हैं। एक्सपर्ट कहते हैं-यह एक सोशल स्किल भी मैकएंड्रयू के अनुसार, गॉसिप एक सामाजिक कौशल है। एक कुशल गॉसिपर वह है जो जानकारी तो रखता है, लेकिन उसे जिम्मेदारी और गोपनीयता के साथ साझा करता है। ऐसे भरोसेमंद व्यक्ति का समाज में सम्मान होता है।

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