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Wrestler Meenakshi Goyat on Vinesh Phogat Asian Games Trail Match

Wrestler Meenakshi Goyat on Vinesh Phogat Asian Games Trail Match

मीनाक्षी गोयत मूल रूप से जींद जिले के चाबरी गांव की रहने वाली हैं। फिलहाल वह अपने परिवार के साथ सोनीपत में रह रही हैं।

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एशियन गेम्स-2026 के ट्रायल्स के सेमीफाइनल में रेसलर विनेश को हराने वाली मीनाक्षी गोयत मूल रूप से जींद की रहने वाली हैं। फिलहाल कई सालों से वह अपने परिवार के साथ सोनीपत में रह रही हैं। मीनाक्षी का कहना है कि मैंने अपनी पूरी ताकत लगाकर विनेश के सामने मैच जीता।

फाइनल में हार पर मीनाक्षी ने कहा कि रेफरी ने अंतिम पंघाल को गलत पॉइंट दिए। हमने वीडियो यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) को भेजा है। जल्द ही पता चला जाएगा कि मेरा ऑब्जेक्शन सही था या गलत।

दैनिक भास्कर से बातचीत में मीनाक्षी ने कुश्ती की शुरुआत, अपने रूटीन और एशियन गेम्स के ट्रायल के बारे में बताया। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…

रिपोर्टर: कुश्ती में आने की प्रेरणा कहां से मिली? मीनाक्षी: मेरे पिता कोई पहलवान नहीं हैं। मैं WWE फाइट देखती थी। जॉन सीना की फैन होने की वजह से कुश्ती में दिलचस्पी बढ़ी। स्कूल टाइम में ही मैं कुश्ती के मैदान में उतर गई थी। मेरे पिता साधारण किसान हैं और करीब दो एकड़ जमीन है। उन्हें रेसलिंग के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन जब मैंने कुश्ती खेलने की बात कही तो उन्होंने बेटे की तरह मुझे निडानी गांव के स्पोर्ट्स स्कूल में भेजना शुरू कर दिया। वहीं हॉस्टल में रहना शुरू किया था, हालांकि ज्यादातर समय अप-डाउन भी करती थी।

रिपोर्टर: कुश्ती को लेकर परिवार और गांववालों ने क्या कहा? मीनाक्षी: पहले कुछ लोग पिता से यह कहते थे कि लड़कियों पर इतना पैसा क्यों खर्च कर रहे हो, पैसा खर्च करना है तो लड़के को आगे बढ़ाओ। मेरे पिता ने मुझे छोटी उम्र में ही कुश्ती के मैदान में भेजना शुरू कर दिया था। उस समय मुझे सामाजिक तानों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन जैसे-जैसे बड़ी हुई तो लोगों की बातें सुनती थी। मेरे पिता को ताने दिए जाते थे कि लड़कियों को इतना बाहर क्यों भेजते हो।

मीनाक्षी सोनीपत में अपने परिवार के साथ रहती हैं। वे चार भाई-बहन हैं। उनकी बड़ी बहन की शादी हो चुकी है।

रिपोर्टर: रूटीन और डाइट क्या रहती है? मीनाक्षी: मैं कुलदीप मलिक एकेडमी में रोज सुबह और शाम अलग-अलग समय पर करीब तीन-तीन घंटे प्रैक्टिस करती हूं। मैं वेजीटेरियन हूं और घर का खाना ही खाती हूं। बाहर के खाने से परहेज रखती हूं। खास तौर पर घर में माता-पिता ने गाय और भैंस रखी हुई हैं और उनका घी-दूध खाकर ही पहलवानी करती हूं। प्रोटीन और अन्य जरूरतों के लिए कुछ सप्लीमेंट भी लेने पड़ते हैं। मैंने कभी नॉनवेज नहीं खाया।

रिपोर्टर: एशियन गेम्स ट्रायल को लेकर कैसे तैयारी की? मीनाक्षी: मैं पहले से ही प्रैक्टिस कर रही थी, लेकिन मुझे यह मालूम नहीं था कि विनेश फोगाट मेरे वेट वर्ग में रहेंगी। जब पता चला कि ट्रायल में मेरा मुकाबला विनेश के साथ होगा तो मैंने खुद को पहले की तुलना में और ज्यादा तैयार किया। कुश्ती में हार-जीत नहीं देखनी, बस कुश्ती को बहुत अच्छे ढंग से लड़ना है। आखिरी क्षण तक फोकस रखना है, क्योंकि विनेश एक सीनियर खिलाड़ी हैं और उनका एक्सपीरियंस भी बहुत ज्यादा है। उनके सामने टिकने के लिए पहले से दिमाग में बात थी कि गलतियां कम से कम करनी हैं।

रिपोर्टर: विनेश के साथ मुकाबले को लेकर दिमाग में कोई स्ट्रेस था? मीनाक्षी: ऐसा नहीं है कि मुझे स्ट्रेस था, लेकिन हां, थोड़ी बहुत घबराहट जरूर थी। इस मुकाबले को लेकर मैं बहुत ज्यादा एक्साइटेड थी। कोई भी पहलवान जब मैदान में होता है तो हर कोई जीत के लिए आता है। गलती तो शायद विनेश ने भी नहीं की थी। वह भी अपनी पूरी ताकत के साथ लड़ रही थी।

रिपोर्टर: एशियन गेम्स के लिए किस प्रकार की तैयारी रही? मीनाक्षी: अलग-अलग चैंपियनशिप और गेम्स के लिए मैं लगातार तैयारी करती रहती हूं। एशियन गेम्स के लिए कई साल से तैयारी चल रही है। ऐसे में कुछ अलग तरीके से भी कमियों में सुधार करते हुए तैयारी करनी पड़ती है। अपनी जीत कैसे लेकर आनी है, इसी को लेकर मैट और ग्राउंड दोनों पर तैयारी चल रही थी।

रिपोर्टर: ट्रायल के फाइनल में हार को कैसे देखती हैं? मीनाक्षी: फाइनल मुकाबला अंतिम पंघाल से हुआ था। हमने इसकी वीडियो यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग को भेजी है। वीडियो की समीक्षा के बाद यदि उन्हें लगेगा कि मैं जीत रही थी, तो फैसला मेरे पक्ष में आ सकता है। कई बार जब दोनों खिलाड़ी बराबरी के स्तर के होते हैं, तो मुकाबला पैसिविटी या एक-दो पॉइंट के अंतर से तय होता है। ऐसे में रेफरी और जज के फैसले का परिणाम पर बड़ा असर पड़ता है। कई बार गलत पॉइंट भी दे दिए जाते हैं।

कोच बोले- अंतिम पंघाल से हरवाया गया

मीनाक्षी गोयत के कोच अजय मलिक ने बताया कि मीनाक्षी ने अपनी तैयारी के अनुसार ट्रायल में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। वह सुबह-शाम तीन से चार घंटे प्रैक्टिस करती थी। उसने एशियन गेम्स के लिए कड़ी मेहनत की थी, लेकिन अंतिम पंघाल के सामने उसे हरवाया गया। हमने यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग को इस बारे में लिखकर भेजा है और वहां से जवाब आने के बाद ही आगे का पता चल पाएगा।

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ओलिंपियन रेसलर विनेश फोगाट शनिवार को एशियन गेम्स ट्रायल का सेमीफाइनल मैच हार गईं। 53 किलो कैटेगरी में लगातार दो बाउट जीतने के बाद उन्हें जींद की मीनाक्षी गोयत ने हराया। विनेश अब एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाएंगी। पढ़ें पूरी खबर…

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एशियन गेम्स-2026 के ट्रायल्स के सेमीफाइनल में रेसलर विनेश को हराने वाली मीनाक्षी गोयत मूल रूप से जींद की रहने वाली हैं। फिलहाल कई सालों से वह अपने परिवार के साथ सोनीपत में रह रही हैं। मीनाक्षी का कहना है कि मैंने अपनी पूरी ताकत लगाकर विनेश के सामने मैच जीता।

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दैनिक भास्कर से बातचीत में मीनाक्षी ने कुश्ती की शुरुआत, अपने रूटीन और एशियन गेम्स के ट्रायल के बारे में बताया। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…

रिपोर्टर: कुश्ती में आने की प्रेरणा कहां से मिली? मीनाक्षी: मेरे पिता कोई पहलवान नहीं हैं। मैं WWE फाइट देखती थी। जॉन सीना की फैन होने की वजह से कुश्ती में दिलचस्पी बढ़ी। स्कूल टाइम में ही मैं कुश्ती के मैदान में उतर गई थी। मेरे पिता साधारण किसान हैं और करीब दो एकड़ जमीन है। उन्हें रेसलिंग के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन जब मैंने कुश्ती खेलने की बात कही तो उन्होंने बेटे की तरह मुझे निडानी गांव के स्पोर्ट्स स्कूल में भेजना शुरू कर दिया। वहीं हॉस्टल में रहना शुरू किया था, हालांकि ज्यादातर समय अप-डाउन भी करती थी।

रिपोर्टर: कुश्ती को लेकर परिवार और गांववालों ने क्या कहा? मीनाक्षी: पहले कुछ लोग पिता से यह कहते थे कि लड़कियों पर इतना पैसा क्यों खर्च कर रहे हो, पैसा खर्च करना है तो लड़के को आगे बढ़ाओ। मेरे पिता ने मुझे छोटी उम्र में ही कुश्ती के मैदान में भेजना शुरू कर दिया था। उस समय मुझे सामाजिक तानों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन जैसे-जैसे बड़ी हुई तो लोगों की बातें सुनती थी। मेरे पिता को ताने दिए जाते थे कि लड़कियों को इतना बाहर क्यों भेजते हो।

मीनाक्षी सोनीपत में अपने परिवार के साथ रहती हैं। वे चार भाई-बहन हैं। उनकी बड़ी बहन की शादी हो चुकी है।

रिपोर्टर: रूटीन और डाइट क्या रहती है? मीनाक्षी: मैं कुलदीप मलिक एकेडमी में रोज सुबह और शाम अलग-अलग समय पर करीब तीन-तीन घंटे प्रैक्टिस करती हूं। मैं वेजीटेरियन हूं और घर का खाना ही खाती हूं। बाहर के खाने से परहेज रखती हूं। खास तौर पर घर में माता-पिता ने गाय और भैंस रखी हुई हैं और उनका घी-दूध खाकर ही पहलवानी करती हूं। प्रोटीन और अन्य जरूरतों के लिए कुछ सप्लीमेंट भी लेने पड़ते हैं। मैंने कभी नॉनवेज नहीं खाया।

रिपोर्टर: एशियन गेम्स ट्रायल को लेकर कैसे तैयारी की? मीनाक्षी: मैं पहले से ही प्रैक्टिस कर रही थी, लेकिन मुझे यह मालूम नहीं था कि विनेश फोगाट मेरे वेट वर्ग में रहेंगी। जब पता चला कि ट्रायल में मेरा मुकाबला विनेश के साथ होगा तो मैंने खुद को पहले की तुलना में और ज्यादा तैयार किया। कुश्ती में हार-जीत नहीं देखनी, बस कुश्ती को बहुत अच्छे ढंग से लड़ना है। आखिरी क्षण तक फोकस रखना है, क्योंकि विनेश एक सीनियर खिलाड़ी हैं और उनका एक्सपीरियंस भी बहुत ज्यादा है। उनके सामने टिकने के लिए पहले से दिमाग में बात थी कि गलतियां कम से कम करनी हैं।

रिपोर्टर: विनेश के साथ मुकाबले को लेकर दिमाग में कोई स्ट्रेस था? मीनाक्षी: ऐसा नहीं है कि मुझे स्ट्रेस था, लेकिन हां, थोड़ी बहुत घबराहट जरूर थी। इस मुकाबले को लेकर मैं बहुत ज्यादा एक्साइटेड थी। कोई भी पहलवान जब मैदान में होता है तो हर कोई जीत के लिए आता है। गलती तो शायद विनेश ने भी नहीं की थी। वह भी अपनी पूरी ताकत के साथ लड़ रही थी।

रिपोर्टर: एशियन गेम्स के लिए किस प्रकार की तैयारी रही? मीनाक्षी: अलग-अलग चैंपियनशिप और गेम्स के लिए मैं लगातार तैयारी करती रहती हूं। एशियन गेम्स के लिए कई साल से तैयारी चल रही है। ऐसे में कुछ अलग तरीके से भी कमियों में सुधार करते हुए तैयारी करनी पड़ती है। अपनी जीत कैसे लेकर आनी है, इसी को लेकर मैट और ग्राउंड दोनों पर तैयारी चल रही थी।

रिपोर्टर: ट्रायल के फाइनल में हार को कैसे देखती हैं? मीनाक्षी: फाइनल मुकाबला अंतिम पंघाल से हुआ था। हमने इसकी वीडियो यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग को भेजी है। वीडियो की समीक्षा के बाद यदि उन्हें लगेगा कि मैं जीत रही थी, तो फैसला मेरे पक्ष में आ सकता है। कई बार जब दोनों खिलाड़ी बराबरी के स्तर के होते हैं, तो मुकाबला पैसिविटी या एक-दो पॉइंट के अंतर से तय होता है। ऐसे में रेफरी और जज के फैसले का परिणाम पर बड़ा असर पड़ता है। कई बार गलत पॉइंट भी दे दिए जाते हैं।

कोच बोले- अंतिम पंघाल से हरवाया गया

मीनाक्षी गोयत के कोच अजय मलिक ने बताया कि मीनाक्षी ने अपनी तैयारी के अनुसार ट्रायल में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। वह सुबह-शाम तीन से चार घंटे प्रैक्टिस करती थी। उसने एशियन गेम्स के लिए कड़ी मेहनत की थी, लेकिन अंतिम पंघाल के सामने उसे हरवाया गया। हमने यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग को इस बारे में लिखकर भेजा है और वहां से जवाब आने के बाद ही आगे का पता चल पाएगा।

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